7 अप्रैल 2024

भगवती बगलामुखी की साधना के सामान्य नियम

   


भगवती बगलामुखि की साधना सामान्यतः शत्रुनाश और मुकदमों में विजय प्राप्ति के लिये की जाती है.इस साधना के सामान्य नियम :-

  1. साधक को सात्विक आचार तथा व्यवहार रखना चाहिये.
  2. साधना काल में पीले रंग के वस्त्र तथा आसन का उपयोग करॆं.
  3. साधना रात्रिकालीन है अर्थात रात्रि ९ से सुबह ४ के मध्य मन्त्र जाप करें.
  4. साधनाकाल में क्रोध ना करें.
  5. साधना काल में यथासंभव ब्रह्मचर्य का पालन करें.
  6. साधनाकाल में किसी स्त्री का अपमान ना करें.
  7. हल्दी या पीली हकीक की माला से जाप करें.
  8. साधना करने से पहले गुरु दीक्षा और बगलामुखी दीक्षा ले लें  । 
  9. गुरु से अनुमति लेकर ही यह साधना करें. 
  10. यह साधना उग्र साधना है इसलिये नन्हे बालक तथा कमजोर मानसिक स्थिति वाले इस साधना को ना करें.
  11. सामान्यतः सवा लाख जाप का पुरश्चरण तथा १२५०० मन्त्रों से हवन किया जाना अपेक्षित है.
  12. हवन पीली सरसों से किया जायेगा.

सूर्यग्रहण विशेष - तारा शाबर मंत्र

   

सूर्यग्रहण विशेष - तारा शाबर मंत्र



ॐ आदि योग अनादि माया । 
जहाँ पर ब्रह्माण्ड उत्पन्न भया ।
ब्रह्माण्ड समाया । 

आकाश मण्डल । 
तारा त्रिकुटा तोतला माता तीनों बसै । 

ब्रह्म कापलिजहाँ पर ब्रह्मा विष्णु महेश उत्पत्तिसूरज मुख तपे । 
चंद मुख अमिरस पीवे
अग्नि मुख जले
आद कुंवारी हाथ खण्डाग गल मुण्ड माल
मुर्दा मार ऊपर खड़ी देवी तारा । 
नीली काया पीली जटा
काली दन्त में जिह्वा दबाया । 
घोर तारा अघोर तारा
दूध पूत का भण्डार भरा । 
पंच मुख करे हा हा ऽऽकारा
डाकिनी शाकिनी भूत पलिता 
सौ सौ कोस दूर भगाया । 
चण्डी तारा फिरे ब्रह्माण्डी 
तुम तो हों तीन लोक की जननी ।

तारा मंत्र
ॐ ऐं ह्रीं स्त्रीं हूँ फट्

विधि :-
  1. रात्री काल मे जाप करें । ग्रहण काल मे जाप करने से विशेष लाभदायक है । 
  2. अपनी क्षमतानुसार 1,11,21,51,108 बार । 
  3. व्यापार और आर्थिक समृद्धि के लिए लाभदायक । 
  4. जप काल मे किसी स्त्री का अपमान न करें । 

सूर्य ग्रहण विशेष – व्यापार वृद्धि साधना

  सूर्य ग्रहण विशेष – व्यापार वृद्धि साधना


आवश्यक वस्तुएं :-
Ø श्री यंत्र छोटा साइज का जिसे आप अपनी जेब , पर्स,या बेग मे रख सकें ।
Ø केसर  




दिनांक 08.04,2024  को सूर्यग्रहण है । समय केलेण्डर या गूगल से देख लें ।

। । ॐ श्रीं ॐ । ।

1.      लाल कपड़े मे अपने सामने श्री यंत्र एक थाली मे रख लें।
2.   केसर को पानी मे घोल लें ।
3.   इस मंत्र का एक जाप करें और एक केसर की बिंदी श्री यंत्र पर लगाएँ ।
4.   इस प्रकार 1008 बार करें ।
5.    उसके बाद उस यंत्र को अपने पर्स या बैग मे रख लें।
6.  अधिक लाभ के लिए इसका मानसिक जाप करते रहें ।

साधना मे रक्षा हेतु हनुमान शाबरमंत्र

 साधना मे रक्षा हेतु हनुमान शाबरमंत्र




· इस शाबर मंत्र को किसी शुभ दिन जैसे ग्रहण, होली, रवि पुष्य योग, गुरु पुष्य योग मे1008 बार जप कर सिद्ध कर ले ।

· इस मंत्र का जाप आप एकांत/हनुमान मंदिर/अपने घर मे करें |

· हनुमान जी का विधी विधान से पुजन करके 11 लड्डुओ का भोग लगा कर जप शुरू कर दे । जप समाप्त होने पर हनुमान जी को प्रणाम करे | त्रुटियों के लिए क्षमा प्रार्थना कर लें |

· जब भी आप कोई साधना करे |तो मात्र 7 बार इस मंत्र का जाप करके रक्षा घेरा बनाने से स्वयं हनुमान जी रक्षा करते है ।

· इस मंत्र का 7 बार जप कर के ताली बजा देने से भी पूर्ण तरह से रक्षाहोती है ।


इस मंत्र को सिद्ध करने के बाद रोज इस मंत्र की 1 माला जाप करने पर इसका तेज बढ़ता जाता है और टोना जादु साधक पर असर नही करते ।


मंत्र :-


॥ ओम नमो वज्र का कोठा, जिसमे पिंण्ड हमारा पैठा,

ईश्वर कुंजी ब्रम्हा का ताला, मेरे आठो अंग का यति हनुमंत वज्र वीर रखवाला ।




मंत्र तथा साधनाएं : व्हाट्सप्प चैनल

मंत्र तथा साधनाएं : व्हाट्सप्प चैनल 

सहश्राक्षरी लक्ष्मी मंत्र का उच्चारण

5 अप्रैल 2024

काल भैरव अष्टकम

काल भैरव अष्टकम

काल भैरव अष्टकम


देवराजसेव्यमानपावनांघ्रिपङ्कजं व्यालयज्ञसूत्रमिन्दुशेखरं कृपाकरम् ।

नारदादियोगिवृन्दवन्दितं दिगंबरं काशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे ॥ १॥

भानुकोटिभास्वरं भवाब्धितारकं परं नीलकण्ठमीप्सितार्थदायकं त्रिलोचनम् ।

कालकालमंबुजाक्षमक्षशूलमक्षरं काशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे ॥ २॥

शूलटंकपाशदण्डपाणिमादिकारणं श्यामकायमादिदेवमक्षरं निरामयम् ।

भीमविक्रमं प्रभुं विचित्रताण्डवप्रियं काशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे ॥ ३॥

भुक्तिमुक्तिदायकं प्रशस्तचारुविग्रहं भक्तवत्सलं स्थितं समस्तलोकविग्रहम् ।

विनिक्वणन्मनोज्ञहेमकिङ्किणीलसत्कटिं काशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे॥ ४॥

धर्मसेतुपालकं त्वधर्ममार्गनाशनं कर्मपाशमोचकं सुशर्मधायकं विभुम् ।

स्वर्णवर्णशेषपाशशोभितांगमण्डलं काशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे ॥ ५॥

रत्नपादुकाप्रभाभिरामपादयुग्मकं नित्यमद्वितीयमिष्टदैवतं निरंजनम् ।

मृत्युदर्पनाशनं करालदंष्ट्रमोक्षणं काशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे ॥ ६॥

अट्टहासभिन्नपद्मजाण्डकोशसंततिं दृष्टिपात्तनष्टपापजालमुग्रशासनम् ।

अष्टसिद्धिदायकं कपालमालिकाधरं काशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे ॥ ७॥

भूतसंघनायकं विशालकीर्तिदायकं काशिवासलोकपुण्यपापशोधकं विभुम् ।

नीतिमार्गकोविदं पुरातनं जगत्पतिं काशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे ॥ ८॥


विधि :-

सूर्यग्रहण के अवसर पर 108 पाठ करें ।

यह सभी प्रकार के पूजन के पूर्व रक्षा के लिए उपयोगी है।

विभिन्न प्रकार के रक्षा प्रयोगों मे किया जा सकता है ।