॥ ॐ ह्रीं क्रीं मे स्वाहा ॥
- यह सर्वविध रोगों के प्रशमन में सहायक होता है.
- इसका प्रभाव भी महामृत्युंजय मंत्र के समान प्रचंड है .
- यथा शक्ति जाप करें.
एक प्रयास सनातन धर्म[Sanatan Dharma] के महासमुद्र मे गोता लगाने का.....कुछ रहस्यमयी शक्तियों [shakti] से साक्षात्कार करने का.....गुरुदेव Dr. Narayan Dutt Shrimali Ji [ Nikhileswaranand Ji] की कृपा से प्राप्त Mantra Tantra Yantra विद्याओं को समझने का...... Kali, Sri Yantra, Laxmi,Shiv,Kundalini, Kamkala Kali, Tripur Sundari, Maha Tara ,Tantra Sar Samuchhay , Mantra Maharnav, Mahakal Samhita, Devi,Devata,Yakshini,Apsara,Tantra, Shabar Mantra, जैसी गूढ़ विद्याओ को सीखने का....
साल में दो नवरात्रि आती है जो कि चैत्र माह में होती है जिस महीने में रामनवमी पड़ती है । दूसरी आश्विन माह में आती है जिसमे दशहरा पड़ता है । यह दोनों नवरात्रि व्यापक रूप से मनाई जाती है । इसमें भी दशहरा वाली नवरात्रि को ज्यादा महत्व दिया जाता है.....
इन दोनों में भी आप शक्ति साधना कर सकते हैं । इस वर्ष 2022 की आषाढ़ की गुप्त नवरात्रि 30 जून से प्रारंभ हो रही है ।
इस नवरात्रि के अवसर पर आप देवी से संबंधित साधनाएं कर सकते हैं, इन मंत्रों को किसी भी जाति आयु और लिंग का व्यक्ति जो सनातन धर्म मे विश्वास रखता है वह कर सकता है ।
नवरात्रि के अवसर पर शक्ति का संचरण पृथ्वी पर ज्यादा मात्रा में होता है । ऐसा माना जाता है । उस अवसर पर उनके लिए की गई साधनाएं ज्यादा अनुकूलता और परिणाम देती है । इसलिए नवरात्रि के अवसर पर देवी की साधना करना ज्यादा लाभप्रद माना गया है ....
अपनी क्षमता के अनुसार आप रोज 5 मिनट, 10 मिनट से लेकर दो-तीन घंटे तक जितना आप की क्षमता हो.... उतना मंत्र जाप करें.... और देवी की अनुकूलता की प्रार्थना करें !
भगवती की कृपा प्राप्त करने का प्रयास करें !!


शनि माला मंत्र
शनिबाधा निवारण हेतु आप इसे नित्य पूजन मे शामिल कर सकते है ..
या प्रत्येक शनिवार इसका उचित संख्या मे पाठ करे ..
ॐ नमो भगवते शनैश्चराय मंदगतये सूर्यपुत्राय महाकालाग्निसदृशाय क्रूरदेहाय गृध्रासनाय नीलरुपाय चतुर्भुजाय त्रिनेत्राय नीलांबरधराय नीलमालाविभूषिताय धनुराकारमण्डले प्रतिष्ठिताय काश्यपगोत्रात्मजाय माणिक्यमुक्ताभरणाय छायापुत्राय सकल महारौद्राय सकल जगतभयंकराय पंगुपादाय क्रूररुपाय देवासुरभयंकराय सौरये कृष्णवर्णाय स्थूलरोमाय अधोमुखाय नीलभद्रासनाय नीलवर्णरथारुढाय त्रिशूलधराय सर्वजनभयंकराय मंदाय दं शं नं मं हुं रक्ष रक्ष , मम शत्रून नाशय नाशय , सर्वपीडा नाशय नाशय , विषमस्थ शनैश्चरान सुप्रीणय सुप्रीणय , सर्व ज्वरान शमय शमय , समस्त व्याधीनामोचय मोचय विमोचय विमोचय मां रक्ष रक्ष , समस्त दुष्टग्रहान भक्षय भक्षय , भ्रामय भ्रामय , त्रासय त्रासय , बंधय बंधय , उन्मादय उन्मादय , दीपय दीपय , तापय तापय , सर्व विघ्नान छिंधि छिंधि , डाकिनी शाकिनी भूत वेताल यक्षरगोगंधर्वग्रहान ग्रासय ग्रासय , भक्षय भक्षय , दह दह , पच पच , हन हन , विदारय विदारय , शत्रून नाशय नाशय , सर्वपीडा नाशय नाशय , विषमस्थ शनैश्चरान सुप्रीणय सुप्रीणय , सर्वज्वरान शमय शमय , समस्त व्याधीन विमोचय विमोचय , ॐ शं नं मं ह्रां फं हुं शनैश्चराय नीलाभ्रवर्णाय नीलमेखलाय सौरये नम:
!! इति शनि माला मंत्र !!
एक गोपनीय शाबर रक्षा मंत्र
यह सद्गुरुदेव डा नारायण दत्त श्रीमाली जी के द्वारा दिया गया एक अद्भुत मंत्र है .....
ॐ रक्षो रक्ष महावीर !
काला गोरा भेरूँ! बल वहन करे !
वज्र सी देह रक्षा करे ! एडी सू चोटी चोटी सू एडी !
तणो वज्र निरधार झरे ! ठम ठम ठम !!!
इसे आप 108 बार जपकर सूर्यग्रहण/होली/शिवरात्रि/अमावस्या/नवरात्रि के अवसर पर सिद्ध कर लें ।.
सुबह उठते ही इसका नित्य 3 बार जाप करते रहें तो आपके ऊपर किसी प्रकार का प्रयोग आदि होने पर उससे रक्षा होगी ।.