14 सितंबर 2026

लक्ष्मी प्राप्ति हेतु गणपति साधना

लक्ष्मी प्राप्ति हेतु गणपति साधना

 


गजाननं भूतगणादि सेवितं कपीत्थ जम्बू फल चारू भक्षितम ।

उमासुतम शोक विनाशकारणम नमामि विघ्नेश्वर पाद पंकजम ।


गज के समान मुख वाले, भूतादि गण जिनकी सेवा करते हैं ऐसे विविध भोज्य पदार्थों के प्रेमी तथा बाधओं को दूर करने वाले देवी जगदम्बा के प्रियपुत्र भगवान गणेश के चरण कमलों को मैं सादर प्रणाम करता हूं ।


कलियुग में फलदायक साधनाओं के विषय में कहा गया है कि:-

 

‘कलौ चण्डी विनायकौ’

 

अर्थात कलियुग में चण्डी तथा गणपति साधनायें ज्यादा फलप्रद होंगी। 

गणपति साधना को प्रारंभिक तथा अत्यंत लाभप्रद साधनाओं में गिना जाता है। योगिक विचार में मूलाधार चक्र को कुण्डली का प्रारंभ माना जाता है तथा गणपति उसके स्वामी माने जाते हैं। साथ ही शिव शक्ति के पुत्र होने के कारण दोनों की संयुक्त कृपा प्रदान करते हैं।

 

भगवती लक्ष्मी को चंचला कहा गया है । चंचला अर्थात जो एक स्थान पर ज्यादा देर तक न रह सकती हो । केवल लक्ष्मी का पूजन तथा साधना यद्यपि फलदायक होती है मगर अल्पकालिक होती है । लक्ष्मी के साथ गणपति का पूजन लक्ष्मी को स्थायित्व प्रदान करता है।

 

आगे की पंक्तियों में भगवान गणपति का एक स्तोत्र प्रस्तुत है। इस स्तोत्र का नित्य पाठ करना लाभप्रद होता है। यद्यपि यह कहना उचित नही होगा कि इस स्तोत्र के पाठ से आप धनवान बन जायेंगें, परंतु धनागमन के नए मार्गों के संबंध में नए विचार उपाय आदि आपके मस्तिष्क में उत्पन्न होंगें, जिनका सही प्रयोग कर आप धन प्राप्ति कर सकेंगें।

 

गणपति स्तोत्र

 

ऊं नमो विघ्नराजाय सर्वसौख्य प्रदायिने ।

दुष्टारिष्ट विनाशाय पराय परात्मने ।

लम्बोदरं महावीर्यं नागयज्ञोपशोभितं ।

अर्धचंद्रधरं देवं विघ्न व्यूह विनाशनम ।

ॐ हृॉं हृीं ह्रूँ हृैं हृौं हृः हेरम्बाय नमः ।

सर्व सिद्धिप्रदो सि त्वं सिद्धिबुद्धिप्रदो भवतः ।

चिंतितार्थ प्रदस्त्वं हि सततं मोदकप्रियः ।

सिंदूरारूण वस्त्रेश्च पूजितो वरदायकः ।


फलश्रुति:-

इदं गणपति स्तोत्रं यः पठेद भक्तिमान नरः ।

तस्य देहं च गेहं च लक्ष्मीर्न मुश्चति ।

 

इस स्तोत्र का 108 पाठ करें। इससे पहले भगवान गणपति के सामने अपनी इच्ठा या मनोकामना रखें तथा इसका पाठ प्रारंभ करें । भगवान गणपति की कृपा से आपको अपनी इच्ठा की पूर्ति में अवश्य सहायता मिलेगी।

 


संतान/पुत्र प्राप्ति गणेश स्तोत्र

   संतान/पुत्र प्राप्ति गणेश स्तोत्र


नमोस्तु गणनाथाय सिद्धि बुद्धि युताय च।

सर्वेश्वर्यप्रदाय देवाय पुत्र वृद्धि प्रदाय च ।

गुरुवराय पुरवे गोप्त्रे गुहयासिताय ते ।

गोप्याय गोपिता शेष भुवनाय चिदात्मने ।

विश्वमूलाय भव्याय विश्वसृष्टिकराय ते ।

नमो नमस्ते सत्याय सत्यपूर्णाय शुंडिने ।

एकदंताय शुद्धाय सुमुखाय नमो नमः ।

प्रपन्न जन पालाय प्रणतार्ति विनाशिने ।

शरणम भव देवेश संततिम सुदृढ़म कुरु ।

भविष्यन्ती च ये पुत्रा मत्कुले गणनायक ।

ते सर्वे तव पूजार्थ निरताः स्युर्वरो मत: ।

पुत्रप्रदमिदम स्तोत्रम सर्वसिध्धी प्रदायकम ॥


विधि :-

भगवान गणेश का ध्यान पूजन करके नित्य क्षमतानुसार 1,3,5,11 बार इस स्तोत्र का पाठ करें तो संतान/पुत्र प्राप्ति मे आने वाले विघ्नों को विघ्नकर्ता महागणपती हटाकर अनुकूलता प्रदान करते हैं .....  



श्री गणेश अष्टोत्तर शत नाम

  श्री गणेश अष्टोत्तर शत नाम




‘कलौ चण्डी-विनायकौ’-कलियुग में ‘चण्डी’ और ‘गणेश’ की साधना ही श्रेयस्कर है।

मेरे गुरुदेव ने बताया था कि कलयुग में चंडी अर्थात भगवती जगदंबा की साधना और विनायक अर्थात गणेश भगवान की साधना या पूजा करने से ज्यादा लाभप्रद होता है ।

गणेश भगवान की साधना सरल है और उसमें बहुत ज्यादा विधि-विधान और जटिलता की आवश्यकता नहीं है इसीलिए सर्वसामान्य में गणेश भगवान की पूजन का बहुत ज्यादा प्रचलन है जो हम गणेशोत्सव के रूप में प्रतिवर्ष देखते हैं ।
गणेश भगवान के पूजन के लिए आप पंचोपचार व षोडशोपचार जैसे पूजन विधान का प्रयोग कर सकते हैं लेकिन उसमें संस्कृत श्लोकों का ज्यादा प्रयोग होता है जो पढ़ने में सामान्य जन को थोड़ी दिक्कत होती है । लेकिन करते करते उच्चारण स्पष्ट हो जाता है । 
पूजन की एक अन्य विधि है अष्टोत्तर शतनाम !

अष्टोत्तर शतनाम का मतलब होता है, गणेश भगवान के 108 नाम के साथ उनका प्रणाम करते हुए पूजन करना जो कि सरल है और हर कोई कर सकता है ।

आप इन नाम का उच्चारण करने के बाद हर बार नम: बोलते समय अपनी श्रद्धा अनुसार
फूल,
चावल के दाने,
अष्टगंध,
दूर्वा ,
चंदन या जो आपकी श्रद्धा हो वह चढ़ा सकते हैं ।
इस प्रकार से बेहद सरलता से आप गणेश भगवान का पूजन संपन्न कर पाएंगे ।


1 गं विनायकाय नम: ॥
2 गं द्विजप्रियाय नम: ॥
3 गं शैलेंद्र तनुजोत्संग खेलनोत्सुक मानसाय नम: ॥
4 गं स्वलावण्य सुधा सार जित मन्मथ विग्रहाय नम: ॥
5 गं समस्तजगदाधाराय नम: ॥
6 गं मायिने नम: ॥
7 गं मूषकवाहनाय नम: ॥
8 गं हृष्टाय नम: ॥
9 गं तुष्टाय नम: ॥
10 गं प्रसन्नात्मने नम: ॥
11 गं सर्व सिद्धि प्रदायकाय नम: ॥
12 गं अग्निगर्भच्छिदे नम: ॥
13 गं इंद्रश्रीप्रदाय नम: ॥
14 गं वाणीप्रदाय नम: ॥
15 गं अव्ययाय नम: ॥
16 गं सिद्धिरूपाय नम: ॥
17 गं शर्वतनयाय नम: ॥
18 गं शर्वरीप्रियाय नम: ॥
19 गं सर्वात्मकाय नम: ॥
20 गं सृष्टिकत्रै नम: ॥
21 गं विघ्नराजाय नम: ॥
22 गं देवाय नम: ॥
23 गं अनेकार्चिताय नम: ॥
24 गं शिवाय नम: ॥
25 गं शुद्धाय नम: ॥
26 गं बुद्धिप्रियाय नम: ॥
27 गं शांताय नम: ॥
28 गं ब्रह्मचारिणे नम: ॥
29 गं गजाननाय नम: ॥
30 गं द्वैमातुराय नम: ॥
31 गं मुनिस्तुत्याय नम: ॥
32 गं गौरीपुत्राय नम: ॥
33 गं भक्त विघ्न विनाशनाय नम: ॥
34 गं एकदंताय नम: ॥
35 गं चतुर्बाहवे नम: ॥
36 गं चतुराय नम: ॥
37 गं शक्ति संयुक्ताय नम: ॥
38 गं लंबोदराय नम: ॥
39 गं शूर्पकर्णाय नम: ॥
40 गं हस्त्ये नम: ॥
41 गं ब्रह्मविदुत्तमाय नम: ॥
42 गं कालाय नम: ॥
43 गं गणेश्वराय नम: ॥
44 गं ग्रहपतये नम: ॥
45 गं कामिने नम: ॥
46 गं सोम सूर्याग्नि लोचनाय नम: ॥
47 गं पाशांकुश धराय नम: ॥
48 गं चण्डाय नम: ॥
49 गं गुणातीताय नम: ॥
50 गं निरंजनाय नम: ॥
51 गं अकल्मषाय नम: ॥
52 गं स्वयं सिद्धाय नम: ॥
53 गं सिद्धार्चित पदांबुजाय नम: ॥
54 गं स्कंदाग्रजाय नम: ॥
55 गं बीजापूर फलासक्ताय नम: ॥
56 गं वरदाय नम: ॥
57 गं शाश्वताय नम: ॥
58 गं कृतिने नम: ॥
59 गं सर्व प्रियाय नम: ॥
60 गं वीतभयाय नम: ॥
61 गं गतिने नम: ॥
62 गं चक्रिणे नम: ॥
63 गं इक्षु चाप धृते नम: ॥
64 गं श्री प्रदाय नम: ॥
65 गं अव्यक्ताय नम: ॥
66 गं अजाय नम: ॥
67 गं उत्पल कराय नम: ॥
68 गं श्री पतये नम: ॥
69 गं स्तुति हर्षिताय नम: ॥
70 गं कुलाद्रिभेत्रे नम: ॥
71 गं जटिलाय नम: ॥
72 गं कलि कल्मष नाशनाय नम: ॥
73 गं चंद्रचूडामणये नम: ॥
74 गं कांताय नम: ॥
75 गं पापहारिणे नम: ॥
76 गं भूताय नम: ॥
77 गं समाहिताय नम: ॥
78 गं आश्रिताय नम: ॥
79 गं श्रीकराय नम: ॥
80 गं सौम्याय नम: ॥
81 गं भक्त वांछित दायकाय नम: ॥
82 गं शांतमानसाय नम: ॥
83 गं कैवल्य सुखदाय नम: ॥
84 गं सच्चिदानंद विग्रहाय नम: ॥
85 गं ज्ञानिने नम: ॥
86 गं दयायुताय नम: ॥
87 गं दक्षाय नम: ॥
88 गं दांताय नम: ॥
89 गं ब्रह्मद्वेष विवर्जिताय नम: ॥
90 गं प्रमत्त दैत्य भयदाय नम: ॥
91 गं श्रीकण्ठाय नम: ॥
92 गं विबुधेश्वराय नम: ॥
93 गं रामार्चिताय नम: ॥
94 गं विधये नम: ॥
95 गं नागराज यज्ञोपवितवते नम: ॥
96 गं स्थूलकण्ठाय नम: ॥
97 गं स्वयंकर्त्रे नम: ॥
98 गं अध्यक्षाय नम: ॥
99 गं साम घोष प्रियाय नम: ॥
100 गं परस्मै नम: ॥
101 गं स्थूल तुंडाय नम: ॥
102 गं अग्रण्यै नम: ॥
103 गं धीराय नम: ॥
104 गं वागीशाय नम: ॥
105 गं सिद्धि दायकाय नम: ॥
106 गं दूर्वा बिल्व प्रियाय नम: ॥
107 गं अव्यक्त मूर्तये नम: ॥
108 गं अद्भुत मूर्ति मते नम: ॥


अंत में हाथ जोड़कर प्रणाम करें और दोनों कान पकड़कर किसी भी प्रकार की त्रुटि के लिए क्षमा प्रार्थना करते हुए भगवान गणेश से अपने इच्छित मनोकामना को पूर्ण करने की याचिका करें ।


विस्तृत गणेश पूजन विधि

      


 
(बृहत गणेश पूजन )


पहले गुरु स्मरण ,गणेश स्मरण करे ..
ॐ गुं गुरुभ्यो नमः
ॐ श्री गणेशाय नमः
ॐ श्री महालक्ष्म्यै नमः
अब आप 4 बार आचमन करे ( दाए हाथ में पानी लेकर पिए )
गं आत्मतत्त्वं शोधयामि नमः स्वाहा
गं विद्यातत्त्वं शोधयामि नमः स्वाहा
गं शिव तत्त्वं शोधयामि नमः स्वाहा
गं सर्व तत्त्वं शोधयामि नमः स्वाहा
अब आप घंटा नाद करे और उसे पुष्प अक्षत अर्पण करे
घंटा देवताभ्यो नमः
अब आप जिस आसन पर बैठे है उस पर पुष्प अक्षत अर्पण करे
आसन देवताभ्यो नमः
अब आप दीपपूजन करे उन्हें प्रणाम करे और पुष्प अक्षत अर्पण करे
दीप देवताभ्यो नमः
अब आप कलश का पूजन करे ..उसमेगंध ,अक्षत ,पुष्प ,तुलसी,इत्र ,कपूर डाले ..उसे तिलक करे .
कलश देवताभ्यो नमः
अब आप अपने आप को तिलक करे
उसके बाद हाथ मे जल अक्षत और पुष्प लेकर संकल्प करे कि आज के दिन मै अपनी समस्या निवारण हेतु ( जो समस्य हो उसे स्मरण करे ) या अपनी मनोकामना पूर्ती हेतु ( अपनी मनोकामना का स्मरण करे ) श्री गणपती का पूजन कर रहा हूं
फिर संक्षिप्त गुरु पुजन करे
ॐ गुं गुरुभ्यो नम:
ॐ परम गुरुभ्यो नम:
ॐ पारमेष्ठी गुरुभ्यो नम:
उसके बाद गणपती का ध्यान करे
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्य कोटि समप्रभ
निर्विघ्नं कुरु में देव सर्व कार्येशु सर्वदा
गजाननं भूतगणाधिसेवितं
कपित्थ जंबूफलसारभक्षितं
उमासुतं शोकविनाशकारकं
नमामि विघ्नेश्वर पादपंकजं

श्री महागणपति आवाहयामि
मम पूजन स्थाने रिद्धि सिद्धि सहित शुभ लाभ सहित स्थापयामि नमः
त्वां चरणे गन्धाक्षत पुष्पं समर्पयामि

श्री गणेश षोडशोपचार पूजन :-

ॐ श्री गणेशाय नम: पाद्यं समर्पयामि ( दो आचमनी जल अर्पण करे )
ॐ श्री गणेशाय नम: अर्घ्य समर्पयामि ( एक आचमनी जल मे दूर्वा पुष्प अक्षत मिलाकर अर्पण करे )
ॐ श्री गणेशाय नम: आचमनीयं समर्पयामि ( एक आचमनी जल अर्पण करे)
ॐ श्री गणेशाय नम: स्नानं समर्पयामि
( स्नान कराते समय आप जल से या दुध से या पंचामृत से गणपति अथर्वशीर्ष या अन्य स्तोत्रोसे अभिषेक कर सकते है )
ॐ श्री गणेशाय नम: वस्त्र उपवस्त्र समर्पयामि ( अक्षत पुष्प या मौली धागा अर्पण करे )
ॐ श्री गणेशाय नम: यज्ञोपवीतम समर्पयामि ( यज्ञोपवीत या अक्षत अर्पण करे )
फिर एक आचमनी जल अर्पण करे
ॐ श्री गणेशाय नम: हरिद्रा कुंकुम चंदन अष्टगंधं समर्पयामि
ॐ श्री गणेशाय नम: अक्षतां समर्पयामि
ॐ श्री गणेशाय नम: पुष्पं पुष्पमालां समर्पयामि
ॐ श्री गणेशाय नम: दूर्वाकुरान समर्पयामि
ॐ श्री गणेशाय नम: धूपं समर्पयामि
ॐ श्री गणेशाय नम: दीपं समर्पयामि
ॐ श्री गणेशाय नम: नैवेद्यं समर्पयामि
(फिर एक आचमनी जल अर्पण करे )
ॐ श्री गणेशाय नम: ऋतुफलं समर्पयामि
ॐ श्री गणेशाय नम: तांबुलं समर्पयामि
ॐ श्री गणेशाय नम: द्रव्यदक्षिणां
समर्पयामि
ॐ श्री गणेशाय नम: कर्पूरार्तिकं समर्पयामि
ॐ श्री गणेशाय नम: नमस्कारं समर्पयामि

गणेश अंगपूजन
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अब गणेश जी के एक एक अंग का स्मरण करते हुये पुष्प अक्षत अर्पण करे )
गं पार्वतीनंदनाय नम: पादौ पूजयामि
गं गणेशाय नम: गुल्फौ पूजयामि
गं जगद्धात्रे नम: जंघे पूजयामि
गं जगद्वल्लभाय नम: जानुनि पूजयामि
गं उमापुत्राय नम: उरु पूजयामि
गं विकटाय नम: कटिं पूजयामि
गं गुहाग्रजाय नम: गुह्यं पूजयामि
गं महत्तमाय नम: मेढ्रं पूजयामि
गं नाथाय नम: नाभिं पूजयामि
गं उत्तमाय नम: उदरं पूजयामि
गं विनायकाय नम: वक्षस्थलं पूजयामि
गं पाशच्छिदे नम: पार्श्वौ पूजयामि
गं हेरंबाय नम: हृदयम पूजयामि
गं कपिलाय नम: कण्ठं पूजयामि
गं स्कंदाग्रजाय नम: स्कंधौ पूजयामि
गं हरसुताय नम: हस्तान पूजयामि
गं ब्रह्मचारिणे नम: बाहून पूजयामि
गं सुमुखाय नम: मुखं पूजयामि
गं एकदंताय नम: दंतौ पूजयामि
गं विघ्नहंत्रे नम: नेत्रे पूजयामि
गं शूर्पकर्णाय नम: कर्णौ पूजयामि
गं भालचंद्राय नम: भालं पूजयामि
गं नागाभरणाय नम: नासिकां पूजयामि
गं चिरंतनाय नम: चिबुकं पूजयामि
गं स्थूलौष्ठाय नम: औष्ठौ पूजयामि
गं गलन्मदाय नम: कण्ठं पूजयामि
गं कपिलाय नम: कचान पूजयामि
गं शिवप्रियाय नम: शिर: पूजयामि
गं सर्वमंगलासुताय नम: सर्वांगे पूजयामि

श्री गणेश एकविंशति पत्र पूजा
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अगर आपके पास गणेश जी को अर्पण करने की 21 पत्री उपलब्ध है तो उसे अर्पण करे .. नही तो पुष्प अक्षत अर्पण करे .
गं उमापुत्राय नम: माचीपत्रं समर्पयामि
गं हेरंबाय नम: बृहतीपत्रं समर्पयामि
गं लंबोदराय नम: बिल्वपत्रं समर्पयामि
गं द्विरदाननाय नम: दूर्वापत्रं समर्पयामि
गं धूम्रकेतवे नम: दुर्धूरपत्रं समर्पयामि
गं बृहते नम: बदरीपत्रं समर्पयामि
गं अपवर्गदाय नम: अपामार्गपत्रं समर्पयामि
गं द्वैमातुराय नम: तुलसीपत्रं समर्पयामि
गं चिरंतनाय नम: चूतपत्रं समर्पयामि
गं कपिलाय नम: करवीरपत्रं समर्पयामि
गं विष्णुस्तुताय नम: विष्णुक्रांतपत्रं समर्पयामि
गं अमलाय नम: आमलकीपत्रं समर्पयामि
गं महते नम: मरुवकपत्रं समर्पयामि
गं सिंधुराय नम: सिंधूरपत्रं समर्पयामि
गं गजाननाय नम: जातीपत्रं समर्पयामि
गं गण्डगलन्मदाय नम: गण्डलीपत्रं समर्पयामि
गं शंकरीप्रियाय नम: शमीपत्रं समर्पयामि
गं भृंगराजत्कटाय नम: भृंगराजपत्रं समर्पयामि
गं अर्जुनदंताय नम: अर्जुनपत्रं समर्पयामि
गं अर्कप्रभाय नम: अर्कपत्रं समर्पयामि
गं एकदंताय नम: दाडिमीपत्रं समर्पयामि

श्री गणेश एकविंशति दूर्वा पूजन
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अब आप 21 दूर्वा अर्पण करे [दूब चढ़ाएँ] 
१) गं गणाधिपाय नम: दूर्वायुग्मं समर्पयामि
२) गं पाशांकुशधराय नम: दूर्वायुग्मं समर्पयामि
3) गं आखुवाहनाय नम: दूर्वायुग्मं समर्पयामि
४) गं विनायकाय नम: दूर्वायुग्मं समर्पयामि
५) गं ईशपुत्राय नम: दूर्वायुग्मं समर्पयामि
६) गं सर्वसिद्धिप्रदाय नम: दूर्वायुग्मं समर्पयामि
७) गं एकदंताय नम: दूर्वायुग्मं समर्पयामि
८) गं इभवक्त्राय नम: दूर्वायुग्मं समर्पयामि
९) गं मूषकवाहनाय नम: दूर्वायुग्मं समर्पयामि
१०) गं कुमारगुरवे नम: दूर्वायुग्मं समर्पयामि
११) गं कपिलवर्णाय नम: दूर्वायुग्मं समर्पयामि
१२) गं ब्रह्मचारिणे नम: दूर्वायुग्मं समर्पयामि
१३) गं मोदकहस्ताय नम: दूर्वायुग्मं समर्पयामि
१४) गं सुरश्रेष्ठाय नम: दूर्वायुग्मं समर्पयामि
१५) गं गजनासिकाय नम: दूर्वायुग्मं समर्पयामि
१६) गं कपित्थफलप्रियाय नम: दूर्वायुग्मं समर्पयामि
१७) गं गजमुखाय नम: दूर्वायुग्मं समर्पयामि
१८) गं सुप्रसन्नाय नम: दूर्वायुग्मं समर्पयामि
१९) गं सुराग्रजाय नम: दूर्वायुग्मं समर्पयामि
२०) गं उमापुत्राय नम: दूर्वायुग्मं समर्पयामि
२१) गं स्कंदप्रियाय नम: दूर्वायुग्मं समर्पयामि


श्री अष्टविनायक पूजन
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अब आप अष्टविनायक स्वरुप के पूजन हेतु दूर्वा या पुष्प अक्षत अर्पण करे ..
1) मयुरेश्वर
गं ऐं ह्रीं श्रीं मयूर आरुढाय सिंधुदैत्यविनाशाय श्री मयूरेश्वराय नम:
2) चिंतामणी
गं ऐं ह्रीं श्रीं कपिलऋषी सुपुज्याय चिंतामणि प्रदानाय श्री चिंतामणि गणेशाय नम:
3) महागणपति
गं ऐं ह्रीं श्रीं त्रिपुरासुरवध कारणाय शिवसुपूजिताय श्रीमहागणपतये नम:
4) सिद्धिविनायक
गं ऐं ह्रीं श्रीं विष्णुपूजिताय मधुकैटभवध कारणाय दक्षिणशुंडधारणाय समस्त सिद्धिप्रदानाय श्रीसिद्धिविनायकाय नम:
5) विघ्नेश्वर
गं ऐं ह्रीं श्रीं इंद्रसुपूजिताय विघ्नासुरप्राण हरणाय श्रीविघ्नेश्वराय नम:
6) गिरिजात्मक
गं ऐं ह्रीं श्रीं गिरिजासुपुजिताय शक्तिपुत्राय श्रीगिरिजात्मकाय नम:
7) बालेश्वर
गं ऐं ह्रीं श्रीं बाल्यस्वरुपाय भक्तप्रियाय श्रीबालेश्वराय नम:
8) वरदविनायक
गं ऐं ह्रीं श्रीं वरदहस्ताय सर्वबाधा प्रशमनाय श्रीवरदविनायकाय नम:

श्री गणेश अष्ट अवतार पूजन
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अब आप गणेश जी के अवतारो के पूजन हेतु दूर्वा या पुष्प अक्षत अर्पण करे
१) गं ॐ नमो भगवते मत्सरासुरहंताय सिंहवाहनाय वक्रतुंडाय नम:
२) गं ॐ नमो भगवते मदासुरहंताय मूषकवाहनाय एकदंताय नम:
३) गं ॐ नमो भगवते मोहासुरहंताय ज्ञानदाताय मूषकवाहनाय महोदराय नम:
४) गं ॐ नमो भगवते लोभासुरहंताय सांख्यसिद्धिप्रदानाय मूषकवाहनाय गजाननाय नम:
५) गं ॐ नमो भगवते क्रोधासुरहंताय मूषकवाहनाय लंबोदराय नम:
६) गं ॐ नमो भगवते कामासुरहंताय मयूरवाहनाय विकटनाय नम:
७) गं ॐ नमो भगवते मयासुर प्रहर्ताय शेष वाहनाय विघ्नराजाय नम:
८) गं ॐ नमो भगवते अहंतासुर हंताय मूषकवाहनाय धूम्रवर्णाय नम:

श्री गणेश षोडश नाम पूजन 
(यहाँ पर भगवान गणेश जी के 16 नामावली दी है उससे पूजन करे ..दूर्वा या पुष्प अक्षत या जल अर्पण करे )
1. ॐ गं सुमुखाय नम: ।
2. ॐ गं एकदंताय नमः।
3. ॐ गं कपिलाय नमः।
4. ॐ गं गजकर्णकाय नमः।
5. ॐ गं लंबोदराय नमः।
6. ॐ गं विकटाय नम: !
7. ॐ गं विघ्नराजाय नमः।
8. ॐ गं गणाधिपाय नम: !
9. ॐ गं धूम्रकेतवे नम : ।
10 . ॐ गं गणाध्यक्षाय नमः।
11. ॐ गं भालचंद्राय नमः।
12. ॐ गं गजाननाय नम: !
13. ॐ गं वक्रतुंडाय नमः।
14. ॐ गं शूर्पकर्णाय नमः।
15. ॐ गं हेरंबाय नमः।
16. ॐ गं स्कंदपूर्वजाय नमः।

अब नीचे दिये हुये तन्त्रोक्त सिद्ध गणपती माला मंत्र का पाठ कर पुष्प अर्पण करे

श्री गणपती माला मंत्र
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ॐ क्लीं ह्रीं श्रीं ऐं ग्लौं ॐ ह्रीं क्रौं गं ॐ नमो भगवते महागणपतये स्मरणमात्रसंतुष्टाय सर्वविद्याप्रकाशकाय सर्वकामप्रदाय भवबंधविमोचनाय ह्रीं सर्वभूतबंधनाय क्रों साध्याकर्षणाय क्लीं जगतत्रयवशीकरणाय सौ: सर्वमनक्षोभणाय श्रीं महासंपत्प्रदाय ग्लौं भूमंडलाधिपत्यप्रदाय महाज्ञानप्रदाय चिदानंदात्मने गौरीनंदनाय महायोगिने शिवप्रियाय सर्वानंदवर्धनाय सर्वविद्याप्रकाशनप्रदाय द्रां चिरंजिविने ब्लूं सम्मोहनाय ॐ मोक्षप्रदाय ! फट वशी कुरु कुरु! वौषडाकर्षणाय हुं विद्वेषणाय विद्वेषय विद्वेषय ! फट उच्चाटय उच्चाटय ! ठ: ठ: स्तंभय स्तंभय ! खें खें मारय मारय ! शोषय शोषय ! परमंत्रयंत्रतंत्राणि छेदय छेदय ! दुष्टग्रहान निवारय निवारय ! दु:खं हर हर ! व्याधिं नाशय नाशय ! नम: संपन्नय संपन्नय स्वाहा ! सर्वपल्लवस्वरुपाय महाविद्याय गं गणपतये स्वाहा !
यन्मंत्रे क्षितलांछिताभमनघं मृत्युश्च वज्राशिषो भूतप्रेतपिशाचका: प्रतिहता निर्घातपातादिव ! उत्पन्नं च समस्तदु:खदुरितं उच्चाटनोत्पादकं वंदेsभीष्टगणाधिपं भयहरं विघ्नौघनाशं परम ! ॐ गं गणपतये नम:
ॐ नमो महागणपतये , महावीराय , दशभुजाय , मदनकाल विनाशन , मृत्युं
हन हन , यम यम , मद मद , कालं संहर संहर , सर्व ग्रहान चूर्णय चूर्णय , नागान मूढय मूढय , रुद्ररूप, त्रिभुवनेश्वर , सर्वतोमुख हुं फट स्वाहा !
ॐ नमो गणपतये , श्वेतार्कगणपतये , श्वेतार्कमूलनिवासाय , वासुदेवप्रियाय , दक्षप्रजापतिरक्षकाय , सूर्यवरदाय , कुमारगुरवे , ब्रह्मादिसुरावंदिताय , सर्पभूषणाय , शशांकशेखराय , सर्पमालालंकृतदेहाय , धर्मध्वजाय , धर्मवाहनाय , त्राहि त्राहि , देहि देहि , अवतर अवतर , गं गणपतये , वक्रतुंडगणपतये , वरवरद , सर्वपुरुषवशंकर , सर्वदुष्टमृगवशंकर , सर्वस्ववशंकर , वशी कुरु वशी कुरु , सर्वदोषान बंधय बंधय , सर्वव्याधीन निकृंतय निकृंतय , सर्वविषाणि संहर संहर , सर्वदारिद्र्यं मोचय मोचय , सर्वविघ्नान छिंदि छिंदि , सर्ववज्राणि स्फोटय स्फोटय , सर्वशत्रून उच्चाटय उच्चाटय , सर्वसिद्धिं कुरु कुरु , सर्वकार्याणि साधय साधय , गां गीं गूं गैं गौं गं गणपतये हुं फट स्वाहा !
ॐ नमो गणपते महावीर दशभुज मदनकालविनाशन मृत्युं हन हन , कालं संहर संहर , धम धम , मथ मथ , त्रैलोक्यं मोहय मोहय , ब्रह्मविष्णुरुद्रान मोहय मोहय , अचिंत्य बलपराक्रम , सर्वव्याधीन विनाशाय , सर्वग्रहान चूर्णय चूर्णय , नागान मोटय मोटय , त्रिभुवनेश्वर सर्वतोमुख हुं फट स्वाहा !

अब गणेशजी को अर्घ्य प्रदान करे
एकदंताय विद्महे वक्रतुंडाय धीमहि तन्नो दन्ती प्रचोदयात
अब एक आचमनी जल लेकर पूजा स्थान पर छोड़े
अनेन गणपती पूजनेन श्री भगवान महागणपती प्रीयन्तां न मम .

हाथ जोड़ कर भगवान गणेश जी से प्रार्थना करे
विघ्नेश्वराय वरदाय सुरप्रियाय
लंबोदराय सकलाय जगद्धिताय
नागाननाय श्रूतियज्ञविभूषिताय
गौरीसुताय गणनाथ नमो नमस्ते !!
भक्तार्तिनाशनपराय गणेश्वराय
सर्वेश्वराय शुभदाय सुरेश्वराय
विद्याधराय विकटाय च वामनाय
भक्तप्रसन्नवरदाय नमो नमस्ते !!
नमस्ते ब्रह्मरुपाय विष्णुरुपाय ते नम:
नमस्ते रुद्ररुपाय करिरुपाय ते नम:
विश्वरुपस्वरुपाय नमस्ते ब्रह्मचारिणे
भक्तप्रियाय देवाय नमस्तुभ्यं विनायक !!
लंबोदर नमस्त्युभ्यं सततं मोदकप्रियं
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा !!
भक्तप्रियेति सुखदेति फलप्रदेति
विद्याप्रदेत्यघहरेति च ये स्तुवंति
तेभ्यो गणेश वरदो भव नित्यमेव !!

क्षमाप्रार्थना तथा समर्पण करें ... 
गणेशपूजने कर्म यन्नूनमधिकं कृतं
तेन सर्वेण सर्वात्मा प्रसन्नोsस्तु सदा मम !!
अनया पूजया सिद्धिबुद्धिसहितो महागणपती: प्रीयंतां न मम

लघु गणेश पूजन

  लघु गणेश पूजन



यह एक छोटा गणेश भगवान का पूजन है जिसे आप लगभग 10 मिनट मे सम्पन्न कर सकते हैं 

पहले गुरु स्मरण ,गणेश भैरव महालक्ष्मी स्मरण करे ..
ॐ गुं गुरुभ्यो नमः
ॐ श्री गणेशाय नमः

ॐ भ्रम भैरवाय  नमः 
ॐ श्री महालक्ष्म्यै नमः

अब आप 4 बार आचमन करे दाए हाथ में पानी लेकर पिए
गं आत्मतत्त्वं शोधयामि नमः स्वाहा
गं विद्यातत्त्वं शोधयामि नमः स्वाहा
गं शिव तत्त्वं शोधयामि नमः स्वाहा
गं सर्व तत्त्वं शोधयामि नमः स्वाहा

अब आप घंटा नाद करे और उसे पुष्प अक्षत अर्पण करे
घंटा देवताभ्यो नमः

अब आप जिस आसन पर बैठे है उस पर पुष्प अक्षत अर्पण करे
आसन देवताभ्यो नमः

अब आप दीपपूजन करे उन्हें प्रणाम करे और पुष्प अक्षत अर्पण करे
दीप देवताभ्यो नमः

अब आप कलश का पूजन करे ..उसमेगंध ,अक्षत ,पुष्प ,तुलसी,इत्र ,कपूर डाले ..उसे तिलक करे .
कलश देवताभ्यो नमः

अब आप अपने आप को तिलक करे

फिर संक्षिप्त गुरु पुजन करे
ॐ गुं गुरुभ्यो नम: ।
ॐ परम गुरुभ्यो नम: ।
ॐ पारमेष्ठी गुरुभ्यो नम: ।

उसके बाद गणपति का ध्यान करे
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्य कोटि समप्रभ
निर्विघ्नं कुरु में देव सर्व कार्येशु सर्वदा

उनका आह्वान करें अर्थात बुलाएं 
श्री महागणपति आवाहयामि
मम पूजन स्थाने रिद्धि सिद्धि सहित शुभ लाभ सहित स्थापयामि नमः

उनका स्वागत करें , फूल आदि चढ़ाएं 
त्वां चरणे गन्धाक्षत पुष्पं समर्पयामि ।


पंचोपचार पूजन करें

ॐ गं " लं" पृथ्वी तत्वात्मकं गंधं समर्पयामि । 
कुमकुम,चन्दन अष्टगंध चढ़ाएँ ।

ॐ गं " हं" आकाश तत्वात्मकं पुष्पम समर्पयामि । 
फूल चढ़ाएँ ।

ॐ गं " यं " वायु तत्वात्मकं धूपं समर्पयामि । 
धूप या अगरबत्ती दिखाएँ ।

ॐ गं " रं" अग्नी तत्वात्मकं दीपं समर्पयामि । 
दीपक दिखाएँ ।

ॐ गं " वं " जल तत्वात्मकं नैवेद्यं समर्पयामि । 
प्रसाद चढ़ाएँ ।


अब गणेशजी को अर्घ्य प्रदान करे, एक चम्मच जल चढ़ाएं 
एकदंताय विद्महे वक्रतुंडाय धीमहि तन्नो दन्ती प्रचोदयात

 भगवान गणेश जी के 16 नाम से दूर्वा या पुष्प अक्षत या जल अर्पण करे

1. ॐ गं सुमुखाय नम: । 
2. ॐ गं एकदंताय नमः।
3. ॐ गं कपिलाय नमः।
4. ॐ गं गजकर्णकाय नमः।
5. ॐ गं लंबोदराय नमः।
6. ॐ गं विकटाय नम: । 
7. ॐ गं विघ्नराजाय नमः।
8. ॐ गं गणाधिपाय नम: । 
9. ॐ गं धूम्रकेतवे नम : । 
10 . ॐ गं गणाध्यक्षाय नमः।
11. ॐ गं भालचंद्राय नमः।
12. ॐ गं गजाननाय नम: । 
13. ॐ गं वक्रतुंडाय नमः।
14. ॐ गं शूर्पकर्णाय नमः।
15. ॐ गं हेरंबाय नमः।
16. ॐ गं स्कंदपूर्वजाय नमः।

अब एक आचमनी जल लेकर पूजा स्थान पर छोड़े
अनेन महागणपति षोडश नाम पूजनेन श्री भगवान महागणपति प्रीयन्तां न मम .

हाथ जोड़ कर भगवान गणेश जी से प्रार्थना करे

1 सितंबर 2026

काली शाबर मंत्र साधना

 


प्रथम ज्योति महाकाली प्रगटली ।

ॐ निरंजन निराकार अवगत पुरुष तत सार
तत सार मध्ये ज्योत
ज्योत मध्ये परम ज्योत
परम ज्योत मध्ये उत्पन्न भई माता 
शम्भु शिवानी काली ओ काली काली महाकाली
कृष्ण वर्णी, शव वाहनी, रुद्र की पोषणी
हाथ खप्पर खडग धारी
गले मुण्डमाला हंस मुखी । 
जिह्वा ज्वाला दन्त काली । 
मद्यमांस कारी श्मशान की राणी । 
मांस खाये रक्त-पी-पीवे । 
भस्मन्ति माई जहाँ पर पाई तहाँ लगाई । 
सत की नाती , धर्म की बेटी । 
इन्द्र की साली , काल की काली । 
जोग की जोगीन, नागों की नागीन । 
मन माने तो संग रमाई, नहीं तो श्मशान फिरे । 
अकेली चार वीर अष्ट भैरों, घोर काली अघोर काली । 
अजर महाकाली । 
बजर अमर काली । 
भख जून निर्भय काली । 

बला भख, दुष्ट को भख
काल भख, पापी पाखण्डी को भख । 

जती सती को रख । 

ॐ काली तुम बाला ना वृद्धा, देव ना दानव, नर ना नारी देवीजी तुम तो हो परब्रह्मा काली ।



मूल मंत्र -

क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं दक्षिणे कालिके क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं स्वाहा ।



विधि -

  1. महाकाली की कृपा प्रदान करेगा ।
  2. अपनी क्षमतानुसार 1, 3,9,11,21,51,108 बार जाप रात्रिकाल मे करें।
  3. जन्माष्टमी/कालरात्रि/शिवरात्रि/नवरात्रि/अमावस्या मे करने से विशेष लाभदायक होगा। 
  4. धूप जलाकर रखें । 

31 अगस्त 2026

भगवती महाकाली सहस्त्राक्षरी मंत्र

 भगवती महाकाली सहस्त्राक्षरी मंत्र




ॐ क्रीं  क्रीँ  क्रीँ  ह्रीँ  ह्रीँ  हूं  हूं दक्षिणे कालिके क्रीँ  क्रीँ  क्रीँ  ह्रीँ  ह्रीँ  हूं  हूं स्वाहा ।

शुचिजाया, महापिशाचिनी,  दुष्टचित्तनिवारिणी,
क्रीँ कामेश्वरी,  वीँ हं वाराहिके, ह्रीँ महामाये, खं खः क्रोधाधिपे !
श्रीं  महालक्ष्म्ये ! सर्वहृदय रञ्जनी । वाग्वादिनी विधे त्रिपुरे ।
हंस्त्रिँ  हसकहल ह्रीँ  हस्त्रैँ  ॐ ह्रीँ  क्लीँ  मे  स्वाहा ।
ॐ ॐ ह्रीँ  ईं स्वाहा ।
दक्षिणकालिके क्रीँ हूं ह्रीँ स्वाहा ।

खड्गमुण्डधरे, कुरुकुल्ले तारे, ॐ  ह्रीँ  नमः भयोन्मादिनी भयं मम हन हन । पच पच ।  मथ मथ ।
फ्रेँ विमोहिनी सर्वदुष्टान मोहय मोहय ।
हयग्रीवे, सिँहवाहिनी, सिँहस्थे, अश्वारुढे, अश्वमुरिप विद्राविणी विद्रावय मम शत्रून ये मां हिँसतु तान ग्रस ग्रस ।
महानीले, वलाकिनी, नीलपताके, क्रेँ क्रीँ क्रेँ कामे, संक्षोभिणी, उच्छिष्टचाण्डालिके,
सर्वजगद वशमानय वशमानय ।

मातंगिनी उच्छिष्टचाण्डालिनी मातंगिनी सर्ववशंकरी नमः स्वाहा ।
विस्फारिणी । कपालधरे ।  घोरे । घोरनादिनी । भूर शत्रून् विनाशिनी । उन्मादिनी ।
रोँ  रोँ रोँ  रीँ  ह्रीँ  श्रीँ  हसौः सौँ  वद वद क्लीँ क्लीँ क्लीँ क्रीँ  क्रीँ  क्रीँ कति कति स्वाहा |

काहि काहि कालिके ।
शम्वरघातिनी, कामेश्वरी, कामिके, ह्रं ह्रं क्रीँ स्वाहा ।

हृदयाये ॐ ह्रीँ  क्रीँ  मे स्वाहा ।

ठः ठः ठः क्रीँ  ह्रं  ह्रीँ  चामुण्डे हृदय जनाभिअसूनव ग्रस ग्रस दुष्टजनान् ।
अमून शंखिनी क्षतजचर्चितस्तने उन्नतस्तनेविष्टंभकारिणि । विघाधिके ।  श्मशानवासिनी । कलय कलय । विकलय विकलय । कालग्राहिके । सिँहे । दक्षिणकालिके । अनिरुद्दये । ब्रूहि ब्रूहि । जगच्चित्रिरे । चमत्कारिणी । हं कालिके ।  करालिके । घोरे । कह कह । तडागे । तोये । गहने । कानने । शत्रुपक्षे । शरीरे मर्दिनि पाहि पाहि । अम्बिके । तुभ्यं कल विकलायै । बलप्रमथनायै । योगमार्ग गच्छ गच्छ ।  निदर्शिके । देहिनि । दर्शनं देहि देहि । मर्दिनि महिषमर्दिन्यै । स्वाहा ।

रिपुन्दर्शने द र्शय दर्शय । सिँहपूरप्रवेशिनि । वीरकारिणि । क्रीँ  क्रीँ  क्रीँ  हूं  हूं ह्रीँ  ह्रीँ फट् स्वाहा ।

शक्तिरुपायै ।  रोँ  वा गणपायै  । रोँ  रोँ  रोँ व्यामोहिनि । यन्त्रनिके । महाकायायै ।  प्रकटवदनायै । लोलजिह्वायै । मुण्डमालिनि । महाकालरसिकायै । नमो नमः ।
ब्रम्हरन्ध्रमेदिन्यै नमो नमः ।
शत्रुविग्रहकलहान्त्रिपुरभोगिन्यै । विषज्वालामालिनी । तन्त्रनिके । मेधप्रभे । शवावतंसे । हंसिके । कालि कपालिनि । कुल्ले कुरुकुल्ले । चैतन्यप्रभे प्रज्ञे तु साम्राज्ञि ज्ञान ह्रीँ  ह्रीँ  रक्ष रक्ष । ज्वाला । प्रचण्ड । चण्डिके ।  शक्ति । मार्तण्ड ।  भैरवि ।  विप्रचित्तिके । विरोधिनि । आकर्णय आकर्णय । पिशिते । पिशितप्रिये । नमो नमः ।
खः खः खः मर्दय मर्दय । शत्रून् ठः ठः ठः । कालिकायै नमो नमः ।
ब्राम्हयै नमो नमः ।
माहेश्वर्यै नमो नमः ।
कौमार्यै नमो नमः ।
वैष्णव्यै नमो नमः ।
वाराह्यै नमो नमः ।
इन्द्राण्यै नमो नमः ।
चामुण्डायै नमो नमः ।
अपराजितायै नमो नमः ।
नारसिँहिकायै नमो नमः ।
कालि । महाकालिके । अनिरुध्दके । सरस्वति फट् स्वाहा ।

पाहि पाहि ललाटं । भल्लाटनी । अस्त्रीकले । जीववहे । वाचं रक्ष रक्ष । परविद्या क्षोभय क्षोभय । आकर्षय आकर्षय । कट कट । अमुकान मोहय मोहय  महामोहिनिके । चीरसिध्दके । कृष्णरुपिणी । अंजनसिद्धके ।  स्तम्भिनि । मोहिनि । मोक्षमार्गानि दर्शय दर्शय स्वाहा ।।



  • 108 पाठ से लाभ मिलेगा |
  • चमेली के तेल का दीपक जलाएंगे । 
  • रात्रिकालीन साधना है |
  • दक्षिण दिशा की ओर देखते हुए जाप करें 
  • काला वस्त्र तथा काले कंबल का आसन रहेगा । 

29 अगस्त 2026

तंत्र साधनाओं के लिए गुरु दीक्षा कैसे प्राप्त करें ?

  


मैंने देवी देवताओं तथा उनकी मंत्र साधना से संबन्धित कई लेख प्रकाशित किए हैं । जिन्हे पढ़कर कई पाठकों और पाठिकाओं ने साधना की है या करने की इच्छा व्यक्त की है । मैंने जो विधियाँ प्रकाशित की हैं, वे सरल हैं और उन्हे किसी भी आयु का स्त्री या पुरुष जो सनातन धर्म मे आस्था रखता हो वह सम्पन्न कर सकता है ।  

साधना के मार्ग मे गुरु दीक्षा का बड़ा महत्व होता है । गुरु की देह को गुरु मानने की गलती हम सभी कर बैठते हैं । वास्तव में गुरु के अंदर जो भगवान शिव का ज्ञान या जो शिव तत्व होता है, वही वास्तविक गुरु होता है । तंत्र के अधिपति भगवान शिव सभी साधनाओं के मूल हैं और वही मंत्रों और साधनाओं को शक्ति और चैतन्यता प्रदान करते हैं । 

इसे मैं एक सरल उदाहरण से समझाऊं तो मान लीजिए कि आप अपने घर में एक ट्यूबलाइट जलाना चाहते हैं । इसके दो तरीके हो सकते हैं । पहला तो यह कि आप अपना खुद का बिजली पैदा करने का कोई यंत्र या जनरेटर बना ले और उससे ट्यूबलाइट को जोड़ दें तो ट्यूब लाइट जलने लगेगी । खुद से मंत्र जाप करना कुछ कुछ वैसा ही है । जैसे-जैसे आप जाप करते जाते हैं धीरे-धीरे आपके अंदर ऊर्जा बनने लगती है या आपका खुद का जनरेटर चालू होने लगता है । जब उसकी बिजली पर्याप्त हो जाती है, तब ट्यूब लाइट जलता है । 

दूसरा तरीका यह है कि जो बिजली की सप्लाई लाइन आपके इलाके में आई हुई है, उसके तार से अपने घर में एक कनेक्शन ले ले । उस कनेक्शन के माध्यम से ट्यूबलाइट को जोड़ दें, तब भी वह ट्यूबलाइट चल जाएगी । गुरु दीक्षा कुछ-कुछ वैसा ही कनेक्शन है, जो आपकी ट्यूबलाइट को जल्दी चालू कर सकता है । 

जब आप किसी गुरु से दीक्षा लेते हैं, जो कि स्वयं सिद्ध हो, तो उसकी जो गुरु परंपरा होती है, वह पीछे की ओर जाने पर भगवान शिव से जाकर मिलती है । यानी यह समझ लीजिए कि मेन पावर स्टेशन पर जाकर मिलती है, जहां से सभी साधनाओं का प्रारंभ होता है । जब यह लिंक दीक्षा के माध्यम से जुड़ती है तो आपके अंदर जो शिव तत्व है, जो आपके मस्तिष्क के दोनों हिस्सों के बीच में लगभग लिंग आकार स्वरूप में स्थित होता है, उसकी चैतन्यता बढ़ती है । उसी के माध्यम से मंत्रों की शक्ति जागृत होती है और आपको अपना अभीष्ट प्राप्त होता है ।

अब मन मे यह सवाल उठता है कि दीक्षा कैसे प्राप्त करें ? 

सबसे बढ़िया स्थिति तो यह है कि आप गुरु के पास जाकर दीक्षा प्राप्त करें !

उनके पास व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हो और उनसे निवेदन करके अपनी इच्छित दीक्षा प्राप्त करें !!

इसके लिए आप भोपाल मध्य प्रदेश जा सकते हैं, और गुरु माता डॉ.  साधना सिंह जी से दीक्षा प्राप्त कर सकते हैं । 




साधना सिद्धि विज्ञान 
जास्मीन - 429
न्यू मिनाल रेजीडेंसी 
जे. के. रोड , भोपाल  [म.प्र.]


दूरभाष : (0755) --- 4269368,4283681,4221116

टेरो कार्ड रीडिंग सीखें : सुमन जी से



टैरो कार्ड रीडिंग वर्तमान ऊर्जा, अवचेतन मन की स्थिति और संभावित परिणामों को समझने का एक माध्यम है। यह मुख्य रूप से कार्ड पर बने प्रतीकों, चित्रों, रीडर के अंतर्ज्ञान के आधार पर वर्तमान स्थितियों का आकलन करने की एक प्रक्रिया है । इसे आप ज्योतिष की ही एक शाखा के रूप मे देख सकते हैं । 

सुमन जी पिछले कई वर्षों से कार्ड रीडिंग कर रही हैं । मैं उनके सौ से ज्यादा क्लाइंट्स के अनुभव के आधार पर यह कह सकता हूँ कि, गुरुकृपा और महामाया के आशीर्वाद से उनकी रीडिंग काफी अच्छी है । 

अब उन्होंने कार्ड रीडिंग सिखाने का कार्य प्रारंभ किया है अगर आप इच्छुक हों तो जॉइन कर सकते हैं । अपनी अन्तः प्रेरणा को विकसित करने की विधियाँ सीख सकते हैं । निरंतर अभ्यास साधना के माध्यम से एक अच्छे कार्ड रीडर बन सकते हैं ।   



27 अगस्त 2026

चंद्रग्रहण : पति से संबंध अनुकूल बनाने का मंत्र

  

चंद्रग्रहण : पति से संबंध अनुकूल बनाने का मंत्र

यदि आपका पति आपसे विरक्त हो गया हो लगातार झगड़ा होता रहता हो  बेवजह दूरियां बन गई हो तो इस साधना से अनुकूलता मिलेगी |



विधि :-
कामिया सिन्दूर मिल जाये तो उसे सामने रख लें.
ना मिले तो जिस कुमकुम से आप बिंदी लगाती हैं वह ...... या फिर स्टिकर बिंदी का प्रयोग करती हैं तो स्टीकर बिंदी के पैकेट को अपने सामने लाल कपड़े में रख लेंगे । जाप करने के बाद उस लाल कपड़े में लपेटकर रख लेंगे अगले दिन फिर उसे खोल कर जाप करना है । यदि लाल कपडे में रखने में दिक्कत हो तो ऐसे भी पूजा स्थान में रखकर कर सकते हैं ,. 

अगर आपका कोई गुरु हो या किसी देवता को गुरु मानते हो तो उनके मंत्र का तीन बार जाप कर लें
यदि गुरु नहीं हो तो निम्नलिखित गुरु मंत्र का 3 बार जाप कर ले
ॐ श्री गुरु मण्डलाय नमः

इसके बाद अपने दाएं हाथ में एक चम्मच पानी रख लें और अपनी इच्छा (अर्थात मेरा और मेरे पति के बीच में संबंध अच्छा बना रहे ) ऐसी भावना करके उस जल को जमीन पर छोड़ देंगे

उसके बाद निम्नलिखित मंत्र का जाप करेंगे

"हथेली में हनुमन्त बसै, भैरु बसे कपार।

नरसिंह की मोहिनी, मोहे सब संसार।

मोहन रे मोहन्ता वीर, सब वीरन में तेरा सीर।

सबकी नजर बाँध दे, तेल सिन्दूर चढ़ाऊँ तुझे।

तेल सिन्दूर कहाँ से आया ?

कैलास-पर्वत से आया।

कौन लाया, अञ्जनी का हनुमन्त,गौरी का गनेश लाया।

काला, गोरा, तोतला-तीनों बसे कपार।

बिन्दा तेल सिन्दूर का, दुश्मन गया पाताल।

दुहाई कमिया सिन्दूर की, हमें देख शीतल हो जाए भरतार ।

सत्य नाम, आदेश गुरु की।


28 अगस्त 2026 को पूर्णिमा भी है चंद्र ग्रहण भी है उस दिन भी आप इसको १०८ बार या जितनी आपकी क्षमता हो उतनी बार कर सकते हैं . उसके बाद अगली पूर्णिमा तक इसे नित्य कम से कम ११ बार करें . 

इसके आलावा आप निम्नलिखित समय में भी इस कर सकते हैं ;-


.....1....
इस मन्त्र को रोज 11 बार जाप होलिका दहन की रात्रि से प्रारंभ कर रामनवमी तक करें ।

हनुमान जयंती वाले दिन हनुमान मंदिर में एक नारियल और 21 रुपये या जितनी आपकी शक्ति हो उतना चढ़ा दें ।

हनुमान जयंती के बाद किसी भी दिन से इसका टीका [बिंदी] लगाकर पति के पास जाएँ. मन में हमेशा भाव रखें कि सब अच्छा हो जाएगा ।

...,........2.....,
नित्य 108 जाप रोज  पूरी नवरात्री में करें . आखिरी दिन हनुमान मंदिर में एक नारियल और 21 रुपये या जितनी आपकी शक्ति हो उतना चढ़ा दें ।

इसका टीका [बिंदी] लगाकर पति के पास जाएँ. मन में हमेशा भाव रखें कि सब अच्छा हो जाएगा ।

.,........3......

यदि होली,नवरात्रि में ना कर पाएं तो किसी भी पूर्णिमा से अगली पूर्णिमा तक रोज 11 बार जाप कर सकते हैं। आखिरी दिन हनुमान मंदिर में एक नारियल और 21 रुपये या जितनी आपकी शक्ति हो उतना चढ़ा दें ।
बिंदी या कुमकुम रखने में दिक्कत हो तो माता गौरी के भगवान शिव के साथ वाले स्वरूप का ध्यान करके जाप कर लेंगे । टीका या बिंदी लगाते समय इस मंत्र का जाप करते हुए टीका लगा लेंगे ।
.....,

ऐसा नित्य करें तो पति धीरे धीरे अनुकूल होने लगता है.

क्रोध करने से बचें और बेवजह का प्रलाप या बकवास ना करें

यह केवल आपके स्वयं के विवाहित पति के लिए काम करेगा .

प्रेमी के लिए काम नहीं करेगा .