21 अगस्त 2020

श्री गणपति माला मंत्र

 श्री गणपति माला मंत्र
 श्री गणपति माला मंत्र


ॐ क्लीं ह्रीं श्रीं ऐं ग्लौं ॐ ह्रीं क्रौं गं ॐ 

नमो भगवते महागणपतये स्मरणमात्रसंतुष्टाय सर्वविद्याप्रकाशकाय सर्वकामप्रदाय भवबंधविमोचनाय !

ह्रीं सर्वभूतबंधनाय !

क्रों साध्याकर्षणाय !

क्लीं जगतत्रयवशीकरणाय !

सौ: सर्वमनक्षोभणाय !

श्रीं महासंपत्प्रदाय !

ग्लौं भूमंडलाधिपत्यप्रदाय !

महाज्ञानप्रदाय चिदानंदात्मने गौरीनंदनाय महायोगिने शिवप्रियाय सर्वानंदवर्धनाय सर्वविद्याप्रकाशनप्रदाय । 

द्रां चिरंजिविने !

ब्लूं सम्मोहनाय !

ॐ मोक्षप्रदाय ! 

फट वशी कुरु कुरु! 

वौषडाकर्षणाय हुं विद्वेषणाय विद्वेषय विद्वेषय ! 

फट उच्चाटय उच्चाटय ! 

ठ: ठ: स्तंभय स्तंभय ! 

खें खें मारय मारय ! 

शोषय शोषय ! 

परमंत्रयंत्रतंत्राणि छेदय छेदय ! 

दुष्टग्रहान निवारय निवारय ! 

दु:खं हर हर ! 

व्याधिं नाशय नाशय ! 

नम: संपन्नय संपन्नय स्वाहा ! 

सर्वपल्लवस्वरुपाय महाविद्याय गं गणपतये स्वाहा !

यन्मंत्रे क्षितलांछिताभमनघं मृत्युश्च वज्राशिषो भूतप्रेतपिशाचका: प्रतिहता निर्घातपातादिव ! 

उत्पन्नं च समस्तदु:खदुरितं उच्चाटनोत्पादकं वंदेsभीष्टगणाधिपं भयहरं विघ्नौघनाशं परम ! 


ॐ गं गणपतये नम: । 


ॐ नमो महागणपतये , महावीराय , दशभुजाय , मदनकाल विनाशन , मृत्युं हन हन , यम यम , मद मद , कालं संहर संहर , सर्व ग्रहान चूर्णय चूर्णय , नागान मूढय मूढय , रुद्ररूप, त्रिभुवनेश्वर , सर्वतोमुख हुं फट स्वाहा !


ॐ नमो गणपतये , श्वेतार्कगणपतये , श्वेतार्कमूलनिवासाय , वासुदेवप्रियाय , दक्षप्रजापतिरक्षकाय , सूर्यवरदाय , कुमारगुरवे , ब्रह्मादिसुरावंदिताय , सर्पभूषणाय , शशांकशेखराय , सर्पमालालंकृतदेहाय , धर्मध्वजाय , धर्मवाहनाय , त्राहि त्राहि , देहि देहि , अवतर अवतर , गं गणपतये , वक्रतुंडगणपतये , वरवरद , सर्वपुरुषवशंकर , सर्वदुष्टमृगवशंकर , सर्वस्ववशंकर , वशी कुरु वशी कुरु , सर्वदोषान बंधय बंधय , सर्वव्याधीन निकृंतय निकृंतय , सर्वविषाणि संहर संहर , सर्वदारिद्र्यं मोचय मोचय , सर्वविघ्नान छिंदि छिंदि , सर्ववज्राणि स्फोटय स्फोटय , सर्वशत्रून उच्चाटय उच्चाटय , सर्वसिद्धिं कुरु कुरु , सर्वकार्याणि साधय साधय , गां गीं गूं गैं गौं गं गणपतये हुं फट स्वाहा !


ॐ नमो गणपते महावीर दशभुज मदनकालविनाशन !

मृत्युं हन हन !

कालं संहर संहर !

धम धम !

मथ मथ !

त्रैलोक्यं मोहय मोहय !

ब्रह्मविष्णुरुद्रान मोहय मोहय !

अचिंत्य बलपराक्रम , सर्वव्याधीन विनाशाय !

सर्वग्रहान चूर्णय चूर्णय !

नागान मोटय मोटय !

त्रिभुवनेश्वर सर्वतोमुख हुं फट स्वाहा !!


यह भगवान श्री गणेश का अद्भुत माला मंत्र है । अगर आप इसे ध्यान से पढ़ेंगे तो पाएंगे कि इसमें लगभग हर समस्या जो हमारे जीवन में आती है , उसके समाधान के लिए एक साथ प्रभु से प्रार्थना कर ली गई है । 

आप ऐसा भी कह सकते हैं कि यह एक ऑल-इन-वन प्रार्थना है । जिसमें जीवन की हर समस्या के समाधान का सूत्र है । 


अब आते हैं विधि पर :-

गणेश भगवान की साधनाएं बुधवार या चतुर्थी तिथि से आप प्रारंभ कर सकते हैं । गणेश चतुर्थी के विषय में तो आप जानते ही हैं । इसके अलावा हर महीने में शुक्ल पक्ष की चौथी तारीख को गणेश भगवान की तिथि के रूप में स्वीकार किया जाता है । आप उस दिन से भी साधना प्रारंभ कर सकते हैं । 


इस माला मंत्र का जाप आप एक बार या अपनी क्षमता अनुसार जितना कर सकें कर सकते हैं ।  कोशिश यह कीजिएगा कि रोज एक निश्चित संख्या में ही माला मंत्र का पाठ करें । 


पीले रंग के वस्त्र तथा आसन का प्रयोग अच्छा है । अगर आपके पास उसकी व्यवस्था नहीं है तो आप किसी भी प्रकार के साफ-सुथरे धुले हुए वस्त्र पहनकर इस माला मंत्र का पाठ कर सकते हैं । 


पूजा स्थान में बैठकर इसके पाठ की अनिवार्यता नहीं है लेकिन जहां भी आप बैठे वाह स्थान साफ सुथरा हो तो बेहतर है । 


किसी भी प्रकार के मंत्र जाप या पाठ में साधक या पूजन कर्ता की भावना का महत्व रहता है । बाकी सारी चीजें गौण हैं । इसलिए पूजन सामग्री आप अपनी इच्छा अनुसार रख सकते हैं । दीपक भी अगर आपकी इच्छा हो तो जला सकते हैं । अगरबत्ती जलाना भी आपकी इच्छा के अनुसार है । अगर सामर्थ्य नहीं हुए है तो बेवजह खर्च करने की आवश्यकता नहीं है । 

आप बिना इन सब के भी पाठ करेंगे तो आपको अनुकूलता मिल जाएगी ।  


अगर सक्षम है तो किसी भी मीठे तेल का दीपक या घी का दीपक या चमेली के तेल का दीपक अपनी क्षमता अनुसार जला सकते हैं । 


प्रसाद के रूप में श्री महागणपति को अत्यंत प्रिय है । आप उन्हें मोदक या लड्डू चढ़ा सकते हैं । घर में बना कर चढ़ाएं तो सबसे बढ़िया है । अगर नहीं बना सकते हैं तो दुकान में मिलने वाले लड्डू चढ़ाएं । यह ध्यान रखें कि मात्रा भले कम हो लेकिन अच्छी क्वालिटी के लड्डू चढ़ाएं । ऐसा लड्डू चढ़ाएं जिसे खाने में आपको आनंद आता हो ।  स्वादिष्ट हो । 

 

हमारे यहां आज यह स्थिति हो गई है कि हवन और पूजन की सामग्री के नाम पर घटिया सामग्रियां बिक रही है । यहां तक कि दुकानदार हवन वाले घी  के बारे में यह बोलकर खासतौर से देता है कि इसे खाने के लिए इस्तेमाल नहीं करना है । अब आप खुद सोच सकते हैं कि वह किस प्रकार का घी दे रहा है जिससे आप हवन कर रहे हैं । जब आप अग्नि को देवता मान के हवन कर रहे हैं तो उसे इस प्रकार की डुप्लीकेट सामग्री या घटिया सामग्री ना चढ़ाएं । 

उससे बेहतर है कि आप सामग्री ही ना चढ़ाएं । 


अधिकांश साधनाएं हिमालय जैसे पर्वत स्थलों मे की जाती है । उन स्थानों पर कुमकुम हल्दी प्रसाद चावल या अन्य पूजा सामग्रीया नहीं मिलती है ।  वहां बैठकर जब अन्य साधक बिना इन सामग्रियों के भी पूजन संपन्न करके सफलता प्राप्त कर सकते हैं तो आप भी सफलता प्राप्त कर सकते हैं । 

शर्त यह है कि आपकी भावना अच्छी हो..... 

आपकी श्रद्धा इष्ट के प्रति प्रबल हो ..... 

बाकी .... 

गुरुदेव की इच्छा ..... 

आप इसका उच्चारण आडिओ मे यहाँ सुन सकते हैं । 
इसे सुनकर उच्चारण करने से धीरे धीरे धीरे गुरुकृपा से आपका उच्चारण स्पष्ट होता जाएगा :-

 

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