16 जुलाई 2026

श्री सदगुरु अष्टोत्तरशत नामावली

 श्री सदगुरु अष्टोत्तरशत नामावली

सद्गुरुदेव का 108 नामों से पूजन 





सद्गुरु के 108 नामों को श्री सदगुरु अष्टोत्तरशत नामावली कहते हैं । इसमे नमः के साथ आप अपने गुरु के श्री चरणों मे फूल. पानी,कुमकुम,सिंदूर,चावल,अष्टगंध आदि चढ़ा सकते हैं । 


श्री सदगुरु अष्टोत्तरशत नामावली

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1) ॐ सदगुरवे नम:

2) ॐ अज्ञान नाशकाय नम:

3) ॐ अदंभिने नम:

4) ॐ अद्वैतप्रकाशकाय नम:

5) ॐ अनपेक्षाय नम:

06) ॐ अनसूयवे नम:

07) ॐ अनुपमाय नम:

08) ॐ अभयप्रदात्रे नम:

09) ॐ अमानिने नम:

10) ॐ अहिंसामूर्तये नम:

11) ॐ अहैतुकस्दयासिंधवे नम:

12) ॐ अहंकारनाशकाय नम:

13) ॐ अहंकारवर्जिताय नम:

14) ॐ आचार्येंद्राय नम:

15) ॐ आत्मसंतुष्टाय नम:

16) ॐ आनंदमूर्तये नम:

17) ॐ आर्जवयुक्ताय नम:

18) ॐ उचितवाचे नम:

19) ॐ उत्साहिने नम:

20) ॐ उदासीनाय नम:

21) ॐ उपरताय नम:

22) ॐ ऐश्वर्ययुक्ताय नम:

23) ॐ कृतकृत्याय नम:

24) ॐ क्षमावते नम:

25) ॐ गुणातीताय नम:

26) ॐ चारुवाग्विलासाय नम:

27) ॐ चारुहासाय नम:

28) ॐ छिन्नसंशयाय नम:

29) ॐ ज्ञानदात्रे नम:

30) ॐ ज्ञानयज्ञतत्पराय नम:

31) ॐ तत्त्वदर्शिने नम:

32) ॐ तपस्विने नम:

33) ॐ तापहराय नम:

34) ॐ तुल्यनिंदास्तुतये नम:

35) ॐ तुल्यप्रियाप्रियाय नम:

36) ॐ तुल्यमानापमानाय नम:

37) ॐ तेजस्विने नम:

38) ॐ त्यक्तसर्वपरिग्रहाय नम:

39) ॐ त्यागिने नम:

40) ॐ दक्षाय नम:

41) ॐ दांताय नम:

42) ॐ दृढव्रताय नम:

43) ॐ दोषवर्जिताय नम:

44) ॐ द्वंद्वातीताय नम:

45) ॐ धीमते नम:

46) ॐ धीराय नम:

47) ॐ नित्यसंतुष्टाय नम:

48) ॐ निरहंकाराय नम:

49) ॐ निराश्रयाय नम:

50) ॐ निर्भयाय नम:

51) ॐ निर्मदाय नम:

52) ॐ निर्ममाय नम:

53) ॐ निर्मलाय नम:

54) ॐ निर्मोहाय नम:

55) ॐ निर्योगक्षेमाय नम:

56) ॐ निर्लोभाय नम:

57) ॐ निष्कामाय नम:

58) ॐ निष्क्रोधाय नम:

59) ॐ नि:संगाय नम:

60) ॐ परमसुखदाय नम:

61) ॐ पंडिताय नम:

62) ॐ पूर्णाय नम:

63) ॐ प्रमाण प्रवर्तकाय नम:

64) ॐ प्रियभाषिणे नम:

65) ॐ ब्रह्मकर्मसमाधये नम:

66) ॐ ब्रह्मात्मनिष्ठाय नम:

67) ॐ ब्रह्मात्मविदे नम:

68) ॐ भक्ताय नम:

69) ॐ भवरोगहराय नम:

70) ॐ भुक्तिमुक्तिप्रदात्रे नम:

71) ॐ मंगलकर्त्रे नम:

72) ॐ मधुरभाषिणे नम:

73) ॐ महात्मने नम:

74) ॐ महावाक्योपदेशकर्त्रे नम:

75) ॐ मितभाषिणे नम:

76) ॐ मुक्ताय नम:

77) ॐ मौनिने नम:

78) ॐ यतचित्ताय नम:

79) ॐ यतये नम:

80) ॐ यद इच्छा लाभ संतुष्टाय नम:

81) ॐ युक्ताय नम:

82) ॐ रागद्वेषवर्जिताय नम:

83) ॐ विदिताखिलशास्त्राय नम:

84) ॐ विद्याविनयसंपन्नाय नम:

85) ॐ विमत्सराय नम:

86) ॐ विवेकिने नम:

87) ॐ विशालहृदयाय नम:

88) ॐ व्यवसायिने नम:

89) ॐ शरणागतवत्सलाय नम:

90) ॐ शांताय नम:

91) ॐ शुद्धमानसाय नम:

92) ॐ शिष्यप्रियाय नम:

93) ॐ श्रद्धावते नम:

94) ॐ श्रोत्रियाय नम:

95) ॐ सत्यवाचे नम:

96) ॐ सदामुदितवदनाय नम:

97) ॐ समचित्ताय नम:

98) ॐ समाधिकस्वर्जिताय नम:

99) ॐ समाहितचित्ताय नम:

100) ॐ सर्वभूतहिताय नम:

101) ॐ सिद्धाय नम:

102) ॐ सुलभाय नम:

103) ॐ सुशीलाय नम:

104) ॐ सुह्रदये नम:

105) ॐ सूक्ष्मबुद्धये नम:

106) ॐ संकल्पवर्जिताय नम:

107) ॐ संप्रदायविदे नम:॥

108) ॐ स्वतंत्राय नम:॥

15 जुलाई 2026

गुरू शृंखला

   

 जगद्गुरु भगवान शिव







भगवान वेद व्यास


गौड पादाचार्य [शंकराचार्य जी के गुरु ]


जगद्गुरु आदि शंकराचार्य 



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ब्रह्मानंद सरस्वती



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।                                                                                                 ।
           महेश योगी                                                                     करपात्री महाराज
।                                                                                                 ।
।                                                                                                 ।
।                                                                                                 ।
                                           पूज्यपाद सद्गुरुदेव
                                                                               डॉ. नारायण दत्त श्रीमाली जी
[परमहंस स्वामी निखिलेश्वरानंद जी]
[1933-1998]



                                                 
                                              ।
                                              ।
                                               ।
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।                                                                                                 ।
।                                                                                                 ।
।                                                                                                 ।
।                                                                                                 ।
गुरुमाता डॉ . साधना सिंह  जी                                                                       गुरुदेव स्वामी सुदर्शन नाथ जी
                                                                                                       
जानकारी स्त्रोत -  साधना सिद्धि विज्ञान जुलाई २००५ पेज ७०

14 जुलाई 2026

गुरुमाता डॉ. साधना सिंह : एक सिद्ध तंत्र गुरु

गुरुमाता डॉ. साधना सिंह : एक सिद्ध तंत्र गुरु




वात्सल्यमयी गुरुमाता डॉ. साधना सिंह जी महाविद्या बगलामुखी की प्रचंड , सिद्धहस्त साधिका हैं.
स्त्री कथावाचक और उपदेशक तो बहुत हैं पर तंत्र के क्षेत्र में स्त्री गुरु अत्यंत दुर्लभ हैं.

तंत्र के क्षेत्र में स्त्री गुरु का बहुत महत्व होता है.
माँ अपने शिशु को स्नेह और वात्सल्य के साथ जो कुछ भी देती है वह उसके लिए अनुकूल हो जाता है . 

स्त्री गुरु मातृ स्वरूपा होने के कारण उनके द्वारा प्रदत्त मंत्र साधकों को सहज सफ़लता प्रदायक होते हैं. स्त्री गुरु द्वारा प्रदत्त मंत्र स्वयं में सिद्ध माने गये हैं.

वे एक  योगाचार्य और विश्वविख्यात होम्यो पैथ भी हैं । उनके लेख वर्षों तक प्रतिष्ठित पत्रिका निरोगधाम में प्रकाशित होते रहे हैं । आप उनसे अपनी असाध्य बीमारियों पर भी सलाह एप्वाइंटमेंट लेकर ले सकते हैं।

मैने तंत्र साधनाओं की वास्तविकता और उनकी शक्तियों का अनुभव पूज्यपाद सदगुरुदेव स्वामी निखिलेश्वरानंद जी [डॉ. नारायण दत्त श्रीमाली जी ] तथा उनके बाद गुरुदेव स्वामी सुदर्शननाथ जी और गुरुमाता डॉ. साधना सिंह जी के सानिध्य में किया है ।

आप भी उनसे मिलकर प्रत्यक्ष मार्गदर्शन ले सकते हैं :-


जास्मीन - 429
न्यू मिनाल रेजीडेंसी
जे. के. रोड , भोपाल [म.प्र.]
दूरभाष : (0755)
4269368,4283681,4221116

वेबसाइट:-

www.namobaglamaa.org


यूट्यूब चेनल :-

https://www.youtube.com/@MahavidhyaSadhakPariwar

12 जुलाई 2026

निखिलेश्वरानंद स्तवन

   


गुरुदेव डॉ नारायण दत्त श्रीमाली जी का सन्यस्त स्वरूप है परमहंस स्वामी निखिलेश्वरानंद जो युगपुरुष हैं उनकी महिमा को शब्दों मे समेटने का भागीरथ प्रयत्न है यह स्तवन !
इसे श्री विरल पटेल जी ने आधुनिक तकनीक से स्कैन करके सभी के लिए निशुल्क उपलब्ध कराया है जिसे आप नीचे लिखे लिंक से देख सकते हैं । 


किसी भी प्रकार की जानकारी या रोज गुरुदेव के वीडियो /प्रवचन अपने व्हाट्सप्प मे प्राप्त करने के लिए आप संपर्क कर सकते हैं । 
श्री विरल पटेल 
9429400214



  

3 जुलाई 2026

गुरुदेव के आडिओ वीडियो प्रवचन : सबके लिये

   

गुरुदेव के आडिओ वीडियो प्रवचन : सबके लिये 




मेरे गुरुदेव डॉ नारायण दत्त श्रीमाली जी तंत्र तथा
आयुर्वेद के ख्याति प्राप्त विद्वान थे ।
उनका जन्म 21 अप्रेल सन 1935 को हुआ था ।
उनका देहांत 3 जुलाई 1998 में हो गया । 

उन्होंने विभिन्न विषयों पर लगभग डेढ़ सौ से ज्यादा
किताबें लिखी हैं ।
किताबों के विषय ज्योतिष और हस्तरेखा शास्त्र से लेकर
तंत्र और पारद विद्या तक विस्तृत है । 
विश्व का सर्वप्रथम तांत्रिक उपन्यास " शमशान भैरवी" 
उन्होंने ही लिखा था । 
जब वे किसी विषय पर बोलते थे ...
तो उस पर लगातार घंटों बोल लेते थे । 
ऐसा लगता था ....
जैसे उनके कंठ में साक्षात
भगवती सरस्वती विराजमान हो ।  

मंत्रों का और साधनाओं का
उनके पास अकूत भंडार था । 
जब वे तांत्रिक प्रयोग कराते थे...
तो 30-32 पेज के मंत्र ...
जिनको बोलने में लगभग
आधा से 1 घंटे का समय लगता है
वह बिना कोई कागज देखें बोल लेते थे ।
चारों वेद उनको कंठस्थ थे ..... 

उन्होंने अपने जीवन काल में
अनेक बड़ी-बड़ी हस्तियों को मार्गदर्शन दिया है । 
ज्योतिष के क्षेत्र में उनकी राय को
भारत का ज्योतिष जगत प्रमाणित मानता रहा है ....
भूतपूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से लेकर
भूतपूर्व राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा
और ड्रीम गर्ल हेमा मालिनी तक
उनके कई प्रतिष्ठित समर्थक रहे हैं । 

उनके कई प्रयोगों के ऑडियो और वीडियो आज भी उपलब्ध हैं
जिन्हें सुनकर आप लाभ उठा सकते हैं ।  

https://www.youtube.com/@Nikhileshwaranandji


निखिलम शरणम

    


-:निखिलम शरणम :-


डॉ. नारायण दत्त श्रीमाली जी (परमहंस स्वामी निखिलेश्वरानंद जी)

    तन्त्र, मन्त्र, यन्त्र के सिद्धहस्त आचार्य, ज्योतिष के प्रकांड विद्वान, कर्मकांड के पुरोधा, प्राच्य विद्याओं के विश्वविख्यात पुनरुद्धारक,अनगिनत ग्रन्थों के रचयिता तथा पूरे विश्व में फ़ैले हुए करोडों शिष्यों को साधना पथ पर उंगली पकडकर चलाने वाले मेरे परम आदरणीय गुरुवर.....
शिव स्वरूप गुरुदेव के लिये सिर्फ़ यही कहा जा सकता है कि....

असित-गिरि-समं स्यात् कज्जलं सिन्धु-पात्रे।
सुर-तरुवर-शाखा लेखनी पत्रमुर्वी।।
लिखति यदि गृहीत्वा शारदा सर्वकालं।
तदपि तव गुणानामीश पारं न याति।। 
अर्थात :- 
यदि समुद्र रूपी दवात में काले पर्वतों को घिसकर उसकी स्याही बना दी जाये, स्वर्ग लोक के दिव्य कल्पवृक्ष की शाखाओं को तोड़ तोड़कर कलम बनाई जाए, पूरी पृथ्वी को कागज के समान प्रयोग किया जाए और स्वयं विद्या की अधिष्ठात्री देवी सरस्वती अनन्त काल तक लिखती रहें, तो भी हे शिव स्वरूप गुरुदेव ! आपके गुणों का पार नहीं पाया जा सकता ।



२ जुन १९९२ 


जब मैने परम पुज्य गुरुदेव डॉ. नारायण दत्त श्रीमाली जी [परमहंस स्वामी निखिलेश्वरानंद जी ] से दीक्षा ली तब से आज तक मै गुरु कृपा से साधना के मार्ग पर गतिशील हूं.

अक्टूबर - १९९३

जब गुरुदेव भिलाई की धरती पर पधारे.....


.....

.....

जब जब मेरे कदम लडखडाये गुरुवर की कृपा सदैव मुझपर बनी रही.जो मेरे जीवन का आधार है.

3 जुलाई 1998

एक अपूरणीय क्षति का दिन जब मेरे गुरुवर ने अपनी भौतिक देह का त्याग किया .एक ममता भरा वात्सल्यमय साथ जो नही रहा......... ऐसा लगा जैसे सब कुछ छूट गया ..... सब कुछ समाप्त हो गया ..... 
 

और फ़िर.......

गुरु देह की सीमा से परे होते हैं यह एह्सास गुरुवर ने करा दिया और फिर यह बालक निश्चिंत होकर निकल पडा खेल के मैदान में........

21 अप्रैल 2026

संक्षिप्त गुरुपूजन

     






संक्षिप्त गुरुपूजन
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यहाँ पर संक्षिप्त गुरुपूजन विधि प्रस्तुत कर रहा हूं .. इसे आप अपने नित्य दैनंदिन साधना मे कर सकते है ..
हाथ जोडकर प्रणाम करे
ॐ गुं गुरुभ्यो नम:
ॐ श्री गणेशाय नम:
ॐ ह्रीम दशमहाविद्याभ्यो नम:
फिर गुरुदेव का ध्यान करे
गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णु गुरुर्देवो महेश्वर:
गुरु: साक्षात परब्रह्म तस्मै श्रीगुरवे नम:
ध्यानमूलं गुरो मूर्ति : पूजामूलं गुरो: पदं
मंत्रमूलं गुरुर्वाक्यं मोक्षमूलं गुरो: कृपा
गुरुकृपाहि केवल गुरुकृपाहि केवलं
गुरुकृपाहि केवलं गुरुकृपाहि केवलं
श्री सदगुरु चरण कमलेभ्यो नम: ध्यानं समर्पयामि
श्री सदगुरु स्वामी निखिलेश्वरानंद महाराज मम ह्रदय कमल मध्ये आवाहयामि स्थापयामि नम:
अगर आपके पास समय कम है तो आप सीधे गुरुमंत्र का जाप शुरु करे .. नही तो सदगुरुदेव का मानसिक पंचोपचार पूजन करे और पूजन के बाद गुरुपादुका पंचक स्तोत्र का भी पाठ अवश्य करे ..
अब सदगुरुदेव का मानसिक पूजन या उपलब्ध सामुग्री से पंचोपचार पूजन करे .. मानसिक पूजन करते समय पंचतत्वो की मुद्राये प्रदर्शित करे और सामुग्री से पूजन करते समय उचित सामुग्री का उपयोग करे
ॐ " लं " पृथ्वी तत्वात्मकं गंधं समर्पयामि श्री गुरवे नम:
ॐ " हं " आकाश तत्वात्मकं पुष्पम समर्पयामि श्री गुरवे नम:
ॐ " यं " वायु तत्वात्मकं धूपं समर्पयामि श्रीगुरवे नम:
ॐ " रं " अग्नी तत्वात्मकं दीपं समर्पयामि श्रीगुरवे नम:
ॐ " वं " जल तत्वात्मकं नैवेद्यं समर्पयामि श्रीगुरवे नम:
ॐ " सं " सर्व तत्वात्मकं तांबूलं समर्पयामि श्री गुरवे नम:
अब हाथ जोडकर गुरु पंक्ति का पूजन करे
ॐ गुरुभ्यो नम:
ॐ परम गुरुभ्यो नम:
ॐ परात्पर गुरुभ्यो नम:
ॐ पारमेष्ठी गुरुभ्यो नम:
ॐ दिव्यौघ गुरुपंक्तये नम:
ॐ सिद्धौघ गुरुपंक्तये नम:
ॐ मानवौघ गुरुपंक्तये नम:
आप चाहे तो निम्न गुरुपादुका पंचक स्तोत्र का पाठ करे .. अगर स्तोत्र पाठ नही करना है तो सीधे आगे का पूजन करे
गुरुपादुका पंचक स्तोत्र
ॐ नमो गुरुभ्यो गुरुपादुकाभ्यां
नम: परेभ्य: परपादुकाभ्यां
आचार्य सिद्धेश्वर पादुकाभ्यां
नमो नम: श्री गुरुपादुकाभ्यां !! १ !!
ऐंकार ह्रींकार रहस्ययुक्त
श्रीं कार गूढार्थ महाविभूत्या
ॐकार मर्म प्रतिपादिनीभ्यां
नमो नम: श्री गुरुपादुकाभ्यां !! २ !!
होमाग्नि होत्राग्नि हविष्यहोतृ
होमादि सर्वाकृति भासमानं
यद ब्रह्म तद बोध वितारिणाभ्यां
नमो नम: श्री गुरुपादुकाभ्यां !! ३ !!
अनंत संसार समुद्रतार
नौकायिताभ्यां स्थिर भक्तिदाभ्यां
जाड्याब्धि संशोषण बाडवाभ्यां
नमो नम: श्री गुरुपादुकाभ्यां !! ४ !!
कामादिसर्प व्रजगारुडाभ्यां
विवेक वैराग्य निधिप्रदाभ्यां
बोधप्रदाभ्यां द्रुत मोक्षदाभ्यां
नमो नम: श्री गुरुपादुकाभ्यां !! ५ !!
अब एक आचमनी जल मे चंदन मिलाकर अर्घ्य दे या मानसिक स्तर पर अर्घ्य दे ..
ॐ गुरुदेवाय विद्महे परम गुरवे धीमहि तन्नो गुरु: प्रचोदयात्
अब गुरुमंत्र का यथाशक्ती जाप करे
ॐ परम तत्वाय नारायणाय गुरुभ्यो नम:
अंत मे जप गुरुदेव को अर्पण करे
ॐ गुह्याति गुह्यगोप्ता
त्वं गृहाणास्मत कृतं जपं
सिद्धिर्भवतु मे गुरुदेव त्वतप्रसादान्महेश्वर !!
अब एक आचमनी जल अर्पण करे
अनेन पूजनेन श्री गुरुदेव प्रीयंता मम !!

वो स्पर्श : जिसने जिंदगी बदल दी ........

 

33 वर्ष पहले जब गुरुदेव मिले ...... 




 

सद्गुरुदेव का 108 नामों से पूजन

 श्री सदगुरु अष्टोत्तरशत नामावली

सद्गुरुदेव का 108 नामों से पूजन 





सद्गुरु के 108 नामों को श्री सदगुरु अष्टोत्तरशत नामावली कहते हैं । इसमे नमः के साथ आप अपने गुरु के श्री चरणों मे फूल. पानी,कुमकुम,सिंदूर,चावल,अष्टगंध आदि चढ़ा सकते हैं । 


श्री सदगुरु अष्टोत्तरशत नामावली

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1) ॐ सदगुरवे नम:

2) ॐ अज्ञान नाशकाय नम:

3) ॐ अदंभिने नम:

4) ॐ अद्वैतप्रकाशकाय नम:

5) ॐ अनपेक्षाय नम:

06) ॐ अनसूयवे नम:

07) ॐ अनुपमाय नम:

08) ॐ अभयप्रदात्रे नम:

09) ॐ अमानिने नम:

10) ॐ अहिंसामूर्तये नम:

11) ॐ अहैतुकस्दयासिंधवे नम:

12) ॐ अहंकारनाशकाय नम:

13) ॐ अहंकारवर्जिताय नम:

14) ॐ आचार्येंद्राय नम:

15) ॐ आत्मसंतुष्टाय नम:

16) ॐ आनंदमूर्तये नम:

17) ॐ आर्जवयुक्ताय नम:

18) ॐ उचितवाचे नम:

19) ॐ उत्साहिने नम:

20) ॐ उदासीनाय नम:

21) ॐ उपरताय नम:

22) ॐ ऐश्वर्ययुक्ताय नम:

23) ॐ कृतकृत्याय नम:

24) ॐ क्षमावते नम:

25) ॐ गुणातीताय नम:

26) ॐ चारुवाग्विलासाय नम:

27) ॐ चारुहासाय नम:

28) ॐ छिन्नसंशयाय नम:

29) ॐ ज्ञानदात्रे नम:

30) ॐ ज्ञानयज्ञतत्पराय नम:

31) ॐ तत्त्वदर्शिने नम:

32) ॐ तपस्विने नम:

33) ॐ तापहराय नम:

34) ॐ तुल्यनिंदास्तुतये नम:

35) ॐ तुल्यप्रियाप्रियाय नम:

36) ॐ तुल्यमानापमानाय नम:

37) ॐ तेजस्विने नम:

38) ॐ त्यक्तसर्वपरिग्रहाय नम:

39) ॐ त्यागिने नम:

40) ॐ दक्षाय नम:

41) ॐ दांताय नम:

42) ॐ दृढव्रताय नम:

43) ॐ दोषवर्जिताय नम:

44) ॐ द्वंद्वातीताय नम:

45) ॐ धीमते नम:

46) ॐ धीराय नम:

47) ॐ नित्यसंतुष्टाय नम:

48) ॐ निरहंकाराय नम:

49) ॐ निराश्रयाय नम:

50) ॐ निर्भयाय नम:

51) ॐ निर्मदाय नम:

52) ॐ निर्ममाय नम:

53) ॐ निर्मलाय नम:

54) ॐ निर्मोहाय नम:

55) ॐ निर्योगक्षेमाय नम:

56) ॐ निर्लोभाय नम:

57) ॐ निष्कामाय नम:

58) ॐ निष्क्रोधाय नम:

59) ॐ नि:संगाय नम:

60) ॐ परमसुखदाय नम:

61) ॐ पंडिताय नम:

62) ॐ पूर्णाय नम:

63) ॐ प्रमाण प्रवर्तकाय नम:

64) ॐ प्रियभाषिणे नम:

65) ॐ ब्रह्मकर्मसमाधये नम:

66) ॐ ब्रह्मात्मनिष्ठाय नम:

67) ॐ ब्रह्मात्मविदे नम:

68) ॐ भक्ताय नम:

69) ॐ भवरोगहराय नम:

70) ॐ भुक्तिमुक्तिप्रदात्रे नम:

71) ॐ मंगलकर्त्रे नम:

72) ॐ मधुरभाषिणे नम:

73) ॐ महात्मने नम:

74) ॐ महावाक्योपदेशकर्त्रे नम:

75) ॐ मितभाषिणे नम:

76) ॐ मुक्ताय नम:

77) ॐ मौनिने नम:

78) ॐ यतचित्ताय नम:

79) ॐ यतये नम:

80) ॐ यद इच्छा लाभ संतुष्टाय नम:

81) ॐ युक्ताय नम:

82) ॐ रागद्वेषवर्जिताय नम:

83) ॐ विदिताखिलशास्त्राय नम:

84) ॐ विद्याविनयसंपन्नाय नम:

85) ॐ विमत्सराय नम:

86) ॐ विवेकिने नम:

87) ॐ विशालहृदयाय नम:

88) ॐ व्यवसायिने नम:

89) ॐ शरणागतवत्सलाय नम:

90) ॐ शांताय नम:

91) ॐ शुद्धमानसाय नम:

92) ॐ शिष्यप्रियाय नम:

93) ॐ श्रद्धावते नम:

94) ॐ श्रोत्रियाय नम:

95) ॐ सत्यवाचे नम:

96) ॐ सदामुदितवदनाय नम:

97) ॐ समचित्ताय नम:

98) ॐ समाधिकस्वर्जिताय नम:

99) ॐ समाहितचित्ताय नम:

100) ॐ सर्वभूतहिताय नम:

101) ॐ सिद्धाय नम:

102) ॐ सुलभाय नम:

103) ॐ सुशीलाय नम:

104) ॐ सुह्रदये नम:

105) ॐ सूक्ष्मबुद्धये नम:

106) ॐ संकल्पवर्जिताय नम:

107) ॐ संप्रदायविदे नम:॥

108) ॐ स्वतंत्राय नम:॥

निखिलेश्वरानंद स्तवन

  


गुरुदेव डॉ नारायण दत्त श्रीमाली जी का सन्यस्त स्वरूप है परमहंस स्वामी निखिलेश्वरानंद जो युगपुरुष हैं उनकी महिमा को शब्दों मे समेटने का भागीरथ प्रयत्न है यह स्तवन !
इसे श्री विरल पटेल जी ने आधुनिक तकनीक से स्कैन करके सभी के लिए निशुल्क उपलब्ध कराया है जिसे आप नीचे लिखे लिंक से देख सकते हैं । 


किसी भी प्रकार की जानकारी या रोज गुरुदेव के वीडियो /प्रवचन अपने व्हाट्सप्प मे प्राप्त करने के लिए आप संपर्क कर सकते हैं । 
श्री विरल पटेल 
9429400214