एक प्रयास सनातन धर्म[Sanatan Dharma] के महासमुद्र मे गोता लगाने का.....कुछ रहस्यमयी शक्तियों [shakti] से साक्षात्कार करने का.....गुरुदेव Dr. Narayan Dutt Shrimali Ji [ Nikhileswaranand Ji] की कृपा से प्राप्त Mantra Tantra Yantra विद्याओं को समझने का...... Kali, Sri Yantra, Laxmi,Shiv,Kundalini, Kamkala Kali, Tripur Sundari, Maha Tara ,Tantra Sar Samuchhay , Mantra Maharnav, Mahakal Samhita, Devi,Devata,Yakshini,Apsara,Tantra, Shabar Mantra, जैसी गूढ़ विद्याओ को सीखने का....
Disclaimer
23 दिसंबर 2025
19 दिसंबर 2025
रोगनाशक महाकाली मंत्र
- यह सर्वविध रोगों के प्रशमन में सहायक होता है.
- इसका प्रभाव भी महामृत्युंजय मंत्र के समान प्रचंड है .
- यथा शक्ति जाप करें.
- इसके बाद आप मंत्र जाप रुद्राक्ष की माला से सम्पन्न करें ।
- रोज निश्चित संख्या मे मंत्र जाप करें ।
- जाप काल मे समर्थ हों तो दीपक जला लें , आर्थिक दिक्कत हो तो बिना दीपक के भी कर सकते हैं ।
- जाप पूरा हो जाने के बाद माला को लाल कपड़े मे लपेट कर रख दें । कोशिश करें कि जाप पूरा होते तक आपके अलावा कोई उसका स्पर्श न करे । गलती से स्पर्श हो जाये तो कोई दिक्कत नहीं है ।
- ब्रह्मचर्य का कड़ाई से पालन करें ।
- आचार, विचार, व्यव्हार सात्विक और शुद्ध रखें ।
- रात्रि 9 से सुबह 3 बजे तक का समय श्रेष्ठ है । न कर पाएँ तो जब आपको समय मिले तब कर लें ।
- पूर्णिमा तक आपको जाप करना है ।
- पूर्णिमा के मंत्र जाप के बाद उस माला को आप अपने लिए कर रहे हों तो स्वयं पहन लें । दूसरे के लिए कर रहे हों, तो रोगी को पहना दें ।
- एक महीने तक चौबीस घंटे उस माला को पहने रखें ।
- अगली पूर्णिमा को उस माला को नदी, तालाब, समुद्र मे प्रवाहित कर दें ।
॥ ॐ ह्रीं क्रीं मे स्वाहा ॥
17 दिसंबर 2025
दस महाविद्याये तथा उनकी साधना से होने वाले लाभ
दस महाविद्याये तथा उनकी साधना से होने वाले लाभ
मेरे सदगुरुदेव डा नारायण दत्त श्रीमाली जी ने दसों महाविद्याओं के सम्बन्ध में विस्तृत विवेचन किया है . उनके प्रवचन के ऑडियो/वीडियो आप इंटरनेट पर सर्च करके या यूट्यूब पर सुन सकते हैं . तथा विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकते हैं .
जितना मैंने जाना है उसके आधार पर मुझे ऐसा लगता है कि सभी महाविद्याओं से आध्यात्मिक शक्ति की वृद्धि तथा सर्व मनोकामना की पूर्ती होती है . इसके अलावा जो विशेष प्रयोजन सिद्ध होते हैं उनका उल्लेख इस प्रकार से किया गया है .
महाकाली - मानसिक प्रबलता /सर्वविध रक्षा / कुण्डलिनी जागरण /पौरुष
तारा - आर्थिक उन्नति / कवित्व / वाक्शक्ति
त्रिपुर सुंदरी - आर्थिक/यश / आकर्षण
भुवनेश्वरी - आर्थिक/स्वास्थ्य/प्रेम
छिन्नमस्ता - तन्त्रबाधा/शत्रुबाधा / सर्वविध रक्षा
त्रिपुर भैरवी - तंत्र बाधा / शत्रुबाधा / सर्वविध रक्षा
धूमावती - शत्रु बाधा / सर्वविध रक्षा
बगलामुखी - शत्रु स्तम्भन / वाक् शक्ति / सर्वविध रक्षा
मातंगी - सौंदर्य / प्रेम /आकर्षण/काव्य/संगीत
कमला - आर्थिक उन्नति
महाविद्याओं की साधना उच्चकोटि की साधना है . आप अपनी रूचि के अनुसार किसी भी महाविद्या की साधना कर सकते हैं . महाविद्या साधना आपको जीवन में सब कुछ प्रदान करने में सक्षम है .
यदि आप सात्विक पद्धति से गृहस्थ जीवन में रहते हुए ही , महाविद्या साधना सिद्धि करना चाहते हैं तो आप महाविद्या से सम्बंधित दीक्षा तथा मंत्र प्राप्त करने के लिए मेरे गुरुदेव स्वामी सुदर्शन नाथ जी से या गुरुमाता डा साधना सिंह जी से संपर्क कर सकते हैं .
विस्तृत जानकारी के लिए नीचे दिए गए वेबसाइट तथा यूट्यूब चैनल का अवलोकन कर सकते हैं .
contact for details
वेबसाइट
namobaglamaa.org
यूट्यूब चैनल
https://youtube.com/c/MahavidhyaSadhakPariwar
12 दिसंबर 2025
महिषासुरमर्दिनि स्तोत्रम्
यह एक अत्यंत मधुर तथा गीत के रूप मे रचित देवी स्तुति है । इसके पाठ से आपको अत्यंत आनंद और सुखद अनुभूति होगी ।
महिषासुरमर्दिनि स्तोत्रम्
अयि गिरिनन्दिनि नन्दितमेदिनि विश्वविनोदिनि नन्दिनुते,
गिरिवरविन्ध्यशिरोऽधिनिवासिनि विष्णुविलासिनि जिष्णुनुते ।
भगवति हे शितिकंठ कुटुम्बिनि भूरिकुटुम्बिनि भूरिकृते
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १ ॥
सुरवरवर्षिणि दुर्धरधर्षिणि दुर्मुखमर्षिणि हर्षरते,
त्रिभुवनपोषिणि शङ्करतोषिणि किल्बिषमोषिणि घोषरते ।
दनुजनिरोषिणि दितिसुतरोषिणि दुर्मदशोषिणि सिन्धुसुते
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ २ ॥
अयि जगदम्ब मदम्ब कदम्ब वनप्रियवासिनि हासरते,
शिखरि शिरोमणि तुङ्गहिमालय शृङ्गनिजालय मध्यगते ।
मधुमधुरे मधुकैटभगञ्जिनि कैटभभञ्जिनि रासरते
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ ३ ॥
अयि शतखण्ड विखण्डितरुण्ड वितुण्डितशुण्ड गजाधिपते
रिपुगजगण्ड विदारणचण्ड पराक्रमशुण्ड मृगाधिपते ।
निजभुजदण्ड निपातितखण्ड विपातितमुण्ड भटाधिपते
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ ४ ॥
अयि रणदुर्मद शत्रुवधोदित दुर्धरनिर्जर शक्तिभृते
चतुरविचार धुरीणमहाशिव दूतकृत प्रमथाधिपते ।
दुरितदुरीह दुराशयदुर्मति दानवदुत कृतान्तमते
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ ५ ॥
अयि शरणागत वैरिवधुवर वीरवराभय दायकरे
त्रिभुवनमस्तक शुलविरोधि शिरोऽधिकृतामल शुलकरे ।
दुमिदुमितामर धुन्दुभिनादमहोमुखरीकृत दिङ्मकरे
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ ६ ॥
अयि निजहुङ्कृति मात्रनिराकृत धूम्रविलोचन धूम्रशते
समरविशोषित शोणितबीज समुद्भवशोणित बीजलते ।
शिवशिवशुम्भ निशुम्भमहाहव तर्पितभूत पिशाचरते
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ ७ ॥
धनुरनुषङ्ग रणक्षणसङ्ग परिस्फुरदङ्ग नटत्कटके
कनकपिशङ्ग पृषत्कनिषङ्ग रसद्भटशृङ्ग हताबटुके ।
कृतचतुरङ्ग बलक्षितिरङ्ग घटद्बहुरङ्ग रटद्बटुके
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ ८ ॥
जय जय जप्य जयेजयशब्द परस्तुति तत्परविश्वनुते
झणझणझिञ्झिमि झिङ्कृत नूपुरशिञ्जितमोहित भूतपते ।
नटित नटार्ध नटी नट नायक नाटितनाट्य सुगानरते
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ ९ ॥
अयि सुमनःसुमनःसुमनः सुमनःसुमनोहरकान्तियुते
श्रितरजनी रजनी रजनी रजनी रजनी करवक्त्रवृते ।
सुनयन विभ्रमर भ्रमर भ्रमर भ्रमर भ्रमराधिपते
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १० ॥
सहित महाहव मल्लमतल्लिक मल्लितरल्लक मल्लरते
विरचित वल्लिक पल्लिक मल्लिक झिल्लिक भिल्लिक वर्गवृते ।
शितकृतफुल्ल समुल्लसितारुण तल्लजपल्लव सल्ललिते
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ ११ ॥
अविरल गण्ड गलन्मद मेदुर मत्त मतङ्ग जराजपते
त्रिभुवनभुषण भूतकलानिधि रूपपयोनिधि राजसुते ।
अयि सुदतीजन लालस मानस मोहन मन्मथराजसुते
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १२ ॥
कमलदलामल कोमलकान्ति कलाकलितामल भाललते
सकलविलास कलानिलयक्रम केलिचलत्कल हंसकुले ।
अलिकुल सङ्कुल कुवलय मण्डल मौलिमिलद्बकुलालिकुले
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १३ ॥
करमुरलीरव वीजित कूजित लज्जित कोकिल मञ्जुमते
मिलित पुलिन्द मनोहर गुञ्जित रञ्जित शैल निकुञ्जगते ।
निजगणभूत महाशबरीगण सद्गुणसम्भृत केलितले
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १४ ॥
कटितट पीत दुकूल विचित्र मयुख तिरस्कृत चन्द्ररुचे
प्रणत सुरासुर मौलिमणिस्फुर दंशुल सन्नख चन्द्ररुचे
जितकनकाचल मौलिमदोर्जित निर्भरकुञ्जर कुम्भकुचे
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १५ ॥
विजित सहस्र करैक सहस्र करैक सहस्र करैकनुते
कृत सुर तारक सङ्गर तारक सङ्गर तारक सूनुसुते ।
सुरथ समाधि समान समाधि समाधि समाधि सुजातरते ।
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १६ ॥
पद कमलं करुणानिलये वरिवस्यति योऽनुदिनं सुशिवे
अयि कमले कमला निलये कमलानिलयः स कथं न भवेत् ।
तव पदमेव परम्पदमित्यनुशीलयतो मम किं न शिवे
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १७ ॥
कनक लसत्कल सिन्धुजलैरनुषिञ्चति तेगुणरङ्गभुवम्
भजति स किं न शची कुच कुम्भतटी परिरम्भ सुखानुभवम् ।
तव चरणं शरणं करवाणि नतामर वाणि निवासि शिवम्
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १८ ॥
तव विमलेन्दु कुलं वदनेन्दु मलं सकलं ननु कूलयते
किमु पुरुहूतपुरीन्दु मुखी सुमुखीभिरसौ विमुखीक्रियते ।
मम तु मतं शिवनामधने भवती कृपया किमुत क्रियते
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १९ ॥
अयि मयि दीन दयालुतया कृपयैव त्वया भवितव्यमुमे
अयि जगतो जननी कृपयासि यथासि तथानुमितासिरते ।
यदुचितमत्र भवत्युररीकुरुतादुरुतापमपाकुरुते
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ २० ॥
5 दिसंबर 2025
भूत प्रेत जिन्न पिशाच आदि से रक्षा के लिए महाकाली मंत्र
भूत प्रेत जिन्न पिशाच आदि से रक्षा के लिए महाकाली मंत्र
यदि आपको इस प्रकार की कोई भी समस्या हो तो इस सिद्ध मंत्र का जाप करके स्वयं इसका प्रभाव अनुभव करें ।.
महाकाली सिद्ध मंत्र :-
।। हुं हुं ह्रीं ह्रीं कालिके घोर दन्ष्ट्रे प्रचन्ड चन्ड नायिके दानवान दारय हन हन शरीरे महाविघ्न छेदय छेदय स्वाहा हुं फट ।।
यह महाकाली का स्वयंसिद्ध मन्त्र है.
तंत्र बाधा की काट , भूत बाधा आदि में लाभ प्रद है .
नवरात्रि मे इसका जाप करना ज्यादा लाभदायक है . 108 बार नित्य जाप करें
इस दौरान आप अपने सामने रुद्राक्ष , अंगूठी , माला आदि को सामने रखकर उसे मंत्र सिद्ध करके रक्षा के लिए बच्चों को भी पहना सकते हैं ।
इस मन्त्र का जाप करके रक्षा सूत्र बान्ध सकते हैं।
यदि आप किसी ऊपरी बाधा से ग्रस्त हैं तो नवरात्रि मे या किसी भी शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से प्रारम्भ करके नौ दिन नित्य रात्रि काल अर्थात रात्रि 9 से 3 बजे के बीच 1008 बार जाप करें । दशमी के दिन 108 काली मिर्च के दाने सरसों के तेल मे भिगोकर अपने सामने रख लेंगे । लकड़ी या गोबर का कंडा जला लेंगे । एक काली मिर्च का दाना लेंगे उसे अपने माथे से स्पर्श कराकर इस मंत्र का एक बार पाठ करेंगे और फट बोलने के बाद उसे आग मे डाल देंगे । जब 108 दाने पूरे आपके अग्नि मे चले जाएँगे तो उसे प्रणाम करके माँ काली से रक्षा की प्रार्थना करके उठ जाएँगे । उस राख़ को नदी, तालाब या किसी सुनसान स्थान पर अगले दिन छोड़ देंगे ।. आपको इसका प्रभाव दिखने लगेगा । इसके बाद रक्षा के लिए नित्य सुबह बिस्तर से उठते समय इसका तीन बार उच्चारण करके बिस्तर से उठेंगे तो अनुकूलता बनी रहेगी ।
28 नवंबर 2025
निखिल धाम [ परमहंस स्वामी निखिलेश्वरानन्द जी को समर्पित मंदिर ]
निखिल धाम
[ परमहंस स्वामी निखिलेश्वरानन्द जी को समर्पित मंदिर ]
21 नवंबर 2025
गुरुदेव स्वामी सुदर्शन नाथ जी : एक प्रचंड तंत्र साधक
गुरुदेव स्वामी सुदर्शन नाथ जी : एक प्रचंड तंत्र साधक
साधना का क्षेत्र अत्यंत दुरुह तथा जटिल होता है. इसी लिये मार्गदर्शक के रूप में गुरु की अनिवार्यता स्वीकार की गई है.
गुरु दीक्षा प्राप्त शिष्य को गुरु का प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष मार्गदर्शन प्राप्त होता रहता है.
बाहरी आडंबर और वस्त्र की डिजाइन से गुरू की क्षमता का आभास करना गलत है.
एक सफ़ेद धोती कुर्ता पहना हुआ सामान्य सा दिखने वाला व्यक्ति भी साधनाओं के क्षेत्र का महामानव हो सकता है यह गुरुदेव स्वामी सुदर्शन नाथ जी से मिलकर मैने अनुभव किया.
भैरव साधना से शरभेश्वर साधना तक.......
कामकला काली से लेकर त्रिपुरसुंदरी तक .......
अघोर साधनाओं से लेकर तिब्बती साधना तक....
महाकाल से लेकर महासुदर्शन साधना तक सब कुछ अपने आप में समेटे हुए निखिल तत्व के जाज्वल्यमान पुंज स्वरूप...
गुरुदेव स्वामी सुदर्शननाथ जी
महाविद्या त्रिपुर सुंदरी के सिद्धहस्त साधक हैं.वर्तमान में बहुत कम महाविद्या सिद्ध साधक इतनी सहजता से साधकों के मार्गदर्शन के लिये उपलब्ध हैं.
आप चाहें तो उनसे संपर्क करके मार्गदर्शन ले सकते हैं :-
साधना सिद्धि विज्ञान
जास्मीन - 429
न्यू मिनाल रेजीडेंसी
जे. के. रोड , भोपाल [म.प्र.]
दूरभाष : (0755)
4269368,4283681,4221116
वेबसाइट:-
यूट्यूब चेनल :-
https://www.youtube.com/@MahavidhyaSadhakPariwar
17 नवंबर 2025
गुरुमाता डॉ. साधना सिंह : एक सिद्ध तंत्र गुरु
गुरुमाता डॉ. साधना सिंह : एक सिद्ध तंत्र गुरु
वात्सल्यमयी गुरुमाता डॉ. साधना सिंह जी महाविद्या बगलामुखी की प्रचंड , सिद्धहस्त साधिका हैं.
स्त्री कथावाचक और उपदेशक तो बहुत हैं पर तंत्र के क्षेत्र में स्त्री गुरु अत्यंत दुर्लभ हैं.
तंत्र के क्षेत्र में स्त्री गुरु का बहुत महत्व होता है.
माँ अपने शिशु को स्नेह और वात्सल्य के साथ जो कुछ भी देती है वह उसके लिए अनुकूल हो जाता है .
स्त्री गुरु मातृ स्वरूपा होने के कारण उनके द्वारा प्रदत्त मंत्र साधकों को सहज सफ़लता प्रदायक होते हैं. स्त्री गुरु द्वारा प्रदत्त मंत्र स्वयं में सिद्ध माने गये हैं.
वे एक योगाचार्य और विश्वविख्यात होम्यो पैथ भी हैं । उनके लेख वर्षों तक प्रतिष्ठित पत्रिका निरोगधाम में प्रकाशित होते रहे हैं । आप उनसे अपनी असाध्य बीमारियों पर भी सलाह एप्वाइंटमेंट लेकर ले सकते हैं।
मैने तंत्र साधनाओं की वास्तविकता और उनकी शक्तियों का अनुभव पूज्यपाद सदगुरुदेव स्वामी निखिलेश्वरानंद जी [डॉ. नारायण दत्त श्रीमाली जी ] तथा उनके बाद गुरुदेव स्वामी सुदर्शननाथ जी और गुरुमाता डॉ. साधना सिंह जी के सानिध्य में किया है ।
आप भी उनसे मिलकर प्रत्यक्ष मार्गदर्शन ले सकते हैं :-
जास्मीन - 429
न्यू मिनाल रेजीडेंसी
जे. के. रोड , भोपाल [म.प्र.]
दूरभाष : (0755)
4269368,4283681,4221116
वेबसाइट:-
www.namobaglamaa.org
यूट्यूब चेनल :-
https://www.youtube.com/@MahavidhyaSadhakPariwar
14 नवंबर 2025
दस महाविद्याये तथा उनकी साधना से होने वाले लाभ
दस महाविद्याये तथा उनकी साधना से होने वाले लाभ
मेरे सदगुरुदेव डा नारायण दत्त श्रीमाली जी ने दसों महाविद्याओं के सम्बन्ध में विस्तृत विवेचन किया है . उनके प्रवचन के ऑडियो/वीडियो आप इंटरनेट पर सर्च करके या यूट्यूब पर सुन सकते हैं . तथा विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकते हैं .
जितना मैंने जाना है उसके आधार पर मुझे ऐसा लगता है कि सभी महाविद्याओं से आध्यात्मिक शक्ति की वृद्धि तथा सर्व मनोकामना की पूर्ती होती है . इसके अलावा जो विशेष प्रयोजन सिद्ध होते हैं उनका उल्लेख इस प्रकार से किया गया है .
महाकाली - मानसिक प्रबलता /सर्वविध रक्षा / कुण्डलिनी जागरण /पौरुष
तारा - आर्थिक उन्नति / कवित्व / वाक्शक्ति
त्रिपुर सुंदरी - आर्थिक/यश / आकर्षण
भुवनेश्वरी - आर्थिक/स्वास्थ्य/प्रेम
छिन्नमस्ता - तन्त्रबाधा/शत्रुबाधा / सर्वविध रक्षा
त्रिपुर भैरवी - तंत्र बाधा / शत्रुबाधा / सर्वविध रक्षा
धूमावती - शत्रु बाधा / सर्वविध रक्षा
बगलामुखी - शत्रु स्तम्भन / वाक् शक्ति / सर्वविध रक्षा
मातंगी - सौंदर्य / प्रेम /आकर्षण/काव्य/संगीत
कमला - आर्थिक उन्नति
महाविद्याओं की साधना उच्चकोटि की साधना है . आप अपनी रूचि के अनुसार किसी भी महाविद्या की साधना कर सकते हैं . महाविद्या साधना आपको जीवन में सब कुछ प्रदान करने में सक्षम है .
यदि आप सात्विक पद्धति से गृहस्थ जीवन में रहते हुए ही , महाविद्या साधना सिद्धि करना चाहते हैं तो आप महाविद्या से सम्बंधित दीक्षा तथा मंत्र प्राप्त करने के लिए मेरे गुरुदेव स्वामी सुदर्शन नाथ जी से या गुरुमाता डा साधना सिंह जी से संपर्क कर सकते हैं .
विस्तृत जानकारी के लिए नीचे दिए गए वेबसाइट तथा यूट्यूब चैनल का अवलोकन कर सकते हैं .
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12 नवंबर 2025
11 नवंबर 2025
काल भैरव साधना
- शत्रु बाधा.
- तंत्र बाधा.
- इतर योनी से कष्ट.
- उग्र साधना में रक्षा हेतु.
- रात्रि कालीन साधना है.अमावस्या, नवरात्रि,कालभैरवाष्टमी, जन्माष्टमी या किसी भी अष्टमी से प्रारंभ करें.
- रात्रि 9 से 4 के बीच करें.
- काला आसन और वस्त्र रहेगा.
- रुद्राक्ष या काली हकिक माला से जाप करें.
- १०००,५०००,११०००,२१००० जितना आप कर सकते हैं उतना जाप करें.
- जाप के बाद १० वा हिस्सा यानि ११००० जाप करेंगे तो ११०० बार मंत्र में स्वाहा लगाकर हवन कर लें.
- हवन सामान्य हवन सामग्री से भी कर सकते हैं.
- काली मिर्च या तिल का प्रयोग भी कर सकते हैं.
- अंत में एक कुत्ते को भरपेट भोजन करा दें. काला कुत्ता हो तो बेहतर.
- एक नारियल [पानीवाला] आखिरी दिन अपने सर से तीन बार घुमा लें, अपनी इच्छा उसके सामने बोल दें.
- किसी सुनसान जगह पर बने शिव या काली मंदिर में छोड़कर बिना पीछे मुड़े वापस आ जाएँ.
- घर में आकर स्नान कर लें.
- दो अगरबत्ती जलाकर शिव और शक्ति से कृपा की प्रार्थना करें.
- किसी भी प्रकार की गलती हो गयी हो तो उसके लिए क्षमा मांगे.
- दोनों अगरबत्ती घर के द्वार पर लगा दें.
10 नवंबर 2025
भैरव अष्टोत्तर शत नाम
- काला/लाल वस्त्र पहनें.
- दक्षिण दिशा की और मुख रखें .
- भैरव यंत्र या चित्र या पंचमुखी रुद्राक्ष रखकर कर सकते हैं .
- सरसों के तेल का दीपक जला सकते हैं .
- हर मन्त्र के साथ सिंदूर या लाल पुष्प चढ़ाएं .
01) ॐ भैरवाय नम:
02) ॐ भूतनाथाय नम:
03) ॐ भूतात्मने नम:
04) ॐ भूतभावनाय नम:
05) ॐ क्षेत्रदाय नम:
06) ॐ क्षेत्रपालाय नम:
07) ॐ क्षेत्रज्ञाय नम:
08) ॐ क्षत्रियाय नम:
09) ॐ विराजे नम:
10) ॐ श्मशानवासिने नम:
11) ॐ मांसाशिने नम:
12) ॐ खर्पराशिने नम:
13) ॐ स्मरांतकाय नम:
14) ॐ रक्तपाय नम:
15) ॐ पानपाय नम:
16) ॐ सिद्धाय नम:
17) ॐ सिद्धिदाय नम:
18) ॐ सिद्धसेविताय नम:
19) ॐ कंकालाय नम:
20) ॐ कालशमनाय नम:
21) ॐ कलाकाष्ठाय नम:
22) ॐ तनये नम:
23) ॐ कवये नम:
24) ॐ त्रिनेत्राय नम:
25) ॐ बहुनेत्राय नम:
26) ॐ पिंगललोचनाय नम:
27) ॐ शूलपाणये नम:
28) ॐ खडगपाणये नम:
29) ॐ कंकालिने नम:
30) ॐ धूम्रलोचनाय नम:
31) ॐ अभीरवे नम:
32) ॐ भैरवीनाथाय नम:
33) ॐ भूतपाय नम:
34) ॐ योगिनीपतये नम:
35) ॐ धनदाय नम:
36) ॐ अधनहारिणे नम:
37) ॐ धनवते नम:
38) ॐ प्रीतिवर्धनाय नम:
39) ॐ नागहाराय नम:
40) ॐ नागपाशाय नम:
41) ॐ व्योमकेशाय नम:
42) ॐ कपालभृते नम:
43) ॐ कालाय नम:
44) ॐ कपालमालिने नम:
45) ॐ कमनीयाय नम:
46) ॐ कलानिधये नम:
47) ॐ त्रिनेत्राय नम:
48) ॐ ज्वलन्नेत्राय नम:
49) ॐ त्रिशिखिने नम:
50) ॐ त्रिलोकपालाय नम:
51) ॐ त्रिवृत्ततनयाय नम:
52) ॐ डिंभाय नम:
53) ॐ शांताय नम:
54) ॐ शांतजनप्रियाय नम:
55) ॐ बटुकाय नम:
56) ॐ बटुवेशाय नम:
57) ॐ खट्वांगधराय नम:
58) ॐ भूताध्यक्षाय नम:
59) ॐ पशुपतये नम:
60) ॐ भिक्षकाय नम:
61) ॐ परिचारकाय नम:
62) ॐ धूर्ताय नम:
63) ॐ दिगंबराय नम:
64) ॐ शूराय नम:
65) ॐ हरिणे नम:
66) ॐ पांडुलोचनाय नम:
67) ॐ प्रशांताय नम:
68) ॐ शांतिदाय नम:
69) ॐ शुद्धाय नम:
70) ॐ शंकरप्रियबांधवाय नम:
71) ॐ अष्टमूर्तये नम:
72) ॐ निधीशाय नम:
73) ॐ ज्ञानचक्षुषे नम:
74) ॐ तपोमयाय नम:
75) ॐ अष्टाधाराय नम:
76) ॐ षडाधाराय नम:
77) ॐ सर्पयुक्ताय नम:
78) ॐ शिखिसखाय नम:
79) ॐ भूधराय नम:
80) ॐ भूधराधीशाय नम:
81) ॐ भूपतये नम:
82) ॐ भूधरात्मजाय नम:
83) ॐ कपालधारिणे नम:
84) ॐ मुंडिने नम:
85) ॐ नागयज्ञोपवीतवते नम:
86) ॐ जृंभणाय नम:
87) ॐ मोहनाय नम:
88) ॐ स्तंभिने नम:
89) ॐ मारणाय नम:
90) ॐ क्षोभणाय नम:
91) ॐ शुद्धनीलांजनप्रख्याय नम:
92) ॐ दैत्यघ्ने नम:
93) ॐ मुंडभूषिताय नम:
94) ॐ बलिभुजे नम:
95) ॐ बलिभुंगनाथाय नम:
96) ॐ बालाय नम:
97) ॐ बालपराक्रमाय नम:
98) ॐ सर्वापत्तारणाय नम:
99) ॐ दुर्गाय नम:
100) ॐ दुष्टभूतनिषेविताय नम:
101) ॐ कामिने नम:
102) ॐ कलानिधये नम:
103) ॐ कांताय नम:
104) ॐ कामिनीवशकृद्वशिने नम:
105) ॐ सर्वसिद्धिप्रदाय नम:
106) ॐ वैद्याय नम:
107) ॐ प्रभवे नम:
108) ॐ विष्णवे नम:
9 नवंबर 2025
भैरवं नमामि
सं सं सं संहार मूर्ति शुभ मुकुट जटा शेखरं चन्द्र विम्बं
दं दं दं दीर्घ कायं विकृत नख मुख चौर्ध्व रोमं करालं
पं पं पं पाप नाशं प्रणमतं सततं भैरवं क्षेत्रपालं ॥ १ ॥
रं रं रं रक्तवर्णं कटक कटितनुं तीक्ष्णदंष्ट्रा विशालं
घं घं घं घोर घोषं घ घ घ घ घर्घरा घोर नादं
कं कं कं कालरूपं धग धग धगितं ज्वलितं कामदेहं
दं दं दं दिव्य देहं प्रणमत सततं भैरवं क्षेत्रपालं ॥ २ ॥
लं लं लं लम्ब दन्तं ल ल ल ल लुलितं दीर्घ जिह्वाकरालं
धूं धूं धूं धूम्रवर्ण स्फुट विकृत मुखंमासुरं भीम रूपं
रूं रूं रूं रुण्डमालं रुधिरमय मुखं ताम्र नेत्रं विशालं
नं नं नं नग्नरूपं प्रणमत सततं भैरवं क्षेत्रपालं ॥ ३ ॥
वं वं वं वायुवेगं प्रलय परिमितं ब्रह्मरूपं स्वरूपं
खं खं खं खड्गहस्तं त्रिभुवन निलयं भास्करं भीमरूपं
चं चं चं चालयन्तं चल चल चलितं चालितं भूत चक्रं
मं मं मं मायकायं प्रणमत सततं भैरवं क्षेत्रपालं ॥ ४ ॥
खं खं खं खड्गभेदं विषममृतमयं काल कालान्धकारं
क्षि क्षि क्षि क्षिप्र वेग दह दह दहन नेत्रं सन्दीप्यमानं
हूं हूं हूं हूंकार शब्दं प्रकटित गहन गर्जितं भूमिकंपं
बं बं बं बाललीलम प्रणमत सततं भैरवं क्षेत्रपालं ॥ ५ ॥
- भैरव प्रार्थना है.
- उनकी कृपा प्रदान करती है .
8 नवंबर 2025
रक्षा कारक भैरव् यंत्र !
रक्षा कारक भैरव् यंत्र !
नकारात्मक शक्तियों से परेशान हैं ?
घर/दुकान पर तंत्र प्रयोग का संदेह है ?
तो आपको रक्षा प्रयोग करना चाहिए ....
रक्षा कारक देवताओं में भगवान भैरव को सबसे महत्वपूर्ण माना गया है । इन्हें भगवान शिव का ही एक स्वरूप माना गया है । प्रत्येक पूजन में विघ्नों से रक्षा के लिए भगवान गणेश की पूजा के पश्चात सर्व विध रक्षा के लिए भगवान श्री भैरव का पूजन संपन्न किया जाता है . प्रमुख रूप से आठ प्रकार के भैरव माने गए हैं । कई तांत्रिक ग्रन्थों में 51 और 64 प्रकार के भैरव का भी उल्लेख मिलता है ।
यूट्यूब पर उपलब्ध विडियोस मे आप पाएंगे कि गुरुदेव डॉ नारायण दत्त श्रीमाली जी ने अपने प्रवचनों में कई बार भैरव साधना के विषय में महत्वपूर्ण जानकारियां दी है उनमें से एक महत्वपूर्ण जानकारी यह भी है कि भैरव यंत्र का पूजन करके अगर आप उसे घर के प्रमुख द्वार के ऊपर लटका दें तो नकारात्मक शक्तियों का घर के अंदर प्रवेश नहीं हो पाता है ।.
आपके नाम से भैरव यंत्र [शुल्क- पाँच सौ एक रुपये मात्र] अभिमंत्रित करके आपको स्पीड पोस्ट से भेजने की व्यवस्था हमारे प्रतिष्ठान " अष्टलक्ष्मी पूजा सामग्री" की तरफ से की जा सकती है, इसके लिए आप इस क्यूआर कोड़ का उपयोग भी कर सकते हैं :-
यदि आप इच्छुक हो तो आप निम्नलिखित जानकारी मेरे व्हाट्सएप नंबर 7000630499 पर भेज देंगे ➖
1> निर्धारित शुल्क 501 रुपये का शुल्क फोन पे/गूगल पे//पे टी एम के द्वारा भेजे जाने की रसीद/स्क्रीन शॉट ।
2> आपका नाम ।
3> आपका गोत्र, जन्म तिथि,समय,स्थान (यदि मालूम हो तो )
4> बिना चश्मे के आपकी एक ताजा फोटो जिसमे आपका चेहरा और आँखें स्पष्ट दिखती हों ।
5> पिन कोड़ सहित, आपका पूरा डाक का पता, जिस पते पर पार्सल भेजना है । साथ मे आपका वह मोबाइल नंबर जिसपर पोस्टमेन आवश्यकता पड़ने पर आपसे पार्सल डिलिवरी के समय संपर्क कर सके ।











