14 सितंबर 2026

लघु गणेश पूजन

  लघु गणेश पूजन



यह एक छोटा गणेश भगवान का पूजन है जिसे आप लगभग 10 मिनट मे सम्पन्न कर सकते हैं 

पहले गुरु स्मरण ,गणेश भैरव महालक्ष्मी स्मरण करे ..
ॐ गुं गुरुभ्यो नमः
ॐ श्री गणेशाय नमः

ॐ भ्रम भैरवाय  नमः 
ॐ श्री महालक्ष्म्यै नमः

अब आप 4 बार आचमन करे दाए हाथ में पानी लेकर पिए
गं आत्मतत्त्वं शोधयामि नमः स्वाहा
गं विद्यातत्त्वं शोधयामि नमः स्वाहा
गं शिव तत्त्वं शोधयामि नमः स्वाहा
गं सर्व तत्त्वं शोधयामि नमः स्वाहा

अब आप घंटा नाद करे और उसे पुष्प अक्षत अर्पण करे
घंटा देवताभ्यो नमः

अब आप जिस आसन पर बैठे है उस पर पुष्प अक्षत अर्पण करे
आसन देवताभ्यो नमः

अब आप दीपपूजन करे उन्हें प्रणाम करे और पुष्प अक्षत अर्पण करे
दीप देवताभ्यो नमः

अब आप कलश का पूजन करे ..उसमेगंध ,अक्षत ,पुष्प ,तुलसी,इत्र ,कपूर डाले ..उसे तिलक करे .
कलश देवताभ्यो नमः

अब आप अपने आप को तिलक करे

फिर संक्षिप्त गुरु पुजन करे
ॐ गुं गुरुभ्यो नम: ।
ॐ परम गुरुभ्यो नम: ।
ॐ पारमेष्ठी गुरुभ्यो नम: ।

उसके बाद गणपति का ध्यान करे
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्य कोटि समप्रभ
निर्विघ्नं कुरु में देव सर्व कार्येशु सर्वदा

उनका आह्वान करें अर्थात बुलाएं 
श्री महागणपति आवाहयामि
मम पूजन स्थाने रिद्धि सिद्धि सहित शुभ लाभ सहित स्थापयामि नमः

उनका स्वागत करें , फूल आदि चढ़ाएं 
त्वां चरणे गन्धाक्षत पुष्पं समर्पयामि ।


पंचोपचार पूजन करें

ॐ गं " लं" पृथ्वी तत्वात्मकं गंधं समर्पयामि । 
कुमकुम,चन्दन अष्टगंध चढ़ाएँ ।

ॐ गं " हं" आकाश तत्वात्मकं पुष्पम समर्पयामि । 
फूल चढ़ाएँ ।

ॐ गं " यं " वायु तत्वात्मकं धूपं समर्पयामि । 
धूप या अगरबत्ती दिखाएँ ।

ॐ गं " रं" अग्नी तत्वात्मकं दीपं समर्पयामि । 
दीपक दिखाएँ ।

ॐ गं " वं " जल तत्वात्मकं नैवेद्यं समर्पयामि । 
प्रसाद चढ़ाएँ ।


अब गणेशजी को अर्घ्य प्रदान करे, एक चम्मच जल चढ़ाएं 
एकदंताय विद्महे वक्रतुंडाय धीमहि तन्नो दन्ती प्रचोदयात

 भगवान गणेश जी के 16 नाम से दूर्वा या पुष्प अक्षत या जल अर्पण करे

1. ॐ गं सुमुखाय नम: । 
2. ॐ गं एकदंताय नमः।
3. ॐ गं कपिलाय नमः।
4. ॐ गं गजकर्णकाय नमः।
5. ॐ गं लंबोदराय नमः।
6. ॐ गं विकटाय नम: । 
7. ॐ गं विघ्नराजाय नमः।
8. ॐ गं गणाधिपाय नम: । 
9. ॐ गं धूम्रकेतवे नम : । 
10 . ॐ गं गणाध्यक्षाय नमः।
11. ॐ गं भालचंद्राय नमः।
12. ॐ गं गजाननाय नम: । 
13. ॐ गं वक्रतुंडाय नमः।
14. ॐ गं शूर्पकर्णाय नमः।
15. ॐ गं हेरंबाय नमः।
16. ॐ गं स्कंदपूर्वजाय नमः।

अब एक आचमनी जल लेकर पूजा स्थान पर छोड़े
अनेन महागणपति षोडश नाम पूजनेन श्री भगवान महागणपति प्रीयन्तां न मम .

हाथ जोड़ कर भगवान गणेश जी से प्रार्थना करे

1 सितंबर 2026

काली शाबर मंत्र साधना

 


प्रथम ज्योति महाकाली प्रगटली ।

ॐ निरंजन निराकार अवगत पुरुष तत सार, 
तत सार मध्ये ज्योत, 
ज्योत मध्ये परम ज्योत, 
परम ज्योत मध्ये उत्पन्न भई माता 
शम्भु शिवानी काली ओ काली काली महाकाली, 
कृष्ण वर्णी, शव वाहनी, रुद्र की पोषणी, 
हाथ खप्पर खडग धारी, 
गले मुण्डमाला हंस मुखी । 
जिह्वा ज्वाला दन्त काली । 
मद्यमांस कारी श्मशान की राणी । 
मांस खाये रक्त-पी-पीवे । 
भस्मन्ति माई जहाँ पर पाई तहाँ लगाई । 
सत की नाती , धर्म की बेटी । 
इन्द्र की साली , काल की काली । 
जोग की जोगीन, नागों की नागीन । 
मन माने तो संग रमाई, नहीं तो श्मशान फिरे । 
अकेली चार वीर अष्ट भैरों, घोर काली अघोर काली । 
अजर महाकाली । 
बजर अमर काली । 
भख जून निर्भय काली । 

बला भख, दुष्ट को भख, 
काल भख, पापी पाखण्डी को भख । 

जती सती को रख । 

ॐ काली तुम बाला ना वृद्धा, देव ना दानव, नर ना नारी देवीजी तुम तो हो परब्रह्मा काली ।



मूल मंत्र -

क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं दक्षिणे कालिके क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं स्वाहा ।



विधि -

  1. महाकाली की कृपा प्रदान करेगा ।
  2. अपनी क्षमतानुसार 1, 3,9,11,21,51,108 बार जाप रात्रिकाल मे करें।
  3. जन्माष्टमी/कालरात्रि/शिवरात्रि/नवरात्रि/अमावस्या मे करने से विशेष लाभदायक होगा। 
  4. धूप जलाकर रखें । 

31 अगस्त 2026

भगवती महाकाली सहस्त्राक्षरी मंत्र

 भगवती महाकाली सहस्त्राक्षरी मंत्र




ॐ क्रीं  क्रीँ  क्रीँ  ह्रीँ  ह्रीँ  हूं  हूं दक्षिणे कालिके क्रीँ  क्रीँ  क्रीँ  ह्रीँ  ह्रीँ  हूं  हूं स्वाहा ।

शुचिजाया, महापिशाचिनी,  दुष्टचित्तनिवारिणी,
क्रीँ कामेश्वरी,  वीँ हं वाराहिके, ह्रीँ महामाये, खं खः क्रोधाधिपे !
श्रीं  महालक्ष्म्ये ! सर्वहृदय रञ्जनी । वाग्वादिनी विधे त्रिपुरे ।
हंस्त्रिँ  हसकहल ह्रीँ  हस्त्रैँ  ॐ ह्रीँ  क्लीँ  मे  स्वाहा ।
ॐ ॐ ह्रीँ  ईं स्वाहा ।
दक्षिणकालिके क्रीँ हूं ह्रीँ स्वाहा ।

खड्गमुण्डधरे, कुरुकुल्ले तारे, ॐ  ह्रीँ  नमः भयोन्मादिनी भयं मम हन हन । पच पच ।  मथ मथ ।
फ्रेँ विमोहिनी सर्वदुष्टान मोहय मोहय ।
हयग्रीवे, सिँहवाहिनी, सिँहस्थे, अश्वारुढे, अश्वमुरिप विद्राविणी विद्रावय मम शत्रून ये मां हिँसतु तान ग्रस ग्रस ।
महानीले, वलाकिनी, नीलपताके, क्रेँ क्रीँ क्रेँ कामे, संक्षोभिणी, उच्छिष्टचाण्डालिके,
सर्वजगद वशमानय वशमानय ।

मातंगिनी उच्छिष्टचाण्डालिनी मातंगिनी सर्ववशंकरी नमः स्वाहा ।
विस्फारिणी । कपालधरे ।  घोरे । घोरनादिनी । भूर शत्रून् विनाशिनी । उन्मादिनी ।
रोँ  रोँ रोँ  रीँ  ह्रीँ  श्रीँ  हसौः सौँ  वद वद क्लीँ क्लीँ क्लीँ क्रीँ  क्रीँ  क्रीँ कति कति स्वाहा |

काहि काहि कालिके ।
शम्वरघातिनी, कामेश्वरी, कामिके, ह्रं ह्रं क्रीँ स्वाहा ।

हृदयाये ॐ ह्रीँ  क्रीँ  मे स्वाहा ।

ठः ठः ठः क्रीँ  ह्रं  ह्रीँ  चामुण्डे हृदय जनाभिअसूनव ग्रस ग्रस दुष्टजनान् ।
अमून शंखिनी क्षतजचर्चितस्तने उन्नतस्तनेविष्टंभकारिणि । विघाधिके ।  श्मशानवासिनी । कलय कलय । विकलय विकलय । कालग्राहिके । सिँहे । दक्षिणकालिके । अनिरुद्दये । ब्रूहि ब्रूहि । जगच्चित्रिरे । चमत्कारिणी । हं कालिके ।  करालिके । घोरे । कह कह । तडागे । तोये । गहने । कानने । शत्रुपक्षे । शरीरे मर्दिनि पाहि पाहि । अम्बिके । तुभ्यं कल विकलायै । बलप्रमथनायै । योगमार्ग गच्छ गच्छ ।  निदर्शिके । देहिनि । दर्शनं देहि देहि । मर्दिनि महिषमर्दिन्यै । स्वाहा ।

रिपुन्दर्शने द र्शय दर्शय । सिँहपूरप्रवेशिनि । वीरकारिणि । क्रीँ  क्रीँ  क्रीँ  हूं  हूं ह्रीँ  ह्रीँ फट् स्वाहा ।

शक्तिरुपायै ।  रोँ  वा गणपायै  । रोँ  रोँ  रोँ व्यामोहिनि । यन्त्रनिके । महाकायायै ।  प्रकटवदनायै । लोलजिह्वायै । मुण्डमालिनि । महाकालरसिकायै । नमो नमः ।
ब्रम्हरन्ध्रमेदिन्यै नमो नमः ।
शत्रुविग्रहकलहान्त्रिपुरभोगिन्यै । विषज्वालामालिनी । तन्त्रनिके । मेधप्रभे । शवावतंसे । हंसिके । कालि कपालिनि । कुल्ले कुरुकुल्ले । चैतन्यप्रभे प्रज्ञे तु साम्राज्ञि ज्ञान ह्रीँ  ह्रीँ  रक्ष रक्ष । ज्वाला । प्रचण्ड । चण्डिके ।  शक्ति । मार्तण्ड ।  भैरवि ।  विप्रचित्तिके । विरोधिनि । आकर्णय आकर्णय । पिशिते । पिशितप्रिये । नमो नमः ।
खः खः खः मर्दय मर्दय । शत्रून् ठः ठः ठः । कालिकायै नमो नमः ।
ब्राम्हयै नमो नमः ।
माहेश्वर्यै नमो नमः ।
कौमार्यै नमो नमः ।
वैष्णव्यै नमो नमः ।
वाराह्यै नमो नमः ।
इन्द्राण्यै नमो नमः ।
चामुण्डायै नमो नमः ।
अपराजितायै नमो नमः ।
नारसिँहिकायै नमो नमः ।
कालि । महाकालिके । अनिरुध्दके । सरस्वति फट् स्वाहा ।

पाहि पाहि ललाटं । भल्लाटनी । अस्त्रीकले । जीववहे । वाचं रक्ष रक्ष । परविद्या क्षोभय क्षोभय । आकर्षय आकर्षय । कट कट । अमुकान मोहय मोहय  महामोहिनिके । चीरसिध्दके । कृष्णरुपिणी । अंजनसिद्धके ।  स्तम्भिनि । मोहिनि । मोक्षमार्गानि दर्शय दर्शय स्वाहा ।।



  • 108 पाठ से लाभ मिलेगा |
  • चमेली के तेल का दीपक जलाएंगे । 
  • रात्रिकालीन साधना है |
  • दक्षिण दिशा की ओर देखते हुए जाप करें 
  • काला वस्त्र तथा काले कंबल का आसन रहेगा । 

29 अगस्त 2026

तंत्र साधनाओं के लिए गुरु दीक्षा कैसे प्राप्त करें ?

  


मैंने देवी देवताओं तथा उनकी मंत्र साधना से संबन्धित कई लेख प्रकाशित किए हैं । जिन्हे पढ़कर कई पाठकों और पाठिकाओं ने साधना की है या करने की इच्छा व्यक्त की है । मैंने जो विधियाँ प्रकाशित की हैं, वे सरल हैं और उन्हे किसी भी आयु का स्त्री या पुरुष जो सनातन धर्म मे आस्था रखता हो वह सम्पन्न कर सकता है ।  

साधना के मार्ग मे गुरु दीक्षा का बड़ा महत्व होता है । गुरु की देह को गुरु मानने की गलती हम सभी कर बैठते हैं । वास्तव में गुरु के अंदर जो भगवान शिव का ज्ञान या जो शिव तत्व होता है, वही वास्तविक गुरु होता है । तंत्र के अधिपति भगवान शिव सभी साधनाओं के मूल हैं और वही मंत्रों और साधनाओं को शक्ति और चैतन्यता प्रदान करते हैं । 

इसे मैं एक सरल उदाहरण से समझाऊं तो मान लीजिए कि आप अपने घर में एक ट्यूबलाइट जलाना चाहते हैं । इसके दो तरीके हो सकते हैं । पहला तो यह कि आप अपना खुद का बिजली पैदा करने का कोई यंत्र या जनरेटर बना ले और उससे ट्यूबलाइट को जोड़ दें तो ट्यूब लाइट जलने लगेगी । खुद से मंत्र जाप करना कुछ कुछ वैसा ही है । जैसे-जैसे आप जाप करते जाते हैं धीरे-धीरे आपके अंदर ऊर्जा बनने लगती है या आपका खुद का जनरेटर चालू होने लगता है । जब उसकी बिजली पर्याप्त हो जाती है, तब ट्यूब लाइट जलता है । 

दूसरा तरीका यह है कि जो बिजली की सप्लाई लाइन आपके इलाके में आई हुई है, उसके तार से अपने घर में एक कनेक्शन ले ले । उस कनेक्शन के माध्यम से ट्यूबलाइट को जोड़ दें, तब भी वह ट्यूबलाइट चल जाएगी । गुरु दीक्षा कुछ-कुछ वैसा ही कनेक्शन है, जो आपकी ट्यूबलाइट को जल्दी चालू कर सकता है । 

जब आप किसी गुरु से दीक्षा लेते हैं, जो कि स्वयं सिद्ध हो, तो उसकी जो गुरु परंपरा होती है, वह पीछे की ओर जाने पर भगवान शिव से जाकर मिलती है । यानी यह समझ लीजिए कि मेन पावर स्टेशन पर जाकर मिलती है, जहां से सभी साधनाओं का प्रारंभ होता है । जब यह लिंक दीक्षा के माध्यम से जुड़ती है तो आपके अंदर जो शिव तत्व है, जो आपके मस्तिष्क के दोनों हिस्सों के बीच में लगभग लिंग आकार स्वरूप में स्थित होता है, उसकी चैतन्यता बढ़ती है । उसी के माध्यम से मंत्रों की शक्ति जागृत होती है और आपको अपना अभीष्ट प्राप्त होता है ।

अब मन मे यह सवाल उठता है कि दीक्षा कैसे प्राप्त करें ? 

सबसे बढ़िया स्थिति तो यह है कि आप गुरु के पास जाकर दीक्षा प्राप्त करें !

उनके पास व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हो और उनसे निवेदन करके अपनी इच्छित दीक्षा प्राप्त करें !!

इसके लिए आप भोपाल मध्य प्रदेश जा सकते हैं, और गुरु माता डॉ.  साधना सिंह जी से दीक्षा प्राप्त कर सकते हैं । 




साधना सिद्धि विज्ञान 
B-81,B-82
न्यू मिनाल रेजीडेंसी 
जे. के. रोड , भोपाल  [म.प्र.]


दूरभाष : (0755) --- 4269368,4283681,4221116
यदि आप  गुरुमता से फोटो से दीक्षा प्राप्त करना चाहते हों तो आप मेरे निम्नलिखित नंबर पर whatsapp कर सकते हैं  
 


टेरो कार्ड रीडिंग सीखें : सुमन जी से



टैरो कार्ड रीडिंग वर्तमान ऊर्जा, अवचेतन मन की स्थिति और संभावित परिणामों को समझने का एक माध्यम है। यह मुख्य रूप से कार्ड पर बने प्रतीकों, चित्रों, रीडर के अंतर्ज्ञान के आधार पर वर्तमान स्थितियों का आकलन करने की एक प्रक्रिया है । इसे आप ज्योतिष की ही एक शाखा के रूप मे देख सकते हैं । 

सुमन जी पिछले कई वर्षों से कार्ड रीडिंग कर रही हैं । मैं उनके सौ से ज्यादा क्लाइंट्स के अनुभव के आधार पर यह कह सकता हूँ कि, गुरुकृपा और महामाया के आशीर्वाद से उनकी रीडिंग काफी अच्छी है । 

अब उन्होंने कार्ड रीडिंग सिखाने का कार्य प्रारंभ किया है अगर आप इच्छुक हों तो जॉइन कर सकते हैं । अपनी अन्तः प्रेरणा को विकसित करने की विधियाँ सीख सकते हैं । निरंतर अभ्यास साधना के माध्यम से एक अच्छे कार्ड रीडर बन सकते हैं ।   



27 अगस्त 2026

चंद्रग्रहण : पति से संबंध अनुकूल बनाने का मंत्र

  

चंद्रग्रहण : पति से संबंध अनुकूल बनाने का मंत्र

यदि आपका पति आपसे विरक्त हो गया हो लगातार झगड़ा होता रहता हो  बेवजह दूरियां बन गई हो तो इस साधना से अनुकूलता मिलेगी |



विधि :-
कामिया सिन्दूर मिल जाये तो उसे सामने रख लें.
ना मिले तो जिस कुमकुम से आप बिंदी लगाती हैं वह ...... या फिर स्टिकर बिंदी का प्रयोग करती हैं तो स्टीकर बिंदी के पैकेट को अपने सामने लाल कपड़े में रख लेंगे । जाप करने के बाद उस लाल कपड़े में लपेटकर रख लेंगे अगले दिन फिर उसे खोल कर जाप करना है । यदि लाल कपडे में रखने में दिक्कत हो तो ऐसे भी पूजा स्थान में रखकर कर सकते हैं ,. 

अगर आपका कोई गुरु हो या किसी देवता को गुरु मानते हो तो उनके मंत्र का तीन बार जाप कर लें
यदि गुरु नहीं हो तो निम्नलिखित गुरु मंत्र का 3 बार जाप कर ले
ॐ श्री गुरु मण्डलाय नमः

इसके बाद अपने दाएं हाथ में एक चम्मच पानी रख लें और अपनी इच्छा (अर्थात मेरा और मेरे पति के बीच में संबंध अच्छा बना रहे ) ऐसी भावना करके उस जल को जमीन पर छोड़ देंगे

उसके बाद निम्नलिखित मंत्र का जाप करेंगे

"हथेली में हनुमन्त बसै, भैरु बसे कपार।

नरसिंह की मोहिनी, मोहे सब संसार।

मोहन रे मोहन्ता वीर, सब वीरन में तेरा सीर।

सबकी नजर बाँध दे, तेल सिन्दूर चढ़ाऊँ तुझे।

तेल सिन्दूर कहाँ से आया ?

कैलास-पर्वत से आया।

कौन लाया, अञ्जनी का हनुमन्त,गौरी का गनेश लाया।

काला, गोरा, तोतला-तीनों बसे कपार।

बिन्दा तेल सिन्दूर का, दुश्मन गया पाताल।

दुहाई कमिया सिन्दूर की, हमें देख शीतल हो जाए भरतार ।

सत्य नाम, आदेश गुरु की।


28 अगस्त 2026 को पूर्णिमा भी है चंद्र ग्रहण भी है उस दिन भी आप इसको १०८ बार या जितनी आपकी क्षमता हो उतनी बार कर सकते हैं . उसके बाद अगली पूर्णिमा तक इसे नित्य कम से कम ११ बार करें . 

इसके आलावा आप निम्नलिखित समय में भी इस कर सकते हैं ;-


.....1....
इस मन्त्र को रोज 11 बार जाप होलिका दहन की रात्रि से प्रारंभ कर रामनवमी तक करें ।

हनुमान जयंती वाले दिन हनुमान मंदिर में एक नारियल और 21 रुपये या जितनी आपकी शक्ति हो उतना चढ़ा दें ।

हनुमान जयंती के बाद किसी भी दिन से इसका टीका [बिंदी] लगाकर पति के पास जाएँ. मन में हमेशा भाव रखें कि सब अच्छा हो जाएगा ।

...,........2.....,
नित्य 108 जाप रोज  पूरी नवरात्री में करें . आखिरी दिन हनुमान मंदिर में एक नारियल और 21 रुपये या जितनी आपकी शक्ति हो उतना चढ़ा दें ।

इसका टीका [बिंदी] लगाकर पति के पास जाएँ. मन में हमेशा भाव रखें कि सब अच्छा हो जाएगा ।

.,........3......

यदि होली,नवरात्रि में ना कर पाएं तो किसी भी पूर्णिमा से अगली पूर्णिमा तक रोज 11 बार जाप कर सकते हैं। आखिरी दिन हनुमान मंदिर में एक नारियल और 21 रुपये या जितनी आपकी शक्ति हो उतना चढ़ा दें ।
बिंदी या कुमकुम रखने में दिक्कत हो तो माता गौरी के भगवान शिव के साथ वाले स्वरूप का ध्यान करके जाप कर लेंगे । टीका या बिंदी लगाते समय इस मंत्र का जाप करते हुए टीका लगा लेंगे ।
.....,

ऐसा नित्य करें तो पति धीरे धीरे अनुकूल होने लगता है.

क्रोध करने से बचें और बेवजह का प्रलाप या बकवास ना करें

यह केवल आपके स्वयं के विवाहित पति के लिए काम करेगा .

प्रेमी के लिए काम नहीं करेगा .

चन्द्र ग्रहण में गुरु साधना

    



|| ॐ गुं गुरुभ्यो नमः ||

  • चन्द्र ग्रहण में गुरु साधना करनी चाहिये.जो दीक्षित हैं वे गुरु प्रदत्त गुरु मंत्र जाप करें 
  • अप्सरा साधना, लक्ष्मी साधना के लिये यह सबसे श्रेष्ठ मुहुर्त होता है.
  • सम्मोहन/वशीकरण साधना के लिये यह उपयुक्त समय होता है.

ग्रहण काल में किये गये मंत्र जाप का १००० गुना फ़ल मिलता है.

चन्द्र ग्रहण विशेष : आर्थिक लाभ हेतु शाबर मंत्र

  आर्थिक लाभ हेतु शाबर मंत्र 

शाबर मंत्र सामान्य जन की भाषा में लिखे हुए मंत्र होते हैं और उसमें व्याकरण की त्रुटि या शब्दों का अर्थ निकालने का प्रयास नहीं करना चाहिए और वे जैसे हैं वैसे ही पाठ कर लेना चाहिए ।
इसमें अलग-अलग स्रोतों के हिसाब से शब्दों में फर्क पड़ सकता है जो कि अलग-अलग साधकों के द्वारा अपने ढंग से प्रस्तुत किए जाते हैं लेकिन सभी सुखद परिणाम देते हैं।
पढ़ने में सरल होते हैं इसलिए कोई भी व्यक्ति से कर सकता है ।
इन मंत्रों का प्रयोग पुरुष या स्त्री कोई भी कर सकता है ।

मंत्र

ॐ नमो आदेश गुरु को |
नमो सिद्ध गणपति प्रसादात विघ्न हर्तुम गणपत गणपत वसो मसाण |
जो फल चाहूं सो फल आण , पञ्च लाडूँ , सिर सिन्दूर , रिद्धि सिद्धि आण |
गौरी का पुत्र सिंहासन बैठा |
राजा काम्पै प्रजा काम्पै दृष्टे राजा सिम चाम्पे| पञ्च कोष पूर्व पश्चिम से आण उत्तर से आण दक्षिण से आण |
इतनी कर रिद्धि सिद्धि मेरे घर द्वार आण|
राजा प्रजा अभी मेरो पड़े पाँव न पड़े तो लाजे मैया गौरी |
जो मै देखूं गणेश बाला कर मंत्र का सत की फट फट स्वाहा |


विधि

भोजपत्र पर इस मंत्र को लिख कर उसके सामने जाप करें
ग्रहण काल मे 108 बार जाप करें । ज्यादा कर पाएँ तो और अच्छा । 
जाप के समय गुग्गुल का धुप जलता रहे तो अच्छा है.
जाप के बाद ताबीज में भरकर पहन लें या धन रखने के स्थान में रख लें.
दूकान हो तो वहां गल्ले में भी रख सकते हैं.

चन्द्र ग्रहण :- देवराज इंद्रकृत सहस्राक्षरी लक्ष्मी स्तोत्र

  चन्द्र ग्रहण :- देवराज इंद्रकृत सहस्राक्षरी लक्ष्मी स्तोत्र





देवराज इंद्रकृत सहस्राक्षरी लक्ष्मी स्तोत्र अपने आप में अत्यंत ही प्रभावशाली तथा शीघ्र फलप्रदायक है.

यह स्तोत्र लक्ष्मी जी के यंत्र चित्र या मूर्ति के सामने करना चाहिए.

पहले लघु पूजन करें. तदुपरांत स्तोत्र का पाठ करें.

महालक्ष्मी पूजनः-


ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः गंधम समर्पयामि । (इत्र कुंकुम चढायें)

ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः पुष्पम समर्पयामि । (फूल चढायें )

ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः धूपम समर्पयामि । (अगरबत्ती दिखायें)

ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः दीपम समर्पयामि । (दीपक दिखायें )

ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः नैवेद्यम समर्पयामि । (प्रसाद चढायें )


क्षमतानुसार 1,3,5,7,9,11,21,51 या 108 बार सहस्राक्षरी स्तोत्र मंत्र का पाठ करेंः-


(हाथ में जल लेकर)विनियोगः-

ऊँ अस्य श्री सर्व महाविद्या महारात्रि गोपनीय मंत्र रहस्याति रहस्यमयी पराशक्ति श्री मदाद्या भगवती सिद्ध लक्ष्मी सहस्राक्षरी सहस्र रूपिणि महाविद्याया श्री इंद्र ऋषिं गायत्रयादि नाना छंदांसि नवकोटि शक्तिरूपा श्री मदाद्या भगवती सिद्ध लक्ष्मी देवता श्री मदाद्या भगवती सिद्ध लक्ष्मी प्रसादादखिलेष्टार्थ (यहाँ अपनी मनोकामना बोल देंगे ) जपे पाठे विनियोगः । (जल जमीन पर छोड़ दें )

अपने हाथ मे एक पुष्प रखें ।

एक पाठ पूरा हो जाने पर उसे देवी के चरणों मे चढ़ा दें और उनकी कृपा प्राप्ति की प्रार्थना करें ।.


स्तोत्र मंत्र :-

ऊँ ऐं ह्रीं श्रीं हसौं श्रीं ऐं ह्रीं क्लीं सौः सौः ऊँ ऐं ह्रीं क्लीं श्रीं जय जय महालक्ष्मी, जगदाद्ये,विजये सुरासुर त्रिभुवन निदाने दयांकुरे सर्व तेजो रूपिणी विरंचि संस्थिते, विधि वरदे सच्चिदानंदे विष्णु देहावृते महामोहिनी नित्य वरदान तत्परे महासुधाब्धि वासिनी महातेजो धारिणी सर्वाधारे सर्वकारण कारिणे अचिंत्य रूपे इंद्रादि सकल निर्जर सेविते सामगान गायन परिपूर्णोदय कारिणी विजये जयंति अपराजिते सर्व सुंदरि रक्तांशुके सूर्य कोटि संकाशे चंद्र कोटि सुशीतले अग्निकोटि दहनशीले यम कोटि वहनशीले ऊँकार नाद बिंदु रूपिणी निगमागम भाग्यदायिनी त्रिदश राज्य दायिनी सर्व स्त्री रत्न स्वरूपिणी दिव्य देहिनि निर्गुणे सगुणे सदसद रूप धारिणी सुर वरदे भक्त त्राण तत्परे बहु वरदे सहस्राक्षरे अयुताक्षरे सप्त कोटि लक्ष्मी रूपिणी अनेक लक्षलक्ष स्वरूपे अनंत कोटि ब्रहमाण्ड नायिके चतुर्विंशति मुनिजन संस्थिते चतुर्दश भुवन भाव विकारिणे गगन वाहिनी नाना मंत्र राज विराजिते सकल सुंदरी गण सेविते चरणारविंद्र महात्रिपुर सुंदरी कामेश दायिते करूणा रस कल्लोलिनी कल्पवृक्षादि स्थिते चिंतामणि द्वय मध्यावस्थिते मणिमंदिरे निवासिनी विष्णु वक्षस्थल कारिणे अजिते अमले अनुपम चरिते मुक्तिक्षेत्राधिष्ठायिनी प्रसीद प्रसीद सर्व मनोरथान पूरय पूरय सर्वारिष्टान छेदय छेदय सर्वग्रह पीडा ज्वराग्र भय विध्वंसय विध्वंसय सर्व त्रिभुवन जातं वशय वशय मोक्ष मार्गाणि दर्शय दर्शय ज्ञानमार्ग प्रकाशय प्रकाशय अज्ञान तमो नाशय नाशय धनधान्यादि वृद्धिं कुरूकुरू सर्व कल्याणानि कल्पय कल्पय माम रक्ष रक्ष सर्वापदभ्यो निस्तारय निस्तारय वज्र शरीरं साधय साधय ह्रीं सहस्राक्षरी सिद्ध लक्ष्मी महाविद्यायै नमः ।


इसे आप चन्द्र ग्रहण/शरद पूर्णिमा/दीपावली/पूर्णिमा/ या किसी भी दिन कर सकते हैं । 

22 अगस्त 2026

बालकों के डरने से बचाव मे सहायक : छह मुखी रुद्राक्ष

  

  1. बालकों को नींद मे घबराकर उठने की दिक्कत हो या बेवजह डरता हो तो यह रुद्राक्ष सहायक होता है । 
  2. छह मुखी रुद्राक्ष साक्षात् कार्तिकेय भगवान् का प्रतीक है.
  3. यह शत्रुओं के निवारण के लिए अति लाभ दायक होने के कारण शत्रुंजय रुद्राक्ष भी कहलाता है .

इसके लिए निर्धारित शुल्क दो सौ पचास रुपये [जिसमे रुद्राक्ष का मूल्य, पूजन सामग्री का व्यय, पूजन शुल्क, पेकेजिंग तथा पोस्टेज व्यय शामिल है ] भेजकर आप इसे प्राप्त कर सकते हैं ।
शुल्क आप फोन पे, पे टी एम, गूगल पे, भीम पे से मेरे मोबाइल नंबर पर भेज सकते हैं :-
मेरा मोबाइल नंबर - 7000630499

इस क्यूआर कोड से भी भेज सकते हैं 





छह मुखी रुद्राक्ष प्राप्त करने के लिए मुझे निम्नलिखित चीजें इस नंबर पर व्हाट्सप्प कर देंगे :-

१) निर्धारित शुल्क के ऑनलाइन पेमेंट की रसीद ।
२) बच्चे का नाम , जन्म तिथि,स्थान,समय ।[ यदि मालूम हो ]
३) गोत्र (यदि मालूम हो )
४) बच्चे की ताजा फोटो जिसमे  चेहरा और आँखें स्पष्ट दिखती हों । चश्मा लगाते हों तो बिना चश्मे के फोटो भेजेंगे । यह फोटो उसके प्रतीक रूप में पूजन के समय रखी जाएगी . 
५) आपका पूरा पोस्टल एड्रेस पिन कोड सहित भेजेंगे । साथ मे वह मोबाइल नंबर भी भेजेंगे जिसपर पोस्टमेन आवश्यकता पड़ने पर आपसे पार्सल की डिलिवरी के समय संपर्क कर सके ।