एक प्रयास सनातन धर्म[Sanatan Dharma] के महासमुद्र मे गोता लगाने का.....कुछ रहस्यमयी शक्तियों [shakti] से साक्षात्कार करने का.....गुरुदेव Dr. Narayan Dutt Shrimali Ji [ Nikhileswaranand Ji] की कृपा से प्राप्त Mantra Tantra Yantra विद्याओं को समझने का...... Kali, Sri Yantra, Laxmi,Shiv,Kundalini, Kamkala Kali, Tripur Sundari, Maha Tara ,Tantra Sar Samuchhay , Mantra Maharnav, Mahakal Samhita, Devi,Devata,Yakshini,Apsara,Tantra, Shabar Mantra, जैसी गूढ़ विद्याओ को सीखने का....
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6 अक्टूबर 2015
25 सितंबर 2015
बगलामुखी साधना
॥ॐ ह्लीं ॐ॥
इसमन्त्र का रात्रि 9 से 4 के बीच जाप करें।
हल्दी. पीली हकीक या रुद्राक्ष माला से जाप करें।
125000 जाप का एक पुरश्चरण होगा
ब्रह्मचर्य , सात्विक आचार,विचार,व्यवहार करें।
पीला आसन वस्त्र तथा दिशा उत्तर ।
24 सितंबर 2015
धूमावती मंत्रम
॥ धूं धूं धूमावती ठः ठः ॥
- सर्व बाधा निवारण हेतु.
- मंगल या शनिवार से प्रारंभ करें.
- ब्रह्मचर्य का पालन करें.
- सात्विक आहार तथा आचार विचार रखें.
- यथा संभव मौन रहें.
- अनर्गल प्रलाप और बकवास न करें.
- सफ़ेद वस्त्र पहनकर सफ़ेद आसन पर बैठ कर जाप करें.
- यथाशक्ति जाप जोर से बोल कर करें.
- बेसन के पकौडे का भोग लगायें.
- जाप के बाद भोग को निर्जन स्थान पर छोड कर वापस मुडकर देखे बिना लौट जायें.
- ११००० जाप करें. ११०० मंत्रों से हवन करें.मंत्र के आखिर में स्वाहा लगाकर हवन सामग्री को आग में छोडें. हवन की भस्म को प्रभावित स्थल या घर पर छिडक दें. शेष भस्म को नदी में प्रवाहित करें.
- जाप पूरा हो जाने पर किसी गरीब विधवा स्त्री को भोजन तथा सफ़ेद साडी दान में दें.
21 सितंबर 2015
17 सितंबर 2015
गणपति मन्त्रम - २
॥ ऊं वक्रतुन्डाय नमः ॥
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समस्त प्रकार की जटिलताओं के निवारण के लिये
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दिशा = उत्तर ।
वस्त्र = सफ़ेद ।
आसन = सफ़ेद ।
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जप सन्ख्या = २१,२१०,२१००,२१०००.
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समस्त प्रकार की जटिलताओं के निवारण के लिये
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दिशा = उत्तर ।
वस्त्र = सफ़ेद ।
आसन = सफ़ेद ।
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जप सन्ख्या = २१,२१०,२१००,२१०००.
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गणपति मन्त्रम - १
॥ ऊं गं गणपतये नमः ॥
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दिशा = उत्तर ।
वस्त्र = सफ़ेद ।
आसन = सफ़ेद ।
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जप सन्ख्या = २१,२१०,२१००,२१०००.
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दिशा = उत्तर ।
वस्त्र = सफ़ेद ।
आसन = सफ़ेद ।
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जप सन्ख्या = २१,२१०,२१००,२१०००.
लघु गणपति पूजनम
एक नन्हा सा गणपति पूजन प्रस्तुत है । इसे पन्चोपचार पूजन कहते हैं
ऊं गं गणपतये नमः गंधम समर्पयामि --- इत्र आदि चढायें ।
ऊं गं गणपतये नमः पुष्पम समर्पयामि --- फ़ूल
ऊं गं गणपतये नमः धूपम समर्पयामि -- अगरबत्ती
ऊं गं गणपतये नमः दीपम समर्पयामि -- दीपक जलायें
ऊं गं गणपतये नमः नैवेद्यम समर्पयामि -- प्रसाद चढायें
इसके बाद आरती कर लें
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