10 फ़रवरी 2026

दस महाविद्याये तथा उनकी साधना से होने वाले लाभ

   दस महाविद्याये तथा उनकी साधना से होने वाले लाभ 


मेरे सदगुरुदेव डा नारायण दत्त श्रीमाली जी ने दसों महाविद्याओं के सम्बन्ध में विस्तृत विवेचन किया है . उनके प्रवचन के ऑडियो/वीडियो आप इंटरनेट पर सर्च करके या यूट्यूब पर सुन सकते हैं . तथा विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकते हैं .  


जितना मैंने जाना है उसके आधार पर मुझे ऐसा लगता है कि सभी महाविद्याओं से आध्यात्मिक शक्ति की वृद्धि तथा सर्व मनोकामना की पूर्ती होती है . इसके अलावा जो विशेष प्रयोजन सिद्ध होते हैं उनका उल्लेख इस प्रकार से किया गया है .  

महाकाली - मानसिक प्रबलता /सर्वविध रक्षा / कुण्डलिनी जागरण /पौरुष 

तारा - आर्थिक उन्नति / कवित्व / वाक्शक्ति 

त्रिपुर सुंदरी - आर्थिक/यश / आकर्षण 

भुवनेश्वरी - आर्थिक/स्वास्थ्य/प्रेम 

छिन्नमस्ता - तन्त्रबाधा/शत्रुबाधा / सर्वविध रक्षा

त्रिपुर भैरवी - तंत्र बाधा / शत्रुबाधा / सर्वविध रक्षा

धूमावती - शत्रु बाधा / सर्वविध रक्षा 

बगलामुखी - शत्रु स्तम्भन / वाक् शक्ति / सर्वविध रक्षा

मातंगी - सौंदर्य / प्रेम /आकर्षण/काव्य/संगीत  

कमला - आर्थिक उन्नति 


महाविद्याओं की साधना उच्चकोटि की साधना है . आप अपनी रूचि के अनुसार किसी भी महाविद्या की साधना कर सकते हैं . महाविद्या साधना आपको जीवन में सब कुछ प्रदान करने में सक्षम है .

यदि आप सात्विक पद्धति से गृहस्थ जीवन में रहते हुए ही , महाविद्या साधना सिद्धि करना चाहते हैं तो आप महाविद्या से सम्बंधित दीक्षा तथा मंत्र प्राप्त करने के लिए मेरे गुरुदेव स्वामी सुदर्शन नाथ जी से या गुरुमाता डा साधना सिंह जी से संपर्क कर सकते हैं .


विस्तृत जानकारी के लिए नीचे दिए गए वेबसाइट तथा यूट्यूब चैनल का अवलोकन कर सकते हैं . 

contact for details
वेबसाइट
namobaglamaa.org

यूट्यूब चैनल
https://youtube.com/c/MahavidhyaSadhakPariwar

9 फ़रवरी 2026

नटराज : कामेश्वर : शिव

  नटराज : कामेश्वर : शिव



यह मंत्र उनके लिए है जो .....
जीवन को एक उत्सव मानते हैं ....
उल्लास जिनकी जीवन शैली है ....
मुस्कान जिनके होंठों का श्रृंगार है.....
सहजता जिनकी प्रवृत्ति है ..................


....................यह शिवत्व की यात्रा है...........


॥ क्रीं आनंद ताण्डवाय नमः ॥

आनंद और उल्लास के साथ नृत्य के साथ इस मन्त्र का जाप करें.....

और फ़िर कहीं कुछ होगा, ऐसा जो अद्भुत होगा
बाकी शिव इच्छा.......

8 फ़रवरी 2026

दक्षिणामूर्ति शिव

 दक्षिणामूर्ति शिव 

दक्षिणामूर्ति शिव भगवान शिव का सबसे तेजस्वी स्वरूप है । यह उनका आदि गुरु स्वरूप है । इस रूप की साधना सात्विक भाव वाले सात्विक मनोकामना वाले तथा ज्ञानाकांक्षी साधकों को करनी चाहिये ।





॥ऊं ह्रीं दक्षिणामूर्तये नमः ॥

  • ब्रह्मचर्य का पालन करें.
  • ब्रह्ममुहूर्त यानि सुबह ४ से ६ के बीच जाप करें.
  • सफेद वस्त्र , आसन , होगा.
  • दिशा इशान( उत्तर और पूर्व के बीच ) की तरफ देखकर करें.
  • भस्म से त्रिपुंड लगाए . 
  • रुद्राक्ष की माला पहने .
  • रुद्राक्ष की माला से जाप करें.
.

7 फ़रवरी 2026

सर्व बाधा निवारक : सदाशिव रक्षा कवच

सर्व बाधा निवारक : सदाशिव रक्षा कवच 




[प्रातः स्मरणीय परम श्रद्धेय सदगुरुदेव परमहंस स्वामी निखिलेश्वरानन्दजी]

ॐ नमो भगवते सदाशिवाय सकलतत्वात्मकाय सर्वमन्त्रस्वरूपाय सर्वयन्त्राधिष्ठिताय सर्वतन्त्रस्वरूपाय सर्वतत्वविदूराय ब्रह्मरुद्रावतारिणे नीलकण्ठाय पार्वतीमनोहरप्रियाय सोमसूर्याग्निलोचनाय भस्मोद्धूलितविग्रहाय महामणि मुकुटधारणाय माणिक्यभूषणाय सृष्टिस्थितिप्रलयकाल- रौद्रावताराय दक्षाध्वरध्वंसकाय महाकालभेदनाय मूलधारैकनिलयाय तत्वातीताय गङ्गाधराय सर्वदेवाधिदेवाय षडाश्रयाय वेदान्तसाराय त्रिवर्गसाधनाय अनन्तकोटिब्रह्माण्डनायकाय अनन्त वासुकि तक्षक- कर्कोटक शङ्ख कुलिक- पद्म महापद्मेति- अष्टमहानागकुलभूषणाय प्रणवस्वरूपाय चिदाकाशाय आकाश दिक् स्वरूपाय ग्रहनक्षत्रमालिने सकलाय कलङ्करहिताय सकललोकैककर्त्रे सकललोकैकभर्त्रे सकललोकैकसंहर्त्रे सकललोकैकगुरवे सकललोकैकसाक्षिणे सकलनिगमगुह्याय सकलवेदान्तपारगाय सकललोकैकवरप्रदाय सकललोकैकशङ्कराय सकलदुरितार्तिभञ्जनाय सकलजगदभयङ्कराय शशाङ्कशेखराय शाश्वतनिजवासाय निराकाराय निराभासाय निरामयाय निर्मलाय निर्मदाय निश्चिन्ताय निरहङ्काराय निरङ्कुशाय निष्कलङ्काय निर्गुणाय  निष्कामाय निरूपप्लवाय निरुपद्रवाय निरवद्याय निरन्तराय निष्कारणाय निरातङ्काय निष्प्रपञ्चाय निस्सङ्गाय निर्द्वन्द्वाय निराधाराय नीरागाय निष्क्रोधाय निर्लोपाय निष्पापाय निर्भयाय निर्विकल्पाय निर्भेदाय निष्क्रियाय निस्तुलाय निःसंशयाय निरञ्जनाय निरुपमविभवाय नित्यशुद्धबुद्धमुक्तपरिपूर्ण- सच्चिदानन्दाद्वयाय परमशान्तस्वरूपाय परमशान्तप्रकाशाय तेजोरूपाय तेजोमयाय तेजो‌sधिपतये जय जय रुद्र महारुद्र महारौद्र भद्रावतार महाभैरव कालभैरव कल्पान्तभैरव कपालमालाधर खट्वाङ्ग चर्मखड्गधर पाशाङ्कुश- डमरूशूल चापबाणगदाशक्तिभिन्दिपाल- तोमर मुसल मुद्गर पाश परिघ- भुशुण्डी शतघ्नी चक्राद्यायुधभीषणाकार- सहस्रमुखदंष्ट्राकरालवदन विकटाट्टहास विस्फारित ब्रह्माण्डमण्डल नागेन्द्रकुण्डल नागेन्द्रहार नागेन्द्रवलय नागेन्द्रचर्मधर नागेन्द्रनिकेतन मृत्युञ्जय त्र्यम्बक त्रिपुरान्तक विश्वरूप विरूपाक्ष विश्वेश्वर वृषभवाहन विषविभूषण विश्वतोमुख सर्वतोमुख माम# रक्ष रक्ष ज्वलज्वल प्रज्वल प्रज्वल महामृत्युभयं शमय शमय अपमृत्युभयं नाशय नाशय रोगभयम् उत्सादयोत्सादय विषसर्पभयं शमय शमय चोरान् मारय मारय मम# शत्रून् उच्चाटयोच्चाटय त्रिशूलेन विदारय विदारय कुठारेण भिन्धि भिन्धि खड्गेन छिन्द्दि छिन्द्दि खट्वाङ्गेन विपोधय विपोधय मुसलेन निष्पेषय निष्पेषय बाणैः सन्ताडय सन्ताडय यक्ष रक्षांसि भीषय भीषय अशेष भूतान् विद्रावय विद्रावय कूष्माण्डभूतवेतालमारीगण- ब्रह्मराक्षसगणान् सन्त्रासय सन्त्रासय मम# अभयं कुरु कुरु मम# पापं शोधय शोधय वित्रस्तं माम्# आश्वासय आश्वासय नरकमहाभयान् माम्# उद्धर उद्धर अमृतकटाक्षवीक्षणेन माम# आलोकय आलोकय सञ्जीवय सञ्जीवय क्षुत्तृष्णार्तं माम्# आप्यायय आप्यायय दुःखातुरं माम्# आनन्दय आनन्दय शिवकवचेन माम्# आच्छादय आच्छादय हर हर मृत्युञ्जय त्र्यम्बक सदाशिव परमशिव नमस्ते नमस्ते नमः ॥
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विधि :-
  1. भस्म से  माथे पर  तीन लाइन वाला तिलक त्रिपुंड बनायें.
  2. हाथ में पानी लेकर भगवान  शिव से रक्षा की प्रार्थना करें , जल छोड़ दें.
  3. एक माला गुरुमंत्र की करें . अगर गुरु न बनाया हो तो भगवान् शिव को गुरु मानकर "ॐ नमः शिवाय" मन्त्र का जाप कर लें.
  4. यदि अपने लिए पाठ नहीं कर रहे हैं तो # वाले जगह पर उसका नाम लें जिसके लिए पाठ कर रहे हैं |
  5. रोगमुक्ति, बधामुक्ति, मनोकामना के लिए ११ पाठ ११ दिनों तक करें . अनुकूलता प्राप्त होगी.
  6. रक्षा कवच बनाने के लिए एक पंचमुखी रुद्राक्ष ले लें. उसको दूध,दही,घी,शक्कर,शहद,से स्नान करा लें |अब इसे गंगाजल से स्नान कराकर बेलपत्र चढ़ाएं | ५१ पाठ शिवरात्रि/होली/अष्टमी/अमावस्या/नवरात्री/दीपावली/दशहरा/ग्रहण कि रात्रि करें पाठ के बाद इसे धारण कर लें |


6 फ़रवरी 2026

पाशुपतास्त्र स्तोत्र

    


पाशुपतास्त्र स्तोत्र 



फाल्गुन/श्रावण मास मे इस स्तोत्र का नियमित पाठ कर सकते है ..

इसका पाठ एक बार से ज्यादा न करें क्योंकि यह अत्यंत शक्तिशाली और ऊर्जा उत्पन्न करने वाला स्तोत्र है ।  इसके पाठ से समस्त प्रकार की नकारात्मक ऊर्जाए और बाधाएँ नष्ट हो जाती हैं और घर मे सकारात्मक ऊर्जा बढ्ने लगती है ।


विनियोग :-


हाथ मे पानी लेकर विनियोग पढे और जल जमीन पर छोड़ें .... 

 

ॐ  अस्य श्री पाशुपतास्त्र मंत्रस्य ब्रह्मा ऋषि: गायत्री छन्द: श्रीं बीजं हुं शक्ति: श्री पशुपतीनाथ देवता मम सकुटुंबस्य सपरिवारस्य सर्वग्रह बाधा शत्रू बाधा रोग बाधा अनिष्ट बाधा निवारणार्थं मम सर्व कार्य सिद्धर्थे  [यहाँ अपनी इच्छा बोलें ] जपे विनियोग: ॥ 


कर न्यास :-


ॐ अंगुष्ठाभ्यां  नम: (अंगूठा और तर्जनी यानि पहली उंगली को आपस मे मिलाएं )

श्ल तर्जनीभ्यां नम: (अंगूठा और तर्जनी यानि पहली उंगली को आपस मे मिलाएं )


ईं मध्यमाभ्यां नम: (अंगूठा और मध्यमा यानि बीच वाली  उंगली को आपस मे मिलाएं )


प अनामिकाभ्यां नम: (अंगूठा और अनामिका यानि तीसरी  उंगली को आपस मे मिलाएं )


शु: कनिष्ठिकाभ्यां नम: (अंगूठा और कनिष्ठिका यानि छोटी उंगली को आपस मे मिलाएं )


हुं फट करतल करपृष्ठाभ्यां नम: (दोनों हाथों को आपस मे रगड़ दें )


हृदयादि न्यास :-

अपने हाथ से संबंधित अंगों को स्पर्श कर लें । 


ॐ हृदयाय नम: 

श्ल शिरसे स्वाहा 

ईं शिखायै वषट 

प कवचाय हुं 

शु: नेत्रत्रयाय वौषट 

हुं फट अस्त्राय फट 


ध्यान 

मध्यान्ह अर्कसमप्रभं शशिधरं  भीम अट्टहासोज्वलं 

त्र्यक्षं पन्नगभूषणं शिखिशिखाश्मश्रू  स्फुरन्मूर्धजम 

हस्ताब्जैस्त्रिशिखं समुदगरमसिं शक्तिं दधानं विभुं 

दंष्ट्राभीमचतुर्मुखं पशुपतिं दिव्यास्त्ररुपं स्मरेत !! 


अर्थ :- जो मध्यान्ह कालीन अर्थात दोपहर के सूर्य के समान कांति से युक्त है , चंद्रमा को धारण किये हुये हैं । जिनका भयंकर अट्टहास अत्यंत प्रचंड है । उनके तीन नेत्र है तथा शरीर मे सर्पों का आभूषण सुशोभित हो रहा है । 

उनके ललाट मे स्थित तीसरे नेत्र से निकलती अग्नि की शिखा से श्मश्रू तथा केश दैदिप्यमान हो रहे है । 

जो अपने कर कमलो मे त्रिशूल , मुदगर , तलवार , तथा शक्ति धारण किये हुये है ऐसे दंष्ट्रा से भयानक चार मुख वाले दिव्य स्वरुपधारी सर्वव्यापक महादेव का मैं दिव्यास्त्र के रूप मे स्मरण करता हूँ ।  


अब नीचे दिये हुये स्तोत्र का पाठ करे .. 


हर बार फट की आवाज के साथ आप शिवलिंग पर बेलपत्र पुष्प या चावल समर्पित कर सकते हैं । 

 

यदि किसी सामग्री की व्यवस्था ना हो पाए तो हर बार फट की आवाज के साथ एक ताली बजाएं । 


पाशुपतास्त्र 

ॐ नमो भगवते महापाशुपताय अतुलबलवीर्य पराक्रमाय त्रिपंचनयनाय नानारुपाय नाना प्रहरणोद्यताय सर्वांगरक्ताय भिन्नांजनचयप्रख्याय श्मशानवेतालप्रियाय सर्वविघ्न निकृंतनरताय सर्वसिद्धिप्रदाय भक्तानुकंपिने असंख्यवक्त्र-भुजपादाय तस्मिन सिद्धाय वेतालवित्रासने शाकिनीक्षोभजनकाय व्याधिनिग्रहकारिणे पापभंजनाय सूर्यसोमाग्निनेत्राय विष्णुकवचाय खडगवज्रहस्ताय यमदंडवरुणपाशाय रूद्रशूलाय ज्वलजिव्हाय सर्वरोगविद्रावणाय ग्रहनिग्रहकारिणे दुष्टनागक्षयकारिणे ! 

ॐ कृष्णपिंगलाय फट ! 

ॐ हूंकारास्त्राय फट ! 

ॐ वज्रहस्ताय फट ! 

ॐ शक्तये फट ! 

ॐ दंडाय फट ! 

ॐ यमाय फट ! 

ॐ खडगाय फट ! 

ॐ निऋताय फट ! 

ॐ वरुणाय फट ! 

ॐ वज्राय फट ! 

ॐ पाशाय फट ! 

ॐ ध्वजाय फट ! 

ॐ अंकुशाय फट ! 

ॐ गदायै फट ! 

ॐ कुबेराय फट ! 

ॐ त्रिशूलाय फट ! 

ॐ मुदगराय फट ! 

ॐ चक्राय फट ! 

ॐ पद्माय फट ! 

ॐ नागास्त्राय फट ! 

ॐ ईशानाय फट ! 

ॐ खेटकास्त्राय फट ! 

ॐ मुंडाय फट ! 

ॐ मुंडास्त्राय फट ! 

ॐ कंकालास्त्राय फट ! 

ॐ पिच्छिकास्त्राय फट ! 

ॐ क्षुरिकास्त्राय फट ! 

ॐ ब्रह्मास्त्राय फट ! 

ॐ शक्त्यास्त्राय फट ! 

ॐ गणास्त्राय फट ! 

ॐ सिद्धास्त्राय फट ! 

ॐ पिलिपिच्छास्त्राय फट ! 

ॐ गंधर्वास्त्राय फट ! 

ॐ पूर्वास्त्राय फट ! 

ॐ दक्षिणास्त्राय फट ! 

ॐ वामास्त्राय फट ! 

ॐ पश्चिमास्त्राय फट ! 

ॐ मंत्रास्त्राय फट  ! 

ॐ शाकिनि अस्त्राय फट ! 

ॐ योगिनी अस्त्राय फट ! 

ॐ दंडास्त्राय फट ! 

ॐ महादंडास्त्राय फट ! 

ॐ नमो अस्त्राय फट ! 

ॐ शिवास्त्राय फट ! 

ॐ ईशानास्त्राय फट ! 

ॐ पुरुषास्त्राय फट ! 

ॐ अघोरास्त्राय फट ! 

ॐ सद्योजातास्त्राय फट ! 

ॐ हृदयास्त्राय फट ! 

ॐ महास्त्राय फट ! 

ॐ गरुडास्त्राय फट ! 

ॐ राक्षसास्त्राय फट ! 

ॐ दानवास्त्राय फट ! 

ॐ क्षौं नरसिंहास्त्राय फट ! 

ॐ त्वष्ट्र अस्त्राय फट ! 

ॐ सर्वास्त्राय फट ! 

ॐ न: फट !
ॐ व: फट ! 

ॐ प: फट ! 

ॐ फ: फट ! 

ॐ म: फट ! 

ॐ श्री: फट ! 

ॐ पें फट ! 

ॐ भू: फट ! 

ॐ भुव: फट ! 

ॐ स्व: फट ! 

ॐ मह: फट ! 

ॐ जन: फट ! 

ॐ तप: फट ! 

ॐ सत्यं फट ! 

ॐ सर्व लोक फट ! 

ॐ  सर्व पाताल फट ! 

ॐ सर्व तत्त्व फट ! 

ॐ सर्व प्राण फट ! 

ॐ सर्व नाडी फट ! 

ॐ सर्व कारण फट ! 

ॐ सर्व देव फट ! 

ॐ ह्रीम फट ! 

ॐ श्रीं फट ! 

ॐ ह्रूं फट ! 

ॐ स्त्रूं फट ! 

ॐ स्वां फट ! 

ॐ लां फट ! 

ॐ वैराग्यस्त्राय फट ! 

ॐ मायास्त्राय फट ! 

ॐ कामास्त्राय फट ! 

ॐ क्षेत्रपालास्त्राय फट ! 

ॐ हुंकारास्त्राय फट ! 

ॐ भास्करास्त्राय फट ! 

ॐ चंद्रास्त्राय फट ! 

ॐ विघ्नेश्वरास्त्राय फट ! 

ॐ गौ: गां फट ! 

ॐ ख्रों ख्रौं फट ! 

ॐ हौं हों फट ! 

ॐ भ्रामय भ्रामय फट ! 

ॐ संतापय संतापय फट ! 

ॐ छादय छादय फट ! 

ॐ उन्मूलय उन्मूलय फट ! 

ॐ त्रासय त्रासय फट ! 

ॐ संजीवय संजीवय फट ! 

ॐ विद्रावय विद्रावय फट ! 

ॐ सर्वदुरितं नाशय नाशय फट ! 

ॐ श्लीं पशुं हुं फट स्वाहा !


अंत मे एक नींबू काटकर शिवलिंग पर निचोड़ कर अर्पित कर दें ।

दोनों कान पकड़कर किसी भी प्रकार की त्रुटि के लिए क्षमा प्रार्थना करें ।

और कहें "श्री निखिलेश्वरानंद चरणार्पणम अस्तु" ॥  

5 फ़रवरी 2026

भगवान सदाशिव तथा जगदम्बा की कृपा प्राप्ति

        


भगवान सदाशिव तथा जगदम्बा की कृपा प्राप्ति के लिये मन्त्र :-  

॥ ओम साम्ब सदाशिवाय नम: ॥ 

  1. सवा लाख मन्त्र का एक पुरस्चरण होगा.
  2. शिवलिंग सामने रखकर साधना करें.
  3. समस्त प्रकार की मनोकामना पूर्ती के लिए प्रयोग किया जा सकता है.
  4. किसी अनुचित अनैतिक इच्छा से न करें गंभीर  नुक्सान हो सकता है. 

4 फ़रवरी 2026

शिव पंचाक्षरी मन्त्र साधना : सरल साधकों के लिए सरल विधि

   शिव पंचाक्षरी मन्त्र साधना : सरल साधकों के लिए सरल विधि 


यह साधना भोले बाबा के उन भोले भक्तों के लिए है जो कुछ जानते नहीं और जानना भी नहीं चाहते |

शिव पंचाक्षरी मन्त्र है |

॥ ऊं नमः शिवाय ॥

जाप से पहले अपनी मनोकामना बाबा से कह दें..

नित्य जितनी आप की क्षमता हो उतना जाप करें..
चलते फिरते चौबीसों घंटे आप कर सकते हैं । 

कर सकें तो कम से कम 1 बेलपत्र और जल बाबा के ऊपर चढ़ा दें

बाकी बाबा देख लेंगे...... 

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जो नियमानुसार विधि विधान से करने के इच्छुक हैं उनके लिए विधि :-

भगवान शिव का पंचोपचार या षोडशोपचार पूजन सम्पन्न करें . 

माथे , दोनों गाल, गला, हृदय, दोनों बांह , दोनों जांघ , दोनों तरफ कमर इस प्रकार 11 स्थान पर भस्म का तिलक/त्रिपुन्ड लगाएँ ।.

रुद्राक्ष की 108 दानों की माला धारण करें और रुद्राक्ष की माला से जाप करें ।.

नित्य 11, 21, 33, 51 , 108 माला जाप कर सकते हैं।  सवा लाख मंत्र जाप का पुरास्चरण माना जाता है ।
माला में 108 दाने होते हैं जिसमे जाप किया जाता है । लेकिन एक माला जाप को 100 मंत्र जाप मान लें । बाकी 8 मंत्र को वचन त्रुटि या किसी अन्य गलती के लिए छोड़ देते हैं । एक पुरस्चरण सवा लाख मंत्र जाप का होगा यानी कुल 1250 मालाएं करनी हैं ।

ईशान यानि उत्तर और पूर्व के बीच की ओर देखते हुए मंत्र जाप करें ।.
नीचे कंबल का या मोटे कपड़े का आसन लगाकर बैठे ।

संभव हो तो रोज शिवलिंग पर 11 बेलपत्र चढ़ाएँ और/ या जल से अभिषेक करें । 
साधना काल में संभव हो तो ब्रह्मचर्य रख सकते हैं । विवाहित हैं तो पत्नी से संबंध रख सकते हैं ।

किसी स्त्री पर क्रोध न करें ।

यथा संभव मौन रहें । बेवजह की बकवास, प्रलाप, चुगली, बुराई आदि से बचें ।

किसी पर क्रोध न करें और न ही अपशब्द, श्राप, आदि दें। 

 

3 फ़रवरी 2026

अघोरेश्वर महादेव की साधना

    

अघोर साधनाएं जीवन की सबसे अद्भुत साधनाएं हैं

अघोरेश्वर महादेव की साधना उन लोगों को करनी चाहिए जो समस्त सांसारिक बंधनों से मुक्त होकर शिव गण बनने की इच्छा रखते हैं.

इस साधना से आप को संसार से धीरे धीरे विरक्ति होनी शुरू हो जायेगी, इसलिए विवाहित और विवाह सुख के अभिलाषी लोगों को यह साधना नहीं करनी चाहिए.

  1. यह  साधना  अमावस्या से प्रारंभ होकर अगली अमावस्या तक की जाती है.
  2. यह  दिगंबर साधना है.
  3. एकांत कमरे में साधना होगी.
  4. स्त्री से संपर्क तो दूर की बात है बात भी नहीं करनी है.
  5. भोजन  कम से कम और खुद पकाकर खाना है.
  6. यथा  संभव मौन रहना है.
  7. क्रोध,विवाद,प्रलाप, न करे.
  8. गोबर के कंडे जलाकर उसकी राख बना लें.
  9. स्नान करने के बाद बिना शरीर  पोछे साधना कक्ष में प्रवेश करें.
  10. अब राख को अपने पूरे शरीर में मल लें.
  11. जमीन पर बैठकर मंत्र जाप करें.
  12. माला या यन्त्र की आवश्यकता नहीं है.
  13. जप की संख्या अपने क्षमता के अनुसार तय करें.
  14. आँख बंद करके दोनों नेत्रों के बीच वाले स्थान पर ध्यान लगाने का प्रयास करते हुए जाप करें.बहुत जोर नहीं लगाना है आराम से सहज ध्यान लगाना है । ज्यादा जोर लगाएंगे तो सिर और आँखों मे दर्द हो सकता है । 
  15. जाप  के बाद भूमि पर सोयें.
  16. उठने के बाद स्नान कर सकते हैं.
  17. यदि एकांत उपलब्ध हो तो पूरे साधना काल में दिगंबर रहें. यदि यह संभव न हो तो काले रंग का वस्त्र पहनें.
  18. साधना के दौरान तेज बुखार, भयानक दृश्य और आवाजें आ सकती हैं. इसलिए कमजोर मन वाले साधक और बच्चे इस साधना को किसी हालत में न करें.
  19. गुरु दीक्षा ले चुके साधक ही अपने गुरु से अनुमति लेकर इस साधन को करें.
  20. जाप से पहले कम से कम १ माला गुरु मन्त्र का जाप अनिवार्य है.


|||| अघोरेश्वराय हूं ||||

31 जनवरी 2026

हनुमान जी के 108 नाम

    हनुमान जी के 108 नाम 



1 ॐ अक्षहन्त्रे नमः।

2 ॐ अन्जनागर्भ सम्भूताय नमः।

3 ॐ अशोकवनकाच्छेत्रे नमः।

4 ॐ आञ्जनेयाय नमः।

5 ॐ कपिसेनानायकाय नमः।

6 ॐ कपीश्वराय नमः।

7 ॐ कबळीकृत मार्ताण्डमण्डलाय नमः।

8 ॐ काञ्चनाभाय नमः।

9 ॐ कामरूपिणे नमः।

10 ॐ काराग्रह विमोक्त्रे नमः।

11 ॐ कालनेमि प्रमथनाय नमः।

12 ॐ कुमार ब्रह्मचारिणे नमः।

13 ॐ केसरीसुताय नमः।

14 ॐ गन्धमादन शैलस्थाय नमः।

15 ॐ गन्धर्व विद्यातत्वज्ञाय नमः।

16 ॐ चञ्चलाय नमः।

17 ॐ चतुर्बाहवे नमः।

18 ॐ चिरञ्जीविने नमः।

19 ॐ जाम्बवत्प्रीतिवर्धनाय नमः।

20 ॐ तत्वज्ञानप्रदाय नमः।

21 ॐ दशग्रीव कुलान्तकाय नमः।

22 ॐ दशबाहवे नमः।

23 ॐ दान्ताय नमः।

24 ॐ दीनबन्धुराय नमः।

25 ॐ दृढव्रताय नमः।

26 ॐ दैत्यकार्य विघातकाय नमः।

27 ॐ दैत्यकुलान्तकाय नमः।

28 ॐ धीराय नमः।

29 ॐ नवव्याकृतपण्डिताय नमः।

30 ॐ पञ्चवक्त्राय नमः।

31 ॐ परमन्त्र निराकर्त्रे नमः।

32 ॐ परयन्त्र प्रभेदकाय नमः।

33 ॐ परविद्या परिहाराय नमः।

34 ॐ परशौर्य विनाशनाय नमः।

35 ॐ पारिजात द्रुमूलस्थाय नमः।

36 ॐ पार्थ ध्वजाग्रसंवासिने नमः।

37 ॐ पिङ्गलाक्षाय नमः।

38 ॐ प्रतापवते नमः।

39 ॐ प्रभवे नमः।

40 ॐ प्रसन्नात्मने नमः।

41 ॐ प्राज्ञाय नमः।

42 ॐ बल सिद्धिकराय नमः।

43 ॐ बालार्कसद्रशाननाय नमः।

44 ॐ ब्रह्मास्त्र निवारकाय नमः।

45 ॐ भविष्यथ्चतुराननाय नमः।

46 ॐ भीमसेन सहायकृते नमः।

47 ॐ मनोजवाय नमः।

48 ॐ महाकायाय नमः।

49 ॐ महातपसे नमः।

50 ॐ महातेजसे नमः।

51 ॐ महाद्युतये नमः।

52 ॐ महाबल पराक्रमाय नमः।

53 ॐ महारावण मर्दनाय नमः।

54 ॐ महावीराय नमः।

55 ॐ मायात्मने नमः।

56 ॐ मारुतात्मजाय नमः।

57 ॐ योगिने नमः।

58 ॐ रक्षोविध्वंसकारकाय नमः।

59 ॐ रत्नकुण्डल दीप्तिमते नमः।

60 ॐ रामकथा लोलाय नमः।

61 ॐ रामचूडामणिप्रदायकाय नमः।

62 ॐ रामदूताय नमः।

63 ॐ रामभक्ताय नमः।

64 ॐ रामसुग्रीव सन्धात्रे नमः।

65 ॐ रुद्र वीर्य समुद्भवाय नमः।

66 ॐ लक्ष्मणप्राणदात्रे नमः।

67 ॐ लङ्कापुर विदायकाय नमः।

68 ॐ लन्किनी भञ्जनाय नमः।

69 ॐ लोकपूज्याय नमः।

70 ॐ वज्रकायाय नमः।

71 ॐ वज्रदेहाय नमः।

72 ॐ वज्रनखाय नमः।

73 ॐ वागधीशाय नमः।

74 ॐ वाग्मिने नमः।

75 ॐ वानराय नमः।

76 ॐ वार्धिमैनाक पूजिताय नमः।

77 ॐ जितेन्द्रियाय नमः।

78 ॐ विभीषण प्रियकराय नमः।

79 ॐ शतकन्टमुदापहर्त्रे नमः।

80 ॐ शरपञ्जर भेदकाय नमः।

81 ॐ शान्ताय नमः।

82 ॐ शूराय नमः।

83 ॐ शृन्खला बन्धमोचकाय नमः।

84 ॐ श्री राम हृदयस्थाये नमः 

85 ॐ श्रीमते नमः।

86 ॐ संजीवननगायार्था नमः।

87 ॐ सर्वग्रहबाधा विनाशिने नमः।

88 ॐ सर्वतन्त्र स्वरूपिणे नमः।

89 ॐ सर्वदुखः हराय नमः।

90 ॐ सर्वबन्धविमोक्त्रे नमः।

91 ॐ सर्वमन्त्र स्वरूपवते नमः।

92 ॐ सर्वमायाविभंजनाय नमः।

93 ॐ सर्वयन्त्रात्मकाय नमः।

94 ॐ सर्वरोगहराय नमः।

95 ॐ सर्वलोकचारिणे नमः।

96 ॐ सर्वविद्या सम्पत्तिप्रदायकाय नमः।

97 ॐ सागरोत्तारकाय नमः।

98 ॐ सिंहिकाप्राण भञ्जनाय नमः।

99 ॐ सीतादेविमुद्राप्रदायकाय नमः।

100 ॐ सीतान्वेषण पण्डिताय नमः।

101 ॐ सीताशोक निवारकाय नमः।

102 ॐ सीतासमेत श्रीरामपाद सेवदुरन्धराय नमः।

103 ॐ सुग्रीव सचिवाय नमः।

104 ॐ सुचये नमः।

105 ॐ सुरार्चिताय नमः।

106 ॐ स्फटिकाभाय नमः।

107 ॐ हनूमते नमः।

108 ॐ हरिमर्कट मर्कटाय नमः।


इन नामों का उच्चारण करें नमः के साथ चावल, सिंदूर,पुष्प,जल अर्पित करें । 


21 जनवरी 2026

श्री गणेश अष्टोत्तर शत नाम

 श्री गणेश अष्टोत्तर शत नाम




‘कलौ चण्डी-विनायकौ’-कलियुग में ‘चण्डी’ और ‘गणेश’ की साधना ही श्रेयस्कर है।

मेरे गुरुदेव ने बताया था कि कलयुग में चंडी अर्थात भगवती जगदंबा की साधना और विनायक अर्थात गणेश भगवान की साधना या पूजा करने से ज्यादा लाभप्रद होता है ।

गणेश भगवान की साधना सरल है और उसमें बहुत ज्यादा विधि-विधान और जटिलता की आवश्यकता नहीं है इसीलिए सर्वसामान्य में गणेश भगवान की पूजन का बहुत ज्यादा प्रचलन है जो हम गणेशोत्सव के रूप में प्रतिवर्ष देखते हैं ।
गणेश भगवान के पूजन के लिए आप पंचोपचार व षोडशोपचार जैसे पूजन विधान का प्रयोग कर सकते हैं लेकिन उसमें संस्कृत श्लोकों का ज्यादा प्रयोग होता है जो पढ़ने में सामान्य जन को थोड़ी दिक्कत होती है । लेकिन करते करते उच्चारण स्पष्ट हो जाता है । 
पूजन की एक अन्य विधि है अष्टोत्तर शतनाम !

अष्टोत्तर शतनाम का मतलब होता है, गणेश भगवान के 108 नाम के साथ उनका प्रणाम करते हुए पूजन करना जो कि सरल है और हर कोई कर सकता है ।

आप इन नाम का उच्चारण करने के बाद हर बार नम: बोलते समय अपनी श्रद्धा अनुसार
फूल,
चावल के दाने,
अष्टगंध,
दूर्वा ,
चंदन या जो आपकी श्रद्धा हो वह चढ़ा सकते हैं ।
इस प्रकार से बेहद सरलता से आप गणेश भगवान का पूजन संपन्न कर पाएंगे ।


1 गं विनायकाय नम: ॥
2 गं द्विजप्रियाय नम: ॥
3 गं शैलेंद्र तनुजोत्संग खेलनोत्सुक मानसाय नम: ॥
4 गं स्वलावण्य सुधा सार जित मन्मथ विग्रहाय नम: ॥
5 गं समस्तजगदाधाराय नम: ॥
6 गं मायिने नम: ॥
7 गं मूषकवाहनाय नम: ॥
8 गं हृष्टाय नम: ॥
9 गं तुष्टाय नम: ॥
10 गं प्रसन्नात्मने नम: ॥
11 गं सर्व सिद्धि प्रदायकाय नम: ॥
12 गं अग्निगर्भच्छिदे नम: ॥
13 गं इंद्रश्रीप्रदाय नम: ॥
14 गं वाणीप्रदाय नम: ॥
15 गं अव्ययाय नम: ॥
16 गं सिद्धिरूपाय नम: ॥
17 गं शर्वतनयाय नम: ॥
18 गं शर्वरीप्रियाय नम: ॥
19 गं सर्वात्मकाय नम: ॥
20 गं सृष्टिकत्रै नम: ॥
21 गं विघ्नराजाय नम: ॥
22 गं देवाय नम: ॥
23 गं अनेकार्चिताय नम: ॥
24 गं शिवाय नम: ॥
25 गं शुद्धाय नम: ॥
26 गं बुद्धिप्रियाय नम: ॥
27 गं शांताय नम: ॥
28 गं ब्रह्मचारिणे नम: ॥
29 गं गजाननाय नम: ॥
30 गं द्वैमातुराय नम: ॥
31 गं मुनिस्तुत्याय नम: ॥
32 गं गौरीपुत्राय नम: ॥
33 गं भक्त विघ्न विनाशनाय नम: ॥
34 गं एकदंताय नम: ॥
35 गं चतुर्बाहवे नम: ॥
36 गं चतुराय नम: ॥
37 गं शक्ति संयुक्ताय नम: ॥
38 गं लंबोदराय नम: ॥
39 गं शूर्पकर्णाय नम: ॥
40 गं हस्त्ये नम: ॥
41 गं ब्रह्मविदुत्तमाय नम: ॥
42 गं कालाय नम: ॥
43 गं गणेश्वराय नम: ॥
44 गं ग्रहपतये नम: ॥
45 गं कामिने नम: ॥
46 गं सोम सूर्याग्नि लोचनाय नम: ॥
47 गं पाशांकुश धराय नम: ॥
48 गं चण्डाय नम: ॥
49 गं गुणातीताय नम: ॥
50 गं निरंजनाय नम: ॥
51 गं अकल्मषाय नम: ॥
52 गं स्वयं सिद्धाय नम: ॥
53 गं सिद्धार्चित पदांबुजाय नम: ॥
54 गं स्कंदाग्रजाय नम: ॥
55 गं बीजापूर फलासक्ताय नम: ॥
56 गं वरदाय नम: ॥
57 गं शाश्वताय नम: ॥
58 गं कृतिने नम: ॥
59 गं सर्व प्रियाय नम: ॥
60 गं वीतभयाय नम: ॥
61 गं गतिने नम: ॥
62 गं चक्रिणे नम: ॥
63 गं इक्षु चाप धृते नम: ॥
64 गं श्री प्रदाय नम: ॥
65 गं अव्यक्ताय नम: ॥
66 गं अजाय नम: ॥
67 गं उत्पल कराय नम: ॥
68 गं श्री पतये नम: ॥
69 गं स्तुति हर्षिताय नम: ॥
70 गं कुलाद्रिभेत्रे नम: ॥
71 गं जटिलाय नम: ॥
72 गं कलि कल्मष नाशनाय नम: ॥
73 गं चंद्रचूडामणये नम: ॥
74 गं कांताय नम: ॥
75 गं पापहारिणे नम: ॥
76 गं भूताय नम: ॥
77 गं समाहिताय नम: ॥
78 गं आश्रिताय नम: ॥
79 गं श्रीकराय नम: ॥
80 गं सौम्याय नम: ॥
81 गं भक्त वांछित दायकाय नम: ॥
82 गं शांतमानसाय नम: ॥
83 गं कैवल्य सुखदाय नम: ॥
84 गं सच्चिदानंद विग्रहाय नम: ॥
85 गं ज्ञानिने नम: ॥
86 गं दयायुताय नम: ॥
87 गं दक्षाय नम: ॥
88 गं दांताय नम: ॥
89 गं ब्रह्मद्वेष विवर्जिताय नम: ॥
90 गं प्रमत्त दैत्य भयदाय नम: ॥
91 गं श्रीकण्ठाय नम: ॥
92 गं विबुधेश्वराय नम: ॥
93 गं रामार्चिताय नम: ॥
94 गं विधये नम: ॥
95 गं नागराज यज्ञोपवितवते नम: ॥
96 गं स्थूलकण्ठाय नम: ॥
97 गं स्वयंकर्त्रे नम: ॥
98 गं अध्यक्षाय नम: ॥
99 गं साम घोष प्रियाय नम: ॥
100 गं परस्मै नम: ॥
101 गं स्थूल तुंडाय नम: ॥
102 गं अग्रण्यै नम: ॥
103 गं धीराय नम: ॥
104 गं वागीशाय नम: ॥
105 गं सिद्धि दायकाय नम: ॥
106 गं दूर्वा बिल्व प्रियाय नम: ॥
107 गं अव्यक्त मूर्तये नम: ॥
108 गं अद्भुत मूर्ति मते नम: ॥


अंत में हाथ जोड़कर प्रणाम करें और दोनों कान पकड़कर किसी भी प्रकार की त्रुटि के लिए क्षमा प्रार्थना करते हुए भगवान गणेश से अपने इच्छित मनोकामना को पूर्ण करने की याचिका करें ।