6 जुलाई 2025

ऑनलाइन पूजन मे भाग लेकर दीक्षा प्राप्त करें गुरुपूर्णिमा पर

                                    

महाविद्या साधक परिवार(एक विराट, भव्य एवं दिव्य गुरु श्रृंखला)




जगद्गुरु भगवान शिव

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भगवान वेद व्यास

गौड पादाचार्य 
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[1871-1953]


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[1907-1982]
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गुरुमाता डॉ . साधना सिंह  जी                                                                       गुरुदेव स्वामी सुदर्शन नाथ जी
                                                                                                       
जानकारी स्त्रोत -  साधना सिद्धि विज्ञान जुलाई २००५ पेज ७०

भगवान वेद व्यास के शिष्य रहे गौडपादाचार्य, गौड पादाचार्य के शिष्य रहे गोविन्दपाद, गोविन्दपाद आदि शंकराचार्य के गुरु रहे हैं। जगद्गुरु शंकराचार्य जी ने सनातन धर्म की प्रचार के लिए 4 मठ की स्थापना की, जिसमें शंकराचार्य की इस श्रृंखला में ब्रह्मानंद सरस्वती जी ज्योतिर्मय पीठ पर बैठे। ब्रह्मानंद सरस्वती जी के दो प्रमुख शिष्य हुए, इनमें से एक महेश योगी एवं एक धर्म सम्राट करपात्री जी महराज। करपात्री जी महाराज ने सद्गुरुदेव डॉ. नारायण दत्त श्रीमाली जी (स्वामी निखिलेश्वरानंद जी) को तंत्र दीक्षा, 10 महाविद्या दीक्षा ,श्री विद्या जैसी अनेकों दीक्षाएं प्रदान की।

परमहंस स्वामी निखिलेश्वरानंद महाराज द्वारा अपने आध्यात्मिक जीवन में भारत एवं सुदूर के असंख्य लोगों को दीक्षा प्रदान कर अनेकों उत्कृष्ट शिष्यों का निर्माण किया ।श्री निखिलेश्वरानंद महाराज द्वारा दीक्षित एवं परिष्कृत शिष्यों में से हमारे पूज्य गुरुदेव श्री सुदर्शन नाथ जी एवं पूज्य गुरु माता डॉक्टर साधना जी हैं । 

पूज्य गुरुदेव सुदर्शन नाथ जी एवं गुरु माता डॉक्टर साधना जी द्वारा भोपाल मे साधकों के लिए महाविद्या साधक परिवार की स्थापना की गई । भोजपुर नामक स्थान पर निखिलधाम नामक एक अत्यंत प्रचंड सिद्ध शक्तिपीठ का निर्माण किया गया है जिसमे दस महाविद्याओं और भगवान क्षाराभ के साथ साथ परमहंस स्वामी निखिलेश्वरनन्द जी का दिव्य मंदिर भी स्थापित है । 

निखिल भगवान की सूक्ष्म उपस्थिति में गुरुदेव श्री सुदर्शननाथ एवं गुरुमाता डॉ साधना के साथ गुरुपूर्णिमा महोत्सव दिनाँक 10/07/2025 को मनाया जा रहा है । जिसके अंतर्गत वर्तमान में वैवश्विक परिदृश्य को देखते हुए शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक रूप से कवचित करने के लिए दस महाविद्या खड्ग माला प्रयोग एवं कवच शिष्यों को प्रदान की जाएगी।

संपर्क :- 

🔴 प्रशांत पांड़े (दिल्ली) 8800458271 🟠 रजनीश आचार्य (छिंदवाड़ा) 9425146518 🟠 देवेन्द्र उइके (नागपुर): 9096078410 🟡मनोहर सरजाल (छत्तीसगढ़)+91 90091 60861 🟡सचिन किसवे (लातूर)+91 93257 77190 🟠 सुभाष शर्मा (उदयपुर) 9929140845 🟡प्रेमजीत सिंह (पटना)+91 87574 02620 🟡विनयशर्मा(गुना)9685224686 🔴कपिल वास्पत (इंदौर) 9179050735 🔵रणजीत अन्कुलगे (उदगीर) 9923440540 🟡विनय शर्मा ( अयोध्या)09235712271 🟢करुणेश कर्ण (पटना)+91 98522 84595 🟣स्वाति शर्मा (गाजियाबाद) 9958862952,9354101677 🔵सन्तोष नागतोडे (मोइझिरि) 9301107239 🟠 कार्यालय भोपाल 0755-4269368

रुद्राक्ष : एक अद्भुत आध्यात्मिक फल

 


रुद्राक्ष : एक अद्भुत आध्यात्मिक फल 


रुद्राक्ष दो शब्दों से मिलकर बना है रूद्र और अक्ष । 

रुद्र = शिव, अक्ष = आँख 

ऐसा माना जाता है कि भगवान शिव के आंखों से गिरे हुए आनंद के आंसुओं से रुद्राक्ष के फल की उत्पत्ति हुई थी । 

रुद्राक्ष एक मुखी से लेकर इक्कीस मुखी तक पाए जाते हैं । 

रुद्राक्ष साधकों के लिए एक महत्वपूर्ण चीज है लगभग सभी साधनाओं में रुद्राक्ष की माला को स्वीकार किया जाता है एक तरह से आप इसे माला के मामले में ऑल इन वन कह सकते हैं 


अगर आप तंत्र साधनाएं करते हैं या किसी की समस्या का समाधान करते हैं तो आपको रुद्राक्ष की माला अवश्य पहननी चाहिए ।


यह एक तरह की आध्यात्मिक बैटरी है जो आपके मंत्र जाप और साधना के द्वारा चार्ज होती रहती है और वह आपके इर्द-गिर्द एक सुरक्षा घेरा बनाकर रखती है जो आपकी रक्षा तब भी करती है जब आप साधना से उठ जाते हैं और यह रक्षा मंडल आपके चारों तरफ दिनभर बना रहता है ।

पंचमुखी रुद्राक्ष सबसे सुलभ और सस्ते होते हैं । जैसे जैसे मुख की संख्या कम होती जाती है उसकी कीमत बढ़ती जाती है । एक मुखी रुद्राक्ष सबसे दुर्लभ और सबसे महंगे रुद्राक्ष है । इसी प्रकार से पांच मुखी रुद्राक्ष के ऊपर मुख वाले रुद्राक्ष की मुख की संख्या के हिसाब से उसकी कीमत बढ़ती जाती है । 21 मुखी रुद्राक्ष भी बेहद दुर्लभ और महंगे होते हैं ।

पांच मुखी रुद्राक्ष सामान्यतः हर जगह उपलब्ध हो जाता है और आम आदमी उसे खरीद भी सकता है पहन भी सकता है । पाँच मुखी रुद्राक्ष के अंदर भी आध्यात्मिक शक्तियों को समाहित करने के गुण होते हैं ।


गृहस्थ व्यक्ति , पुरुष या स्त्री , पांच मुखी रुद्राक्ष की माला धारण कर सकते हैं और अगर एक दाना धारण करना चाहे तो भी धारण कर सकते हैं ।

रुद्राक्ष की माला से बीपी में भी अनुकूलता प्राप्त होती है


रुद्राक्ष पहनने के मामले में सबसे ज्यादा लोग नियमों की चिंता करते हैं ।

मुझे ऐसा लगता है कि जैसे भगवान शिव किसी नियम किसी सीमा के अधीन नहीं है, उसी प्रकार से उनका अंश रुद्राक्ष भी परा स्वतंत्र हैं । उनके लिए किसी प्रकार के नियमों की सीमा का बांधा जाना उचित नहीं है


रुद्राक्ष हर किसी को सूट नहीं करता यह भी एक सच्चाई है और इसका पता आपको रुद्राक्ष की माला पहनने के महीने भर के अंदर चल जाएगा । अगर रुद्राक्ष आपको स्वीकार करता है तो वह आपको अनुकूलता देगा ।

आपको मानसिक शांति का अनुभव होगा आपको अपने शरीर में ज्यादा चेतना में महसूस होगी......

आप जो भी काम करने जाएंगे उसमें आपको अनुकूलता महसूस होगी ....

ऐसी स्थिति में आप रुद्राक्ष को धारण कर सकते हैं वह आपके लिए अनुकूल है !!!


इसके विपरीत स्थितियाँ होने से आप समझ जाइए कि आपको रुद्राक्ष की माला नहीं पहननी है ।


इसके बाद सबसे ज्यादा संशय की बात होती है कि रुद्राक्ष असली है या नहीं है । आज के युग में 100% शुद्धता की बात करना बेमानी है । ऑनलाइन में कई प्रकार के सर्टिफाइड रुद्राक्ष भी उपलब्ध है । उनमें से भी कई नकली हो सकते हैं, ऐसी स्थिति में मेरे विचार से आप किसी प्रामाणिक गुरु से या आध्यात्मिक संस्थान से रुद्राक्ष प्राप्त करें तो ज्यादा बेहतर होगा ।




तमिलनाडु में कोयंबटूर नामक स्थान पर सद्गुरु के नाम से लोकप्रिय आध्यात्मिक संत जग्गी वासुदेव जी के द्वारा ईशा फाउंडेशन नामक एक संस्था की स्थापना की गई है । जो आदियोगी अर्थात भगवान शिव के गूढ़ रहस्यों को जन जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर गतिशील है । उनके द्वारा एक अद्भुत और संभवतः विश्व के सबसे बड़े पारद शिवलिंग की स्थापना भी की गई है । यही नहीं एक विशालकाय आदियोगी भगवान शिव की प्रतिमा का भी निर्माण किया गया है , जिसके प्रारंभ के उत्सव में स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी भी उपस्थित थे ।


ईशा फाउंडेशन के द्वारा कुछ विशेष अवसरों पर निशुल्क प्राण प्रतिष्ठित रुद्राक्ष भी उपलब्ध कराए जाते हैं जैसा कि शिवरात्रि के अवसर पर इस वर्ष किया गया था ।


इसके अलावा रुद्राक्ष की छोटे मनको वाली और बड़े मनको वाली माला जोकि सदगुरुदेव द्वारा प्राण प्रतिष्ठित होती है, वह आप ऑनलाइन प्राप्त कर सकते हैं । ज्यादा जानकारी के लिए आप ईशा फाउंडेशन गूगल में सर्च करके देख सकते हैं ।

उनकी वेबसाइट का एड्रेस है . 

https://www.ishalife.com/in/


5 जुलाई 2025

गुरुदेव स्वामी सुदर्शन नाथ जी : एक प्रचंड तंत्र साधक

गुरुदेव स्वामी सुदर्शन नाथ जी : एक प्रचंड तंत्र साधक



साधना का क्षेत्र अत्यंत दुरुह तथा जटिल होता है. इसी लिये मार्गदर्शक के रूप में गुरु की अनिवार्यता स्वीकार की गई है.
गुरु दीक्षा प्राप्त शिष्य को गुरु का प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष मार्गदर्शन प्राप्त होता रहता है.
बाहरी आडंबर और वस्त्र की डिजाइन से गुरू की क्षमता का आभास करना गलत है.
एक सफ़ेद धोती कुर्ता पहना हुआ सामान्य सा दिखने वाला व्यक्ति भी साधनाओं के क्षेत्र का महामानव हो सकता है यह गुरुदेव स्वामी सुदर्शन नाथ जी से मिलकर मैने अनुभव किया.

भैरव साधना से शरभेश्वर साधना तक.......
कामकला काली से लेकर त्रिपुरसुंदरी तक .......
अघोर साधनाओं से लेकर तिब्बती साधना तक....
महाकाल से लेकर महासुदर्शन साधना तक सब कुछ अपने आप में समेटे हुए निखिल तत्व के जाज्वल्यमान पुंज स्वरूप...
गुरुदेव स्वामी सुदर्शननाथ जी
महाविद्या त्रिपुर सुंदरी के सिद्धहस्त साधक हैं.वर्तमान में बहुत कम महाविद्या सिद्ध साधक इतनी सहजता से साधकों के मार्गदर्शन के लिये उपलब्ध हैं.

आप चाहें तो उनसे संपर्क करके मार्गदर्शन ले सकते हैं :-

साधना सिद्धि विज्ञान
जास्मीन - 429
न्यू मिनाल रेजीडेंसी
जे. के. रोड , भोपाल [म.प्र.]
दूरभाष : (0755)
4269368,4283681,4221116

वेबसाइट:-

www.namobaglamaa.org


यूट्यूब चेनल :-

https://www.youtube.com/@MahavidhyaSadhakPariwar




🌹 गुरुपूर्णिमा महोत्सव 🌹 : ऑनलाइन दीक्षा एवं पूजन

                                   

महाविद्या साधक परिवार(एक विराट, भव्य एवं दिव्य गुरु श्रृंखला)




जगद्गुरु भगवान शिव

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भगवान वेद व्यास

गौड पादाचार्य 
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[1871-1953]


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[1907-1982]
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गुरुमाता डॉ . साधना सिंह  जी                                                                       गुरुदेव स्वामी सुदर्शन नाथ जी
                                                                                                       
जानकारी स्त्रोत -  साधना सिद्धि विज्ञान जुलाई २००५ पेज ७०

भगवान वेद व्यास के शिष्य रहे गौडपादाचार्य, गौड पादाचार्य के शिष्य रहे गोविन्दपाद, गोविन्दपाद आदि शंकराचार्य के गुरु रहे हैं। जगद्गुरु शंकराचार्य जी ने सनातन धर्म की प्रचार के लिए 4 मठ की स्थापना की, जिसमें शंकराचार्य की इस श्रृंखला में ब्रह्मानंद सरस्वती जी ज्योतिर्मय पीठ पर बैठे। ब्रह्मानंद सरस्वती जी के दो प्रमुख शिष्य हुए, इनमें से एक महेश योगी एवं एक धर्म सम्राट करपात्री जी महराज। करपात्री जी महाराज ने सद्गुरुदेव डॉ. नारायण दत्त श्रीमाली जी (स्वामी निखिलेश्वरानंद जी) को तंत्र दीक्षा, 10 महाविद्या दीक्षा ,श्री विद्या जैसी अनेकों दीक्षाएं प्रदान की।

परमहंस स्वामी निखिलेश्वरानंद महाराज द्वारा अपने आध्यात्मिक जीवन में भारत एवं सुदूर के असंख्य लोगों को दीक्षा प्रदान कर अनेकों उत्कृष्ट शिष्यों का निर्माण किया ।श्री निखिलेश्वरानंद महाराज द्वारा दीक्षित एवं परिष्कृत शिष्यों में से हमारे पूज्य गुरुदेव श्री सुदर्शन नाथ जी एवं पूज्य गुरु माता डॉक्टर साधना जी हैं । 

पूज्य गुरुदेव सुदर्शन नाथ जी एवं गुरु माता डॉक्टर साधना जी द्वारा भोपाल मे साधकों के लिए महाविद्या साधक परिवार की स्थापना की गई । भोजपुर नामक स्थान पर निखिलधाम नामक एक अत्यंत प्रचंड सिद्ध शक्तिपीठ का निर्माण किया गया है जिसमे दस महाविद्याओं और भगवान क्षाराभ के साथ साथ परमहंस स्वामी निखिलेश्वरनन्द जी का दिव्य मंदिर भी स्थापित है । 

निखिल भगवान की सूक्ष्म उपस्थिति में गुरुदेव श्री सुदर्शननाथ एवं गुरुमाता डॉ साधना के साथ गुरुपूर्णिमा महोत्सव दिनाँक 10/07/2025 को मनाया जा रहा है । जिसके अंतर्गत वर्तमान में वैवश्विक परिदृश्य को देखते हुए शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक रूप से कवचित करने के लिए दस महाविद्या खड्ग माला प्रयोग एवं कवच शिष्यों को प्रदान की जाएगी।

संपर्क :- 

🔴 प्रशांत पांड़े (दिल्ली) 8800458271 🟠 रजनीश आचार्य (छिंदवाड़ा) 9425146518 🟠 देवेन्द्र उइके (नागपुर): 9096078410 🟡मनोहर सरजाल (छत्तीसगढ़)+91 90091 60861 🟡सचिन किसवे (लातूर)+91 93257 77190 🟠 सुभाष शर्मा (उदयपुर) 9929140845 🟡प्रेमजीत सिंह (पटना)+91 87574 02620 🟡विनयशर्मा(गुना)9685224686 🔴कपिल वास्पत (इंदौर) 9179050735 🔵रणजीत अन्कुलगे (उदगीर) 9923440540 🟡विनय शर्मा ( अयोध्या)09235712271 🟢करुणेश कर्ण (पटना)+91 98522 84595 🟣स्वाति शर्मा (गाजियाबाद) 9958862952,9354101677 🔵सन्तोष नागतोडे (मोइझिरि) 9301107239 🟠 कार्यालय भोपाल 0755-4269368

4 जुलाई 2025

गुरु श्रंखला

 जगद्गुरु भगवान शिव







भगवान वेद व्यास


गौड पादाचार्य [शंकराचार्य जी के गुरु ]


जगद्गुरु आदि शंकराचार्य 



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[1871-1953]


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[1907-1982]
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गुरुमाता डॉ . साधना सिंह  जी                                                                       गुरुदेव स्वामी सुदर्शन नाथ जी
                                                                                                       
जानकारी स्त्रोत -  साधना सिद्धि विज्ञान जुलाई २००५ पेज ७०

गुरु पूर्णिमा : ऑनलाइन शिविर


 

3 जुलाई 2025

पूज्यपाद गुरुदेव : स्मरणांजली

   


-:निखिलम शरणम :-


डॉ. नारायण दत्त श्रीमाली जी (परमहंस स्वामी निखिलेश्वरानंद जी)

    तन्त्र, मन्त्र, यन्त्र के सिद्धहस्त आचार्य, ज्योतिष के प्रकांड विद्वान, कर्मकांड के पुरोधा, प्राच्य विद्याओं के विश्वविख्यात पुनरुद्धारक,अनगिनत ग्रन्थों के रचयिता तथा पूरे विश्व में फ़ैले हुए करोडों शिष्यों को साधना पथ पर उंगली पकडकर चलाने वाले मेरे परम आदरणीय गुरुवर.....
शिव स्वरूप गुरुदेव के लिये सिर्फ़ यही कहा जा सकता है कि....

असित-गिरि-समं स्यात् कज्जलं सिन्धु-पात्रे।
सुर-तरुवर-शाखा लेखनी पत्रमुर्वी।।
लिखति यदि गृहीत्वा शारदा सर्वकालं।
तदपि तव गुणानामीश पारं न याति।। 
अर्थात :- 
यदि समुद्र रूपी दवात में काले पर्वतों को घिसकर उसकी स्याही बना दी जाये, स्वर्ग लोक के दिव्य कल्पवृक्ष की शाखाओं को तोड़ तोड़कर कलम बनाई जाए, पूरी पृथ्वी को कागज के समान प्रयोग किया जाए और स्वयं विद्या की अधिष्ठात्री देवी सरस्वती अनन्त काल तक लिखती रहें, तो भी हे शिव स्वरूप गुरुदेव ! आपके गुणों का पार नहीं पाया जा सकता ।



२ जुन १९९२ 


जब मैने परम पुज्य गुरुदेव डॉ. नारायण दत्त श्रीमाली जी [परमहंस स्वामी निखिलेश्वरानंद जी ] से दीक्षा ली तब से आज तक मै गुरु कृपा से साधना के मार्ग पर गतिशील हूं.

अक्टूबर - १९९३

जब गुरुदेव भिलाई की धरती पर पधारे.....


.....

.....

जब जब मेरे कदम लडखडाये गुरुवर की कृपा सदैव मुझपर बनी रही.जो मेरे जीवन का आधार है.

3 जुलाई 1998

एक अपूरणीय क्षति का दिन जब मेरे गुरुवर ने अपनी भौतिक देह का त्याग किया .एक ममता भरा वात्सल्यमय साथ जो नही रहा......... ऐसा लगा जैसे सब कुछ छूट गया ..... सब कुछ समाप्त हो गया ..... 
 

और फ़िर.......

गुरु देह की सीमा से परे होते हैं यह एह्सास गुरुवर ने करा दिया और फिर यह बालक निश्चिंत होकर निकल पडा खेल के मैदान में........

वो स्पर्श : जिसने जिंदगी बदल दी ........

33 वर्ष पहले जब गुरुदेव मिले ...... 

 

2 जुलाई 2025

गुरुदेव के आडिओ वीडियो प्रवचन : सबके लिये

  

गुरुदेव के आडिओ वीडियो प्रवचन : सबके लिये 




मेरे गुरुदेव डॉ नारायण दत्त श्रीमाली जी तंत्र तथा
आयुर्वेद के ख्याति प्राप्त विद्वान थे ।
उनका जन्म 21 अप्रेल सन 1935 को हुआ था ।
उनका देहांत 3 जुलाई 1998 में हो गया । 

उन्होंने विभिन्न विषयों पर लगभग डेढ़ सौ से ज्यादा
किताबें लिखी हैं ।
किताबों के विषय ज्योतिष और हस्तरेखा शास्त्र से लेकर
तंत्र और पारद विद्या तक विस्तृत है । 
विश्व का सर्वप्रथम तांत्रिक उपन्यास " शमशान भैरवी" 
उन्होंने ही लिखा था । 
जब वे किसी विषय पर बोलते थे ...
तो उस पर लगातार घंटों बोल लेते थे । 
ऐसा लगता था ....
जैसे उनके कंठ में साक्षात
भगवती सरस्वती विराजमान हो ।  

मंत्रों का और साधनाओं का
उनके पास अकूत भंडार था । 
जब वे तांत्रिक प्रयोग कराते थे...
तो 30-32 पेज के मंत्र ...
जिनको बोलने में लगभग
आधा से 1 घंटे का समय लगता है
वह बिना कोई कागज देखें बोल लेते थे ।
चारों वेद उनको कंठस्थ थे ..... 

उन्होंने अपने जीवन काल में
अनेक बड़ी-बड़ी हस्तियों को मार्गदर्शन दिया है । 
ज्योतिष के क्षेत्र में उनकी राय को
भारत का ज्योतिष जगत प्रमाणित मानता रहा है ....
भूतपूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से लेकर
भूतपूर्व राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा
और ड्रीम गर्ल हेमा मालिनी तक
उनके कई प्रतिष्ठित समर्थक रहे हैं । 

उनके कई प्रयोगों के ऑडियो और वीडियो आज भी उपलब्ध हैं
जिन्हें सुनकर आप लाभ उठा सकते हैं ।  

https://www.youtube.com/@Nikhileshwaranandji