17 फ़रवरी 2026

सूर्यग्रहण विशेष - तारा शाबर मंत्र




      ॐ आदि योग अनादि माया । 
      जहाँ पर ब्रह्माण्ड उत्पन्न भया ।
      ब्रह्माण्ड समाया । 

      आकाश मण्डल । 
      तारा त्रिकुटा तोतला माता तीनों बसै । 

      ब्रह्म कापलिजहाँ पर ब्रह्मा विष्णु महेश उत्पत्तिसूरज मुख तपे । 
      चंद मुख अमिरस पीवे
      अग्नि मुख जले
      आद कुंवारी हाथ खण्डाग गल मुण्ड माल
      मुर्दा मार ऊपर खड़ी देवी तारा । 
      नीली काया पीली जटा
      काली दन्त में जिह्वा दबाया । 
      घोर तारा अघोर तारा
      दूध पूत का भण्डार भरा । 
      पंच मुख करे हा हा ऽऽकारा
      डाकिनी शाकिनी भूत पलिता 
      सौ सौ कोस दूर भगाया । 
      चण्डी तारा फिरे ब्रह्माण्डी 
      तुम तो हों तीन लोक की जननी ।

      तारा मंत्र
      ॐ ऐं ह्रीं स्त्रीं हूँ फट्

      विधि :-
      1. रात्री काल मे जाप करें । ग्रहण काल मे जाप करने से विशेष लाभदायक है । 
      2. अपनी क्षमतानुसार 1,11,21,51,108 बार । 
      3. व्यापार और आर्थिक समृद्धि के लिए लाभदायक । 
      4. जप काल मे किसी स्त्री का अपमान न करें । 

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