26 सितंबर 2016

सरल काली साधना

जो लोग स्वास्थ्यगत कारणों या उम्र के कारण बैठ कर साधना नहीं कर सकते हैं वे चलते फ़िरते निम्नलिखित काली बीज मन्त्र का जाप नवरात्रि में कर सकते हैं.





॥ क्लीं ॥


  • यदि चाहें तो अष्टमी या नवमी को १०८ बार इस मन्त्र में स्वाहा लगाकर हवन कर लें.
  • अगर ऐसा ना करना चाहें तो इसी मन्त्र से एक नारियल पर लाल कुम्कुम की बिन्दियां १०८ बार लगायें अब इस नारियल को काली/दुर्गा/शिव मंदिर में अपनी मनोकामना बताकर चढा दें.


सरल पितृ पूजन

पितृ पक्ष चल रहा है. सभी लोग विधि विधान से पूजन नहीं कर पते हैं .उनके लिए एक सरल विधि:-
|| ॐ सर्व पित्रेभ्यो नमः ||

  • आपके घर में जो भोजन बना हो उसे एक थाली में सजा ले.
  • उसको पूजा स्थान में अपने सामने रखकर इस मंत्र का १०८  बार जाप करें.
  • हाथ में पानी लेकर कहें " मेरे सभी ज्ञात अज्ञात पितरों की शांति हो " इसके बाद जल जमीन पर छोड़ दे.
  • अब उस थाली के भोजन को किसी गाय को या किसी गरीब भूखे को खिला दें. 


नवार्ण मंत्र साधना विधि

नवार्ण मंत्र 













॥ ऐं ह्रीं क्लीं चामुन्डायै विच्चै ॥


ऐं = सरस्वती का बीज मन्त्र है ।

ह्रीं = महालक्ष्मी का बीज मन्त्र है ।

क्लीं = महाकाली का बीज मन्त्र है ।

नवार्ण मन्त्र का जाप इन तीनों देवियों की कृपा प्रदान करता है ।


  • वस्त्र आसन  लाल होगा .
  • दिशा कोई भी हो सकती है.
  • स्नान कर के बैठेंगे .
  • रात्रि काल में जाप होगा.
  • रुद्राक्ष की माला से जाप करें.
  • ब्रह्मचर्य का पालन करें.
  • बकवास और प्रलाप से बचें.
  • यथासंभव मौन रहें.
  • यथा शक्ति जाप करें.





नवरात्री साधना में सामान्य तथ्य




  1. साधना प्रारम्भ करने से पहले हाथ में जल लेकर अपनी मनोकामना बोले.
  2. महाविद्याओं की साधना दीक्षा लेकर ही करे.
  3. जाप के पहले तथा बाद मे गुरु मन्त्र की १ माला जाप करें.

    ॥ ऊं परम तत्वाय नारायणाय गुरुभ्यो नमः ॥

  4. नवरात्रि में मंत्र का जाप रात्रि काल में ९ से ३ बजे के बीच करना चाहिये.
  5. जहाँ दिशानिर्देश न हो वहाँ उत्तर या पूर्व की ओर देखते हुए जाप करें.
  6. यथासंभव एकांत वास करें.
  7. सात्विक आचार व्यव्हार रखें.
  8. बहुत आवश्यक हो तो पत्नी से संपर्क रख सकते हैं. 
  9. किसी स्त्री का अपमान ना करें.
  10. क्रोध न करें . 
  11. किसी को नुक्सान न पहुंचाए.
  12. साधना को गोपनीय रखें.
  13. हो सके तो साधना स्थल पर ही रात को सोयें.
  14. किसी को ना तो कोसें और ना ही व्यर्थ का प्रलाप करें.
  15. यथा संभव मौन रखें.
  16. साधना में बैठने से पहले हल्का भोजन करें.
  17. जप के बाद दोनों कान पकड़कर सभी प्रकार की गलतियों के लिए माफ़ी मांगें
  18. अंत में जप गुरु को समर्पित करें .
  19. उग्र सधानाये बच्चे और महिलाएं न करें.
  20. गुरु से अनुमति लेकर ही साधना करें .
  21. साधनात्मक शक्तियों के दुरुपयोग का दुष्प्रभाव आने वाली पीढ़ियों तक को झेलना पडता है, इसलिए सिद्धि का दुरुपयोग न करे वरना परिणाम भयानक तथा विनाशकारी होंगे .

महाविद्या भगवती धूमावती





॥ धूं धूं धूमावती ठः ठः ॥


  • सर्व बाधा निवारण हेतु.

  • मंगल या शनिवार से प्रारंभ करें.

  •  ब्रह्मचर्य का पालन करें. 

  • सात्विक आहार तथा आचार विचार रखें. 

  • यथा संभव मौन रहें. 

  • अनर्गल प्रलाप और बकवास न करें. 

  • सफ़ेद वस्त्र पहनकर सफ़ेद आसन पर बैठ कर  जाप करें.  

  • यथाशक्ति जाप जोर से बोल कर करें. 

  • बेसन के पकौडे का भोग लगायें. 

  • जाप के बाद भोग को निर्जन स्थान पर छोड कर वापस मुडकर देखे बिना लौट जायें.

  • ११००० जाप करें. ११०० मंत्रों से हवन करें.मंत्र के आखिर में स्वाहा लगाकर हवन सामग्री को आग में छोडें. हवन की भस्म को प्रभावित स्थल या घर पर छिडक दें. शेष भस्म को नदी में प्रवाहित करें.

  •  
  • जाप पूरा हो जाने पर किसी गरीब विधवा स्त्री को भोजन तथा सफ़ेद साडी दान में दें.

मातंगी साधना




॥ ह्रीं क्लीं हुं मातंग्यै फ़ट स्वाहा ॥


  • मातंगी साधना संपूर्ण गृहस्थ सुख प्रदान करती है.
  • यह साधना जीवन में रस प्रदान करती है.

त्रिपुरभैरवी महाविद्या



॥ हसै हसकरी हसै ॥


लाभ - शत्रुबाधा, तन्त्रबाधा निवारण.


विधि ---


  • दिये हुए चित्र को फ़्रम करवा लें.
  • यन्त्र के बीच में देखते हुए जाप करें.
  • रात्रि काल में जाप होगा.
  • रत्रि ९ बजे से सुबह ४ बजे के बीच का समय रात्रि काल है.
  • काला रंग का आसन तथा वस्त्र होगा.
  • दिशा दक्षिण की तरफ़ मुंह करके बैठना है.
  • हो सके तो साधना स्थल पर ही रात को सोयें.
  • किसी स्त्री का अपमान न करें.
  • किसी पर साधना काल में क्रोध न करें.
  • किसी को ना तो कोसें और ना ही व्यर्थ का प्रलाप करें.
  • यथा संभव मौन रखें.
  • उपवास न कर सकें तो साधना में बैठने से पहले हल्का भोजन करें.


25 सितंबर 2016

दुर्गा मनोकामना मन्त्र





॥ ॐ क्लीं दुर्गायै नमः ॥


  • यह काम बीज से संगुफ़ित दुर्गा मन्त्र है.
  • यह सर्वकार्यों में लाभदायक है.
  • जाप प्रारंभ होने से पूर्व हाथ में जल लेकर अपनी इच्छा व्यक्त करे और पानी जमीन पर छोड़ दें.
  • इसका जाप आप नवरत्रि में चलते फ़िरते भी कर सकते हैं.
  • अनुष्ठान के रूप में २१००० जाप करें.
  • २१०० मंत्रों से हवन नवमी को करें.
  • विशेष लाभ के लिये विजयादशमी को हवन करें.

24 सितंबर 2016

नवार्ण मन्त्र








॥ ऐं ह्रीं क्लीं चामुन्डायै विच्चै ॥


ऐं = सरस्वती का बीज मन्त्र है ।

ह्रीं = महालक्ष्मी का बीज मन्त्र है ।

क्लीं = महाकाली का बीज मन्त्र है ।
नवरात्री में नवार्ण मन्त्र का जाप इन तीनों देवियों की कृपा प्रदान करता है ।

23 सितंबर 2016

महाकाली रोगनाशक मंत्रम



॥ ॐ ह्रीं क्रीं मे स्वाहा ॥

  • यह सर्वविध रोगों के प्रशमन में सहायक होता है.
  • इसका प्रभाव भी महामृत्युंजय मंत्र के सामान प्रचंड है .
  • यथा शक्ति जाप करें.

22 सितंबर 2016

भुवनेश्वरी महाविद्या















॥ ह्रीं ॥




  • भुवनेश्वरी महाविद्या समस्त सृष्टि की माता हैं

  • हमारे जीवन के लिये आवश्यक अमृत तत्व वे हैं.
  • इस मन्त्र का नित्य जाप आपको उर्जावान बनायेगा.
  • जिनका पाचन संबंधी शिकायत है उनको लाभ मिलेगा.
  • प्रातः काल ४ से ६ बजे तक जाप करें.
  • सफ़ेद वस्त्र और आसन होगा.
  • दिशा उत्तर या पूर्व .
  • ब्रह्मचर्य का पालन करें.
  • आचार विचार व्यवहार सात्विक रखें.
  • 21 सितंबर 2016

    तारा महाविद्या साधना




    1.  तारा काली कुल की महविद्या है ।
    2. तारा महाविद्या की साधना जीवन का सौभाग्य है ।
    3. यह महाविद्या साधक की उंगली पकडकर उसके लक्ष्य तक पहुन्चा देती है।
    4. गुरु कृपा से यह साधना मिलती है तथा जीवन को निखार देती है ।
    5. साधना से पहले गुरु से तारा दीक्षा लेना लाभदायक होता है ।

    तारा मंत्रम
     ॥ ऐं ऊं ह्रीं स्त्रीं हुं फ़ट ॥
    • मंत्र का जाप रात्रि काल में ९ से ३ बजे के
    • बीच करना चाहिये.
    • यह रात्रिकालीन साधना है.
    • गुरुवार से प्रारंभ करें.
    • गुलाबी वस्त्र/आसन/कमरा रहेगा.
    • उत्तर या पूर्व की ओर देखते हुए जाप करें.
    • यथासंभव एकांत वास करें.
    • सवा लाख जाप का पुरश्चरण है.
    • ब्रह्मचर्य/सात्विक आचार व्यव्हार रखें.
    • किसी स्त्री का अपमान ना करें.
    • क्रोध और बकवास ना करें.
    • साधना को गोपनीय रखें.
    • प्रतिदिन तारा त्रैलोक्य विजय कवच का एक पाठ अवश्य करें. यह आपको निम्नलिखित ग्रंथों से प्राप्त हो जायेगा.

    साधना सिद्धि विज्ञान मासिक पत्रिका      
    https://plus.google.com/105560236464645529722/posts

    15 सितंबर 2016

    अघोरेश्वराय परमेश्वराय महादेवाय नमः

    अघोर साधनाएं जीवन की सबसे अद्भुत साधनाएं हैं

    अघोरेश्वर महादेव की साधना उन लोगों को करनी चाहिए जो समस्त सांसारिक बंधनों से मुक्त होकर शिव गण बनने की इच्छा रखते हैं.

    इस साधना से आप को संसार से धीरे धीरे विरक्ति होनी शुरू हो जायेगी इसलिए विवाहित और विवाह सुख के अभिलाषी लोगों को यह साधना नहीं करनी चाहिए.

    1. यह  साधना  अमावस्या से प्रारंभ होकर अगली अमावस्या तक की जाती है.
    2. यह  दिगंबर साधना है.
    3. एकांत कमरे में साधना होगी.
    4. स्त्री से संपर्क तो दूर की बात है बात भी नहीं करनी है.
    5. भोजन  कम से कम और खुद पकाकर खाना है.
    6. यथा  संभव मौन रहना है.
    7. क्रोध,विवाद,प्रलाप, न करे.
    8. गोबर के कंडे जलाकर उसकी राख बना लें.
    9. स्नान करने के बाद बिना शरीर  पोछे साधना कक्ष में प्रवेश करें.
    10. अब राख को अपने पूरे शरीर में मल लें.
    11. जमीन पर बैठकर मंत्र जाप करें.
    12. माला या यन्त्र की आवश्यकता नहीं है.
    13. जप की संख्या अपने क्षमता के अनुसार तय करें.
    14. आँख बंद करके दोनों नेत्रों के बीच वाले स्थान पर ध्यान लगाने का प्रयास करते हुए जाप करें.
    15. जाप  के बाद भूमि पर सोयें.
    16. उठने के बाद स्नान कर सकते हैं.
    17. यदि एकांत उपलब्ध हो तो पूरे साधना काल में दिगंबर रहें. यदि यह संभव न हो तो काले रंग का वस्त्र पहनें.
    18. साधना के दौरान तेज बुखार, भयानक दृश्य और आवाजें आ सकती हैं. इसलिए कमजोर मन वाले साधक और बच्चे इस साधना को किसी हालत में न करें.
    19. गुरु दीक्षा ले चुके साधक ही अपने गुरु से अनुमति लेकर इस साधन को करें.
    20. जाप से पहले कम से कम १ माला गुरु मन्त्र का जाप अनिवार्य है.


    |||| अघोरेश्वराय हूं ||||





    11 सितंबर 2016

    उच्छिष्ट गणपति मन्त्रम : अद्भुत फ़लदायक तथा गोपनीय मन्त्र

    •  


    ॥ हस्तिपिशाचिलिखे स्वाहा ॥
     
    सामान्य निर्देश :-
    • साधनाएँ इष्ट तथा गुरु की कृपा से प्राप्त और सिद्ध होती हैं |
    • इसके लिए कई वर्षों तक एक ही साधना को करते रहना होता है |
    • साधना की सफलता साधक की एकाग्रता और उसके श्रद्धा और विश्वास पर निर्भर करता है |
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    विधि :-

    1. रुद्राक्ष की माला सभी कार्यों के लिए स्वीकार्य  है |
    2. जाप के पहले दिन हाथ में पानी लेकर संकल्प करें " मै (अपना नाम बोले), आज अपनी (मनोकामना बोले) की पूर्ती के लिए यह मन्त्र जाप कर रहा/ रही हूँ | मेरी त्रुटियों को क्षमा करके मेरी मनोकामना पूर्ण करें " | इतना बोलकर पानी जमीन पर छोड़ दें |
    3. पान का बीड़ा चबाएं फिर मंत्र जाप करें |
    4. गुरु से अनुमति ले लें|
    5. दिशा दक्षिण की और देखते हुए बैठें |
    6. आसन लाल/पीले रंग का रखें|
    7. जाप रात्रि 9 से सुबह 4 के बीच करें|
    8. यदि अर्धरात्रि जाप करते हुए निकले तो श्रेष्ट है | 
    9. कम से कम 21 दिन जाप करने से अनुकूलता मिलती है | 
    10. जाप के दौरान किसी को गाली गलौच / गुस्सा/ अपमानित ना करें|
    11. किसी महिला ( चाहे वह नौकरानी ही क्यों न हो ) का अपमान ना करें | यथा सम्भव सम्मान करें |
    12. जिस बालिका/युवती/स्त्री के बाल कमर से नीचे तक या उससे ज्यादा लम्बे हों उसे देखने पर मन ही मन मातृवत मानते हुए प्रणाम करें |
    13. सात्विक आहार/ आचार/ विचार रखें |
    14. ब्रह्मचर्य का पालन करें |

    लघु गणपति पूजनम



    एक नन्हा सा गणपति पूजन प्रस्तुत है ।
    इसे पन्चोपचार पूजन कहते हैं



    ऊं गं गणपतये नमः गंधम समर्पयामि --- इत्र आदि चढायें ।


    ऊं गं गणपतये नमः पुष्पम समर्पयामि ---  फ़ूल 

    ऊं गं गणपतये नमः धूपम समर्पयामि -- अगरबत्ती

    ऊं गं गणपतये नमः दीपम समर्पयामि -- दीपक जलायें

    ऊं गं गणपतये नमः नैवेद्यम समर्पयामि -- प्रसाद चढायें

    इसके बाद आरती कर लें

    सरल गणपति हवन विधि


    गणपति विसर्जन से पहले सबकी इच्छा होती है कि गणपति हवन हो जाता तो अच्छा होता | यदि किसी कारणवश आप किसी साधक /पंडित से हवन ना करवा सकें तो आपके लिए एक सरल हवन विधान प्रस्तुत है जो आप आसानी से स्वयम कर सकते हैं ।

    ऊं अग्नये नमः .........७ बार इस मन्त्र का जाप करें तथा आग जला लें ।

    ऊं परम तत्वाय नारायणाय गुरुभ्यो नमः ..... २१ बार इस मन्त्र का जाप करें ।
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    अग्नि जल जाए तब  घी/ दशांग से आहुति डालें |

    ऊं अग्नये स्वाहा ...... ७ आहुति (अग्नि मे डालें)

    ऊं गं  स्वाहा ..... १ बार

    ऊं भैरवाय स्वाहा ..... ११ बार

    ऊं परम तत्वाय नारायणाय गुरुभ्यो नमः स्वाहा .....२१ बार

    ॐ प्रचंड चंडिकायै स्वाहा -- 9 बार ( अपने मस्तक को स्पर्श करते हुए आहुति डालें )

    अब अपनी मनोकामना भगवान् गणपति के समक्ष निवेदन (मन में या बोलकर ) करें

    ऊं गं गणपतये स्वाहा ..... १०८ बार ( ह्रदय को स्पर्श करते हुए आहुति डालें )

    अन्त में कहें कि गणपति भगवान की कृपा मुझे प्राप्त हो....

    दोनों कान पकड़कर सभी गलतियों के लिये क्षमा मांगे.....

    तीन बार पानी छिडककर शांति शांति शांति ऊं कहें.....

    संभव हो तो किसी गरीब बच्चे को भोजन/मिठाई/दान अवश्य दें |