7 जनवरी 2018

भुवनेश्वरी साधना





॥ ह्रीं ॥
  भुवनेश्वरी महाविद्या समस्त सृष्टि की माता हैं
  हमारे जीवन के लिये आवश्यक अमृत तत्व वे हैं.
  इस मन्त्र का नित्य जाप आपको उर्जावान बनायेगा.
  जिनका पाचन संबंधी शिकायत है उनको लाभ मिलेगा.
  समस्त प्रकार के रोगियों को बल प्रदान करता है |
  मृत्युंजय मन्त्र के समान लाभ दायक है 
  प्रातः काल ४ से ६ बजे तक जाप करें.
  सफ़ेद वस्त्र और आसन होगा.
  दिशा उत्तर या पूर्व .
  ब्रह्मचर्य का पालन करें.
  आचार विचार व्यवहार सात्विक रखें.----

3 टिप्‍पणियां:

  1. गुरूजी चरण वंदना

    मैं मंत्र तंत्र और यन्त्र से बहुत वर्षो से संपर्क में हूँ. जब पूज्यनीय गुरुदेव डाक्टर श्री थे. मैंने उनसे अनायाश धन प्राप्ति के मणिभद्र साधना प्रैक्टिकल रूप में सिद्ध की थी. उसमे मैंने सफलता प्राप्त की. लेकिन पारिवारिक हालत और पत्नी के स्वर्गवास के कारण मैं उस साधना को दुबारा नहीं कर पाया. कुछ बाते शायद भूल गया। मेरे पास अब वो मंत्र या साधना सम्बन्धी सामग्री भी नहीं. मेरी चरणबद्ध प्रार्थना है की मुझे अनायाश धन प्राप्ति साधना (लाटरी इत्यादि) फिर से बताने की किरपा करे. अनायाश धन प्राप्ति के लिए दो मंत्र अलग अलग बताये थे.
    ॐ नमो मणिभद्रया मम लक्ष्मी वाञ्छितं पुरया पुरया ऐं ह्रीं क्लीं सौ मणिभद्रया नमः.
    ( क्या ये मंत्र अपने आप में पूर्ण है. )

    ऐं ह्रीं श्रीं क्लीं अकश्मिक धनं देहि देहि नमः

    कुल जाप के बाद हवं भी बताया था.

    मेरी आपसे प्रार्थन है मुझे सही दिशा निर्देश दे. ताकि मैं फिर से ये साधना कर सकू
    आपका
    सत्य

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  2. गुरूजी चरण वंदना

    मैं मंत्र तंत्र और यन्त्र से बहुत वर्षो से संपर्क में हूँ. जब पूज्यनीय गुरुदेव डाक्टर श्री थे. मैंने उनसे अनायाश धन प्राप्ति के मणिभद्र साधना प्रैक्टिकल रूप में सिद्ध की थी. उसमे मैंने सफलता प्राप्त की. लेकिन पारिवारिक हालत और पत्नी के स्वर्गवास के कारण मैं उस साधना को दुबारा नहीं कर पाया. कुछ बाते शायद भूल गया। मेरे पास अब वो मंत्र या साधना सम्बन्धी सामग्री भी नहीं. मेरी चरणबद्ध प्रार्थना है की मुझे अनायाश धन प्राप्ति साधना (लाटरी इत्यादि) फिर से बताने की किरपा करे. अनायाश धन प्राप्ति के लिए दो मंत्र अलग अलग बताये थे.
    ॐ नमो मणिभद्रया मम लक्ष्मी वाञ्छितं पुरया पुरया ऐं ह्रीं क्लीं सौ मणिभद्रया नमः.
    ( क्या ये मंत्र अपने आप में पूर्ण है. )

    ऐं ह्रीं श्रीं क्लीं अकश्मिक धनं देहि देहि नमः

    कुल जाप के बाद हवं भी बताया था.

    मेरी आपसे प्रार्थन है मुझे सही दिशा निर्देश दे. ताकि मैं फिर से ये साधना कर सकू
    आपका
    सत्य

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  3. मणिभद्राय
    पूरय पूरय

    ऐसा उच्चारण आएगा . विधि के लिए पूज्य गुरुदेव स्वामी सुदर्शन नाथ जी से भोपाल में संपर्क कर सकते हैं

    उत्तर देंहटाएं

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