18 दिसंबर 2015

कलिकाये नमः








 







शवासन संस्थिते महाघोर रुपे ,
                                महाकाल  प्रियायै चतुःषष्टि कला पूरिते |
घोराट्टहास कारिणे प्रचण्ड रूपिणीम,
                                अम्बे महाकालीम तमर्चयेत सर्व काले ॥

मेरी अद्भुत स्वरूपिणी महामाया जो शव के आसन पर भयंकर रूप धारण कर विराजमान है, जो काल के अधिपति महाकाल की प्रिया हैं, जो चौंषठ कलाओं से युक्त हैं, जो भयंकर अट्टहास से संपूर्ण जगत को कंपायमान करने में समर्थ हैं, ऐसी प्रचंड स्वरूपा मातृरूपा महाकाली की मैं सदैव अर्चना करता हूं |

उन्मुक्त केशी दिगम्बर रूपे,
                                 रक्त प्रियायै श्मशानालय संस्थिते ।
सद्य नर मुंड माला धारिणीम,
                               अम्बे महाकालीम तमर्चयेत सर्व काले ॥

 
जिनकी केशराशि उन्मुक्त झरने के समान है ,जो पूर्ण दिगम्बरा हैं, अर्थात हर नियम, हर अनुशासन,हर विधि विधान से परे हैं , जो श्मशान की अधिष्टात्री देवी हैं ,जो रक्तपान प्रिय हैं , जो ताजे कटे नरमुंडों की माला धारण किये हुए है ऐसी प्रचंड स्वरूपा महाकाल रमणी महाकाली की मैं सदैव आराधना करता हूं |


क्षीण कटि युक्ते पीनोन्नत स्तने,
                               केलि प्रियायै हृदयालय संस्थिते।
कटि नर कर मेखला धारिणीम,
                               अम्बे महाकालीम तमर्चयेत सर्व काले ॥

अद्भुत सौन्दर्यशालिनी महामाया जिनकी कटि अत्यंत ही क्षीण है और जो अत्यंत उन्नत स्तन मंडलों से सुशोभित हैं, जिनको केलि क्रीडा अत्यंत प्रिय है और वे  सदैव मेरे ह्रदय रूपी भवन में निवास करती हैं . ऐसी महाकाल प्रिया महाकाली जिनके कमर में नर कर से बनी मेखला सुशोभित है उनके श्री चरणों का मै सदैव अर्चन करता हूं  ||

खङग चालन निपुणे रण चंडिके,
                               युद्ध प्रियायै युद्धुभूमि संस्थिते ।
महोग्र रूपे महा रक्त पिपासिनीम,
                               अम्बे महाकालीम तमर्चयेत सर्व काले ॥

देव सेना की महानायिका, जो खड्ग चालन में अति निपुण हैं, युद्ध जिनको अत्यंत प्रिय है, असुरों और आसुरी शक्तियों का संहार जिनका प्रिय खेल है,जो युद्ध भूमि की अधिष्टात्री हैं , जो अपने महान उग्र रूप को धारण कर शत्रुओं का रक्तपान करने को आतुर रहती हैं , ऐसी मेरी मातृस्वरूपा महामाया महाकाल रमणी महाकाली को मै सदैव प्रणाम करता हूं |



मातृ रूपिणी स्मित हास्य युक्ते,
                                प्रेम प्रियायै प्रेमभाव संस्थिते ।
वर वरदे अभय मुद्रा धारिणीम,
                                अम्बे महाकालीम तमर्चयेत सर्व काले ॥


जो सारे संसार का पालन करने वाली मातृस्वरूपा हैं, जिनके मुख पर सदैव अभय भाव युक्त आश्वस्त करने वाली मंद मंद मुस्कुराहट विराजमान रहती है , जो प्रेममय हैं जो प्रेमभाव में ही स्थित हैं , हमेशा अपने साधकों को वर प्रदान करने को आतुर रहने वाली ,अभय प्रदान करने वाली माँ महाकाली को मै उनके सहस्र रूपों में सदैव प्रणाम करता हूं |

शीघ्र विवाह मन्त्र

मंत्र :-
|| ॐ अ-प्र-ति चक्रे फट विचक्राय स्वाहा ||

जिस लड़की का विवाह नहीं हो रहा हो वह काला धागा लेकर उसपर हाथ फेरते हुए २१ माला मंत्र जप कर उसके हाथ में बांध दे या गले में पहना दे तो शीघ्र विवाह की संभावना बनती है |

14 दिसंबर 2015

पद्मावती स्तोत्रं

पूरे भारत में सबसे समृद्ध संप्रदाय है 
जैन संप्रदाय 
और उनकी अधिष्टात्री देवी है 
पद्मावती 



दिव्योवताम वे पद्मावती त्वं, लक्ष्मी त्वमेव धन धन्य सुतान्वदै  च |
पूर्णत्व देह परिपूर्ण मदैव तुल्यं, पद्मावती त्वं प्रणमं नमामि ||

ज्ञानेव सिन्धुं ब्रह्मत्व नेत्रं , चैतन्य देवीं भगवान भवत्यम |
देव्यं प्रपन्नाति हरे प्रसीद, प्रसीद,प्रसीद, प्रसीद,प्रसीद ||

धनं धान्य रूपं, साम्राज्य रूपं,ज्ञान स्वरुपम् ब्रह्म स्वरुपम् |
चैतन्य रूपं परिपूर्ण रूपं , पद्मावती त्वं  प्रणमं नमामि ||

न मोहं न क्रोधं न ज्ञानं न चिन्त्यं परिपुर्ण रूपं भवताम वदैव |
दिव्योवताम सूर्य तेजस्वी रूपं  , पद्मावती त्वं  प्रणमं नमामि ||

सन्यस्त रूप मपरम पूर्ण गृहस्थं, देव्यो सदाहि भवताम श्रियेयम |
पद्मावती त्वं, हृदये पद्माम, कमालत्व रूपं पद्मम प्रियेताम ||





|| इति परमहंस स्वामी निखिलेश्वरानंद कृत पद्मावती स्तोत्रं सम्पूर्णं ||


विधि :-
  1. सबसे पहले  तीन बार " ॐ निखिलेश्वराय नमः "  मन्त्र का जोर से बोलकर उच्चारण करें |
  2. इस स्तोत्र को अमावस्या से प्रारंभ करके अगले मॉस की पूर्णिमा पर समाप्त करें |
  3. नित्य 1,3,5,11 जैसे आपकी क्षमता हो वैसा पाठ करें |
  4. सात्विक आहार /विचार /व्यवहार  रखें |
  5. क्रोध ना करें |
  6. किसी स्त्री का अपमान ना करें |
  7. जिस दिनपाठ पूर्ण हो जाए उस दिन किसी गरीब विवाहित महिला को लाल साड़ी दान करें|
  8. लक्ष्मी मंदिर या दुर्गा मंदिर में अपनी क्षमतानुसार गुलाब या कमल के फूल चढ़ाएं और देवी पद्मावती से कृपा करने की प्रार्थना करके सीधे वापस घर आ जाएँ |
  9. घर आने के बाद एक बार और पाठ करें |
  10. फिर से 3 बार " ॐ निखिलेश्वराय नमः " मन्त्र का जोर से बोलकर उच्चारण करें |
  11. घर में या परिचय में कोई वृद्ध महिला हो तो उसके चरण स्पर्श करें और कुछ भेंट दें , भेंट आप अपनी क्षमतानुसार कुछ भी दे सकते हैं |
  12.  इस प्रकार पूजन संपन्न हुआ | आगे आप चाहें तो नित्य एक बार पाठ करते रहें |







11 दिसंबर 2015

मेरे गुरुदेव : स्वामी सुदर्शन नाथ जी



अघोरेश्वरं महा सिद्ध रूपम,

निखिल प्राण रूपं प्रणम्यम सदैव ॥१॥

अघोर शक्तियों के स्वामी, 
साक्षात अघोरेश्वर,
शिव स्वरूप , 
सिद्धों के भी सिद्ध,
भैरव से शरभेश्वर तक
और
उच्चिष्ठ चाण्डालिनी से गुह्याकाली तक
हर गुह्यतम साधना के ज्ञाता

मेरे पूज्यपाद गुरुदेव स्वामी सुदर्शन नाथ
जो प्रातः स्मरणीय परमहंस स्वामी निखिलेश्वरानंद जी के अंशीभूत, प्राण स्वरूप हैं, उनके चरणों में मै साष्टांग प्रणाम करता हूं.


प्रचण्डातिचण्डम शिवानंद कंदम,

निखिल प्राण रूपं प्रणम्यम सदैव ॥२॥

प्रचंडता की साक्षात मूर्ति,
शिवत्व के जाज्वल्यमान स्वरूप,
जिन्होंने तंत्र ग्रंथों और तांत्रिक अनुष्ठानों की गोपनीय विधियों को साधकों को सहज सुलभ कराया
ऐसे मेरे पूज्यपाद गुरुदेव स्वामी सुदर्शन नाथ, 
जो प्रातः स्मरणीय परमहंस स्वामी निखिलेश्वरानंद जी के अंशीभूत और प्राण स्वरूप हैं, उनके चरणों में मै साष्टांग प्रणाम करता हूं.



सुदर्शनोत्वं परिपूर्ण रूपम,

निखिल प्राण रूपं प्रणम्यम सदैव ॥३॥

सौन्दर्य की पूर्णता को साकार करने वाले,
साक्षात कामेश्वर,
पूर्णत्व युक्त,
शिव के प्रतीक,
मेरे पूज्यपाद गुरुदेव स्वामी सुदर्शन नाथ 
जो प्रातः स्मरणीय परमहंस स्वामी निखिलेश्वरानंद जी के अंशीभूत और प्राण स्वरूप हैं, उनके चरणों में मै साष्टांग प्रणाम करता हूं.



ब्रह्माण्ड रूपम, गूढातिगूढम,

निखिल प्राण रूपं प्रणम्यम सदैव ॥४॥

जो स्वयं अपने अंदर संपूर्ण ब्रह्मांड को समेटे हुए हैं,
जो अहं ब्रह्मास्मि के नाद से गुन्जरित हैं,
जो गूढ से भी गूढ 
अर्थात गोपनीय से भी गोपनीय 
विद्याओं के ज्ञाता हैं,
महाकाल संहिता और गुह्य काली संहिता जैसे दुर्लभ ग्रंथों का जिन्होंने पुनरुद्धार किया है ,
ऐसे मेरे पूज्यपाद गुरुदेव स्वामी सुदर्शन नाथ 
जो प्रातः स्मरणीय परमहंस स्वामी निखिलेश्वरानंद जी के अंशीभूत और प्राण स्वरूप हैं, उनके चरणों में मै साष्टांग प्रणाम करता हूं.



योगेश्वरोत्वम, कृष्ण स्वरूपम,

निखिल प्राण रूपं प्रणम्यम सदैव ॥५॥

जो योग के सभी अंगों के सिद्धहस्त आचार्य हैं,
जिनका शरीर योग के जटिलतम आसनों को भी
सहजता से करने में सिद्ध है,
जो योग मुद्राओं के प्रतिष्ठित आचार्य हैं,
जो साक्षात कृष्ण के समान,
प्रेममय,
योगमय,
आह्लादमय,
सहज व्यक्तित्व के स्वामी हैं  
ऐसे मेरे पूज्यपाद गुरुदेव स्वामी सुदर्शन नाथ 
जो प्रातः स्मरणीय परमहंस स्वामी निखिलेश्वरानंद जी के अंशीभूत और प्राण स्वरूप हैं, उनके चरणों में मै साष्टांग प्रणाम करता हूं.



महाकाल तत्वम घोरातिघोरम,

निखिल प्राण रूपं प्रणम्यम सदैव ॥६॥

काल भी जिससे घबराता है, 
ऐसे महाकाल और महाकाली युगल के उपासक,
साक्षात महाकाल स्वरूप,
अघोरत्व के जाज्वल्यमान स्वरूप,
महाकाली के महासिद्ध साधक
मेरे पूज्यपाद गुरुदेव स्वामी सुदर्शन नाथ
जो प्रातः स्मरणीय परमहंस स्वामी निखिलेश्वरानंद जी के अंशीभूत और प्राण स्वरूप हैं, उनके चरणों में मै साष्टांग प्रणाम करता हूं.


10 दिसंबर 2015

देवाधिदेव महादेव : पारद शिवलिंग रोगमुक्ति साधना

पारद शिवलिंग रोगमुक्ति साधना

|| ॐ ह्रीं तेजसे श्रीं कामसे क्रीं पूर्णत्व सिद्धिं पारदाय क्रीं श्रीं ह्रीं ॐ ||

  • कम से कम १०८ बार पारद शिवलिंग पर आचमनी से जल चढ़ाएं.
  • हर बार चढाते समय मंत्र का उच्चारण करें .
  • पूरा होने पर उस जल को अपने मुह आँख तथा शरीर पर छिडकें.
  • शेष जल को पी जाएँ.
  • ऐसा कम से कम १२० दिन तक करें.
  • जटिलतम रोगों में भी लाभप्रद है. 
  • पारद शिवलिंग यदि श्रेष्ट तांत्रिक गुरु द्वारा निर्मित हो तो अत्यंत श्रेष्ट होता है. उसमे भी यदि स्त्री गुरु द्वारा प्रदत्त हो तो सर्वश्रेष्ट होता है.
  • जो गुरु युगल रूप में अपनी शक्ति के साथ युक्त होते हैं उनके द्वारा प्रदत्त पारद शिवलिंग ज्यादा प्रभावशाली होता है.


  •  
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अघोर महालक्ष्मी ताबीज



  1. भोजपत्र 
  2. अष्टगंध
  3. कुमकुम.
  4. चांदी की लेखनी , चांदी के छोटे से तार से भी लिख सकते हैं.
  5. उचित आकार का एक ताबीज जिसमे यह यंत्र रख कर आप पहन सकें.
  6. दीपावली की रात या किसी भी अमावस्या की रात को कर सकते हैं.

विधि विधान :-
 
  • धुप अगर बत्ती जला दें.
  • संभव हो तो घी का दीपक जलाएं.
  • स्नान कर के बिना किसी वस्त्र का स्पर्श किये पूजा स्थल पर बिना किसी आसन के जमीन पर बैठें.
  • अघोर अवस्था में इस यन्त्र का निर्माण अष्टगंध से भोजपत्र पर करें.
  • इस प्रकार 108 बार श्रीं [लक्ष्मी बीज मंत्र] लिखें.
  • हर मन्त्र लेखन के साथ मन्त्र का जाप भी मन में करतेरहें.
  • यंत्र लिख लेने के बाद 108 माला " ॐ श्रीं ॐ " मंत्र का जाप यंत्र के सामने करें.
  • एक माला पूर्ण हो जाने पर एक श्रीं के ऊपर कुमकुम की एक बिंदी लगा दें.
  • इस प्रकार १०८ माला जाप जाप पूरा होते तक हर "श्रीं"  पर बिंदी लग जाएगी.
  • जाप पूरा हो जाने के बाद इस यंत्र को ताबीज में डाल कर गले में धारण कर लें.
  • कोशिश यह करें की इसे न उतारें. उतारते ही इसका प्रभाव ख़तम हो जायेगा. 
  • आर्थिक अनुकूलता प्रदान करता है.

विवाह अनुकूलता मन्त्र

मंत्र :-
|| ॐ अ-प्र-ति चक्रे फट विचक्राय स्वाहा ||

जिस लड़की का विवाह नहीं हो रहा हो वह काला धागा लेकर उसपर हाथ फेरते हुए २१ माला मंत्र जप कर
उसके हाथ में बांध दे या गले में पहना दे तो शीघ्र विवाह की संभावना बनती है |

9 दिसंबर 2015

लघु नवग्रह स्तुति






ब्रह्मा मुरारी त्रिपुरान्तकारी भानु शशि भूमि सुतो बुधश्च



गुरुश्च शुक्रः शनि राहु केतवः सर्वे ग्रहाः शान्तिकराः भवन्तु ....



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इस स्तोत्र के पाठ से ब्रह्मा विष्णु महेश तथा नवग्रहों की कृपा प्राप्त होती है

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किसी भी कार्य को करने के पहले इसका पाठ करके कार्य प्रारंभ करें.

अध्यात्मिक उन्नति के लिए :ब्रह्माण्ड रूप हनुमान






    ॥ ॐ नमो हनुमते रुद्रावताराय विश्वरूपाय अमितविक्रमाय प्रकट पराक्रमाय महाबलाय सूर्यकोटि समप्रभाय रामदूताय स्वाहा  ॥  
     
     
    सबसे पहले गुरु यदि हों तो उनके मंत्र की एक माला जाप करें. यदि न हों तो मेरे गुरुदेव 
     
    परम हंस स्वामी निखिलेस्वरानंद जी 
    [ डॉ. नारायण दत्त श्रीमाली जी ]
    को गुरु मानकर निम्नलिखित मंत्र की एक माला जाप कर लें.
    || ॐ परम तत्वाय नारायणाय गुरुभ्यो नमः ||
    इसके बाद आप जाप प्रारंभ करें. गुरु मन्त्र का जाप करने से साधना में बाधा नहीं आती और सफलता जल्दी मिलने की संभावना बढ़ जाती है.
    हनुमान जी की साधना के सामान्य नियम निम्नानुसार होंगे :-
    1. पहले दिन हाथ में जल लेकर अपनी मनोकामाना बोल देना चाहिए.
    2. ब्रह्मचर्य का पालन किया जाना चाहिये.
    3. साधना का समय रात्रि ९ से सुबह ६ बजे तक.
    4. साधना कक्ष में हो सके तो किसी बाहरी व्यक्ति को प्रवेश न दें.
    5. आसन तथा वस्त्र लाल या सिंदूरी रंग का रखें.
    6. जाप संख्या ११,००० होगी.
    7. प्रतिदिन चना,गुड,बेसन लड्डू,बूंदी में से किसी एक वस्तु का भोग लगायें.
    8. हवन ११०० मन्त्र का होगा, इसमें जाप किये जाने वाले मन्त्र के अन्त में स्वाहा लगाकर सामग्री अग्नि में डालना होता है.
    9. हवन सामग्री में गुड का चूरा मिला लें.
    10. रुद्राक्ष की माला से जाप होगा.
अधिक जानकारी के लिए डाऊनलोड करें "साधना सिद्धि विज्ञान " का हनुमान विशेषांक 



https://drive.google.com/file/d/0B_O195pngUbpMDczNGRjYTctNmUwZi00NWUzLTlhMTQtN2M3ODY4ZTlmZjI4/view?usp=sharing

8 दिसंबर 2015

महामृत्युन्जय मन्त्रम



महामृत्युन्जय मन्त्रम :-

यदि खुद कर रहे हैं तो:-

मन्त्र -1 
॥ ॐ जूं सः  मां  पालय पालय सः जूं ॐ॥

यदि किसी और के लिये [उदाहरण : मान लीजिये "अनिल" के लिये ] कर रहे हैं तो :-
मन्त्र -2  
 ॥ ॐ जूं सः ( अनिल) पालय पालय सः जूं ॐ ॥

  • यदि रोगी जाप करे तो पहला मंत्र करे.
  • यदि रोगी के लिये कोइ और करे तो दूसरा मंत्र करे. नाम के जगह पर रोगी का नाम आयेगा.रोगी के पास बैठकर मन्त्र जाप करे . ऐसा संभव न हो तो रोगी का फोटो सामने रखकर जाप करे और ई भावना रखे कि वह स्वस्थ हो रहा है .
  • सामने शिवलिंग रखें .
  • बेल पत्र चढायें.
  • रुद्राक्ष माला धारण करें.
  • रुद्राक्ष माला से जाप करें. जाप पूरा हो जाने के बाद संभव हो तो रोगी को वह माला पहना दें.
  • भस्म [अगरबत्ती की राख] से तिलक करें.

7 दिसंबर 2015

तारा महाविद्या




  1.  तारा काली कुल की महविद्या है ।
  2. तारा महाविद्या की साधना जीवन का सौभाग्य है ।
  3. यह महाविद्या साधक की उंगली पकडकर उसके लक्ष्य तक पहुन्चा देती है।
  4. गुरु कृपा से यह साधना मिलती है तथा जीवन को निखार देती है ।
  5. साधना से पहले गुरु से तारा दीक्षा लेना लाभदायक होता है ।

तारा मंत्रम
 ॥ ऐं ऊं ह्रीं स्त्रीं हुं फ़ट ॥
  • मंत्र का जाप रात्रि काल में ९ से ३ बजे के
  • बीच करना चाहिये.
  • यह रात्रिकालीन साधना है.
  • गुरुवार से प्रारंभ करें.
  • गुलाबी वस्त्र/आसन/कमरा रहेगा.
  • उत्तर या पूर्व की ओर देखते हुए जाप करें.
  • यथासंभव एकांत वास करें.
  • सवा लाख जाप का पुरश्चरण है.
  • ब्रह्मचर्य/सात्विक आचार व्यव्हार रखें.
  • किसी स्त्री का अपमान ना करें.
  • क्रोध और बकवास ना करें.
  • साधना को गोपनीय रखें.
  • प्रतिदिन तारा त्रैलोक्य विजय कवच का एक पाठ अवश्य करें. यह आपको निम्नलिखित ग्रंथों से प्राप्त हो जायेगा.

साधना सिद्धि विज्ञान मासिक पत्रिका      
https://plus.google.com/105560236464645529722/posts

6 दिसंबर 2015

महाकाली साधना



॥  ऊं अष्टकाल्यै क्रीं श्रीं ह्रीं क्रीं सिद्धिं मे देहि दापय नमः ॥


  1. दक्षिण दिशा की ओर मुख करके जाप करें.
  2. दिगम्बर अवस्था में जाप करें या काले रंग का आसन वस्त्र रखें.
  3. सिन्दूर का लम्बा टीका माथे पर लगायें .
  4. रुद्राक्ष या काली हकीक माला से जाप करें.
  5. पुरश्चरण १,२५,००० मन्त्रों का होगा.
  6. रात्रिकाल में 9 से 4 बजे के बीच जाप करें.
  7. जप के बाद १२५०० मन्त्र में स्वाहा लगाकर सामान्य हवन सामग्री या कालीमिर्च से हवन  करें.

4 दिसंबर 2015

महाविद्या धूमावती साधना




॥ धूं धूं धूमावती ठः ठः ॥

  • सर्व बाधा निवारण हेतु.
  • मंगल या शनिवार से प्रारंभ करें.
  • ब्रह्मचर्य का पालन करें.फिल्म /टी.वी./गाना /नाच से दूर रहें.
  • किसी स्त्री का स्पर्श न करें. यदि स्त्री हों तो पुरुष का स्पर्श न करें.
  • सात्विक आहार तथा आचार विचार रखें.
  • यथा संभव मौन रहें.
  • अनर्गल प्रलाप और बकवास न करें.
  • सफ़ेद वस्त्र पहनकर सफ़ेद आसन पर बैठ कर  जाप करें. 
  • यथाशक्ति जाप जोर से बोल कर करें.
  • बेसन के पकौडे का भोग लगायें.
  • जाप के बाद भोग को निर्जन स्थान पर छोड कर वापस मुडकर देखे बिना लौट जायें.
  • ११००० जाप करें. ११०० मंत्रों से हवन करें.मंत्र के आखिर में स्वाहा लगाकर हवन सामग्री को आग में छोडें. हवन की भस्म को प्रभावित स्थल या घर पर छिडक दें. शेष भस्म को नदी में प्रवाहित करें.
  • जाप पूरा हो जाने पर किसी गरीब विधवा स्त्री को भोजन तथा सफ़ेद साडी दान में दें.

2 दिसंबर 2015

भुवनेश्वरी साधना





॥ ह्रीं ॥
  • भुवनेश्वरी महाविद्या समस्त सृष्टि की माता हैं
  • हमारे जीवन के लिये आवश्यक अमृत तत्व वे हैं.
  • इस मन्त्र का नित्य जाप आपको उर्जावान बनायेगा.
  • जिनका पाचन संबंधी शिकायत है उनको लाभ मिलेगा.
  • सफ़ेद वस्त्र तथा आसन रहेगा .
  • नित्य स्नान कर जाप करें.
  • ब्रह्म मुहूर्त सबसे अच्छा है.
  • ब्रह्मचारी /सात्विक आचार विहार रखें.


1 दिसंबर 2015

श्री महाकाल भैरव





काल भैरव साधना निम्नलिखित परिस्थितियों में लाभकारी है :-
  • शत्रु बाधा.
  • तंत्र बाधा.
  • इतर योनी से कष्ट.
  • उग्र साधना में रक्षा हेतु.




काल भैरव मंत्र :-

|| ॐ भ्रं काल भैरवाय फट ||

विधि :-
  1. रात्रि कालीन साधना है.
  2. रात्रि 9 से 4 के बीच करें.
  3. काला आसन और वस्त्र रहेगा.
  4. रुद्राक्ष या काली हकिक माला से जाप करें.
  5. १०००,५०००,११०००,२१००० जितना आप कर सकते हैं उतना जाप करें.
  6. जाप के बाद १० वा हिस्सा यानि ११००० जाप करेंगे तो ११०० बार मंत्र में स्वाहां लगाकर हवं कर लें.
  7. हवन सामान्य हवन सामग्री से भी कर सकते हैं.
  8. कलि मिर्च , तिल का प्रयोग भी कर सकते हैं.
  9. अंत में एक कुत्ते को भोजन करा दें. काला कुत्ता हो तो बेहतर.