शूकर दंत : तांत्रिक अभिचार और वशीकरण कर्म की काट
तंत्र शास्त्र और लोक मान्यताओं में शूकर दंत (सूअर के दांत) को सभी प्रकार के अभिचार/वशीकरण क्रियाओं की एक अत्यंत शक्तिशाली 'काट' के रूप में देखा जाता है।
विशेष रूप से इस्लामिक तंत्र से की गयी क्रियाओं का प्रभाव इससे नष्ट हो जाता है । संभवतः इसका प्रमुख कारण यह है कि इस्लामिक मान्यताओं में सूअर को 'नजिस' (अपवित्र) माना गया है। तंत्र का एक मूलभूत सिद्धांत 'विषस्य विषमौषधम्' (अर्थात - जहर ही जहर की दवा है) पर काम करता है। इसलिए ऐसा माना जाता है कि जिस ऊर्जा या शक्ति का आधार विशिष्ट धार्मिक मान्यताओं पर टिका हो, वह उस वस्तु के संपर्क में आते ही अपनी शक्ति खो देती है जिसे उस धर्म में वर्जित माना गया है। इसी कारण, कई तांत्रिक इसे 'मुस्लिम तंत्र' या 'जिन्नात' आदि के प्रभावों को निष्क्रिय करने के लिए एक अचूक अस्त्र मानते हैं।
शूकर दंत को भगवान वराह (विष्णु के अवतार) का प्रतीक माना जाता है, जिन्होंने पृथ्वी को पाताल से निकालकर उसकी रक्षा की थी। इसलिए यह किसी भी प्रकार के 'अभिचार कर्म' को वापस पलटने की क्षमता रखता है।
साधना विधि :-
शूकर दंत को एक स्टील के गहरे बर्तन मे अपने सामने रख लें । बर्तन इतना बड़ा हो कि लगभग आधा लीटर पानी आ जाये ।
भगवान विष्णु के वराह स्वरूप का ध्यान करें ।.
वाराह स्तुति
नमस्ते देवदेवाय ब्रह्मणे परमेष्ठिने ।
पुरुषाय पुराणाय शाश्वताय जयाय च ।।
अर्थ - देवों के देव, ब्रह्मस्वरूप, परमेष्ठी (परम पद में स्थित रहने वाले) पुराण पुरुष, शाश्वत और जयस्वरूप, आपके लिए नमस्कार है।
नमः स्वयंभुवे तुभ्यं स्त्रष्ट्रे सर्वार्थवेदिने ।
नमो हिरण्यगर्भाय वेधसे परमात्मने ।।
अर्थ - स्वयंभू, सृष्टि रचयिता और सर्वार्थ को जानने वाले आपको नमस्कार है। हिरण्यगर्भ, वेधा और परमात्मा को नमस्कार है।
नमस्ते वासुदेवाय विष्णवे विश्वयोनये ।
नारायणाय देवाय देवानां हितकारिणे ।।
अर्थ - वासुदेव, विष्णु, विश्वयोनि, नारायण, देवों के हितकारी देवरूप के लिए नमस्कार है।
नमोऽस्तु ते चतुर्वक्त्रे शार्ङ्गचक्रासिधारिणे ।
सर्वभूतात्मभूताय कूटस्थाय नमो नमः ।।
अर्थ - चतुर्मुख, शार्ङ्ग, चक्र तथा असि धारण करने वाले आपको नमस्कार है। समस्तभूतों के आत्मस्वरूप तथा कूटस्थ को नमस्कार है।
नमो वेदरहस्याय नमस्ते वेदयोनये ।
नमो बुद्धाय शुद्धाय नमस्ते ज्ञानरूपिणे ।।
अर्थ - वेदों के रहस्यरूप के लिए नमस्कार है। वेदयोनि को नमस्कार है। बुद्ध और शुद्ध को नमस्कार है। ज्ञानरूपी के लिए नमस्कार है।
नमोऽस्त्वानन्दरूपाय साक्षिणे जगतां नमः ।
अनन्तायाप्रमेयाय कार्याय करणाय च ।।
अर्थ - आनन्दरूप और जगत् के साक्षीरूप को नमस्कार है। अनन्त, अप्रमेय, कार्य तथा कारणरूप को नमस्कार है।
नमस्ते पञ्चभूताय पञ्चभूतात्मने नमः ।
नमो मूलप्रकृतये मायारूपाय ते नमः ।।
अर्थ - पञ्चभूतरूप आपको नमस्कार। पञ्चभूतात्मा को, मूलप्रकृतिरूप मायारूप आपको नमस्कार है।
नमोऽस्तु ते वराहाय नमस्ते मत्स्यरूपिणे ।
नमो योगाधिगम्याय नमः सकर्षणाय ते ।।
अर्थ - वराह रूपधारी को नमस्कार है। मत्स्यरूपी को नमस्कार है। योग के द्वारा ही जानने योग्य को नमस्कार है तथा संकर्षण! आपको नमस्कार है।
नमस्त्रिमूर्तये तुभ्यं त्रिधाम्ने दिव्यतेजसे ।
नमः सिद्धाय पूज्याय गुणत्रयविभागिने ।।
अर्थ - त्रिमूर्ति के लिए नमस्कार है। दिव्य तेज वाले विधामा, सिद्ध, पूज्य और तीनों गुणों का विभाग करने वाले आपको नमस्कार है।
तमोऽस्त्वादित्यवर्णाय नमस्ते पद्मयोनये ।
नमोऽमूर्त्ताय मूर्ताय माधवाय नमो नमः ।।
अर्थ - आदित्यरूप को नमस्कार है। पद्मयोनि को नमस्कार है। अमूर्त, मूर्त तथा माधव को नमस्कार है।
त्वयैव सृष्टमखिलं त्वय्येव लयमेष्यति ।
पालयैतज्जगत् सर्वं त्राता त्वं शरणं गतिः ।।
अर्थ - आपने ही अखिल जगत् को सृष्टि की है। आप में ही सकल विश्व स्थित है। आप इस सम्पूर्ण जगत् का पालन करें। आप ही रक्षक एवं शरणागति हैं।
वराह स्तुति करके प्रभु को प्रणाम करके प्रार्थना कर लेंगे की उनकी रक्षाकारक शक्ति इस शूकर दंत मे समाहित होकर रक्षा करें ।.
उसके बाद इस मंत्र का 1008 बार जाप करें ।
॥ ॐ वज्र वाराह्ये नमः ॥
हर बार नमः के साथ उसके ऊपर एक चम्मच जल डालते जाएँगे । इस प्रकार से आपका पानी अभिमंत्रित हो जाएगा ।
जब पूरा हो जाये तो उस शूकर दंत सहित उस पानी को बोतल मे डालकर रख लें ।
पानी को प्रयोग करना है । खतम हो जाये तो इसी प्रयोग को उसी शूकर दंत पर पुनः करके फिर अभिमंत्रित पानी बना सकते हैं ।
प्रयोग विधि :-
1) अगर किसी के ऊपर वशीकरण या तांत्रिक प्रयोग होने का शक हो तो इस जल की कुछ बूंदें उसे पिला दें । ऐसा तीन दिनों तक करें ।. प्रभाव दिखाई देने लगेगा ।
2) घर मे किसी क्रिया का अभास हो तो इसी जल को पूरे घर मे छिड़क सकते हैं ।
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