एक प्रयास सनातन धर्म[Sanatan Dharma] के महासमुद्र मे गोता लगाने का.....कुछ रहस्यमयी शक्तियों [shakti] से साक्षात्कार करने का.....गुरुदेव Dr. Narayan Dutt Shrimali Ji [ Nikhileswaranand Ji] की कृपा से प्राप्त Mantra Tantra Yantra विद्याओं को समझने का...... Kali, Sri Yantra, Laxmi,Shiv,Kundalini, Kamkala Kali, Tripur Sundari, Maha Tara ,Tantra Sar Samuchhay , Mantra Maharnav, Mahakal Samhita, Devi,Devata,Yakshini,Apsara,Tantra, Shabar Mantra, जैसी गूढ़ विद्याओ को सीखने का....
Disclaimer
21 अप्रैल 2024
निखिल धाम [ परमहंस स्वामी निखिलेश्वरानन्द जी को समर्पित मंदिर ]
20 अप्रैल 2024
परम तेजस्वी गुरुदेव परमहंस स्वामी निखिलेश्वरानंद जी का तान्त्रोक्त मन्त्र
- यह परम तेजस्वी गुरुदेव परमहंस स्वामी निखिलेश्वरानंद जी का तान्त्रोक्त मन्त्र है.
- पूर्ण ब्रह्मचर्य / सात्विक आहार/आचार/विचार के साथ जाप करें.
- पूर्णिमा से प्रारंभ कर अगली पूर्णिमा तक करें.
- तीन लाख मंत्र का पुरस्चरण होगा.
- नित्य जाप निश्चित संख्या में करेंगे .
- रुद्राक्ष की माला से जाप होगा.
- जाप के बाद वह माला गले में धारण कर लेंगे.
- यथा संभव मौन रहेंगे.
- किसी पर क्रोध नहीं करेंगे.
- यह साधना उन लोगों के लिए है जो साधना के मार्ग पर आगे बढ़ना चाहते हैं.
- यह साधना आपके अन्दर शिवत्व और गुरुत्व पैदा करेगी.
- यह साधना वैराग्य की साधना है.
- यह साधना जीवन का सौभाग्य है.
- यह साधना आपको धुल से फूल बनाने में सक्षम है.
- इस साधना से श्रेष्ट कोई और साधना नहीं है.
19 अप्रैल 2024
हनुमान जी पर चोला चढ़ाने की सरल विधि
हनुमान जी पर चोला चढ़ाने की सरल विधि

- हनुमान जी पर सिन्दूर घोलकर लेप करने को चोला चढाना कहते हैं .
- हनुमान जी पर चोला चढाने के लिये सिन्दूर को तेल में घोलकर पूरी मूर्ति पर लेप किया जाता है.
- लेप करने के बाद उनके चरणों से सिन्दूर लेकर अपने माथे तथा हृदय पर लगाना चाहिये.कम से कम एक बार हनुमान चालीसा का पाठ अवश्य करें.
- यदि संभव हो तो सुंदर कांड का पाठ भी लाभदायक रहेगा.
- चोला चढाने से पहले कम से कम एक दिन का ब्रह्मचर्य जरूर रखें. चोला चढाने के बाद कम से कम एक दिन सात्विक आहार आचार व्यवहार रखें तो ज्यादा लाभ होगा.
साथ में बंदरों को चने या उनके पसंद की कोई सामग्री खिलाना भी लाभ प्रद होगा.
18 अप्रैल 2024
तान्त्रिक बीज मन्त्र युक्त हनुमान साधना
तान्त्रिक बीज मन्त्र युक्त हनुमान साधना
17 अप्रैल 2024
श्री हनुमान सरल हवन विधि
श्री हनुमान सरल हवन विधि
- पहले एक हवन कुंड या पात्र में लकडियां जमायें.
- अब उसमें "आं अग्नये नमः" मंत्र बोलते हुए आग लगायें.
- ७ बार "ॐ अग्नये स्वाहा" मंत्र से आहुति डालें.
- ३ बार "ॐ गं गणपतये स्वाहा" मंत्र से आहुति डालें.
- ३ बार "ॐ भ्रं भैरवाय स्वाहा" मंत्र से आहुति डालें.
- २१ बार "ॐ परम तत्वाय नारायणाय गुरुभ्यो नमः स्वाहा" मंत्र से आहुति डालें.
- 11 बार "ॐ जानकी वल्लभाय स्वाहा" मंत्र से आहुति डालें.
- अब जिस हनुमान मन्त्र का जाप कर रहे थे उस मन्त्र से स्वाहा लगाकर १०८ बार आहुति डालें.
- अंत में अपने दोनों कान पकडकर गलतियों के लिये क्षमा मांगे.
16 अप्रैल 2024
हनुमान जी के 108 नाम
हनुमान जी के 108 नाम
1 ॐ अक्षहन्त्रे नमः।
2 ॐ अन्जनागर्भ सम्भूताय नमः।
3 ॐ अशोकवनकाच्छेत्रे नमः।
4 ॐ आञ्जनेयाय नमः।
5 ॐ कपिसेनानायकाय नमः।
6 ॐ कपीश्वराय नमः।
7 ॐ कबळीकृत मार्ताण्डमण्डलाय नमः।
8 ॐ काञ्चनाभाय नमः।
9 ॐ कामरूपिणे नमः।
10 ॐ काराग्रह विमोक्त्रे नमः।
11 ॐ कालनेमि प्रमथनाय नमः।
12 ॐ कुमार ब्रह्मचारिणे नमः।
13 ॐ केसरीसुताय नमः।
14 ॐ गन्धमादन शैलस्थाय नमः।
15 ॐ गन्धर्व विद्यातत्वज्ञाय नमः।
16 ॐ चञ्चलाय नमः।
17 ॐ चतुर्बाहवे नमः।
18 ॐ चिरञ्जीविने नमः।
19 ॐ जाम्बवत्प्रीतिवर्धनाय नमः।
20 ॐ तत्वज्ञानप्रदाय नमः।
21 ॐ दशग्रीव कुलान्तकाय नमः।
22 ॐ दशबाहवे नमः।
23 ॐ दान्ताय नमः।
24 ॐ दीनबन्धुराय नमः।
25 ॐ दृढव्रताय नमः।
26 ॐ दैत्यकार्य विघातकाय नमः।
27 ॐ दैत्यकुलान्तकाय नमः।
28 ॐ धीराय नमः।
29 ॐ नवव्याकृतपण्डिताय नमः।
30 ॐ पञ्चवक्त्राय नमः।
31 ॐ परमन्त्र निराकर्त्रे नमः।
32 ॐ परयन्त्र प्रभेदकाय नमः।
33 ॐ परविद्या परिहाराय नमः।
34 ॐ परशौर्य विनाशनाय नमः।
35 ॐ पारिजात द्रुमूलस्थाय नमः।
36 ॐ पार्थ ध्वजाग्रसंवासिने नमः।
37 ॐ पिङ्गलाक्षाय नमः।
38 ॐ प्रतापवते नमः।
39 ॐ प्रभवे नमः।
40 ॐ प्रसन्नात्मने नमः।
41 ॐ प्राज्ञाय नमः।
42 ॐ बल सिद्धिकराय नमः।
43 ॐ बालार्कसद्रशाननाय नमः।
44 ॐ ब्रह्मास्त्र निवारकाय नमः।
45 ॐ भविष्यथ्चतुराननाय नमः।
46 ॐ भीमसेन सहायकृते नमः।
47 ॐ मनोजवाय नमः।
48 ॐ महाकायाय नमः।
49 ॐ महातपसे नमः।
50 ॐ महातेजसे नमः।
51 ॐ महाद्युतये नमः।
52 ॐ महाबल पराक्रमाय नमः।
53 ॐ महारावण मर्दनाय नमः।
54 ॐ महावीराय नमः।
55 ॐ मायात्मने नमः।
56 ॐ मारुतात्मजाय नमः।
57 ॐ योगिने नमः।
58 ॐ रक्षोविध्वंसकारकाय नमः।
59 ॐ रत्नकुण्डल दीप्तिमते नमः।
60 ॐ रामकथा लोलाय नमः।
61 ॐ रामचूडामणिप्रदायकाय नमः।
62 ॐ रामदूताय नमः।
63 ॐ रामभक्ताय नमः।
64 ॐ रामसुग्रीव सन्धात्रे नमः।
65 ॐ रुद्र वीर्य समुद्भवाय नमः।
66 ॐ लक्ष्मणप्राणदात्रे नमः।
67 ॐ लङ्कापुर विदायकाय नमः।
68 ॐ लन्किनी भञ्जनाय नमः।
69 ॐ लोकपूज्याय नमः।
70 ॐ वज्रकायाय नमः।
71 ॐ वज्रदेहाय नमः।
72 ॐ वज्रनखाय नमः।
73 ॐ वागधीशाय नमः।
74 ॐ वाग्मिने नमः।
75 ॐ वानराय नमः।
76 ॐ वार्धिमैनाक पूजिताय नमः।
77 ॐ जितेन्द्रियाय नमः।
78 ॐ विभीषण प्रियकराय नमः।
79 ॐ शतकन्टमुदापहर्त्रे नमः।
80 ॐ शरपञ्जर भेदकाय नमः।
81 ॐ शान्ताय नमः।
82 ॐ शूराय नमः।
83 ॐ शृन्खला बन्धमोचकाय नमः।
84 ॐ श्री राम हृदयस्थाये नमः
85 ॐ श्रीमते नमः।
86 ॐ संजीवननगायार्था नमः।
87 ॐ सर्वग्रहबाधा विनाशिने नमः।
88 ॐ सर्वतन्त्र स्वरूपिणे नमः।
89 ॐ सर्वदुखः हराय नमः।
90 ॐ सर्वबन्धविमोक्त्रे नमः।
91 ॐ सर्वमन्त्र स्वरूपवते नमः।
92 ॐ सर्वमायाविभंजनाय नमः।
93 ॐ सर्वयन्त्रात्मकाय नमः।
94 ॐ सर्वरोगहराय नमः।
95 ॐ सर्वलोकचारिणे नमः।
96 ॐ सर्वविद्या सम्पत्तिप्रदायकाय नमः।
97 ॐ सागरोत्तारकाय नमः।
98 ॐ सिंहिकाप्राण भञ्जनाय नमः।
99 ॐ सीतादेविमुद्राप्रदायकाय नमः।
100 ॐ सीतान्वेषण पण्डिताय नमः।
101 ॐ सीताशोक निवारकाय नमः।
102 ॐ सीतासमेत श्रीरामपाद सेवदुरन्धराय नमः।
103 ॐ सुग्रीव सचिवाय नमः।
104 ॐ सुचये नमः।
105 ॐ सुरार्चिताय नमः।
106 ॐ स्फटिकाभाय नमः।
107 ॐ हनूमते नमः।
108 ॐ हरिमर्कट मर्कटाय नमः।
इन नामों का उच्चारण करें नमः के साथ चावल, सिंदूर,पुष्प अर्पित करें ।
दुर्घटना में रक्षा प्रदायक हनुमान /मारुति यंत्र
दुर्घटना से बचाव के लिए : हनुमान मारुति यंत्र
वाहन यानि मोटर साइकल, स्कूटर, कार, आदि आज हमारे दैनिक जीवन का अभिन्न अंग बन गए हैं । जिनकी संख्या लगातार बढ़ती जा रही है । उसके साथ साथ दुर्घटनाओं की संख्या और संभावनाएं भी बढ़ती जा रही हैं । वाहन दुर्घटनाओं का होना जीवन में कई प्रकार के संकट और दुखद परिस्थितियों को निर्मित कर सकता है। इस प्रकार की दुर्घटनाएं आकस्मिक होती हैं और कई बार घातक भी हो सकती हैं ।
हम सावधानी से गाड़ी चलाएं, हेलमेट सीट बेल्ट का उपयोग करें , एयर बैग वाली गाड़ियों मे सफर करें तो नुकसान की संभावना कम होती जाती है । ये सारे रक्षा कारक उपाय हैं । जो आपके बड़े नुकसान को छोटा कर देता है , आपके प्राण बचा लेता है ।
कुछ आध्यात्मिक उपाय भी ऐसे हैं जो दुर्घटनाओं मे आपको सुरक्षा देने के लिए प्रयुक्त होते हैं ।
इसमे से एक सरल और सस्ता उपाय है श्री हनुमान/मारुति यंत्र ।
हनुमान जी को संकट मोचक कहा जाता है । उनका यंत्र आप अपने वाहन मे रखें या फिर अपने साथ जेब मे रखें तो यह हनुमान जी की कृपा से रक्षा प्रदायक माना गया है ।
श्री हनुमान/मारुति यंत्र आप चाहे तो दुकान से भी प्राप्त कर सकते हैं और उस पर पूजन करके अपनी जेब में या अपनी गाड़ी में रख सकते हैं । इसके लिए आप उसे सामने रखकर ११ बार हनुमान चालीसा का पाठ कर सकते हैं
यदि आप चाहें तो हनुमान/मारुति यंत्र इस हनुमान जन्मोत्सव (23 अप्रैल 2024) के अवसर पर आपके नाम से अभिमंत्रित करके मेरे पास से भी प्राप्त कर सकते हैं । यंत्र उसे धारण करने/रखने के निर्देशों तथा विधि के साथ , हनुमान जयंती के एक या दो दिन के बाद आपको स्पीड पोस्ट से भेज दिया जाएगा । जो समान्यतः एक हफ्ते मे आपके पास पोस्टमेन द्वारा पहुंचा दिया जाएगा । इसके लिए अपना पूरा पता पिन कोड और फोन नंबर जिसपर पोस्टमेन संपर्क कर सके अवश्य भेजें ।
दुर्घटना में रक्षा प्रदायक हनुमान /मारुति यंत्र प्राप्त करने के लिए आप अपना नाम, [जन्म तिथि, जन्म समय, जन्म स्थान, गोत्र ( यदि मालूम हो तो )], अपनी एक ताजा फोटो के साथ मेरे नंबर 7000630499 पर हनुमान जन्मोत्सव यानी 23 अप्रैल से पहले व्हाट्सएप्प कर दें ।
डाक व्यय सहित,यंत्र का पूजन शुल्क (₹ 251)दो सौ इक्यावन रुपए फोन पे, पेटीएम या गूगल पे से मेरे नंबर 7000630499 पर भेजकर उसकी रसीद भी उस के साथ व्हाट्सएप्प कर दें ।
नमस्काराष्टक
नमस्काराष्टक
ॐ नमो भगवते श्रीरामाय परमात्मने।
सर्वभूतान्तरस्थाय ससीताय नमो नमः ॥1॥
ॐ नमो भगवते श्रीराम चन्द्राय वेधसे।
सर्ववेदांतवेदाय ससीताय नमो नमः ॥2॥
ॐ नमो भगवते श्रीविष्णवे परमात्मने।
परात्पराय रामाय ससीताय नमो नमः॥ 3॥
ॐ नमो भगवते श्रीरघुनाथाय शांगिने।
चिन्मयानन्दरूपाय ससीताय नमो नमः ॥4॥
ॐ नमो भगवते श्रीराम श्रीकृष्णाय मकरिणे।
पूर्णज्ञानदेहाय ससीताय नमो नमः ॥5॥
ॐ नमो भगवते श्रीवासुदेवाय श्रीविष्णवे।
पूर्णानंदैकरूपाय ससीताय नमो नमः ॥6॥
ॐ नमो भगवते श्रीराम रामभद्राय वेधसे।
सर्वलोकशरणाय ससीताय नमो नमः ॥7॥
ॐ नमो भगवते श्रीरामयामिततेजसे।
ब्रह्मानन्दैकरूपाय ससीताय नमो नमः ॥8॥
मंगलप्रद श्रीरामसुप्रभातस्तोत्र
मंगलप्रद श्रीरामसुप्रभातस्तोत्र
विघ्नेश्वरः सकलविघ्नविनाशदक्षो दक्षात्मजा भगवती हि सरस्वती च। दृप्ताष्टभैरवगणा नव दिव्यदुर्गा देव्यः सुरास्तु नृपते तव सुप्रभातम् ।।
भानुः शशी कुजबुधौ गुरुशुक्रमन्दा राहुः सकेतुरदितिर्दितिरादितेयाः । शक्रादयः कमलभूः पुरुषोत्तमेन्द्रो रुद्रः करोतु सततं तव सुप्रभातम् ।।
पृथ्वी जलं ज्वलनमारुतपुष्कराणि सप्ताद्रयोऽपि भुवनानि चतुर्दशैव। शैला वनानि सरितः परितः पवित्रा गंगादयो विदधतां तव सुप्रभातम् ॥
दिक्चक्रमेतदखिलं दिगिभा दिगीशा नागाः सुपर्णभुजगा नगवीरुधश्च । पुण्यानि देवसदनानि बिलानि दिव्यान्यव्याहतं विदधतां तव सुप्रभातम् ॥
वेदाः षडंगसहिताः स्मृतयः पुराणं काव्यं सदागमपथो मुनयोऽपि दिव्याः। व्यासादयः परमकारुणिका ऋषीणां गोत्राणि वै विदधतां तव सुप्रभातम् ।।
'हे नृपते! समस्त विघ्नोंका निवारण करनेमें अत्यन्त कुशल विघ्नेश्वर भगवान् गणेश, दक्ष प्रजापतिकी पुत्री सती भगवती पार्वती, देवी सरस्वती, अभिमानी अष्टभैरव, नौ दिव्य दुर्गा, देवियाँ और समस्त देवता- ये सभी आपके प्रभातको मंगलमय बनायें। सूर्यनारायण, चन्द्रमा, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनैश्वर, राहु तथा केतु-ये नौ ग्रह, देवमाता अदिति, दैत्यमाता दिति, अदितिके पुत्र इन्द्रादि सभी देवता, कमलयोनि ब्रह्मा, पुरुषोत्तम विष्णु तथा भगवान् शिव-ये सभी आपके प्रभातको मंगलमय बनायें। पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश, सातों पर्वत, चौदह भुवन, सभी शैल, वन और गंग आदि पवित्र नदियाँ- ये सभी ओरसे आपके प्रभातको मंगलमय बनायें। समस्त दिशाएँ, समस्त दिशाओंके हाथी, समस्त दिक्पाल, नाग, सुपर्ण, सर्प, पर्वत, वनस्पतियाँ, पवित्र देवायतन तथा दिव्य गिरि-कन्दराएँ- ये सभी निर्विघ्नरूपसे आपके प्रभातको सर्वदा मंगलमय बनायें। शिक्षा, कल्प निरुक्त, व्याकरण, छन्द तथा ज्योतिष - इन षट् वेदांगोंके साथ ऋगादि सभी वेद, मन्वादि स्मृतिय भागवत आदि पुराण, सभी काव्य, उत्तम आगम मार्ग, दिव्य मुनिगण, परम दयालु व्यास, वाल्मीकि आदि महर्षि तथा सभी ऋषियोंके गोत्र-ये सभी आपके प्रभातकालको मंगलमय बनायें।'
साभार- आनंद रामायण -गीता प्रेस ।
15 अप्रैल 2024
हनुमान चालीसा से बनायें रक्षा कवच
हनुमान चालीसा से बनायें रक्षा कवच
हनुमान चालीसा एक बेहद लोकप्रिय उपाय है जो बहुत सारे लोग प्रयोग में लाते हैं ।
इसकी भाषा सरल है इसलिए कोई भी इसका प्रयोग कर सकता है ।
हनुमान जी अमर है ! चिरंजीवी है !!
इसलिए उनकी उपस्थिति आज भी पृथ्वी पर महसूस की जाती है ।
रक्षा कवच
हनुमान चालीसा को रक्षा कवच के रूप में भी उपयोग किया जा सकता है ।
इसके लिए एक छोटे आकार की हनुमान चालीसा ले लें । उसे रखने लायक गेरुए कलर का कपड़ा ले लें जिसमे आप उसे लपेट कर रख सकें या उससे छोटा पॉकेट जैसा बना लें ।
हनुमान जयंती से या किसी भी पूर्णिमा के दिन से प्रारंभ करें और उस हनुमान चालीसा के 11 पाठ रोज करें , ऐसा अगली पूर्णिमा तक करें यानी कुल मिलाकर लगभग 30 दिनों तक आपका पाठ होगा । पाठ हो जाने के बाद उसे उस कपड़े या पॉकेट में बंद करके रख ले । उसे इस प्रकार से रखें कि कोई दूसरा व्यक्ति उसे स्पर्श ना कर सके । यानी आपको 30 दिनों तक उसे दूसरों से छुपा कर रखना है ॥
पूर्णिमा से पूर्णिमा तक पाठ कर लेने के बाद आप उस हनुमान चालीसा को उस कपड़े में लपेटकर हमेशा अपने साथ रखें तथा नित्य एक बार हनुमान चालीसा का पाठ करें जिससे आपको सभी प्रकार के बाधाओं में हनुमान जी की कृपा से रक्षा प्राप्त होगी ।







