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13 अप्रैल 2026

अक्षय तृतीया पर : अभिमंत्रित पारद श्री यंत्र

 

अक्षय तृतीया पर : अभिमंत्रित पारद श्री यंत्र

 


गृहस्थ के जीवन में लक्ष्मी नही है तो कुछ भी नही है । यह हम सभी जानते हैं ।

व्यापार में अनुकूलता और ज्यादा लाभ के लिए महालक्ष्मी के श्री यंत्र का अनादि काल से उपयोग हों रहा है ।

आप इसकी विशिष्ठता इसी बात से समझ सकते हैं कि लगभग सभी उच्च कोटि के तंत्र पीठों में इसकी स्थापना अनिवार्यं रूप से की जाती है ।

महालक्ष्मी की कृपा प्राप्ति के लिए मैंने कई उपाय पहले भी प्रकाशित किए हैं । जिनका कई पाठकों ने प्रयोग किया है और उन्हे अनुकूलता मिली है । इस अक्षय तृतीया के अवसर पर आप उनका प्रयोग कर सकते हैं । इसके लिए आप मेरी रचना  "महालक्ष्मी साधनाएं" देख सकते हैं ।

 

इस अक्षय तृतीया को पारे से बने कुछ श्री यंत्र अभिमंत्रित कर रहा हूँ । पारा काफी महंगा होता है इसलिए कम मूल्य पर छोटे श्री यंत्र ही प्राप्त हो सकते हैं । जिनका वजन 40 से 50 ग्राम होता है ।

अक्षय तृतीया के अवसर पर पारे से बने कुछ छोटे पारद श्री यंत्र को अभिमंत्रित करके लागत मूल्य 2100/-  पर पाठकों को उपलब्ध कराऊंगा ।  इसमे पारद श्री यंत्र का मूल्य, पूजन सामग्री तथा पूजन व्यय, पेकिंग तथा कूरियर के द्वारा इसे आप तक भेजने का खर्च शामिल है ।

 

इस यंत्र को आप अपने पूजा स्थान मे रख सकते हैं । चाहें तो गल्ले तिजोरी या अलमारी मे भी रख सकते हैं । इसके सामने रोज एक माला महालक्ष्मी के मंत्र का जाप करेंगे तो महामाया की कृपा से तीन से छह महीने के अंदर आपको आर्थिक अनुकूलता प्राप्त होगी ।

 

जो पाठक इच्छुक हैं वे मुझे 7000630499 पर  संपर्क करके इसे प्राप्त कर सकते हैं ।

 

यंत्र आपके नाम से सिद्ध करने के लिए निम्नलिखित जानकारी लगेगी जो आप भेज देंगे :-

 

भेजे गए शुल्क की रसीद की फोटो । 

आपका एक ताजा खींचा हुआ फोटो

नाम

गोत्र (अगर मालूम हो )

जन्मतिथि (अगर मालूम हो )

जन्म का समय (अगर मालूम हो )

जन्म का स्थान (अगर मालूम हो )

 

पूरा पता , पिन कोड के साथ, जिसमे आपको यंत्र भेजना है ।

आपका व्हाट्सएप्प  नंबर जिसपर आपको मंत्र तथा यंत्र भेजने की सूचना भेजी जाएगी ।

 

आप पेमेंट के लिए इस QR code का भी प्रयोग कर सकते हैं


 

 

 

अक्षय तृतीया महालक्ष्मी की साधना का सिद्ध मुहूर्त : 19-20 अप्रेल 2026

 

 


हिंदू पंचांग के अनुसार, वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को अक्षय तृतीया या 'अखा तीज' कहा जाता है। इसे 'अबूझ मुहूर्त' माना जाता है, यानी इस दिन किसी भी शुभ कार्य के लिए पंचांग देखने की आवश्यकता नहीं होती।

अक्षय तृतीया तिथि का प्रारंभ: 19 अप्रैल 2026 को सुबह 10:49 बजे से।

तृतीया तिथि का समापन: 20 अप्रैल 2026 को सुबह 07:27 बजे तक।

अक्षय तृतीया महालक्ष्मी की साधना के लिए और उनके पूजन के लिए एक अति विशिष्ट मुहूर्त माना गया है । गृहस्थ के लिए लक्ष्मी अर्थात धन धान्य का महत्व अलग से बताने की शायद आवश्यकता नहीं है  । इस दिन महालक्ष्मी के मंत्र का जाप करना चाहिए । अगर संभव हो तो उनके किसी स्तोत्र का पाठ करना भी लाभदायक रहता है ।


श्री यंत्र


इसके अलावा आप इस दिन अपने घर में श्रीयंत्र स्थापित कर सकते हैं । श्री यंत्र कई प्रकार के होते हैं । जिनमें तांबे के ऊपर बने हुए श्री यंत्र सामान्यतः हर जगह उपलब्ध होते हैं । सुनार की दुकान पर आपको चांदी के ऊपर बने हुए श्री यंत्र भी मिल जाएंगे और कई जगह आपको सोने के या सोने की प्लेटिंग के बने हुए श्री यंत्र भी मिल जाएंगे ।
इसके अलावा श्री यंत्र कई चीजों से बनते हैं, जिनमें स्फटिक और अन्य मणियाँ शामिल है ! मणि यानी कि रत्न से बने हुए श्री यंत्र भी उपलब्ध होते हैं ये थोड़े महंगे होते हैं और इनकी कीमत रत्न के वजन के हिसाब से होती है ।
श्री यंत्र का लॉकेट भी मिलता है, आप चाहे तो उसे गले में भी पहन सकते हैं ।
अक्षय तृतीया के दिन कोई भी लक्ष्मी का मंत्र या स्तोत्र (जो "महालक्ष्मी साधनाएं" नाम  से प्रतिलिपि मे आपको मिल जाएगा ) को आप श्री यंत्र के ऊपर संपन्न करके उसे अपनी तिजोरी, पूजा घर, आलमारी या अपने गल्ले में रख सकते हैं ।
ये सभी छोटे छोटे लघु प्रयोग है लेकिन विशेष मुहूर्त ऊपर इनकी करने से लाभ मिलता है


लक्ष्मी की अनुकूलता देने वाली तांत्रिक सामग्री :-

एकाक्षी नारियल


एक = एक , अक्ष = आँख

इसके अलावा जो विशेष तांत्रिक सामग्री लक्ष्मी के घर में स्थायित्व के लिए, या घर में लक्ष्मी के रुकने के लिए या बेवजह के खर्चों को रोकने के लिए सहायक होती है, उसमें सबसे महत्वपूर्ण है एकाक्षी नारियल ।
सामान्यत: आपने देखा होगा कि नारियल के ऊपर तीन छेद होते हैं । जिसे दो आंख तथा एक मुंह कहा जाता है । एकाक्षी नारियल में दो की जगह केवल एक ही आंख होता है । जो सामान्य नारियल होते हैं, उसमें इस प्रकार से सैकड़ों नारियल में से किसी एक नारियल में दो की जगह एक ही आंख होता है, यानी कि उसमें तीन की जगह केवल दो काले बिंदु दिखाई देंगे और उनको एकाक्षी नारियल कहा जाता है ।
इसके अलावा कुछ तांत्रिक एकाक्षी नारियल भी होते हैं, जो कि अलग-अलग प्रकार के आकारों मे पाए जाते हैं । उनके अंदर भी इस प्रकार की आंख की आकृति बनी हुई होती है ।

वह भी महालक्ष्मी कृपा प्रदान करने में सहायक होते हैं ।

 

हत्था जोड़ी


एक और तांत्रिक वस्तु है..... हत्था जोड़ी !

यह एक पौधे की जड़ होती है । जिसका आकार बिल्कुल मनुष्य के हाथ के जैसा दिखाई देगा और वह भी एक हाथ नहीं बल्कि एक हाथ की जोड़ी के जैसा । ऐसा लगता है जैसे दो हाथों को आपस में मिलाकर रखा गया हो । हत्था जोड़ी बहुत दुर्लभ नहीं है । इसे प्राप्त किया जा सकता है । कई जड़ी बूटी की दुकानों पर या घूमने वाले घुमंतू व्यक्तिओं से आप इसे प्राप्त कर सकते हैं । यह अगर आप अपने घर में रखे तो भी आपको लक्ष्मी के और व्यवसाय के संबंध में अनुकूलता प्राप्त होगी ।


बिल्ली की जेर


इसके अलावा एक और चीज है जो काफी प्राचीन काल से ही लक्ष्मी प्रदायक मानी जाती है । वह है बिल्ली की जेर या बिल्ली की नाल । बिल्ली जब अपने बच्चे का प्रसव करती है तो उसके साथ उसकी नाल भी बाहर निकलती है । यह बिल्ली की नाल बदबूदार होती है बिल्ली अधिकांश अवसरों पर इसे स्वयं खा जाती है ।
अगर सौभाग्यवश किसी प्रकार से आपको यह नाल प्राप्त हो जाए तो इसे सुखाकर आप सिंदूर कपूर इलायची आदि डालकर किसी सोने की डिबिया में या चांदी की डिबिया में या प्लास्टिक के डिब्बे में अपने पूजा स्थान में या अपने गल्ले में या अपनी तिजोरी में इसे रखेंगे तो वह आपके लिए अनुकूलता प्रदान करेगी । यदि आप उसे सामने रखकर उसके सामने लक्ष्मी के मंत्र का जाप कर लेते हैं या महालक्ष्मी के स्तोत्र का पाठ करते हैं या कमलगट्टे की आहुतियां उसके सामने यज्ञ करके प्रदान करते हैं तो उसकी तेजस्विता बढ़ जाती है । वह आपको ज्यादा अनुकूलता प्रदान करती है ।

 

कनकधारा यंत्र


लक्ष्मी की प्राप्ति के लिए अन्य यंत्रों में एक सबसे उपयोगी यंत्र है कनकधारा यंत्र । कनकधारा यंत्र को स्थापित करके यदि आप नित्य कनकधारा स्तोत्र का एक बार या अपनी क्षमता अनुसार ज्यादा पाठ करेंगे तो 6 महीने से साल भर के भीतर आपको आर्थिक लाभ होने की संभावनाएं बढ़ जाएंगी ।

हां ! इसके लिए जरूरी है कि आपका कोई काम हो यानि आप कुछ पुरुषार्थ करते हों । घर बैठे बैठे कुछ भी नहीं मिलता है । मान लीजिए आपकी दुकान होगी तो वह ज्यादा चलने लग जाएगी ।

लेकिन अगर आप नौकरी करते हैं तो वहां तो सीमित संभावनाएं होती है उसमें बहुत ज्यादा लाभ आपको नहीं दिखेगा । हां ! खर्चों में कमी आ सकती है ।
यदि आप की दुकान है या कोई व्यवसाय है जिसमे आय बढ़ने की संभावनाएं हैं तो कनकधारा का जाप करने से आपको निश्चित रूप से उसका लाभ दिखाई देगा ।


अष्ट लक्ष्मी यंत्र


लक्ष्मी प्राप्ति के लिए एक अन्य वस्तु जो उपयोगी है वह है अष्ट लक्ष्मी यंत्र । इसमें आठ प्रकार की लक्ष्मीयों के यंत्र बने हुए होते हैं या उनकी आकृति बनी हुई होती है ।
इस यंत्र को भी आप लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने के लिए स्थापित कर सकते हैं ।

 

कुबेर यंत्र

एक और यंत्र है जो महालक्ष्मी कृपा प्राप्त करने के लिए यानि धन समृद्धि प्राप्त करने के लिए सहायक होता है । वह है कुबेर यंत्र ! कुबेर यंत्र भी कई स्थानों पर आसानी से उपलब्ध हो जाता है या किसी तांत्रिक प्रतिष्ठान से आप इसे प्राप्त कर सकते हैं । कुबेर को भगवान या देवताओं के कोषाध्यक्ष के रूप में स्वीकार किया जाता है । यानी कि वे देवराज इंद्र के कोषाध्यक्ष है । अब देवताओं के पास अकूत धन संपदा होती है और उसके प्रभारी हैं यक्ष राज कुबेर । उनके यंत्र को स्थापित करके उनके मंत्र का जाप करने से भी लक्ष्मी से संबंधित अनुकूलता प्राप्त होती है ।

 

स्वर्णाकर्षण भैरव

एक और तांत्रिक स्वरूप है स्वर्णाकर्षण भैरव ! जैसा कि आप लोग जानते ही होंगे भगवान शिव का जो सक्रिय स्वरूप है वह है भैरव । भैरव के कई स्वरूप माने गए हैं उसमें से एक स्वरूप है स्वर्णाकर्षण भैरव । स्वर्ण का मतलब है सोना, आकर्षण मतलब उसे अपनी ओर खींचने की क्रिया और भैरव याने कि वह जो इस प्रकार की क्रिया को संपन्न करता है ।

स्वर्णाकर्षण भैरव का यंत्र भी अगर आपको कहीं से प्राप्त हो जाए तो उसे स्थापित करके और अगर स्वर्णाकर्षण भैरव का यंत्र प्राप्त ना हो पाए तो आप किसी शिवलिंग के सामने बैठकर भी स्वर्णाकर्षण भैरव का मंत्र पढ़कर आर्थिक अनुकूलता प्राप्त कर सकते हैं । यह ध्यान रखेंगे कि स्वर्णाकर्षण भैरव का मंत्र रात्रि काल में किया जाएगा और उसकी कम से कम 11 माला अर्थात 1100 बार उसका रोज उच्चारण करना चाहिए तभी आपको अनुकूलता प्राप्त होगी ।

 

पारद श्री यंत्र


श्री यंत्र पारे से भी बनाए जाते हैं । पारा एक ऐसी धातु है जो लिक्विड अर्थात द्रव अवस्था में होती है । इसे कुछ जड़ी बूटियों और रसायनों के मिश्रण के द्वारा ठोस बनाया जाता है और फिर उसे आकार दिया जाता है । पारे के बने हुए शिवलिंग के विषय में आपने सुना होगा लेकिन पारे से श्री यंत्र भी बनाए जाते हैं और पारे से बने हुए श्री यंत्र महालक्ष्मी की कृपा प्रदायक माने गए हैं । इनको स्थापित करने से भी आपको महालक्ष्मी की कृपा प्राप्त हो सकती है ।

 

पारदेश्वरी लक्ष्मी विग्रह


पारे से बने हुए लक्ष्मी के विग्रह को पारदेश्वर लक्ष्मी कहा जाता है । यदि आपके घर में पारदेश्वरी लक्ष्मी का विग्रह स्थापित हो तो वह भी आपको आर्थिक अनुकूलता प्रदान करने में सहायता करता है । पारदेश्वरी लक्ष्मी के विग्रह के सामने नित्य महालक्ष्मी मंत्र का जाप करना चाहिए या उनके किसी स्तोत्र का पाठ करना चाहिए ।


इसके अलावा कुछ ऐसे उपाय हैं जो महालक्ष्मी की कृपा प्रदान करते हैं ।


स्त्री का सम्मान


इसमें से पहला तो यह है कि प्रत्येक स्त्री का सम्मान करें , क्योंकि महालक्ष्मी स्त्री तत्व है इसलिए जब आप स्त्रियों का सम्मान करते हैं तो महालक्ष्मी की प्रसन्नता आपको प्राप्त होती है । आपके घर में काम करने वाली नौकरानी भी हो तो भी उसे बेवजह अपमानित ना करें ।

 

स्वच्छता


अपने घर में या कार्यस्थल में जितनी शुचिता या साफ-सफाई आप बनाए रखेंगे, उतनी ही संभावना है कि महालक्ष्मी की उपस्थिति वहां पर हो, क्योंकि वह स्वच्छ और पवित्र स्थान पर आसानी से उपस्थित हो जाती हैं । वह उनको प्रिय होता है ।

वस्त्र गंध और शृंगार


आप स्वयं भी साफ-सुथरे और अच्छे वस्त्र पहने यदि संभव हो तो इत्र या सेंड का उपयोग अवश्य करें । वह भी इस प्रकार का जिसकी खुशबू हल्की-हल्की भीनी भीनी हो ।
महिलाएं अगर है तो वह श्रंगार अवश्य करें । साधना या मंत्र जाप करते समय भी इसी प्रकार से बैठे । अच्छे वस्त्र आभूषण धारण करें और इत्र अगरबत्ती लगाकर बैठे, क्योंकि महालक्ष्मी स्वयं आभूषणों से युक्त हैं, स्वर्ण से अलंकृत है, मुकुट धारिणी है । वे अपने भक्तों को साज-सज्जा के साथ बैठे हुए देखना ही पसंद करती हैं । इसलिए महालक्ष्मी की साधना करते समय इस बात का विशेष ध्यान रखें कि आप की वेशभूषा स्वच्छ शुद्ध और पवित्र हो । साथ ही आपके आसपास का वातावरण भी सुगंधित और साफ सुथरा हो ऐसे में आपको महालक्ष्मी की साधना या उनकी पूजा करने में अनुकूलता शीघ्रता से प्राप्त हो जाएगी ।

 

गौमाता की सेवा


यदि आपके पास कोई गौशाला या गायों को संरक्षित करने का कोई स्थान हो तो वहां पर कुछ दान दक्षिणा अवश्य करते रहें । यह उनकी कृपा प्रदान करता है । गाय को कामधेनु का स्वरूप माना गया है । कामधेनु का अर्थ होता है कि वह जो आपकी इच्छा के अनुसार कोई भी चीज देने में समर्थ है । उसकी सेवा करने से आपको अनुकूलता अवश्य प्राप्त होगी ।

 

पारिजात का वृक्ष


पारिजात एक ऐसा पौधा है, जिसमें सफेद रंग के फूल खिलते हैं । इसकी डांडिया हल्की लाल रंग की होती है और यह फूल रात में ही झड़ जाते हैं, रात्रि काल में खिलते हैं और सुबह होने से पहले अधिकांश फूल जमीन पर गिर जाते हैं । इसमें हल्की-हल्की खुशबू आती है यह अगर आप अपने घर में लगाएंगे तो भी आपको महालक्ष्मी से संबंधित अनुकूलता प्राप्त होगी ।

महालक्ष्मी के मंत्र


महालक्ष्मी के कई प्रकार के मंत्र हैं जिनमें से किसी भी मंत्र का आप उपयोग कर सकते हैं ।

 

महालक्ष्मी का बीज मंत्र


महालक्ष्मी का बीज मंत्र है...

॥ श्रीम ॥


बीज मंत्र का तात्पर्य होता है एक ऐसा मंत्र जो उस विद्या का बीज है । जैसे किसी पेड़ का बीज होता है जो उस पूरे पेड़ को अपने अंदर समेटे हुए होता है उसी प्रकार से बीज मंत्र भी संबंधित विद्या को अपने अंदर समेटे हुए होता है ।
जिस प्रकार से बीज से किसी वृक्ष के निकलकर बड़े हो जाने की संभावना होती है उसी प्रकार से बीज मंत्र का जाप करते रहने से भी संबंधित विद्या की संपूर्ण कृपा प्राप्त होने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं ।


महालक्ष्मी गायत्री मंत्र


इसके अलावा आप महालक्ष्मी के गायत्री मंत्र का उच्चारण कर सकते हैं जो इस प्रकार से है :-

॥ ॐ महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्नी च धीमही तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात ॥


इसके अलावा आप महालक्ष्मी के विभिन्न स्तोत्र का पाठ भी कर सकते हैं । जिसमें से प्रमुख स्त्रोत्र हैं श्री सूक्त, दूसरा है लक्ष्मी सूक्त तीसरा है कनकधारा स्तोत्र , और एक है सहस्रक्षरी लक्ष्मी स्तोत्र । यह सारे स्तोत्र तथा कुछ अन्य मंत्र मैंने पहले से ही प्रकाशित किए हुए हैं । जिसे आप इसी रचना के अन्य भागों में देख सकते हैं ।

इनमें से प्रत्येक स्तोत्र अपने आप में शक्तिशाली और प्रचंड है । इनका नित्य पाठ करते रहने से आपको अनुकूलता प्राप्त होगी ।

ऐसा नहीं है कि आपने दो महीने पाठ कर लिया और आपके घर में सोने की बारिश हो जाएगी या आप अचानक से करोड़पति हो जाए ।

ऐसा चमत्कार होने की उम्मीद ना करें । धीरे-धीरे आपको अपने व्यवसाय में, आय में वृद्धि होती हुई महसूस होगी ....

अगर आय में वृद्धि होती हुई महसूस नहीं होगी तो आपको खर्चों में कमी होती हुई अवश्य महसूस होगी ।

यह महालक्ष्मी की कृपा का प्रभाव है यदि आप निरंतर जाप करते रहेंगे तो आपको स्वयं अपने अंदर भी एक पॉजिटिव ऊर्जा का अनुभव होगा जो खुद आपको अपने व्यवसाय में आगे बढ़ने में सहायता प्रदान करेगी ।

 

अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं कि आप महालक्ष्मी के विभिन्न उपक्रमों और उपायों का प्रयोग करते हुए अपने जीवन में अनुकूलता और सफलता प्राप्त करने की कोशिश करें और सफल हो !
महामाया महालक्ष्मी अपने करुणामयी नेत्रों से आप सभी के जीवन में धन, ऐश्वर्य, संपत्ति और कृपा की वर्षा करें ....

ऐसी शुभकामनाए...

 

19 अक्टूबर 2025

शाबर लक्ष्मी मंत्र

शाबर मंत्र सामान्य जन की भाषा में लिखे हुए मंत्र होते हैं और उसमें व्याकरण की त्रुटि या शब्दों का अर्थ निकालने का प्रयास नहीं करना चाहिए और वे जैसे हैं वैसे ही पाठ कर लेना चाहिए ।

इसमें अलग-अलग स्रोतों के हिसाब से शब्दों में फर्क पड़ सकता है जो कि अलग-अलग साधकों के द्वारा अपने ढंग से प्रस्तुत किए जाते हैं लेकिन सभी सुखद परिणाम देते हैं।
पढ़ने में सरल होते हैं इसलिए कोई भी व्यक्ति से कर सकता है ।
इन मंत्रों का प्रयोग पुरुष या स्त्री कोई भी कर सकता है ।

मंत्र

ॐ नमो आदेश गुरु को |
नमो सिद्ध गणपति प्रसादात विघ्न हर्तुम गणपत गणपत वसो मसाण |
जो फल चाहूं सो फल आण , पञ्च लाडूँ , सिर सिन्दूर , रिद्धि सिद्धि आण |
गौरी का पुत्र सिंहासन बैठा |
राजा काम्पै प्रजा काम्पै दृष्टे राजा सिम चाम्पे| पञ्च कोष पूर्व पश्चिम से आण उत्तर से आण दक्षिण से आण |
इतनी कर रिद्धि सिद्धि मेरे घर द्वार आण|
राजा प्रजा अभी मेरो पड़े पाँव न पड़े तो लाजे मैया गौरी |
जो मै देखूं गणेश बाला कर मंत्र का सत की फट फट स्वाहा |


विधि:-

भोजपत्र पर इस मंत्र को लिख कर उसके सामने 1008  बार जाप करें . भोजपत्र न मिले तो कागज या रेशमी कपडे पर लिख सकते हैं . लिखने के लिए अष्टगंध या कुमकुम का प्रयोग करें . 

जाप के समय गुग्गुल का धुप जलता रहे तो अच्छा है.
जाप के बाद ताबीज में भरकर पहन लें या धन रखने के स्थान में रख लें.
दूकान हो तो वहां गल्ले में भी रख सकते हैं.

भगवती महालक्ष्मी पूजन

भगवती महालक्ष्मी पूजन 


पूजन सामग्री :-
हल्दी,कुमकुम ,चन्दन ,अष्टगंध ,अक्षत ,इत्र ,कपूर,फुल,फल,मिठाई ,पान,अगरबत्ती,दीपक, कलश  आदि । 
जो सामग्री उपलब्ध हो वह रखें और जो उपलब्ध ना हो पाए उसके लिए चिंता ना करें । 
प्रयास करें कि सारी सामग्रियां उपलब्ध हो क्योंकि देवी महालक्ष्मी के पूजन में कंजूसी नहीं करनी चाहिए और यथासंभव अपनी क्षमता के अनुसार पूजन संपन्न करना चाहिए । 
पूजन सामग्री भी अच्छी क्वालिटी का ही रखें । 
जिस स्थान पर बैठे वह साफ सुथरा हो । 
आपके कपड़े साफ सुथरे हो । 
महिलाएं हो तो श्रृंगार कर के बैठे हैं पुरुष हो तो साफ-सुथरे धुले हुए वस्त्र पहन कर बैठे । 
यदि इत्र या परफ्यूम उपलब्ध हो तो उसे लगाएं । 
पूजा स्थान में अगरबत्ती या खुशबूदार इत्र का छिड़काव करें ।

यदि गुरु दीक्षा प्राप्त हो तो गुरु का चित्र अवश्य रखें क्योंकि गुरु लक्ष्मी के आने पर उसके दुरुपयोग किए जाने से आपकी रक्षा करता है और आपको  सदबुद्धि देता है कि आप उस धन का सदुपयोग करें ।


पूजा स्थान में गुरुचित्र,लक्ष्मी का चित्र / श्री यंत्र / शंख/ महाविद्या यन्त्र या फोटो जो भी उपलब्ध हो वह रखें ।

गुरु को प्रणाम करें । 
ॐ गुं गुरुभ्यो नमः

इसके बाद भगवान गणेश को याद करें और उन्हें पूजा में सभी प्रकार के विघ्नों को दूर करने की प्रार्थना करें । 
ॐ श्री गणेशाय नमः

भगवान भैरव को याद करें और पूजन की रक्षा करने की प्रार्थना करें । 
ॐ भ्रम भैरवाय नमः ।

इसके बाद तंत्र के अधिपति भगवान शिव और मां जगदंबा को ज्ञात करें उन्हें प्रणाम करें उनसे आशीर्वाद लें कि आपको पूजन में सफलता प्राप्त हो और भगवती महालक्ष्मी आपकी पूजा को स्वीकार कर अनुकूलता प्रदान करें । 
ॐ सांब सदाशिवाय नमः

देवी महालक्ष्मी से प्रार्थना करें कि मैं आपका पूजन करने जा रहा हूं और आप मुझे इसके लिए अनुमति प्रदान करें
ॐ श्री महालक्ष्म्यै नमः

अब आप 4 बार आचमन करे ( दाए हाथ में पानी लेकर पिए )
श्रीं आत्मतत्त्वं शोधयामि नमः स्वाहा
श्रीं विद्या तत्त्वं शोधयामि नमः स्वाहा
श्रीं शिव तत्त्वं शोधयामि नमः स्वाहा
श्रीं सर्व तत्त्वं शोधयामि नमः स्वाहा

अब आप घंटी बजाएं । घंटे को पुष्प समर्पित करें । 
अब आप जिस आसन पर बैठे है उस पर पुष्प अक्षत अर्पण करे । पृथ्वी पर हम बैठे हैं इसलिए उसे प्रणाम करें और उनसे भी आशीर्वाद लें कि आपको पूजन में सफलता प्राप्त हो ।

पृथ्वी देव्ये नमः 
आसन देवताभ्यो नमः

दीपक जलाकर उसका पूजन करे । उन्हें प्रणाम करे और पुष्प अक्षत अर्पण करे । अग्नि का स्वरूप होता है दीपक और उसे शक्ति का प्रतीक माना जाता है इसी भाव के साथ उसे प्रणाम करेंगे । 
दीप देवताभ्यो नमः ।

तांबे या मिट्टी से बना हुआ कलश लेकर उसमें पानी भर कर आप स्थापित कर सकते हैं यह अमृत का प्रतीक माना जाता है अर्थात जीवन में संपूर्णता प्रदान करने वाला .....

कलश का पूजन करे ..
उसमे गंध ,अक्षत ,पुष्प ,तुलसी,इत्र ,कपूर डाले ..
कलश देवताभ्यो नमः ।


उसे सात बार तिलक करे .
त्रिदेवाय नमः । 
चतुर्वेदाय नमः ।

अब आप अपने आप को तिलक करे । इसके लिए आप महामृत्युंजय मंत्र का प्रयोग कर सकते हैं और यदि आपको ज्ञात नहीं है तो महालक्ष्मी नमः ऐसा बोल कर अपने माथे पर तिलक लगा सकते हैं । तिलक कुमकुम अष्टगंध केसर किसी भी चीज का लगा सकते हैं ।

संकल्प :-
संकल्प का तात्पर्य होता है कि आप संबंधित देवी या देवता के साथ एक प्रकार का अनुबंध कर रहे हैं कि मैं आपकी कृपा के प्राप्ति के लिए यह कार्य कर रहा हूं और आप खुश होकर मेरी मनोकामना को पूर्ण करें ।

दाहिने हाथ में जल,पुष्प,अक्षत लेकर संकल्प करे 
मैं (अपना नाम) आज दीपावली  के शुभ मुहूर्त पर अपने ज्ञान और क्षमता के अनुसार जैसा संभव हो उस प्रकार से महालक्ष्मी पूजन कर रहा हूँ । मेरा पूजन ग्रहण करे और मुझपर कृपा दृष्टी रखे तथा मेरी मनोकामना ( आपकी जो इच्छा है उसे यहां पर बोले ) पूर्ण करे ।

अब जल को पूजा स्थान पर छोडे ..
अब आप गणेशजी का स्मरण करे

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्य कोटि समप्रभ
निर्विघ्नं कुरु में देव सर्व कार्येषु सर्वदा

प्रत्येक कार्य के लिए महागणपति का पूजन अनिवार्य होता है । वह बुद्धि के अधिपति हैं और साथ ही लक्ष्मी को स्थायित्व प्रदान करते हैं इसलिए हमेशा महालक्ष्मी का पूजन गणपति के साथ ही किया जाना चाहिए ...

श्री महागणपति आवाहयामि
मम पूजन स्थाने ऋद्धि सिद्धि सहित शुभ लाभ सहित स्थापयामि नमः

ॐ श्री गणेशाय नमः गंधाक्षत समर्पयामि
कुमकुम और चावल चढ़ाएं

ॐ श्री गणेशाय नमः पुष्पं समर्पयामि
फूल चढ़ाएं

ॐ श्री गणेशाय नमः धूपं समर्पयामि
अगरबत्ती धूप दिखाएं

ॐ श्री गणेशाय नमः दीपं समर्पयामि
दीपक प्रदर्शित करें

ॐ श्री गणेशाय नमः नैवेद्यं समर्पयामि
प्रसाद समर्पित करें ।

अब नीचे दिये हुये गणपती माला मंत्र का पाठ कर पुष्प अर्पण करे
श्री गणपती माला मंत्र 
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ॐ क्लीं ह्रीं श्रीं ऐं ग्लौं ॐ ह्रीं क्रौं गं ॐ नमो भगवते महागणपतये स्मरणमात्रसंतुष्टाय सर्वविद्याप्रकाशकाय सर्वकामप्रदाय भवबंधविमोचनाय ह्रीं सर्वभूतबंधनाय क्रों साध्याकर्षणाय क्लीं जगतत्रयवशीकरणाय सौ: सर्वमनक्षोभणाय श्रीं महासंपत्प्रदाय ग्लौं भूमंडलाधिपत्यप्रदाय महाज्ञानप्रदाय चिदानंदात्मने गौरीनंदनाय महायोगिने शिवप्रियाय सर्वानंदवर्धनाय सर्वविद्याप्रकाशनप्रदाय द्रां चिरंजिविने ब्लूं सम्मोहनाय ॐ मोक्षप्रदाय ! फट वशी कुरु कुरु! वौषडाकर्षणाय हुं विद्वेषणाय विद्वेषय विद्वेषय ! फट उच्चाटय उच्चाटय ! ठ: ठ: स्तंभय स्तंभय ! खें खें मारय मारय ! शोषय शोषय ! परमंत्रयंत्रतंत्राणि छेदय छेदय ! दुष्टग्रहान निवारय निवारय ! दु:खं हर हर ! व्याधिं नाशय नाशय ! नम: संपन्नय संपन्नय स्वाहा ! सर्वपल्लवस्वरुपाय महाविद्याय गं गणपतये स्वाहा ! 
यन्मंत्रे क्षितलांछिताभमनघं मृत्युश्च वज्राशिषो भूतप्रेतपिशाचका: प्रतिहता निर्घातपातादिव ! उत्पन्नं च समस्तदु:खदुरितं उच्चाटनोत्पादकं वंदेsभीष्टगणाधिपं भयहरं विघ्नौघनाशं परम ! ॐ गं गणपतये नम:
ॐ नमो महागणपतये , महावीराय , दशभुजाय , मदनकाल विनाशन , मृत्युं
हन हन , यम यम , मद मद , कालं संहर संहर , सर्व ग्रहान चूर्णय चूर्णय , नागान मूढय मूढय , रुद्ररूप, त्रिभुवनेश्वर , सर्वतोमुख हुं फट स्वाहा ! 
ॐ नमो गणपतये , श्वेतार्कगणपतये , श्वेतार्कमूलनिवासाय , वासुदेवप्रियाय , दक्षप्रजापतिरक्षकाय , सूर्यवरदाय , कुमारगुरवे , ब्रह्मादिसुरावंदिताय , सर्पभूषणाय , शशांकशेखराय , सर्पमालालंकृतदेहाय , धर्मध्वजाय , धर्मवाहनाय , त्राहि त्राहि , देहि देहि , अवतर अवतर , गं गणपतये , वक्रतुंडगणपतये , वरवरद , सर्वपुरुषवशंकर , सर्वदुष्टमृगवशंकर , सर्वस्ववशंकर , वशी कुरु वशी कुरु , सर्वदोषान बंधय बंधय , सर्वव्याधीन निकृंतय निकृंतय , सर्वविषाणि संहर संहर , सर्वदारिद्र्यं मोचय मोचय , सर्वविघ्नान छिंदि छिंदि , सर्ववज्राणि स्फोटय स्फोटय , सर्वशत्रून उच्चाटय उच्चाटय , सर्वसिद्धिं कुरु कुरु , सर्वकार्याणि साधय साधय , गां गीं गूं गैं गौं गं गणपतये हुं फट स्वाहा ! 
ॐ नमो गणपते महावीर दशभुज मदनकालविनाशन मृत्युं हन हन , कालं संहर संहर , धम धम , मथ मथ , त्रैलोक्यं मोहय मोहय , ब्रह्मविष्णुरुद्रान मोहय मोहय , अचिंत्य बलपराक्रम , सर्वव्याधीन विनाशाय , सर्वग्रहान चूर्णय चूर्णय , नागान मोटय मोटय , त्रिभुवनेश्वर सर्वतोमुख हुं फट स्वाहा !



अब नीचे दिये हुये नामों से गणेश जी को दुर्वा या पुष्प अक्षत अर्पण करे

गं सुमुखाय नम:
गं एकदंताय नम:
गं कपिलाय नम:
गं गजकर्णकाय नम:
गं लंबोदराय नम:
गं विकटाय नम:
गं विघ्नराजाय नम:
गं गणाधिपाय नम:
गं धूम्रकेतवे नम:
गं गणाध्यक्षाय नम:
गं भालचंद्राय नम:
गं गजाननाय नम:
गं वक्रतुंडाय नम:
गं शूर्पकर्णाय नम:
गं हेरंबाय नम:
गं स्कंदपूर्वजाय नम:

अब गणेशजी को अर्घ्य (एक चम्मच जल )प्रदान करे

एकदंताय विद्महे वक्रतुंडाय धीमहि तन्नो दन्ती प्रचोदयात

महालक्ष्मी विष्णु पत्नी है। जहां भगवान विष्णु का पूजन होता है वहाँ लक्ष्मी अपने आप आती है
विष्णु ध्यान :-
शान्ताकारं भुजंग शयनं पद्मनाभं सुरेशं
विश्वाधारं गगन सदृशं मेघवर्णं शुभांगम
लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगीर्भि ध्यानगम्यम् 
वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैक नाथम्

ॐ श्री विष्णवे नमः

श्री महाविष्णु आवाहयामि मम पूजा स्थाने स्थापयामि पूजयामि नमः

ॐ श्री विष्णवे नमः गंधाक्षत समर्पयामि
कुमकुम चावल समर्पित करें

ॐ श्री विष्णवे नमः पुष्पं समर्पयामि
फूल चढ़ाएं

ॐ श्री विष्णवे नमः धूपं समर्पयामि
धूप अगरबत्ती दिखाएं

ॐ श्री विष्णवे नमः दीपं समर्पयामि
दीपक दिखाएं


ॐ श्री विष्णवे नमः नैवेद्यं समर्पयामि
प्रसाद समर्पित करें

भगवान विष्णु का पूजन तथा ध्यान करने से देवी महालक्ष्मी अत्यंत प्रसन्न होती हैं इसलिए आप चाहे तो यहाँ पुरुषसूक्त , विष्णुसूक्त का पाठ कर सकते है ..

अब भगवान विष्णु के 24 नामों से तुलसी या पुष्प अर्पण करे ।

१. ॐ केशवाय नमः
२. ॐ नारायणाय नमः
३. ॐ माधवाय नमः
४. ॐ गोविन्दाय नमः
५. ॐ विष्णवे नमः
६. ॐ मधुसूदनाय नमः
७. ॐ त्रिविक्रमाय नमः
८. ॐ वामनाय नमः
९. ॐ श्रीधराय नमः
१०. ॐ ऋषिकेशाय नमः
११. ॐ पद्मनाभाय नमः
१२. ॐ दामोदराय नमः
१३. ॐ संकर्षणाय नमः
१४. ॐ वासुदेवाय नमः
१५. ॐ प्रद्युम्नाय नमः
१६. ॐ अनिरुद्धाय नमः
१७. ॐ पुरुषोत्तमाय नमः
१८. ॐ अधोक्षजाय नमः
१९. ॐ नारसिंहाय नमः
२०. ॐ अच्युताय नमः
२१. ॐ जनार्दनाय नमः
२२. ॐ उपेन्द्राय नमः
२३. ॐ हरये नमः
२४. ॐ श्रीकृष्णाय नमः

अब भगवान विष्णु को अर्घ्य प्रदान करे
एक चम्मच जल डालें

ॐ नारायणाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि तन्नो विष्णु: प्रचोदयात

महालक्ष्मी ध्यान 
------------
या सा पद्मासनस्था विपुलकटितटी पद्मपत्रायताक्षी
गंभीरावर्तनाभिस्तनभारनमिता शुभ्रवस्त्रोत्तरीया
या लक्ष्मी दिव्यरुपै मणिगणखचितैः स्नापिता हेमकुम्भैः
सानित्यं पद्महस्ता मम वसतु गॄहे सर्वमांगल्ययुक्ता

इस प्रकार से महालक्ष्मी का आह्वान करने के बाद ऐसी भावना करें कि वे अपने दिव्य स्वरुप में आपके घर में ! आपके कुल में !! आपके पूजा स्थान में !!! आकर स्थापित हो रही हैं और आपको अपने आशीर्वाद से आप्लावित कर रही हैं ....

श्री महालक्ष्मी आवाहयामि मम गृहे मम कुले मम पूजा स्थाने आवाहयामि स्थापयामि नमः
( पुष्प अक्षत अर्पण करे )
ॐ श्री महालक्ष्म्यै नमः आवाहनं समर्पयामि

( पुष्प अक्षत अर्पण करे )
ॐ श्री महालक्ष्म्यै नमः आसनं समर्पयामि

( दो आचमनी जल अर्पण करे )
ॐ श्री महालक्ष्म्यै नमः पाद्यो पाद्यं समर्पयामि


(जल में चन्दन अष्ट गंध मिलाकर अर्पण करे )
ॐ श्री महालक्ष्म्यै नमः अर्घ्यम समर्पयामि

( एक आचमनी जल अर्पण करे )
ॐ श्री महालक्ष्म्यै नमः आचमनीयं समर्पयामि

( स्नान के लिए जल अर्पण करे )
ॐ श्री महालक्ष्म्यै नमः स्नानं समर्पयामि

( मौली/ लाल धागा या अक्षत अर्पण करे )
ॐ श्री महालक्ष्म्यै नमः वस्त्रं समर्पयामि
ॐ श्री महालक्ष्म्यै नमः उप वस्त्रं समर्पयामि

हल्दी कुमकुम अर्पण करे 
ॐ श्री महालक्ष्म्यै नमः हरिद्रा कुमकुम समर्पयामि

चंदन अष्टगंधअर्पण करे 
ॐ श्री महालक्ष्म्यै नमः चन्दन अष्ट गंधं समर्पयामि

इतर या गुलाब का जल अर्पण करे 
ॐ श्री महालक्ष्म्यै नमः सुगन्धित द्रव्यम समर्पयामि

चावल अर्पण करे
ॐ श्री महालक्ष्म्यै नमः अलंकारार्थे अक्षतान समर्पयामि

फूल अर्पण करे
ॐ श्री महालक्ष्म्यै नमः पुष्पं समर्पयामि

फूलों की माला अर्पण करे 
ॐ श्री महालक्ष्म्यै नमः पुष्पमालाम समर्पयामि

धूप दिखाएं 
ॐ श्री महालक्ष्म्यै नमः धूपं समर्पयामि

दीपक प्रदर्शित करें
ॐ श्री महालक्ष्म्यै नमः दीपं समर्पयामि

प्रसाद चढ़ाएं
ॐ श्री महालक्ष्म्यै नमः नैवेद्यं समर्पयामि

फल समर्पित है
ॐ श्री महालक्ष्म्यै नमः फलं समर्पयामि

जल चढ़ाएं
ॐ श्री महालक्ष्म्यै नमः आचमनीयं समर्पयामि

मीठे पान का बीडा हो तो उसे समर्पित करें और ना हो तो लोंग इलाइची सुपारी पान का पत्ता समर्पित करें
ॐ श्री महालक्ष्म्यै नमः ताम्बूलं समर्पयामि

दक्षिणा समर्पित करें इसे पूजन समाप्त हो जाने के बाद किसी विवाहित स्त्री को दे दे । 
ॐ श्री महालक्ष्म्यै नमः द्रव्य दक्षिणा समर्पयामि

कपूर जलाकर आरती करें 
ॐ श्री महालक्ष्म्यै नमः कर्पुर आरती समर्पयामि ।

अष्ट सिद्धियों का पूजन 
गंध अक्षत पुष्पं अर्पण करे
ॐ अणिम्ने नमः
ॐ महिम्ने नमः
ॐ गरिम्ने नमः
ॐ लघिम्ने नमः
ॐ प्राप्त्यै नमः
ॐ प्राकाम्यै नमः
ॐ इशितायै नमः
ॐ वशितायै नमः

अष्टलक्ष्मी का पूजन

गंध अक्षत पुष्पं अर्पण करे
ॐ आद्य लक्ष्म्यै नमः
ॐ धन लक्ष्म्यै नमः
ॐ धान्य लक्ष्म्यै नमः
ॐ धैर्य लक्ष्म्यै नमः
ॐ गज लक्ष्म्यै नमः
ॐ संतान लक्ष्म्यै नमः
ॐ विद्या लक्ष्म्यै नमः
ॐ विजय लक्ष्म्यै नमः

भगवती महालक्ष्मी के 32 नाम पढ़कर पुष्प अक्षत चढ़ाते जाए।

1. ॐ श्रियै नमः।
2. ॐ लक्ष्म्यै नमः।
3. ॐ वरदायै नमः।
4. ॐ विष्णुपत्न्यै नमः।
5. ॐ वसुप्रदायै नमः।
6. ॐ हिरण्यरूपिण्यै नमः।
7. ॐ स्वर्णमालिन्यै नमः।
8. ॐ रजतस्त्रजायै नमः।
9. ॐ स्वर्णगृहायै नमः।
10. ॐ स्वर्णप्राकारायै नमः।
11. ॐ पद्मवासिन्यै नमः।
12. ॐ पद्महस्तायै नमः।
13. ॐ पद्मप्रियायै नमः।
14. ॐ मुक्तालंकारायै नमः।
15. ॐ सूर्यायै नमः।
16. ॐ चंद्रायै नमः।
17. ॐ बिल्वप्रियायै नमः।
18. ॐ ईश्वर्यै नमः।
19. ॐ भुक्त्यै नमः।
20. ॐ प्रभुक्त्यै नमः।
21. ॐ विभूत्यै नमः।
22. ॐ ऋद्धयै नमः।
23. ॐ समृद्ध्यै नमः।
24. ॐ तुष्टयै नमः।
25. ॐ पुष्टयै नमः।
26. ॐ धनदायै नमः।
27. ॐ धनैश्वर्यै नमः।
28. ॐ श्रद्धायै नमः।
29. ॐ भोगिन्यै नमः।
30. ॐ भोगदायै नमः।
31. ॐ धात्र्यै नमः।
32. ॐ विधात्र्यै नमः।

महालक्ष्मी के पुत्रों का पूजन

१. ॐ देवसखाय नमः
२. ॐ चिक्लीताय नमः
३. ॐ आनंदाय नमः
४. ॐ कर्दमाय नमः
५. ॐ श्रीप्रदाय नमः
६. ॐ जातवेदाय नमः
७. ॐ अनुरागाय नमः
८. ॐ संवादाय नमः
९. ॐ विजयाय नमः
१०. ॐ वल्लभाय नमः
११. ॐ मदाय नमः
१२. ॐ हर्षाय नमः
१३. ॐ बलाय नमः
१४. ॐ तेजसे नमः
१५. ॐ दमकाय नमः
१६. ॐ सलिलाय नमः
१७. ॐ गुग्गुलाय नमः
१८ . ॐ कुरूण्टकाय नमः

हाथ जोड़ कर क्षमा प्रार्थना करे
त्रैलोक्य पूजिते देवी कमले विष्णु वल्लभे 
यथा त्वमचला कृष्णे तथा भव मयि स्थिरा 
इश्वरी कमला लक्ष्मीश्चचला भूतिर हरिप्रिया 
पद्मा पद्मालया संपदुच्चे: श्री: पद्माधारिणी
द्वादशैतानी नामानि लक्ष्मी संपूज्य य: पठेत स्थिरा लक्ष्मी भवेत् तस्य पुत्र दारादीभि : सह ।।

अब आचमनी मे जल और कुंकुम लेकर महालक्ष्मी गायत्री से अर्घ्य दे .
ॐ महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णुपत्नी च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात

हाथ जोड़ कर माँ महालक्ष्मी से प्रार्थना करे
त्राहि त्राहि महालक्ष्मी त्राहि त्राहि सुरेश्वरी त्राहि त्राहि जगन्माता दरिद्रात त्राही वेगत :
त्वमेव जननी लक्ष्मी त्वमेव पिता लक्ष्मी भ्राता त्वं च सखा लक्ष्मी विद्या लक्ष्मी त्वमेव च रक्ष त्वं देव देवेशी देव देवस्य वल्लभे दरिद्रात त्राही मां लक्ष्मी कृपां कुरु ममोपरी

ऐसी भावना करें कि देवी महालक्ष्मी इस पूजन से प्रसन्न होकर आपके घर में आए और आपके घर में आपके कुल में आपके परिवार में आपके गोत्र में और आपके हृदय में सदा विराजमान रहें प्रसन्न रहें और वरदान देती रहें ताकि उनकी कृपा सदैव बनी रहे .....

भगवती महालक्ष्मी मम गृहे मम कुले मम परिवारे मम गोत्रे मम हृदये आगच्छ ! सुस्थिरो भव ! प्रसन्नो भव ! वरदो भव …

अंत में इस पूजन को गुरु चरणों में समर्पित करें

हाथ में जल और पुष्प लेकर नीचे लिखा हुआ मंत्र पढ़ें और पूजा स्थान में छोड़ दें ।

।। श्री सद्गुरुदेव निखिलेश्वरानन्द चरणार्पणमस्तु ।।


दोनों कान पकड़कर किसी भी प्रकार की पूजा में त्रुटि हुई हो तो उसके लिए क्षमा प्रार्थना कर ले और देवी महालक्ष्मी से कृपा की प्रार्थना करके पूजा स्थान से उठ जाएं ।




18 अक्टूबर 2025

श्री लक्ष्म्यष्टोत्तरशतनाम या महालक्ष्मी के 108 नाम

     

श्री लक्ष्म्यष्टोत्तरशतनाम या महालक्ष्मी के 108 नाम  


सबसे पहले महालक्ष्मी जी को हाथ जोड़कर ध्यान करलें :-



सरसिज निलये सरोज हस्ते धवलतरांशुक गन्ध माल्य शोभे ।

भगवति हरि वल्लभे मनोज्ञे त्रिभुवन भूतिकरि प्रसीद मह्यम् ॥


हिन्दी भावार्थ - हे महामाया महालक्ष्मी ! आप कमल फूलो से भरे हुए वन में निवास करनेवाली हो, आपके हाथों में सुंदर कमल है। आपके वस्त्र अत्यन्त उज्ज्वल हैं । आपके दिव्य देह पर अत्यंत मनोहर गन्ध और सुंदर सुंदर मालाएँ डाली हुई हैं । हे भगवान श्री हरी की प्रिया आपका स्वरूप अत्यंत मनमोहक है । आपकी कृपा से त्रिभुवन का ऐश्वर्य प्राप्त हो सकता है आप मुझपर प्रसन्न होकर कृपा करें । 

ऐसा ध्यान करेंगे । 


इसके बाद अपने पूजा स्थान/दुकान/ एकांत कक्ष मे अपने सामने लक्ष्मी चित्र/ यंत्र/ श्रीयंत्र/ चाँदी सिक्का/ लक्ष्मी मूर्ति (जो आपके पास उपलब्ध हो ) रखकर भगवती लक्ष्मी के 108 नामों का उच्चारण करें और हर बार नम:  के साथ फूल /कुमकुम/ चावल/ अष्टगंध चढ़ाएं । 


  1. ॐ श्रीं अदित्यै नमः ।

  2. ॐ श्रीं अनघायै नमः ।

  3. ॐ श्रीं अनुग्रहप्रदायै नमः ।

  4. ॐ श्रीं अमृतायै नमः ।

  5. ॐ श्रीं अशोकायै नमः ।

  6. ॐ श्रीं आह्लादजनन्यै नमः ।

  7. ॐ श्रीं इन्दिरायै नमः ।

  8. ॐ श्रीं इन्दुशीतलायै नमः । 

  9. ॐ श्रीं उदाराङ्गायै नमः ।

  10. ॐ श्रीं कमलायै नमः ।

  11. ॐ श्रीं करुणायै नमः ।

  12. ॐ श्रीं कान्तायै नमः ।

  13. ॐ श्रीं कामाक्ष्यै नमः ।

  14. ॐ श्रीं क्रोधसम्भवायै नमः ।

  15. ॐ श्रीं चतुर्भुजायै नमः ।

  16. ॐ श्रीं चन्द्ररूपायै नमः ।

  17. ॐ श्रीं चन्द्रवदनायै नमः ।

  18. ॐ श्रीं चन्द्रसहोदर्यै नमः ।

  19. ॐ श्रीं चन्द्रायै नमः ।

  20. ॐ श्रीं जयायै नमः ।

  21. ॐ श्रीं तुष्टयै नमः । 

  22. ॐ श्रीं त्रिकालज्ञानसम्पन्नायै नमः ।

  23. ॐ श्रीं दारिद्र्यध्वंसिन्यै नमः ।

  24. ॐ श्रीं दारिद्र्यनाशिन्यै नमः । 

  25. ॐ श्रीं दित्यै नमः ।

  26. ॐ श्रीं दीप्तायै नमः ।

  27. ॐ श्रीं देव्यै नमः ।

  28. ॐ श्रीं धनधान्यकर्यै नमः ।

  29. ॐ श्रीं धन्यायै नमः ।

  30. ॐ श्रीं धर्मनिलयायै नमः ।

  31. ॐ श्रीं नवदुर्गायै नमः ।

  32. ॐ श्रीं नारायणसमाश्रितायै नमः ।

  33. ॐ श्रीं नित्यपुष्टायै नमः ।

  34. ॐ श्रीं नृपवेश्मगतानन्दायै नमः ।

  35. ॐ श्रीं पद्मगन्धिन्यै नमः ।

  36. ॐ श्रीं पद्मनाभप्रियायै नमः ।

  37. ॐ श्रीं पद्मप्रियायै नमः ।

  38. ॐ श्रीं पद्ममालाधरायै नमः ।

  39. ॐ श्रीं पद्ममुख्यै नमः ।

  40. ॐ श्रीं पद्मसुन्दर्यै नमः ।

  41. ॐ श्रीं पद्महस्तायै नमः ।

  42. ॐ श्रीं पद्माक्ष्यै नमः ।

  43. ॐ श्रीं पद्मायै नमः ।

  44. ॐ श्रीं पद्मालयायै नमः ।

  45. ॐ श्रीं पद्मिन्यै नमः ।

  46. ॐ श्रीं पद्मोद्भवायै नमः ।

  47. ॐ श्रीं परमात्मिकायै नमः ।

  48. ॐ श्रीं पुण्यगन्धायै नमः ।

  49. ॐ श्रीं पुष्टयै नमः ।

  50. ॐ श्रीं प्रकृत्यै नमः ।

  51. ॐ श्रीं प्रभायै नमः ।

  52. ॐ श्रीं प्रसन्नाक्ष्यै नमः । 

  53. ॐ श्रीं प्रसादाभिमुख्यै नमः ।

  54. ॐ श्रीं प्रीतिपुष्करिण्यै नमः ।

  55. ॐ श्रीं बिल्वनिलयायै नमः ।

  56. ॐ श्रीं बुद्धये नमः ।

  57. ॐ श्रीं ब्रह्माविष्णुशिवात्मिकायै नमः ।

  58. ॐ श्रीं भास्कर्यै नमः ।

  59. ॐ श्रीं भुवनेश्वर्यै नमः । 

  60. ॐ श्रीं मङ्गळा देव्यै नमः ।

  61. ॐ श्रीं महाकाल्यै नमः ।

  62. ॐ श्रीं महादीप्तायै नमः ।

  63. ॐ श्रीं महादेव्यै नमः ।

  64. ॐ श्रीं यशस्विन्यै नमः ।

  65. ॐ श्रीं रमायै नमः ।

  66. ॐ श्रीं लक्ष्म्यै नमः । 

  67. ॐ श्रीं लोकमात्रे नमः ।

  68. ॐ श्रीं लोकशोकविनाशिन्यै नमः ।

  69. ॐ श्रीं वरलक्ष्म्यै नमः । 

  70. ॐ श्रीं वरारोहायै नमः ।

  71. ॐ श्रीं वसुधायै नमः ।

  72. ॐ श्रीं वसुधारिण्यै नमः ।

  73. ॐ श्रीं वसुन्धरायै नमः । 

  74. ॐ श्रीं वसुप्रदायै नमः ।

  75. ॐ श्रीं वाचे नमः । 

  76. ॐ श्रीं विकृत्यै नमः ।

  77. ॐ श्रीं विद्यायै नमः ।

  78. ॐ श्रीं विभावर्यै नमः ।

  79. ॐ श्रीं विभूत्यै नमः ।

  80. ॐ श्रीं विमलायै नमः ।

  81. ॐ श्रीं विश्वजनन्यै नमः ।

  82. ॐ श्रीं विष्णुपत्न्यै नमः ।

  83. ॐ श्रीं विष्णुवक्षस्स्थलस्थितायै नमः ।

  84. ॐ श्रीं शान्तायै नमः ।

  85. ॐ श्रीं शिवकर्यै नमः ।

  86. ॐ श्रीं शिवायै नमः ।

  87. ॐ श्रीं शुक्लमाल्याम्बरायै नमः ।

  88. ॐ श्रीं शुचये नमः ।

  89. ॐ श्रीं शुभप्रदाये नमः ।

  90. ॐ श्रीं शुभायै नमः ।

  91. ॐ श्रीं श्रद्धायै नमः ।

  92. ॐ श्रीं श्रियै नमः ।

  93. ॐ श्रीं सत्यै नमः ।

  94. ॐ श्रीं समुद्रतनयायै नमः ।

  95. ॐ श्रीं सर्वभूतहितप्रदायै नमः ।

  96. ॐ श्रीं सर्वोपद्रव वारिण्यै नमः ।

  97. ॐ श्रीं सिद्धये नमः ।

  98. ॐ श्रीं सुधायै नमः ।

  99. ॐ श्रीं सुप्रसन्नायै नमः । 

  100. ॐ श्रीं सुरभ्यै नमः ।

  101. ॐ श्रीं स्त्रैणसौम्यायै नमः ।

  102. ॐ श्रीं स्वधायै नमः ।

  103. ॐ श्रीं स्वाहायै नमः ।

  104. ॐ श्रीं हरिण्यै नमः ।

  105. ॐ श्रीं हरिवल्लभायै नमः ।

  106. ॐ श्रीं हिरण्मय्यै नमः ।

  107. ॐ श्रीं हिरण्यप्राकारायै नमः ।

  108. ॐ श्रीं हेममालिन्यै नमः ।




अन्त मे हाथ जोड़कर क्षमा प्रार्थना कर लें ।


यह पूजन आप रात्री मे कर सकते हैं । अगर ऐसा संभव ना हो तो आप दिन में किसी भी समय इसे कर सकते हैं ।  


अगर आपने श्री यंत्र के ऊपर पूजन किया है तो पूजा करने के बाद उस यंत्र को आप पूजा स्थान में या अपने पैसा रखने वाले गल्ले में रख सकते हैं ।