6 दिसंबर 2015

महाकाली साधना



॥  ऊं अष्टकाल्यै क्रीं श्रीं ह्रीं क्रीं सिद्धिं मे देहि दापय नमः ॥


  1. दक्षिण दिशा की ओर मुख करके जाप करें.
  2. दिगम्बर अवस्था में जाप करें या काले रंग का आसन वस्त्र रखें.
  3. सिन्दूर का लम्बा टीका माथे पर लगायें .
  4. रुद्राक्ष या काली हकीक माला से जाप करें.
  5. पुरश्चरण १,२५,००० मन्त्रों का होगा.
  6. रात्रिकाल में 9 से 4 बजे के बीच जाप करें.
  7. जप के बाद १२५०० मन्त्र में स्वाहा लगाकर सामान्य हवन सामग्री या कालीमिर्च से हवन  करें.

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