25 सितंबर 2023

पितृ स्तोत्र (गरुड पुराण)

पितृ स्तोत्र (गरुड पुराण)

अमूर्त्तानां च मूर्त्तानां पितृणां दीप्ततेजसाम

नमस्यामि सदा तेषां ध्यानिनां दिव्यचक्षुषाम !

इंद्रादीनां च नेतारो दक्षमारी चयोस्तथा !!

सप्तर्षीणां तथान्येषां तान नमस्यामि कामदान !

मन्वादीनां मुनींद्राणां सूर्य्यांचंद्रमसो तथा !!

तान नमस्यामि अहं सर्व्वान पितरश्च अर्णवेषु ये !

नक्षत्राणां ग्रहाणां च वायु अग्नि नभ तथा !!

द्यावा पृथ्वीव्योश्च तथा नमस्यामि कृतांजलि: !

देवर्षिणां ग्रहाणां च सर्वलोकनमस्कृतान !!

अभयस्य सदा दातृन नमस्येहं कृतांजलि:

नमो गणेभ्य: सप्तभ्यस्तथा लोकेषु सप्तसु ! !

स्वयंभुवे नमस्यामि ब्रम्हणे योग चक्षुषे !

सोमाधारान पितृगणान योगमूर्तिधरांस्तथा !!

नमस्यामि तथा सोमं पितरं जगतामहम !

अग्निरुपां तथैव अन्यान नमस्यामि पितृं अहं !!

अग्निसोममयं विश्वं यत एदतशेषत:

ये तु तेजसि ये चैते सोमसूर्य्याग्निमूर्तय:!!

जगत्स्वरुपिणश्चैव तथा ब्रह्मस्वरुपिण:

तेभ्यो अखिलेभ्यो योगिभ्य: पितृभ्यो यतमानसा: !

नमो नमो नमस्ते मे प्रसीदंतु स्वधाभुज: !!

आप इसका उच्चारण आडिओ मे यहाँ सुन सकते हैं । 
इसे सुनकर उच्चारण करने से धीरे धीरे धीरे गुरुकृपा से आपका उच्चारण स्पष्ट होता जाएगा :-

 

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अगर आपको संस्कृत में उच्चारण करने में दिक्कत हो तो आप इसका भावार्थ हिंदी में भी उच्चरित कर सकते हैं जो कि निम्नानुसार है


जो अमूर्त, अत्यन्त तेजस्वी, ध्यानी तथा दिव्यदृष्टि सम्पन्न हैं, उन पितरों को मैं सदा नमस्कार करता हूँ।


इन्द्र आदि देवताओं, दक्ष, मारीच, सप्तर्षियों तथा दूसरों के भी नायक हैं, सभी कामना की पूर्ति करने वाले उन पितरो को मैं प्रणाम करता हूँ।


मनु आदि राजर्षियों, मुनिश्वरों तथा सूर्य और चन्द्रमा के भी नायक समस्त पितरों को मैं जल और समुद्र में भी प्रणाम करता हूँ।


नक्षत्रों, ग्रहों, वायु, अग्नि, आकाश और द्युलोक तथा पृथ्वी के भी जो प्रमुख हैं, उन पितरों को मैं प्रणाम करता हूँ।


देवर्षियों के जन्मदाता, समस्त लोकों द्वारा वन्दित तथा सदा अक्षय फल के दाता, पितरों को मैं प्रणाम करता हूँ।


प्रजापति, कश्यप, सोम, वरूण तथा योगेश्वरों के रूप में स्थित पितरों को सदा प्रणाम करता हूँ।


सातों लोकों में स्थित सात पितृगणों को नमस्कार है। मैं योगदृष्टिसम्पन्न स्वयम्भू ब्रह्माजी को प्रणाम करता हूँ।


चन्द्रमा के आधार पर प्रतिष्ठित तथा योगमूर्तिधारी पितृगणों को मैं प्रणाम करता हूँ। 

सम्पूर्ण जगत् के पिता सोम को नमस्कार करता हूँ।

अग्निस्वरूप अन्य पितरों को मैं प्रणाम करता हूँ, क्योंकि यह सम्पूर्ण जगत् अग्नि और सोममय है।


जो पितर तेज में स्थित हैं, जो ये चन्द्रमा, सूर्य और अग्नि के रूप में दृष्टिगोचर होते हैं तथा जो जगत्स्वरूप एवं ब्रह्मस्वरूप हैं, उन सम्पूर्ण योगी पितरो को मैं एकाग्रचित्त होकर प्रणाम करता हूँ। 

समस्त पितरो को मैं बारम्बार नमस्कार करता हुआ उनकी कृपा का आकांक्षी हूं । 

वे स्वधाभोजी पितर मुझपर प्रसन्न हों। वह मुझ पर कृपालु हो और मेरे समस्त दोषों का प्रशमन करते हुए मुझे सर्व विध  अनुकूलता प्रदान करें .... 



विधि :-

एक थाली में भोजन तैयार करके रख ले तथा स्तोत्र का यथाशक्ति (1,3,7,9,11) पाठ करके किसी गाय को या किसी गरीब व्यक्ति को खिला दे । 


पितरॊं अर्थात मृत पूर्वजॊं की कृपा : सरल उपाय

  पितरॊं अर्थात मृत पूर्वजॊं की कृपा




श्राद्ध पक्ष में यथा सम्भव जाप करें ।

॥ ऊं सर्व पितरेभ्यो, मम सर्व शापं प्रशमय प्रशमय, सर्व दोषान निवारय निवारय, पूर्ण शान्तिम कुरु कुरु नमः ॥


पितृमोक्ष अमावस्या के दिन एक थाली में भोजन सजाकर सामने रखें।

108 बार जाप करें |

सभी ज्ञात अज्ञात पूर्वजों को याद करें , उनसे कृपा मागें |

ॐ शांति कहते हुए तीन बार पानी से थाली के चारों ओर गोल घेरा बनायें।

अपने पितरॊं को याद करके ईस थाली को गाय कॊ खिला दें।

 इससे पितरॊं अर्थात मृत पूर्वजॊं की कृपा आपकॊ प्राप्त होगी ।

पितृ पक्ष

  पितृ पक्ष






पितृ पक्ष में सभी लोग विधि विधान से पूजन नहीं कर पाते हैं । जो पितर पूजन करना चाहते हैं ,उनके लिए एक सरल विधि प्रस्तुत है जिसे आप आसानी से कर सकते है :-


|| ॐ सर्व पित्रेभ्यो नमः ||

Om sarva pitarebhyo namah 

 

भाव रखें कि - "मैं अपने सभी (ज्ञात और अज्ञात ) पूर्वजों को नमस्कार करता हूं तथा उनसे शांति की प्रार्थना करता हूं ।" 




आपके घर में जो भोजन बना हो उसे एक थाली में सजा लें .... 

उसको पूजा स्थान में अपने सामने रखकर इस मंत्र का १०८  बार जाप करें.


हाथ में पानी लेकर कहें " मेरे सभी ज्ञात अज्ञात पितरों की शांति हो " इसके बाद जल जमीन पर छोड़ दे.

अब उस थाली के भोजन को किसी गाय को या किसी गरीब भूखे को खिला दें. 

मन मे प्रार्थना करें कि " मेरे पूर्वजों को शांति प्राप्त हो ! 

 


24 सितंबर 2023

वक्रतुंडस्तोत्र

गणेश स्तुति

गणेश भगवान के हवन की सरल विधि

गणेश पंचोपचार पूजन

19 सितंबर 2023

श्री गणपति हवन

श्री गणपति हवन

गणपति विसर्जन से पहले सबकी इच्छा होती है कि गणपति हवन हो जाता तो अच्छा होता |

यदि किसी कारणवश आप किसी साधक /पंडित से हवन ना करवा सकें तो आपके लिए एक सरल हवन विधान प्रस्तुत है जो आप आसानी से स्वयम कर सकते हैं ।

किसी कुंड या बर्तन मे आप लकड़ी डालकर आग जला लें । बर्तन या कुंड को ईंट या रेत के ऊपर रखें 

ऊं अग्नये नमः ।
7 बार इस मन्त्र का जाप करें तथा आग जला लें ।

ऊं परम तत्वाय नारायणाय गुरुभ्यो नमः ।
21 बार इस मन्त्र का जाप करें ।

अग्नि जल जाए तब घी/ दशांग (हवन सामग्री ) से आहुति डालें |

ऊं अग्नये स्वाहा ......
7 आहुति अग्नि मे डालें

ऊं गं स्वाहा .....
1 आहुति अग्नि मे डालें

ऊं भैरवाय स्वाहा .....
11 आहुति अग्नि मे डालें

ऊं परम तत्वाय नारायणाय गुरुभ्यो नमः स्वाहा .....
21 आहुति अग्नि मे डालें

ॐ प्रचंड चंडिकायै स्वाहा –
9 बार अपने मस्तक को स्पर्श करते हुए आहुति डालें ।

अब अपनी मनोकामना भगवान् गणपति के समक्ष निवेदन मन में या बोलकर करें

ऊं गं गणपतये स्वाहा .....
108 बार ह्रदय को स्पर्श करते हुए आहुति डालें

अन्त में कहें कि गणपति भगवान की कृपा मुझे प्राप्त हो....

दोनों कान पकड़कर सभी गलतियों के लिये क्षमा मांगे.....

तीन बार पानी छिडककर शांति शांति शांति ऊं कहें.....

संभव हो तो किसी गरीब बच्चे को भोजन/मिठाई/दान अवश्य दें

श्री विघ्नराज गणपति का हवन

श्री विघ्नराज गणपति का हवन

गणपति विसर्जन से पहले सबकी इच्छा होती है कि गणपति हवन हो जाता तो अच्छा होता |

यदि किसी कारणवश आप किसी साधक /पंडित से हवन ना करवा सकें तो आपके लिए एक सरल हवन विधान प्रस्तुत है जो आप आसानी से स्वयम कर सकते हैं ।

किसी कुंड या बर्तन मे आप लकड़ी डालकर आग जला लें । बर्तन या कुंड को ईंट या रेत के ऊपर रखें 

ऊं अग्नये नमः ।
7 बार इस मन्त्र का जाप करें तथा आग जला लें ।

ऊं परम तत्वाय नारायणाय गुरुभ्यो नमः ।
21 बार इस मन्त्र का जाप करें ।

अग्नि जल जाए तब घी/ दशांग (हवन सामग्री ) से आहुति डालें |

ऊं अग्नये स्वाहा ......
7 आहुति अग्नि मे डालें

ऊं गं स्वाहा .....
1 आहुति अग्नि मे डालें

ऊं भैरवाय स्वाहा .....
11 आहुति अग्नि मे डालें

ऊं परम तत्वाय नारायणाय गुरुभ्यो नमः स्वाहा .....
21 आहुति अग्नि मे डालें

ॐ प्रचंड चंडिकायै स्वाहा –
9 बार अपने मस्तक को स्पर्श करते हुए आहुति डालें ।

अब अपनी मनोकामना भगवान् गणपति के समक्ष निवेदन मन में या बोलकर करें

ऊं गं गणपतये स्वाहा .....
108 बार ह्रदय को स्पर्श करते हुए आहुति डालें

अन्त में कहें कि गणपति भगवान की कृपा मुझे प्राप्त हो....

दोनों कान पकड़कर सभी गलतियों के लिये क्षमा मांगे.....

तीन बार पानी छिडककर शांति शांति शांति ऊं कहें.....

संभव हो तो किसी गरीब बच्चे को भोजन/मिठाई/दान अवश्य दें

पन्चोपचार गणपतिपूजन

  


एक नन्हा सा गणपति पूजन प्रस्तुत है ।
इसे पन्चोपचार गणपतिपूजन कहते हैं





ऊं गं गणपतये नमः गंधम समर्पयामि --- इत्र आदि चढायें ।

ऊं गं गणपतये नमः पुष्पम समर्पयामि ---  फ़ूल 

ऊं गं गणपतये नमः धूपम समर्पयामि -- अगरबत्ती

ऊं गं गणपतये नमः दीपम समर्पयामि -- दीपक जलायें

ऊं गं गणपतये नमः नैवेद्यम समर्पयामि -- प्रसाद चढायें

इसके बाद आरती कर लें