5 नवंबर 2026

एकाक्षी नारियल

 एकाक्षी नारियल 


हर गृहस्थ व्यक्ति की यह इच्छा होती है कि उसके पास धन का अभाव न रहे ।  धन की प्राप्ति के लिए प्रयास आवश्यक है ।  उसके साथ साथ यदि आप देवी लक्ष्मी की साधना या कुबेर की साधना जैसे उपाय करें तब भी आपके प्रयासों को जल्दी सफलता मिलती है । 


इसके अलावा कुछ तांत्रिक वस्तुएं भी ऐसी हैं जो मुश्किल से मिलती है । लेकिन उनको घर में रखने मात्र से ही लक्ष्मी प्राप्ति की संभावनाएं बढ़ जाती है । 


इनमें से कई चीजें बेहद दुर्लभ है और कुछ चीजें कठिन है मगर मिल जाती है वैसी ही एक वस्तु है एकाक्षी नारियल । 


सामान्य नारियल में दो आंखें और एक मुह होता है अर्थात कुल मिलाकर तीन काले बिंदु होते हैं ।  



एकाक्षी नारियल में एक ही आंख होती है अर्थात उसमें कुल मिला कर दो काले बिंदु होते हैं ।  




यह नारियल मुश्किल से मिलता है मगर मिलता है ।  ऐसा नारियल अगर आपको प्राप्त हो जाए तो उसे लाल कपड़े पर रखकर से धूप दीप दिखाएँ और उसी लाल कपड़े में बांधकर उस स्थान पर रख दें, जहां पर आप पैसे रखते हैं । 

जैसे तिजोरी या लॉकर ।  इससे लक्ष्मी प्राप्ति में सहयोग मिलता है । 


लक्ष्मी का तात्पर्य केवल धन के आगमन को ही माना जाता है । आप ध्यान दें तो यदि धन का जाना भी कम हो जाए अर्थात आप का खर्च कम हो जाए तो वह भी एक प्रकार से लक्ष्मी का आगमन ही है । 


कई परिवारों में अनावश्यक रूप से बीमारियों या इसी प्रकार की किसी अवांछित घटना के चलते धन का लगातार खर्च बढ़ता रहता है । ऐसी परिस्थितियों में भी एकाक्षी नारियल रखने या लक्ष्मी साधना करने से अनुकूलता मिल सकती है और बेवजह के खर्चों में कमी आने से आर्थिक स्थिति बेहतर हो सकती है ...... 





दक्षिणावर्ती शंख : महालक्ष्मी का सहोदर

दक्षिणावर्ती शंख : महालक्ष्मी का सहोदर 

लक्ष्मी साधना का सबसे दिव्य मुहूर्त है दीपावली ! इस दिन विभिन्न प्रकार के प्रयोग संपन्न करके आप अपने जीवन में लक्ष्मी की उपस्थिति सुनिश्चित कर सकते हैं ।
लक्ष्मी को समुद्र से उत्पन्न माना जाता है इसलिए समुद्र से उत्पन्न निर्मित पदार्थ उनके सहोदर माने जाते हैं और इसमें सबसे महत्वपूर्ण होता है शंख । प्रकार के होते हैं लेकिन इसमे सबसे महत्वपूर्ण होता है दक्षिणावर्ती शंख !



यह शंख सामान्य शंख से उल्टा होता है , यानि शंख के पतले हिस्से को आप अपनी तरफ रखेंगे तो उसका गड्ढा दाहिने तरफ की बजाये बाएं तरफ होता है, और यह उससे काफी महंगा होता है । इसे घर में रखने मात्र से धन की और महालक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है । आजकल नकली शंख भी बहुत मात्रा में उपलब्ध हैं इसलिए किसी प्रामाणिक स्थान से ही इसे प्राप्त करें अन्यथा आप को पूर्ण लाभ नहीं होगा ।

दक्षिणावर्ती शंख का पूजन
दक्षिणावर्ती शंख का पूजन कई प्रकार से किया जा सकता है और आगे की पंक्तियों में नए सरल पूजन विधि बता रहा हूं जिसका प्रयोग आप कर सकते हैं .

यह विधि बेहद सरल है और आप इसे किसी भी प्रकार के शंख के ऊपर प्रयोग कर सकते हैं लेकिन दक्षिणावर्ती शंख के ऊपर प्रयोग करने से यह ज्यादा प्रभावी होता है ।


अक्षत अर्थात बिना टूटे हुए चावल रख ले । इसकी मात्रा शंख के आकार के अनुसार तय करें । यह इतना होना चाहिए कि शंख पूरा भर जाए । शंख पूरा भर जाए तो आप उसे चांदी के वर्क से या सोने के वर्क से जो आपकी क्षमता हो लपेट लें । उसके बाद उसे एक सुंदर लाल कपड़े में बांधकर अपनी तिजोरी या पूजा स्थान में रखें । हो सके तो नित्य उसका दर्शन करें ।
कोशिश करें कि आपके अलावा कोई और उसे खुला ना देख पाए ।

दीपावली के दिन स्थिर लग्न के विषय में गूगल में, पेपर में या पंचांग में देख तय कर लेंगे ।

इस पूजन के लिए आपको कुछ चीजें लगेंगी

पहला है बिना टूटे हुए चावल यानि अक्षत। इसके अलावा शंख को लपेटने के लिए लाल कपड़ा और उसे रखने के लिए एक तांबे या कांसे की थाली भी लगेगी । शंख को आखिरी में लपेटने के लिए चांदी का वर्क भी लगेगा । 

पूजा स्थान में गुरुचित्र,लक्ष्मी का चित्र / श्री यंत्र / शंख/ महाविद्या यन्त्र या फोटो जो भी उपलब्ध हो वह रखें ।

गुरु को प्रणाम करें ।
ॐ गुं गुरुभ्यो नमः

इसके बाद भगवान गणेश को याद करें और उन्हें पूजा में सभी प्रकार के विघ्नों को दूर करने की प्रार्थना करें ।

ॐ श्री गणेशाय नमः

भगवान भैरव को याद करें और पूजन की रक्षा करने की प्रार्थना करें ।

ॐ भ्रम भैरवाय नमः ।
इसके बाद तंत्र के अधिपति भगवान शिव और मां जगदंबा को ज्ञात करें उन्हें प्रणाम करें उनसे आशीर्वाद लें कि आपको पूजन में सफलता प्राप्त हो और भगवती महालक्ष्मी आपकी पूजा को स्वीकार कर अनुकूलता प्रदान करें ।

ॐ सांब सदाशिवाय नमः

देवी महालक्ष्मी से प्रार्थना करें कि मैं आपका पूजन करने जा रहा हूं और आप मुझे इसके लिए अनुमति प्रदान करें
ॐ श्री महालक्ष्म्यै नमः


इसके बाद देवी लक्ष्मी का ध्यान करें ।
महालक्ष्मी ध्यान
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या सा पद्मासनस्था विपुलकटितटी पद्मपत्रायताक्षी
गंभीरावर्तनाभिस्तनभारनमिता शुभ्रवस्त्रोत्तरीया
या लक्ष्मी दिव्यरुपै मणि गण खचितैः स्नापिता हेमकुम्भैः
सानित्यं पद्महस्ता मम वसतु गृहे सर्वमांगल्ययुक्ता

इस प्रकार से महालक्ष्मी का आह्वान करने के बाद ऐसी भावना करें कि वे अपने दिव्य स्वरुप में आपके घर में ! आपके कुल में !! आपके पूजा स्थान में !!! आकर स्थापित हो रही हैं और आपको अपने आशीर्वाद से आप्लावित कर रही हैं ....

अब निम्नलिखित लक्ष्मी मंत्र का उच्चारण करते हुए थोड़ा थोड़ा चावल शंख के अंदर तब तक डालते रहे जब तक वह भरकर छलक ना जाए । जब वह पूरा भर जाए तब उसके ऊपर चाँदी के वर्क को लपेट देंगे और उसके बाद लाल कपड़े से उसे बांध देंगे । यह आपको लक्ष्मी की कृपा प्रदान करेगा । नित्य उसके दर्शन करें और एक बार महालक्ष्मी मंत्र का उच्चारना करें । 

.. ॐ श्री ह्रीं श्री महालक्ष्म्यै नमः .. 

om shreem hreem shreem mahalaxmaiye namah 

4 नवंबर 2026

108 लक्ष्मी को अपने घर मे स्थापित करें

  


दीपावली साधना शिविर 2026 शिविर ऑनलाइन होगा जो भी साधक शिविर में सम्मिलित होना चाहते हैं, वे कृपया नीचे दिये गये नम्बरों में से किसी भी नम्बर पर सम्पर्क कर सकतें है। 👇
रजनीश आचार्य (छिंदवाड़ा):9425146518, 8770365137
प्रशांत पांडे (दिल्ली) 8800458271
पराग पाठक(भोपाल) 7898228444
संतोष नागतोडे(मोइझीरी)9575413141
देवेन्द्र उइके (नागपुर):  9607978410 
मनोहर सरजाल (छत्तीसगढ़)+91 90091 60861
सुभाष शर्मा (उदयपुर) 9929140845
राजेंद्र शर्मा (गाजूवाला,हरियाणा) 9416729462
राजेश सहरावत(गाजूवाला,हरियाणा)9996374772
प्रेमजीत सिंह (पटना)+91 87574 02620
विनयशर्मा(गुना)9685224686
कपिल वास्पत (इंदौर) 9179050735
रणजीत अन्कुलगे (उदगीर) 9923440540
सचिन किशवे(लातूर) 9325777190
विनय शर्मा ( अयोध्या)09235712271
लक्ष्मी नायर(गुना)919770189204
उमेश वाकड़े 9009899987
करूणेश कर्ण (पटना)+91 98522 84595
चन्द्रकांत डोंगलेकर(नांदेड़)+91 70280 91666
बीना अमित शर्मा (करनाल)9996057171,8950622717
कार्यालय भोपाल 0755-4269368

3 नवंबर 2026

लक्ष्मी प्राप्ति हेतु गणपति साधना

 लक्ष्मी प्राप्ति हेतु गणपति साधना

 


गजाननं भूतगणादि सेवितं कपीत्थ जम्बू फल चारू भक्षितम ।

उमासुतम शोक विनाशकारणम नमामि विघ्नेश्वर पाद पंकजम ।


गज के समान मुख वाले, भूतादि गण जिनकी सेवा करते हैं ऐसे विविध भोज्य पदार्थों के प्रेमी तथा बाधओं को दूर करने वाले देवी जगदम्बा के प्रियपुत्र भगवान गणेश के चरण कमलों को मैं सादर प्रणाम करता हूं ।


कलियुग में फलदायक साधनाओं के विषय में कहा गया है कि:-

 

‘कलौ चण्डी विनायकौ’

 

अर्थात कलियुग में चण्डी तथा गणपति साधनायें ज्यादा फलप्रद होंगी। 

गणपति साधना को प्रारंभिक तथा अत्यंत लाभप्रद साधनाओं में गिना जाता है। योगिक विचार में मूलाधार चक्र को कुण्डली का प्रारंभ माना जाता है तथा गणपति उसके स्वामी माने जाते हैं। साथ ही शिव शक्ति के पुत्र होने के कारण दोनों की संयुक्त कृपा प्रदान करते हैं।

 

भगवती लक्ष्मी को चंचला कहा गया है । चंचला अर्थात जो एक स्थान पर ज्यादा देर तक न रह सकती हो । केवल लक्ष्मी का पूजन तथा साधना यद्यपि फलदायक होती है मगर अल्पकालिक होती है । लक्ष्मी के साथ गणपति का पूजन लक्ष्मी को स्थायित्व प्रदान करता है।

 

आगे की पंक्तियों में भगवान गणपति का एक स्तोत्र प्रस्तुत है। इस स्तोत्र का नित्य पाठ करना लाभप्रद होता है। यद्यपि यह कहना उचित नही होगा कि इस स्तोत्र के पाठ से आप धनवान बन जायेंगें, परंतु धनागमन के नए मार्गों के संबंध में नए विचार उपाय आदि आपके मस्तिष्क में उत्पन्न होंगें, जिनका सही प्रयोग कर आप धन प्राप्ति कर सकेंगें।

 

गणपति स्तोत्र

 

ऊं नमो विघ्नराजाय सर्वसौख्य प्रदायिने ।

दुष्टारिष्ट विनाशाय पराय परात्मने ।

लम्बोदरं महावीर्यं नागयज्ञोपशोभितं ।

अर्धचंद्रधरं देवं विघ्न व्यूह विनाशनम ।

ॐ हृॉं हृीं ह्रूँ हृैं हृौं हृः हेरम्बाय नमः ।

सर्व सिद्धिप्रदो सि त्वं सिद्धिबुद्धिप्रदो भवतः ।

चिंतितार्थ प्रदस्त्वं हि सततं मोदकप्रियः ।

सिंदूरारूण वस्त्रेश्च पूजितो वरदायकः ।


फलश्रुति:-

इदं गणपति स्तोत्रं यः पठेद भक्तिमान नरः ।

तस्य देहं च गेहं च लक्ष्मीर्न मुश्चति ।

 

इस स्तोत्र का 108 पाठ करें। इससे पहले भगवान गणपति के सामने अपनी इच्ठा या मनोकामना रखें तथा इसका पाठ प्रारंभ करें । भगवान गणपति की कृपा से आपको अपनी इच्ठा की पूर्ति में अवश्य सहायता मिलेगी।

 


दीपावली पर 108 लक्ष्मी दीक्षा

 


दीपावली साधना शिविर 2026 शिविर ऑनलाइन होगा जो भी साधक शिविर में सम्मिलित होना चाहते हैं, वे कृपया नीचे दिये गये नम्बरों में से किसी भी नम्बर पर सम्पर्क कर सकतें है। 👇
रजनीश आचार्य (छिंदवाड़ा):9425146518, 8770365137
प्रशांत पांडे (दिल्ली) 8800458271
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देवेन्द्र उइके (नागपुर):  9607978410 
मनोहर सरजाल (छत्तीसगढ़)+91 90091 60861
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राजेंद्र शर्मा (गाजूवाला,हरियाणा) 9416729462
राजेश सहरावत(गाजूवाला,हरियाणा)9996374772
प्रेमजीत सिंह (पटना)+91 87574 02620
विनयशर्मा(गुना)9685224686
कपिल वास्पत (इंदौर) 9179050735
रणजीत अन्कुलगे (उदगीर) 9923440540
सचिन किशवे(लातूर) 9325777190
विनय शर्मा ( अयोध्या)09235712271
लक्ष्मी नायर(गुना)919770189204
उमेश वाकड़े 9009899987
करूणेश कर्ण (पटना)+91 98522 84595
चन्द्रकांत डोंगलेकर(नांदेड़)+91 70280 91666
बीना अमित शर्मा (करनाल)9996057171,8950622717
कार्यालय भोपाल 0755-4269368

2 नवंबर 2026

अभिमंत्रित पारद श्री यंत्र

     



गृहस्थ के जीवन में लक्ष्मी नही है तो कुछ भी नही है । यह हम सभी जानते हैं ।

सम्पूर्ण ऐश्वर्य और समृद्धि के लिए श्री यंत्र का अनादि काल से उपयोग हों रहा है । आप इसकी विशिष्ठता इसी बात से समझ सकते हैं कि लगभग सभी उच्च कोटि के तंत्र पीठों में इसकी स्थापना अनिवार्यं रूप से की जाती है ।
श्री यंत्र तांबा,पीतल,सोना,चाँदी,जैसे धातुओं से बनाए जाते हैं । 

पारा भी तंत्र मे अत्यंत विशिष्ट धातु माना गया है । उससे बने विग्रह विशेष लाभदायक भी कहे गए हैं । 
पारे से बने कुछ छोटे पारद श्री यंत्र अभिमंत्रित करके ₹ 2100 [दो हजार एक सौ रुपये ] मे उपलब्ध हैं । 

इस यंत्र को आप अपने पूजा स्थान मे रख सकते हैं । चाहें तो गल्ले तिजोरी या अलमारी मे भी रख सकते हैं । जो पाठक इच्छुक हैं वे मुझे 7000630499 पर  संपर्क करके इसे प्राप्त कर सकते हैं ।


यंत्र आपके नाम से सिद्ध करने के लिए निम्नलिखित जानकारी लगेगी जो आप भेज देंगे :-

भेजे गए शुल्क की रसीद की फोटो ।  
आपका एक ताजा खींचा हुआ फोटो 
नाम 
गोत्र (अगर मालूम हो )
जन्मतिथि (अगर मालूम हो )
जन्म का समय (अगर मालूम हो )
जन्म का स्थान (अगर मालूम हो )

पूरा पता , पिन कोड के साथ, जिसमे आपको यंत्र भेजना है ।
आपका व्हाट्सएप्प  नंबर जिसपर आपको मंत्र तथा यंत्र भेजने की सूचना भेजी जाएगी । 

आप पेमेंट के लिए इस QR code का भी प्रयोग कर सकते हैं



1 नवंबर 2026

श्री लक्ष्म्यष्टोत्तरशतनाम या महालक्ष्मी के 108 नाम

      

श्री लक्ष्म्यष्टोत्तरशतनाम या महालक्ष्मी के 108 नाम  



सबसे पहले महालक्ष्मी जी को हाथ जोड़कर ध्यान करलें :-



सरसिज निलये सरोज हस्ते धवलतरांशुक गन्ध माल्य शोभे ।

भगवति हरि वल्लभे मनोज्ञे त्रिभुवन भूतिकरि प्रसीद मह्यम् ॥


हिन्दी भावार्थ - हे महामाया महालक्ष्मी ! आप कमल फूलो से भरे हुए वन में निवास करनेवाली हो, आपके हाथों में सुंदर कमल है। आपके वस्त्र अत्यन्त उज्ज्वल हैं । आपके दिव्य देह पर अत्यंत मनोहर गन्ध और सुंदर सुंदर मालाएँ डाली हुई हैं । हे भगवान श्री हरी की प्रिया आपका स्वरूप अत्यंत मनमोहक है । आपकी कृपा से त्रिभुवन का ऐश्वर्य प्राप्त हो सकता है आप मुझपर प्रसन्न होकर कृपा करें । 

ऐसा ध्यान करेंगे । 


इसके बाद अपने पूजा स्थान/दुकान/ एकांत कक्ष मे अपने सामने लक्ष्मी चित्र/ यंत्र/ श्रीयंत्र/ चाँदी सिक्का/ लक्ष्मी मूर्ति (जो आपके पास उपलब्ध हो ) रखकर भगवती लक्ष्मी के 108 नामों का उच्चारण करें और हर बार नम:  के साथ फूल /कुमकुम/ चावल/ अष्टगंध चढ़ाएं । 


  1. ॐ श्रीं अदित्यै नमः ।

  2. ॐ श्रीं अनघायै नमः ।

  3. ॐ श्रीं अनुग्रहप्रदायै नमः ।

  4. ॐ श्रीं अमृतायै नमः ।

  5. ॐ श्रीं अशोकायै नमः ।

  6. ॐ श्रीं आह्लादजनन्यै नमः ।

  7. ॐ श्रीं इन्दिरायै नमः ।

  8. ॐ श्रीं इन्दुशीतलायै नमः । 

  9. ॐ श्रीं उदाराङ्गायै नमः ।

  10. ॐ श्रीं कमलायै नमः ।

  11. ॐ श्रीं करुणायै नमः ।

  12. ॐ श्रीं कान्तायै नमः ।

  13. ॐ श्रीं कामाक्ष्यै नमः ।

  14. ॐ श्रीं क्रोधसम्भवायै नमः ।

  15. ॐ श्रीं चतुर्भुजायै नमः ।

  16. ॐ श्रीं चन्द्ररूपायै नमः ।

  17. ॐ श्रीं चन्द्रवदनायै नमः ।

  18. ॐ श्रीं चन्द्रसहोदर्यै नमः ।

  19. ॐ श्रीं चन्द्रायै नमः ।

  20. ॐ श्रीं जयायै नमः ।

  21. ॐ श्रीं तुष्टयै नमः । 

  22. ॐ श्रीं त्रिकालज्ञानसम्पन्नायै नमः ।

  23. ॐ श्रीं दारिद्र्यध्वंसिन्यै नमः ।

  24. ॐ श्रीं दारिद्र्यनाशिन्यै नमः । 

  25. ॐ श्रीं दित्यै नमः ।

  26. ॐ श्रीं दीप्तायै नमः ।

  27. ॐ श्रीं देव्यै नमः ।

  28. ॐ श्रीं धनधान्यकर्यै नमः ।

  29. ॐ श्रीं धन्यायै नमः ।

  30. ॐ श्रीं धर्मनिलयायै नमः ।

  31. ॐ श्रीं नवदुर्गायै नमः ।

  32. ॐ श्रीं नारायणसमाश्रितायै नमः ।

  33. ॐ श्रीं नित्यपुष्टायै नमः ।

  34. ॐ श्रीं नृपवेश्मगतानन्दायै नमः ।

  35. ॐ श्रीं पद्मगन्धिन्यै नमः ।

  36. ॐ श्रीं पद्मनाभप्रियायै नमः ।

  37. ॐ श्रीं पद्मप्रियायै नमः ।

  38. ॐ श्रीं पद्ममालाधरायै नमः ।

  39. ॐ श्रीं पद्ममुख्यै नमः ।

  40. ॐ श्रीं पद्मसुन्दर्यै नमः ।

  41. ॐ श्रीं पद्महस्तायै नमः ।

  42. ॐ श्रीं पद्माक्ष्यै नमः ।

  43. ॐ श्रीं पद्मायै नमः ।

  44. ॐ श्रीं पद्मालयायै नमः ।

  45. ॐ श्रीं पद्मिन्यै नमः ।

  46. ॐ श्रीं पद्मोद्भवायै नमः ।

  47. ॐ श्रीं परमात्मिकायै नमः ।

  48. ॐ श्रीं पुण्यगन्धायै नमः ।

  49. ॐ श्रीं पुष्टयै नमः ।

  50. ॐ श्रीं प्रकृत्यै नमः ।

  51. ॐ श्रीं प्रभायै नमः ।

  52. ॐ श्रीं प्रसन्नाक्ष्यै नमः । 

  53. ॐ श्रीं प्रसादाभिमुख्यै नमः ।

  54. ॐ श्रीं प्रीतिपुष्करिण्यै नमः ।

  55. ॐ श्रीं बिल्वनिलयायै नमः ।

  56. ॐ श्रीं बुद्धये नमः ।

  57. ॐ श्रीं ब्रह्माविष्णुशिवात्मिकायै नमः ।

  58. ॐ श्रीं भास्कर्यै नमः ।

  59. ॐ श्रीं भुवनेश्वर्यै नमः । 

  60. ॐ श्रीं मङ्गळा देव्यै नमः ।

  61. ॐ श्रीं महाकाल्यै नमः ।

  62. ॐ श्रीं महादीप्तायै नमः ।

  63. ॐ श्रीं महादेव्यै नमः ।

  64. ॐ श्रीं यशस्विन्यै नमः ।

  65. ॐ श्रीं रमायै नमः ।

  66. ॐ श्रीं लक्ष्म्यै नमः । 

  67. ॐ श्रीं लोकमात्रे नमः ।

  68. ॐ श्रीं लोकशोकविनाशिन्यै नमः ।

  69. ॐ श्रीं वरलक्ष्म्यै नमः । 

  70. ॐ श्रीं वरारोहायै नमः ।

  71. ॐ श्रीं वसुधायै नमः ।

  72. ॐ श्रीं वसुधारिण्यै नमः ।

  73. ॐ श्रीं वसुन्धरायै नमः । 

  74. ॐ श्रीं वसुप्रदायै नमः ।

  75. ॐ श्रीं वाचे नमः । 

  76. ॐ श्रीं विकृत्यै नमः ।

  77. ॐ श्रीं विद्यायै नमः ।

  78. ॐ श्रीं विभावर्यै नमः ।

  79. ॐ श्रीं विभूत्यै नमः ।

  80. ॐ श्रीं विमलायै नमः ।

  81. ॐ श्रीं विश्वजनन्यै नमः ।

  82. ॐ श्रीं विष्णुपत्न्यै नमः ।

  83. ॐ श्रीं विष्णुवक्षस्स्थलस्थितायै नमः ।

  84. ॐ श्रीं शान्तायै नमः ।

  85. ॐ श्रीं शिवकर्यै नमः ।

  86. ॐ श्रीं शिवायै नमः ।

  87. ॐ श्रीं शुक्लमाल्याम्बरायै नमः ।

  88. ॐ श्रीं शुचये नमः ।

  89. ॐ श्रीं शुभप्रदाये नमः ।

  90. ॐ श्रीं शुभायै नमः ।

  91. ॐ श्रीं श्रद्धायै नमः ।

  92. ॐ श्रीं श्रियै नमः ।

  93. ॐ श्रीं सत्यै नमः ।

  94. ॐ श्रीं समुद्रतनयायै नमः ।

  95. ॐ श्रीं सर्वभूतहितप्रदायै नमः ।

  96. ॐ श्रीं सर्वोपद्रव वारिण्यै नमः ।

  97. ॐ श्रीं सिद्धये नमः ।

  98. ॐ श्रीं सुधायै नमः ।

  99. ॐ श्रीं सुप्रसन्नायै नमः । 

  100. ॐ श्रीं सुरभ्यै नमः ।

  101. ॐ श्रीं स्त्रैणसौम्यायै नमः ।

  102. ॐ श्रीं स्वधायै नमः ।

  103. ॐ श्रीं स्वाहायै नमः ।

  104. ॐ श्रीं हरिण्यै नमः ।

  105. ॐ श्रीं हरिवल्लभायै नमः ।

  106. ॐ श्रीं हिरण्मय्यै नमः ।

  107. ॐ श्रीं हिरण्यप्राकारायै नमः ।

  108. ॐ श्रीं हेममालिन्यै नमः ।




अन्त मे हाथ जोड़कर क्षमा प्रार्थना कर लें ।


यह पूजन आप रात्री मे कर सकते हैं । अगर ऐसा संभव ना हो तो आप दिन में किसी भी समय इसे कर सकते हैं ।  


अगर आपने श्री यंत्र के ऊपर पूजन किया है तो पूजा करने के बाद उस यंत्र को आप पूजा स्थान में या अपने पैसा रखने वाले गल्ले में रख सकते हैं ।


31 अक्टूबर 2026

शाबर लक्ष्मी मंत्र

 शाबर मंत्र सामान्य जन की भाषा में लिखे हुए मंत्र होते हैं और उसमें व्याकरण की त्रुटि या शब्दों का अर्थ निकालने का प्रयास नहीं करना चाहिए और वे जैसे हैं वैसे ही पाठ कर लेना चाहिए ।

इसमें अलग-अलग स्रोतों के हिसाब से शब्दों में फर्क पड़ सकता है जो कि अलग-अलग साधकों के द्वारा अपने ढंग से प्रस्तुत किए जाते हैं लेकिन सभी सुखद परिणाम देते हैं।
पढ़ने में सरल होते हैं इसलिए कोई भी व्यक्ति से कर सकता है ।
इन मंत्रों का प्रयोग पुरुष या स्त्री कोई भी कर सकता है ।

मंत्र

ॐ नमो आदेश गुरु को |
नमो सिद्ध गणपति प्रसादात विघ्न हर्तुम गणपत गणपत वसो मसाण |
जो फल चाहूं सो फल आण , पञ्च लाडूँ , सिर सिन्दूर , रिद्धि सिद्धि आण |
गौरी का पुत्र सिंहासन बैठा |
राजा काम्पै प्रजा काम्पै दृष्टे राजा सिम चाम्पे| पञ्च कोष पूर्व पश्चिम से आण उत्तर से आण दक्षिण से आण |
इतनी कर रिद्धि सिद्धि मेरे घर द्वार आण|
राजा प्रजा अभी मेरो पड़े पाँव न पड़े तो लाजे मैया गौरी |
जो मै देखूं गणेश बाला कर मंत्र का सत की फट फट स्वाहा |


विधि:-

भोजपत्र पर इस मंत्र को लिख कर उसके सामने 1008  बार जाप करें . भोजपत्र न मिले तो कागज या रेशमी कपडे पर लिख सकते हैं . लिखने के लिए अष्टगंध या कुमकुम का प्रयोग करें . 

जाप के समय गुग्गुल का धुप जलता रहे तो अच्छा है.
जाप के बाद ताबीज में भरकर पहन लें या धन रखने के स्थान में रख लें.
दूकान हो तो वहां गल्ले में भी रख सकते हैं.

11 अक्टूबर 2026

रोगनाशक महाकाली मंत्र सिद्ध रुद्राक्ष माला

    

  




  


॥ ॐ ह्रीं क्रीं मे स्वाहा ॥


  • यह सर्वविध रोगों के प्रशमन में सहायक होता है.
  • इसका प्रभाव भी महामृत्युंजय मंत्र के समान प्रचंड है .
  • यथा शक्ति जाप करें.

आप इसे अपने परिवार के किसी सदस्य के स्वस्थ्य लाभ के लिए भी कर सकते हैं । 
इसके लिए आप नवरात्रि / शुक्ल पक्ष प्रतिपदा को हाथ मे जल लेकर संकल्प कर लें :-

मैं (अपना नाम बोलें ), यथा शक्ति, यथा ज्ञान [यानि जितनी मेरी शक्ति है जितना मेरा ज्ञान है उतना ] अमुक (रोगी का नाम ) के स्वस्थ्य लाभ और रोग निवारण के लिए महाकाली रोग निवारण मंत्र के (जाप संख्या बोलें ) जाप का संकल्प लेता हूँ । महा माया महाकाली मेरी त्रुटियों को क्षमा करें और प्रसन्न होकर अमुक (रोगी का नाम ) को स्वास्थ्य लाभ प्रदान करें । 

  1. इसके बाद आप मंत्र जाप रुद्राक्ष की माला से सम्पन्न करें । 
  2. रोज निश्चित संख्या मे मंत्र जाप करें । 
  3. जाप काल मे समर्थ हों तो दीपक जला लें , आर्थिक दिक्कत हो तो बिना दीपक के भी कर सकते हैं । 
  4. जाप पूरा हो जाने के बाद माला को लाल कपड़े मे लपेट कर रख दें । कोशिश करें कि जाप पूरा होते तक आपके अलावा कोई उसका स्पर्श न करे । गलती से स्पर्श हो जाये तो कोई दिक्कत नहीं है । 
  5. ब्रह्मचर्य का कड़ाई से पालन करें ।
  6. आचार, विचार, व्यव्हार सात्विक और शुद्ध रखें ।  
  7. रात्रि 9 से सुबह 3 बजे तक का समय श्रेष्ठ है । न कर पाएँ तो जब आपको समय मिले तब कर लें । 
  8. पूर्णिमा तक आपको जाप करना है । 
  9. पूर्णिमा के मंत्र जाप के बाद उस माला को आप अपने लिए कर रहे हों तो स्वयं पहन लें । दूसरे के लिए कर रहे हों, तो रोगी को पहना दें । 
  10. एक महीने तक चौबीस घंटे उस माला को पहने रखें । 
  11. अगली पूर्णिमा को अपनी रोगमुक्ति की इच्छा बोलते हुये उस माला को नदी, तालाब, समुद्र मे प्रवाहित कर दें । 
रोग निवारक महाकाली मंत्रों से अभिमंत्रित रुद्राक्ष माला 
अगर आप चाहें तो आपके नाम से रोग निवारक काली मंत्र से अभिमंत्रित रुद्राक्ष माला मात्र 1111 रुपये मे उपलब्ध कराने की व्यवस्था इस नवरात्रि मे कर रहा हूँ ।  
इसे आप एक महीने तक गले मे धारण करें और उसके बाद अपनी रोगमुक्ति की इच्छा बोलते हुये उस माला को नदी, तालाब, समुद्र मे प्रवाहित कर दें । 
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नाम , 
जन्म तिथि, समय स्थान ,गोत्र (मालूम हो तो )  । 
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