10 अगस्त 2026

सर्वरोग निवारक गोपनीय महामृत्युंजय मंत्र

 ||ॐ त्रयम्बकं यजामहे उर्वा रुकमिव स्तुता वरदा प्रचोदयंताम आयु: प्राणं प्रजां पशुं ब्रह्मवर्चसं मह्यं दत्वा व्रजम ब्रह्मलोकं  ||


  • इस मंत्र के उच्चारण करने या श्रवण करने से समस्त बिमारियों में लाभ होता है .
  • क्षमतानुसार जाप करें.

9 अगस्त 2026

पाशुपत मंत्र

 पाशुपत मंत्र


पशुपति अर्थात पशुओं के पति....

जो पशुओं को नियंत्रित करने की क्षमता रखते हैं... 

जो अनियंत्रित पशुओं को भी नियंत्रित करने की क्षमता रखते हैं .... 

आपने चरवाहों को देखा होगा...  
गायों के और भैंसों के झुंड भी आपने देखे होंगे…

इसमें से बहुत सारे नियंत्रित होते हैं और कुछ एक ऐसे होते हैं जो अनियंत्रित होते हैं …

अपनी अलग ही चाल में चलते हैं.....

उनको नियंत्रित करने की क्षमता रखने वाला व्यक्ति ही एक अच्छा चरवाहा अर्थात पशुपति बन सकता है..... 

यह संपूर्ण सृष्टि भी पशुओं से भरी हुई है.....
जिसमें सबसे विकसित पशु मनुष्य है......
अमीबा से लेकर वायरस तक सब कुछ एक किस्म का पशु ही है... 
इन सब के अधिपति इन सब को नियंत्रित करने की क्षमता रखने वाले है ..... 
पशुपति.... 
अर्थात भगवान शिव.....

उनका सबसे तेजस्वी मंत्र है पाशुपत मंत्र 

यह एक ऐसा मंत्र है जो सभी प्रकार के अनियंत्रित स्थितियों को नियंत्रित करने में मदद करता है....

विपरीत परिस्थिति में अनुकूलता लाने के लिए…
अपने परिवार की रक्षा के लिए.....
अपने समाज की रक्षा के लिए..... 
अपने राष्ट्र की रक्षा के लिए..... 
मानवता की रक्षा के लिए.... 
आप पाशुपत मंत्र का प्रयोग कर सकते हैं..... 



मैं आगे की पंक्तियों में गुरुदेव  सुदर्शन नाथ जी के द्वारा प्रदान किए गए पाशुपत मंत्र का विवरण दे रहा हूं।  यह मंत्र भगवान शिव के स्वरूप आदि शंकराचार्य के द्वारा भगवान पशुपति की आराधना के लिए प्रयुक्त हुआ था .... इसलिए यह बेहद प्रभावशाली और शक्तिशाली मंत्र है । यह शिव के अवतार द्वारा अपने मूल स्वरूप को प्रसन्न करने और जागृत करने के लिए प्रयुक्त हुआ था ॥ 
यह एक ऐसा अचूक मंत्र है जो सभी प्रकार के संकटों से रक्षा करने में सहायक है.... 

इस मंत्र का जाप आप स्वयं कर सकते हैं । आपकी पत्नी कर सकती है, आपके बच्चे कर सकते हैं । आप इस मंत्र को उन सभी को बता सकते हैं जो भगवान शिव पर और सनातन धर्म में आस्था रखते हो और अपने परिवार तथा राष्ट्र की रक्षा के प्रति जागरूक हो.... 


पाशुपत मंत्र :- 
॥ ॐ श्लीं पशुं हुं फट ॥ 

इसका उच्चारण होगा :- 
( ॐ श्लीम पशुम हुम फट) 
(om shleem pashum hoom fat)

विधि :-
  • मंत्र जाप से पहले 3 या 11, 21,51 या 108 बार गुरु मंत्र का उच्चारण कर ले । 
॥ ॐ परम तत्वाय नारायणाय गुरुभ्यो नमः ॥ 
यदि आपने गुरू  बनाया हो और उन्होंने आपको कोई मंत्र दिया हो तो आप उस मंत्र का उच्चारण कर सकते हैं । 
  • इसके बाद आप पशुपत मंत्र का जितना आपकी शक्ति हो उतना जाप करें ।
  • पशुपति मंत्र के जाप के लिए किसी प्रकार के आयु, जाति ,लिंग, का बंधन नहीं है।
  • भगवान पशुपति का मंत्र होने के कारण इसमें स्थान, आसन, समय, दिशा, वस्त्र आदि का बंधन भी नहीं है । अर्थात आप इस मंत्र को चलते-फिरते भी जप सकते हैं । 
  • इसका जाप आप पूजन कक्ष में बैठकर भी कर सकते हैं । नदी तट पर बैठकर भी कर सकते हैं । इसे आप मंदिर में बैठकर जप सकते हैं तो अपने ड्राइंग रूम में बैठकर भी जप सकते हैं । इसका जाप आप अपने कार्यस्थल में, अपने ऑफिस में ,अपनी रसोई में, कहीं भी कर सकते हैं, 
  • शर्त यही है कि आपकी आस्था देवाधिदेव महादेव पर हो,  बाकी वह देख लेंगे। 

8 अगस्त 2026

अघोर लक्ष्मी दीक्षा : 16 अगस्त 2026

 



रोग निवारण मे सहायक : भगवान शिव के मंत्रों से अभिमंत्रित रुद्राक्ष की माला

 रोग निवारण मे सहायक : भगवान शिव के मंत्रों से अभिमंत्रित रुद्राक्ष की माला


आप किसी भी प्रकार की बीमारी से पीड़ित हो और स्वास्थ्य लाभ के लिए दवाओं के साथ देवीय कृपा भी चाहते हों ।
आप या आपके परिवार के सदस्य अक्सर किसी न किसी बीमारी से पीड़ित रहते हो ।
आपको अनावश्यक रूप से मानसिक तनाव या चिंता आशंका बनी रहती हो, डिप्रेशन होता हो ।

यदि आप उपरोक्त स्थितियों से ग्रसित है तो आपको भगवान शिव के विशिष्ठ मास सावन मे किसी भी दिन यह प्रयोग अवश्य संपन्न करना चाहिए । इससे आपको काफी अनुकूलता मिलेगी ।

आइये जानते हैं कि रुद्राक्ष क्या है ?

यह दो शब्दों से मिलकर बना है रूद्र और अक्ष ।

रुद्र = शिव, अक्ष = आँख

ऐसा माना जाता है कि भगवान शिव के आंखों से गिरे हुए आनंद के आंसुओं से रुद्राक्ष के फल की उत्पत्ति हुई थी ।

रुद्राक्ष पर बनी लाइनों को मुख कहा जाता है । रुद्राक्ष एक मुखी से लेकर इक्कीस मुखी तक पाए जाते हैं । मंत्र जाप के निमित्त सभी साधनाओं में रुद्राक्ष की माला को सर्वसिद्धिदायक मानकर स्वीकार किया जाता है ।

आपको अगर सरल शब्दों मे समझाऊँ तो रुद्राक्ष एक तरह की आध्यात्मिक बैटरी है, जो आपके मंत्र जाप और साधना के द्वारा चार्ज होती रहती है । वह आपके इर्द-गिर्द एक आध्यात्मिक सुरक्षा घेरा बनाकर रखती है । जो आपकी रक्षा तब भी करती है जब आप साधना से उठ जाते हैं । यह रक्षा मंडल आपके चारों तरफ दिनभर बना रहता है । यह नकारात्मक ऊर्जा यानि निगेटिव एनर्जी से आपकी रक्षा करता रहता है ।
रोग निवारक शक्ति भी रुद्राक्ष मे होती है । आपने देखा होगा कि भूतपूर्व प्रधान मंत्री इन्दिरा गांधी भी रुद्राक्ष की माला धारण करती थीं । वर्तमान प्रधान मंत्री मोदी जी तो फिर एक आध्यात्मिक साधक हैं ही..... इसलिए वे कई अवसरों पर रुद्राक्ष की माला धारण किए हुये या उससे जाप करते हुये देखे जा सकते हैं ....

रुद्राक्ष के ऊपर कई प्रकार के शास्त्रोक्त या किसी ग्रंथ से संबन्धित नियम कानून बताए जाते हैं । इसलिए रुद्राक्ष पहनने के मामले में सबसे ज्यादा लोग नियमों की चिंता करते हैं ।
मुझे गुरुदेव परमहंस स्वामी निखिलेश्वरानंद जी के दिव्य सानिध्य में गुजरे अपने पिछले तीस पैंतीस साल के अनुभव से ऐसा लगता है कि, जैसे भगवान शिव, किसी नियम, किसी सीमा, के अधीन नहीं है, उसी प्रकार से उनका अंश रुद्राक्ष भी परा स्वतंत्र हैं । उनके लिए किसी प्रकार के नियमों की सीमा का बांधा जाना उचित नहीं है....
मेरा व्यक्तिगत विचार है कि कोई भी गृहस्थ व्यक्ति , पुरुष या स्त्री , बालक-बालिका, वृद्ध-वृद्धा रुद्राक्ष की माला धारण कर सकते हैं । अगर एक या अधिक दाना धारण करना चाहे तो भी धारण कर सकते हैं ।
अस्तु....

भगवान् शिव को महामृत्युंजय कहा जाता है अर्थात जिसने मृत्यु पर विजय प्राप्त कर ली हो । इसलिए उनके मन्त्रों का अकाल मृत्यु निवारण के लिए अनुष्ठान करने का विधान है । उन्हें वैद्यनाथ भी कहा जाता है अर्थात जो रोग निवारण करने वाले वैद्यों के भी नाथ हैं । इसलिए उनके मंत्र रोग निवारक माने जाते हैं ।


रुद्राक्ष माला प्रयोग विधि :-

एक रुद्राक्ष की माला ले लें जिसमे 33, 54 या 108 दाने हों । वह माला उतनी लंबी होनी चाहिए जिसे आप गले मे पहन सकें ।

माला का चैतन्यीकरण :-

माला को गंगा जल में २४ घंटे के लिए डूबाकर रख लें । बाहर निकालने के बाद उस माला से 111 माला निम्नलिखित मंत्र का जाप किसी शिव मंदिर मे या शिवलिंग या शिव चित्र/यंत्र के सामने बैठकर कर लें । इस प्रकार से वह माला चैतन्य हो जाएगी ।
इसके बाद आप उसे रोगी को दे सकते हैं ।


विशिष्ट महामृत्युंजय मंत्र :-
||ॐ त्रयम्बकं यजामहे उर्वा रुकमिव स्तुता वरदा प्रचोदयंताम आयु: प्राणं प्रजां पशुं ब्रह्मवर्चसं मह्यं दत्वा व्रजम ब्रह्मलोकं ||

॥ om trayambakam yajamahe urva rukamiv stuta varda prachodayantaam ayuh pranam praj am pashum brahmavarchasam mahyam datvaa vrajam brahmalokam ॥

रोगी या माला धारण कर्ता के लिए विधान :-
आप इस रुद्राक्ष की माला से नित्य कम से कम एक माला इसी मंत्र का जाप करें ।
अगर आप बीमार हैं तो बिस्तर पर लेटे लेटे भी इसका जाप कर सकते हैं । इसमे शुद्धि अशुद्धि की चिंता की आवश्यकता नहीं है ।
इसे रोगी को स्वयं करना है । एकदम अवश हो तो परिवार का कोई सदस्य या कोई साधक रोगी के लिए जाप कर सकता है ।
आप अपनी क्षमता के अनुसार एक से ज्यादा मालाएँ भी कर सकते हैं । कम से कम एक माला तो अवश्य करें ।

जाप कर लेने के बाद उस माला को कम से कम एक घंटे पहन लें । आप माला को चौबीस घंटे भी पहन सकते हैं ।

पूरे एक सौ ग्यारह दिनों तक आप नित्य ऐसा करें । उसके बाद उस माला को नदी या तालाब मे विसर्जित करें । यदि ऐसा संभव ना हो तो गंगाजल मे धोकर किसी शिवालय मे छोड़ दें या छुडवा दें और भगवान शिव से रोगी के स्वास्थ्य लाभ की कामना करें ।
ऐसा करने से रोगी की नकारात्मक ऊर्जा विसर्जित होगी ।
माला पानी मे कैसे बहा दूँ ?
क्यों बहा दूँ ?
बहाना जरूरी है क्या ? ऐसा नहीं सोचेंगे ।

इस मंत्र का उच्चारण आप यू ट्यूब तथा प्रतिलिपि एफ़एम पर मेरे चेनल मंत्र उच्चारण by Anil Shekhar सर्च करके सुन सकते हैं

उच्चारण मे होने वाली त्रुटियाँ धीरे धीरे ठीक हो जाती हैं , उसकी चिंता नहीं करेंगे । यथासंभव स्पष्ट उच्चारण करने की कोशिश करेंगे । मन मे यह भाव रखेंगे कि भगवान शिव की कृपा से आप स्वस्थ हों ।

इस मंत्र के उच्चारण करने या श्रवण करने से समस्त बीमारियों में लाभ होता है । यह सद्गुरुदेव डॉ. नारायण दत्त श्रीमाली जी के द्वारा प्रदत्त विशिष्ट महामृत्युंजय मंत्र है ।

अगर आप चाहें तो सावन माह मे आपके नाम से भगवान शिव के विशेष मंत्रों से अभिमंत्रित करके रुद्राक्ष माला आपको स्पीड पोस्ट के माध्यम से भेजी जा सकती है ।
इसके लिए निर्धारित शुल्क एक हजार एक सौ ग्यारह रुपये [जिसमे रुद्राक्ष की 108 छोटे दानों वाली माला का मूल्य, पूजन सामग्री का व्यय, पूजन शुल्क, पेकेजिंग तथा पोस्टेज व्यय शामिल है ] भेजकर आप इसे प्राप्त कर सकते हैं ।
शुल्क आप फोन पे, पे टी एम, गूगल पे, भीम पे से मेरे मोबाइल नंबर पर भेज सकते हैं :-
मेरा मोबाइल नंबर - 7000630499

इस क्यूआर कोड से भी भेज सकते हैं 





माला प्राप्त करने के लिए मुझे निम्नलिखित चीजें इस नंबर पर व्हाट्सप्प कर देंगे :-

१) निर्धारित शुल्क के ऑनलाइन पेमेंट की रसीद ।
२) आपका नाम , जन्म तिथि,स्थान,समय ।[ यदि मालूम हो ]
३) गोत्र (यदि मालूम हो )
४) अपनी ताजा फोटो जिसमे आपका चेहरा और आँखें स्पष्ट दिखती हों । चश्मा लगाते हों तो बिना चश्मे के फोटो भेजेंगे । यह फोटो आपके प्रतीक रूप में माला के पूजन के समय रखी जाएगी . 
५) आपका पूरा पोस्टल एड्रेस पिन कोड सहित भेजेंगे । साथ मे वह मोबाइल नंबर भी भेजेंगे जिसपर पोस्टमेन आवश्यकता पड़ने पर आपसे पार्सल की डिलिवरी के समय संपर्क कर सके ।

7 अगस्त 2026

सर्प सूक्त

  यदि आपको अपने घर में बार बार सांप दिखाई देते हो .....

आपकी कुंडली में कालसर्प दोष हो.........

या आप भगवान शिव के गण के रूप में नाग देवता की पूजा करना चाहते हो तो आप इस सर्प सूक्त का प्रयोग कर सकते हैं ।


सर्प सूक्त


ब्रह्मलोकेषु ये सर्पा: शेषनागपुरोगमा: ।।

नमोSस्तु तेभ्य: सर्पेभ्य: सुप्रीतो मम सर्वदा।। 1।।


इन्द्रलोकेषु ये सर्पा: वासु‍कि प्रमुखास्तथा।

नमोSस्तुतेभ्य: सर्पेभ्य: सुप्रीतो मम सर्वदा।।2।।


कद्रवेयश्च ये सर्पा: मातृभक्ति परायणा:।

नमोSस्तुतेभ्य: सर्पेभ्य: सुप्रीतो मम सर्वदा।।3।।


इन्द्रलोकेषु ये सर्पा: तक्षका प्रमुखास्तथा।

नमोSस्तुतेभ्य: सर्पेभ्य: सुप्रीतो मम सर्वदा।।4।।


सत्यलोकेषु ये सर्पा: वासुकिना च रक्षिता।

नमोSस्तुतेभ्य: सर्पेभ्य: सुप्रीतो मम सर्वदा।।5।।


मलये चैव ये सर्पा: कर्कोटक प्रमुखास्तथा।

नमोSस्तुतेभ्य: सर्पेभ्य: सुप्रीतो मम सर्वदा।।6।।


पृथिव्यां चैव ये सर्पा: ये च साकेत वासिन:।

नमोSस्तुतेभ्य: सर्पेभ्य: सुप्रीतो मम सर्वदा।।7।।


सर्वग्रामेषु ये सर्पा: वसंतिषु संच्छिता।

नमोSस्तुतेभ्य: सर्पेभ्य: सुप्रीतो मम सर्वदा।।8।।


ग्रामे वा यदि वारण्ये ये सर्पा: प्रचरन्ति च।

नमोSस्तुतेभ्य: सर्पेभ्य: सुप्रीतो मम सर्वदा।।9।।


समुद्रतीरे च ये सर्पा: ये सर्पा जलवासिन:।

नमोSस्तुतेभ्य: सर्पेभ्य: सुप्रीतो मम सर्वदा।।10।।


रसातलेषु ये सर्पा: अनन्तादि महाबला:।

नमोSस्तुतेभ्य: सर्पेभ्य: सुप्रीतो मम सर्वदा।।11।।


इसका उच्चारण देखें 


6 अगस्त 2026

महामृत्युंजय स्तोत्र

 महामृत्युंजय स्तोत्र

मार्कण्डेय मुनि द्वारा वर्णित “महामृत्युंजय स्तोत्र” मृत्यु के भय को मिटाने वाला स्तोत्र है । 

इसका आप नित्य पाठ कर सकते हैं । 


ॐ रुद्रं पशुपतिं स्थाणुं नीलकंठमुमापतिम्‌ । 

नमामि शिरसा दॆवं किं नॊ मृत्यु: करिष्यति ॥ १ ॥


नीलकंठं कालमूर्तिं कालज्ञं कालनाशनम्‌ । 

नमामि शिरसा दॆवं किं नॊ मृत्यु: करिष्यति ॥ २ ॥


नीलकंठं विरूपाक्षं निर्मलं निलयप्रदम्‌ । 

नमामि शिरसा दॆवं किं नॊ मृत्यु: करिष्यति ॥ ३ ॥


वामदॆवं महादॆवं लॊकनाथं जगद्गुरुम्‌ । 

नमामि शिरसा दॆवं किं नॊ मृत्यु: करिष्यति ॥ ४ ॥


दॆवदॆवं जगन्नाथं दॆवॆशं वृषभध्वजम्‌ । 

नमामि शिरसा दॆवं किं नॊ मृत्यु: करिष्यति ॥ ५ ॥

गंगाधरं महादॆवं सर्पाभरणभूषितम्‌ । 

नमामि शिरसा दॆवं किं नॊ मृत्यु: करिष्यति ॥ ६ ॥


त्र्यक्षं चतुर्भुजं शांतं जटामुकुटधारणम्‌ । 

नमामि शिरसा दॆवं किं नॊ मृत्यु: करिष्यति ॥ ७ ॥


भस्मॊद्धूलितसर्वांगं नागाभरणभूषितम्‌ ।

नमामि शिरसा दॆवं किं नॊ मृत्यु: करिष्यति ॥ ८ ॥


अनंतमव्ययं शांतं अक्षमालाधरं हरम्‌ । 

नमामि शिरसा दॆवं किं नॊ मृत्यु: करिष्यति ॥ ९ ॥


आनंदं परमं नित्यं कैवल्यपददायिनम्‌ । 

नमामि शिरसा दॆवं किं नॊ मृत्यु: करिष्यति ॥ १० ॥


अर्धनारीश्वरं दॆवं पार्वतीप्राणनायकम्‌ । 

नमामि शिरसा दॆवं किं नॊ मृत्यु: करिष्यति ॥ ११ ॥


प्रलयस्थितिकर्तारं आदिकर्तारमीश्वरम्‌ । 

नमामि शिरसा दॆवं किं नॊ मृत्यु: करिष्यति ॥ १२ ॥


व्यॊमकॆशं विरूपाक्षं चंद्रार्द्ध कृतशॆखरम्‌ । 

नमामि शिरसा दॆवं किं नॊ मृत्यु: करिष्यति ॥ १३ ॥


गंगाधरं शशिधरं शंकरं शूलपाणिनम्‌ । 

नमामि शिरसा दॆवं किं नॊ मृत्यु: करिष्यति ॥ १४ ॥


अनाथं परमानंदं कैवल्यपददायिनम्‌ । 

नमामि शिरसा दॆवं किं नॊ मृत्यु: करिष्यति ॥ १५ ॥


स्वर्गापवर्ग दातारं सृष्टिस्थित्यांतकारिणम्‌ । 

नमामि शिरसा दॆवं किं नॊ मृत्यु: करिष्यति ॥ १६ ॥


कल्पायुर्द्दॆहि मॆ पुण्यं यावदायुररॊगताम्‌ । 

नमामि शिरसा दॆवं किं नॊ मृत्यु: करिष्यति ॥ १७ ॥


शिवॆशानां महादॆवं वामदॆवं सदाशिवम्‌ । 

नमामि शिरसा दॆवं किं नॊ मृत्यु: करिष्यति ॥ १८ ॥


उत्पत्ति स्थितिसंहार कर्तारमीश्वरं गुरुम्‌ । 

नमामि शिरसा दॆवं किं नॊ मृत्यु: करिष्यति ॥ १९ ॥


फलश्रुति

मार्कंडॆय कृतं स्तॊत्रं य: पठॆत्‌ शिवसन्निधौ । 

तस्य मृत्युभयं नास्ति न अग्निचॊरभयं क्वचित्‌ ॥ २० ॥


शतावृतं प्रकर्तव्यं संकटॆ कष्टनाशनम्‌ । 

शुचिर्भूत्वा पठॆत्‌ स्तॊत्रं सर्वसिद्धिप्रदायकम्‌ ॥ २१ ॥


मृत्युंजय महादॆव त्राहि मां शरणागतम्‌ । 

जन्ममृत्यु जरारॊगै: पीडितं कर्मबंधनै: ॥ २२ ॥


तावकस्त्वद्गतप्राणस्त्व च्चित्तॊऽहं सदा मृड । 

इति विज्ञाप्य दॆवॆशं त्र्यंबकाख्यममं जपॆत्‌ ॥ २३ ॥


नम: शिवाय सांबाय हरयॆ परमात्मनॆ । 

प्रणतक्लॆशनाशाय यॊगिनां पतयॆ नम: ॥ २४ ॥



॥ इति श्री मार्कंडॆयपुराणॆ महा मृत्युंजय स्तॊत्रं संपूर्णम्‌ ॥


5 अगस्त 2026

पंचमुखी रुद्राक्ष से बनाएँ रक्षा कवच

   

पंचमुखी रुद्राक्ष से बनाएँ रक्षा कवच



[प्रातः स्मरणीय परम श्रद्धेय सदगुरुदेव परमहंस स्वामी निखिलेश्वरानन्दजी]

ॐ नमो भगवते सदाशिवाय सकलतत्वात्मकाय सर्वमन्त्रस्वरूपाय सर्वयन्त्राधिष्ठिताय सर्वतन्त्रस्वरूपाय सर्वतत्वविदूराय ब्रह्मरुद्रावतारिणे नीलकण्ठाय पार्वतीमनोहरप्रियाय सोमसूर्याग्निलोचनाय भस्मोद्धूलितविग्रहाय महामणि मुकुटधारणाय माणिक्यभूषणाय सृष्टिस्थितिप्रलयकाल- रौद्रावताराय दक्षाध्वरध्वंसकाय महाकालभेदनाय मूलधारैकनिलयाय तत्वातीताय गङ्गाधराय सर्वदेवाधिदेवाय षडाश्रयाय वेदान्तसाराय त्रिवर्गसाधनाय अनन्तकोटिब्रह्माण्डनायकाय अनन्त वासुकि तक्षक- कर्कोटक शङ्ख कुलिक- पद्म महापद्मेति- अष्टमहानागकुलभूषणाय प्रणवस्वरूपाय चिदाकाशाय आकाश दिक् स्वरूपाय ग्रहनक्षत्रमालिने सकलाय कलङ्करहिताय सकललोकैककर्त्रे सकललोकैकभर्त्रे सकललोकैकसंहर्त्रे सकललोकैकगुरवे सकललोकैकसाक्षिणे सकलनिगमगुह्याय सकलवेदान्तपारगाय सकललोकैकवरप्रदाय सकललोकैकशङ्कराय सकलदुरितार्तिभञ्जनाय सकलजगदभयङ्कराय शशाङ्कशेखराय शाश्वतनिजवासाय निराकाराय निराभासाय निरामयाय निर्मलाय निर्मदाय निश्चिन्ताय निरहङ्काराय निरङ्कुशाय निष्कलङ्काय निर्गुणाय  निष्कामाय निरूपप्लवाय निरुपद्रवाय निरवद्याय निरन्तराय निष्कारणाय निरातङ्काय निष्प्रपञ्चाय निस्सङ्गाय निर्द्वन्द्वाय निराधाराय नीरागाय निष्क्रोधाय निर्लोपाय निष्पापाय निर्भयाय निर्विकल्पाय निर्भेदाय निष्क्रियाय निस्तुलाय निःसंशयाय निरञ्जनाय निरुपमविभवाय नित्यशुद्धबुद्धमुक्तपरिपूर्ण- सच्चिदानन्दाद्वयाय परमशान्तस्वरूपाय परमशान्तप्रकाशाय तेजोरूपाय तेजोमयाय तेजो‌sधिपतये जय जय रुद्र महारुद्र महारौद्र भद्रावतार महाभैरव कालभैरव कल्पान्तभैरव कपालमालाधर खट्वाङ्ग चर्मखड्गधर पाशाङ्कुश- डमरूशूल चापबाणगदाशक्तिभिन्दिपाल- तोमर मुसल मुद्गर पाश परिघ- भुशुण्डी शतघ्नी चक्राद्यायुधभीषणाकार- सहस्रमुखदंष्ट्राकरालवदन विकटाट्टहास विस्फारित ब्रह्माण्डमण्डल नागेन्द्रकुण्डल नागेन्द्रहार नागेन्द्रवलय नागेन्द्रचर्मधर नागेन्द्रनिकेतन मृत्युञ्जय त्र्यम्बक त्रिपुरान्तक विश्वरूप विरूपाक्ष विश्वेश्वर वृषभवाहन विषविभूषण विश्वतोमुख सर्वतोमुख माम# रक्ष रक्ष ज्वलज्वल प्रज्वल प्रज्वल महामृत्युभयं शमय शमय अपमृत्युभयं नाशय नाशय रोगभयम् उत्सादयोत्सादय विषसर्पभयं शमय शमय चोरान् मारय मारय मम# शत्रून् उच्चाटयोच्चाटय त्रिशूलेन विदारय विदारय कुठारेण भिन्धि भिन्धि खड्गेन छिन्द्दि छिन्द्दि खट्वाङ्गेन विपोधय विपोधय मुसलेन निष्पेषय निष्पेषय बाणैः सन्ताडय सन्ताडय यक्ष रक्षांसि भीषय भीषय अशेष भूतान् विद्रावय विद्रावय कूष्माण्डभूतवेतालमारीगण- ब्रह्मराक्षसगणान् सन्त्रासय सन्त्रासय मम# अभयं कुरु कुरु मम# पापं शोधय शोधय वित्रस्तं माम्# आश्वासय आश्वासय नरकमहाभयान् माम्# उद्धर उद्धर अमृतकटाक्षवीक्षणेन माम# आलोकय आलोकय सञ्जीवय सञ्जीवय क्षुत्तृष्णार्तं माम्# आप्यायय आप्यायय दुःखातुरं माम्# आनन्दय आनन्दय शिवकवचेन माम्# आच्छादय आच्छादय हर हर मृत्युञ्जय त्र्यम्बक सदाशिव परमशिव नमस्ते नमस्ते नमः ॥
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विधि :-
  1. भस्म से  माथे पर  तीन लाइन वाला तिलक त्रिपुंड बनायें.
  2. हाथ में पानी लेकर भगवान  शिव से रक्षा की प्रार्थना करें , जल छोड़ दें.
  3. एक माला गुरुमंत्र की करें . अगर गुरु न बनाया हो तो भगवान् शिव को गुरु मानकर "ॐ नमः शिवाय" मन्त्र का जाप कर लें.
  4. यदि अपने लिए पाठ नहीं कर रहे हैं तो मम/माम# वाले जगह पर उसका नाम लें जिसके लिए पाठ कर रहे हैं |
  5. रोगमुक्ति, बधामुक्ति, मनोकामना के लिए ११ पाठ ११ दिनों तक करें . अनुकूलता प्राप्त होगी.
  6. रक्षा कवच बनाने के लिए एक पंचमुखी रुद्राक्ष ले लें. उसको दूध,दही,घी,शक्कर,शहद,से स्नान करा लें |अब इसे गंगाजल से स्नान कराकर बेलपत्र चढ़ाएं | ५१ पाठ सावन/शिवरात्रि/होली/अष्टमी/अमावस्या/नवरात्री/दीपावली/दशहरा/ग्रहण कि रात्रि करें पाठ के बाद इसे धारण कर लें |


4 अगस्त 2026

भगवान सदाशिव तथा जगदम्बा की कृपा प्राप्ति के लिये मन्त्र

    


भगवान सदाशिव तथा जगदम्बा की कृपा प्राप्ति के लिये मन्त्र :-  

॥ ओम साम्ब सदाशिवाय नम: ॥ 

  1. सवा लाख मन्त्र का एक पुरस्चरण होगा.
  2. शिवलिंग सामने रखकर साधना करें.
  3. समस्त प्रकार की मनोकामना पूर्ती के लिए प्रयोग किया जा सकता है.
  4. किसी अनुचित अनैतिक इच्छा से न करें गंभीर  नुक्सान हो सकता है. 
  5.  

रोग नाशक महाकाली साधना

 


॥ ॐ ह्रीं क्रीं मे स्वाहा ॥


  • यह सर्वविध रोगों के प्रशमन में सहायक होता है.
  • इसका प्रभाव भी महामृत्युंजय मंत्र के समान प्रचंड है .
  • यथा शक्ति जाप करें.

पंचदशाक्षरी महामृत्युन्जय मन्त्रम

 



पंचदशाक्षरी महामृत्युन्जय मन्त्रम :-

यदि खुद कर रहे हैं तो:-

॥ ॐ जूं सः  मां  पालय पालय सः जूं ॐ॥

यदि किसी और के लिये [उदाहरण : मान लीजिये "अनिल" के लिये ] कर रहे हैं तो :-
॥ ॐ जूं सः ( अनिलम) पालय पालय सः जूं ॐ

  • यदि रोगी जाप करे तो पहला मंत्र करे.
  • यदि रोगी के लिये कोइ और करे तो दूसरा मंत्र करे. नाम के जगह पर रोगी का नाम आयेगा.
  • रुद्राक्ष माला धारण करें.
  • रुद्राक्ष माला से जाप करें.
  • बेल पत्र चढायें.
  • भस्म [अगरबत्ती की राख] से तिलक करें.