सिद्धाश्रम गमन दीक्षा : 3 मार्च : एक अद्भुत आध्यात्मिक दीक्षा
भारतीय आध्यात्मिक और पौराणिक परंपराओं में 'सिद्धाश्रम' एक अत्यंत रहस्यमयी, पवित्र और दिव्य स्थान माना गया है। इसे सिद्ध पुरुषों, ऋषियों और योगियों की तपोभूमि कहा जाता है।
सिद्धाश्रम को हिमालय के किसी अज्ञात और अगम्य क्षेत्र में माना जाता है, जो सामान्य मनुष्यों की दृष्टि से ओझल है। कुछ मान्यताओं के अनुसार यह मानसरोवर और कैलाश पर्वत के पास स्थित है।
इसे सिद्धों की भूमि माना जाता है । यहाँ आज भी उच्च कोटि के योगी, ऋषि और 'सिद्ध' सूक्ष्म शरीर में निवास करते हैं। जिनमे अलग स्वर्ग की रचना करने वाले महर्षि विश्वामित्र से लेकर सप्त ऋषि तथा कृपाचार्य जैसे विशिष्ट मृत्युंजयी वहाँ आते हैं ।
मान्यताओं और योगियों के अनुभव के अनुसार, सिद्धाश्रम का वातावरण सांसारिक दुनिया से बिल्कुल अलग है । यहाँ सूर्य या चंद्रमा के प्रकाश की तरह नहीं, बल्कि एक निरंतर दिव्य आध्यात्मिक आभा फैली रहती है। यहाँ स्थित सिद्धयोगा झील, वृक्ष और पशु-पक्षी सभी चैतन्य और दिव्य माने जाते हैं। यहाँ कल्पवृक्ष भी है । यहाँ का वातावरण हमेशा सुगंधित और शांत रहता है। सिद्धाश्रम में समय का प्रभाव नहीं पड़ता; यहाँ रहने वाले योगी सैकड़ों वर्षों तक युवा और स्वस्थ रहते हैं।
सिद्धाश्रम की विशिष्टता और और वहां निवास करने वाले दिव्य ऋषियों के बारे में जानना किसी आध्यात्मिक यात्रा से कम नहीं है। सिद्धाश्रम को 'ब्रह्मांड का हृदय' माना जाता है, जहाँ से इस सृष्टि की आध्यात्मिक ऊर्जा संचालित होती है।
जिन साधकों को विशिष्ट योगियों के द्वारा स्वप्न या सूक्ष्म रूप मे दीक्षा मिलती है वे योगी और सिद्ध यहीं से निर्देशित होते हैं ।
सद्गुरुदेव डॉ. नारायण दत्त श्रीमाली (परमहंस स्वामी निखिलेश्वरानंद) ने अपने साहित्य में सिद्धाश्रम का विस्तृत वर्णन किया है। यह स्थान आत्म-साक्षात्कार, मंत्र सिद्धि और उच्च स्तरीय आध्यात्मिक शक्तियों को प्राप्त करने का सर्वोच्च केंद्र माना जाता है। उन्होंने सिद्धाश्रम के संचालक प्रातः स्मरणीय दादा गुरुदेव परमहंस स्वामी सच्चिदानन्द जी के विषय मे लिखा है कि वे दस हजार से भी ज्यादा वर्ष की आयु प्राप्त हैं । उन्होने पिछले दस हजार वर्षों मे केवल तीन शिष्य बनाए हैं, जिसमे तीसरे शिष्य वे स्वयं हैं । प्रवेश की पात्रता के विषय मे सद्गुरुदेव ने बताया था कि केवल एक समर्थ सद्गुरु ही अपने शिष्य को सूक्ष्म मार्ग से सिद्धाश्रम की यात्रा करा सकते हैं या वहाँ प्रवेश दिला सकते हैं।
उनकी प्रिय शिष्य हैं गुरु माता डॉ साधना सिंह !
वे उनके साथ सिद्धाश्रम जा चुकी हैं और किसी शिष्य को वहाँ ले जाने का पूर्ण सामर्थ्य भी रखती हैं । यह अलग बात है कि वह इतनी सरल और सहज लगती है कि इस बात पर विश्वास करना बहुत मुश्किल लगता है। मैं पिछले 18 वर्षों से उनके साथ हूं । उनको और उनकी आध्यात्मिक क्षमताओं को मैंने बहुत करीब से देखा है; इसलिए मैं यह बात कह रहा हूं !
बाकी जैसा आप सोचना चाहें .....
गुरुमाता इस बार चन्द्र ग्रहण के अवसर पर पहली बार “सिद्धाश्रम गमन दीक्षा” प्रदान कर रही हैं ।
आप अगर अध्यात्म जगत की उच्चता को जानने के इच्छुक हैं और उसके सबसे उच्च सोपान तक पहुँचने की यात्रा करने के लिए मेहनत करने को तैयार हैं तो भोपाल जाकर गुरु माता डॉ साधना सिंह जी के श्री चरणों मे बैठकर इस दीक्षा को प्राप्त करें । उसके बाद गुरु मंत्र जाप नियमित करते रहें तो साल भर मे आपको विशिष्ट आध्यात्मिक अनुभव होने प्रारम्भ हो जाएँगे ......
अगर आप इच्छुक हों तो रेजिस्ट्रेशन के लिए संपर्क कर सकते हैं :-
श्री प्रशांत पाण्डेय
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