एक प्रयास सनातन धर्म[Sanatan Dharma] के महासमुद्र मे गोता लगाने का.....कुछ रहस्यमयी शक्तियों [shakti] से साक्षात्कार करने का.....गुरुदेव Dr. Narayan Dutt Shrimali Ji [ Nikhileswaranand Ji] की कृपा से प्राप्त Mantra Tantra Yantra विद्याओं को समझने का...... Kali, Sri Yantra, Laxmi,Shiv,Kundalini, Kamkala Kali, Tripur Sundari, Maha Tara ,Tantra Sar Samuchhay , Mantra Maharnav, Mahakal Samhita, Devi,Devata,Yakshini,Apsara,Tantra, Shabar Mantra, जैसी गूढ़ विद्याओ को सीखने का....
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24 सितंबर 2018
23 सितंबर 2018
कामकला काली
साधनाओं के क्षेत्र में कामकला काली की साधना को सर्वोपरि माना जाता है, इसके लिये कहा गया है कि प्राण का दान देकर भी यह विद्या मिल जाये तो इसे सप्रयास ग्रहण करना चाहिये ।
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22 सितंबर 2018
पितृमोक्ष अमावस्या
श्राद्ध पक्ष में यथा सम्भव जाप करें ।
॥ ऊं सर्व पितरेभ्यो, मम सर्व शापं प्रशमय प्रशमय, सर्व दोषान निवारय निवारय, पूर्ण शान्तिम कुरु कुरु नमः ॥
पितृमोक्ष अमावस्या के दिन एक थाली में भोजन सजाकर सामने रखें।
108 बार जाप करें |
सभी ज्ञात अज्ञात पूर्वजों को याद करें , उनसे कृपा मागें |
ॐ शांति कहते हुए तीन बार पानी से थाली के चारों ओर गोल घेरा बनायें।
अपने पितरॊं को याद करके ईस थाली को गाय कॊ खिला दें।
पितृमोक्ष अमावस्या के दिन एक थाली में भोजन सजाकर सामने रखें।
108 बार जाप करें |
सभी ज्ञात अज्ञात पूर्वजों को याद करें , उनसे कृपा मागें |
ॐ शांति कहते हुए तीन बार पानी से थाली के चारों ओर गोल घेरा बनायें।
अपने पितरॊं को याद करके ईस थाली को गाय कॊ खिला दें।
इससे पितरॊं अर्थात मृत पूर्वजॊं की कृपा आपकॊ प्राप्त होगी ।.
20 सितंबर 2018
पितृ पक्ष
पितृ पक्ष में सभी लोग विधि विधान से पूजन नहीं कर पते हैं, लेकिन पूजन करना चाहते हैं .उनके लिए एक सरल विधि:-
|| ॐ सर्व पित्रेभ्यो नमः ||
|| ॐ सर्व पित्रेभ्यो नमः ||
- आपके घर में जो भोजन बना हो उसे एक थाली में सजा ले.
- उसको पूजा स्थान में अपने सामने रखकर इस मंत्र का १०८ बार जाप करें.
- हाथ में पानी लेकर कहें " मेरे सभी ज्ञात अज्ञात पितरों की शांति हो " इसके बाद जल जमीन पर छोड़ दे.
- अब उस थाली के भोजन को किसी गाय को या किसी गरीब भूखे को खिला दें.
19 सितंबर 2018
17 सितंबर 2018
लघु गणपति पूजन
ऊं गं गणपतये नमः गंधम समर्पयामि --- इत्र आदि चढायें ।
ऊं गं गणपतये नमः पुष्पम समर्पयामि --- फ़ूल
ऊं गं गणपतये नमः धूपम समर्पयामि -- अगरबत्ती
ऊं गं गणपतये नमः दीपम समर्पयामि -- दीपक जलायें
ऊं गं गणपतये नमः नैवेद्यम समर्पयामि -- प्रसाद चढायें
इसके बाद आरती कर लें
15 सितंबर 2018
कलौ चण्डी विनायकौ
कलि काल में साधनाओं के विषय में कहा गया है कि :-
कलौ चण्डी विनायकौ
अर्थात कलियुग में चण्डी तथा गणपति साधनायें ज्यादा फलप्रद होंगी।
गणपति साधना को प्रारंभिक तथा अत्यंत लाभप्रद साधनाओं में गिना जाता है। योगिक
विचार में मूलाधार चक्र को कुण्डली का प्रारंभ माना जाता है तथा गणपति उसके स्वामी
माने जाते हैं। साथ ही शिव शक्ति के पुत्र होने के कारण दोनों की संयुक्त कृपा
प्रदान करते हैं।
यदि गणपति साधना करना चाहें तो आप आगे लिखी विधि के अनुसार करें।
गणपति साधना
·
गणपति साधना का यह विवरण सामान्य गृहस्थों के लिए
है। इसे किसी भी जाति, लिंग,आयु का व्यक्ति कर
सकता है।
·
मंत्र का जाप प्रतिदिन निश्चित संख्या या समय तक
करना चाहिये ।
·
माला की व्यवस्था हो सके तो माला से तथा अभाव में
किसी भी गणनायोग्य वस्तु से गणना कर सकते हैं ।
·
ऐसा न कर सकें तो एक समयावधि निश्चित समयावधि जैसे
पांच, दस, पंद्रह मिनट, आधा
या एक घंटा अपनी क्षमता के अनुसार निश्चित कर लें ।
·
इस प्रकार १, ३, ७, ९, ११, १६, २१, ३३, या ५१ दिनों तक करें। यदि किसी दिन जाप न कर पायें तो साधना खण्डित मानी
जायेगी । अगले दिन से पुनः प्रारंभ करना पडेगा। इसलिये दिनों की संख्या का चुनाव
अपनी क्षमता के अनुसार ही करें। महिलायें रजस्वला होने पर जाप छोडकर उस अवधि के
बाद पुनः जाप कर सकती हैं। इस अवस्था में साधना खण्डित नही मानी जायेगी।
·
यदि संभव हो तो प्रतिदिन निश्चित समय पर ही बैठने
का प्रयास करें ।
·
जप करते समय दीपक जलता रहना चाहिये ।
·
साफ वस्त्र पहनकर स्नानादि करके जाप करें । पूर्व
की ओर देखते हुए बैठें। सामने गणपति का चित्र, मूर्ति या यंत्र रखें।
गणपति मंत्र
॥ ऊं गं गणेश्वराय गं नमः ॥
वे साधक जो माता गायत्री के भक्त हैं वे गणेश गायत्री मंत्र का जाप
उपरोक्त मंत्र के स्थान पर कर सकते हैं जो उनके लिए ज्यादा लाभप्रद होगा।
गणपति गायत्री
मंत्र
॥ ऊं तत्पुरूषाय विद्यहे वक्रतुण्डाय धीमहि तन्नो दन्ति प्रचोदयात ॥
साधना लक्ष्य प्राप्ति की सहायक क्रिया है। पुरूषार्थ के साथ-साथ साधना
भी हो तो इष्ट देवता की शक्तियां मार्ग की बाधाओं को दूर करने में सहायक होती हैं।
जिससे सफलता की संभावनायें बढ जाती हैं।
13 सितंबर 2018
श्री महागणपति
विघ्नेश्वरं सुरगणपूजितं, मोदकप्रियं
पार्वती सुतम ।
हस्तिमुखं लम्बोदरं नमामि शिवपुत्रम गणेश्वरम ॥
विघ्नों के अधिपति, देवताओं के भी आराध्य, मोदक अर्थात लड्डूओं के प्रेमी, जगदम्बा
पार्वती के पुत्र, हाथी के समान मुख व लम्बे पेट वाले, भगवान शिव के प्रिय पुत्र गणेश को मैं प्रणाम करता हूं ।
जनसामान्य में व्यापक लोकप्रियता रखने वाले इस अद्भुत देवता के गूणों
की चर्चा करना लगभग असंभव है। वे गणों के अधिपति हैं तो देवताओं के सम्पूर्ण मण्डल
में प्रथम पूज्य भी हैं। बुद्धि कौशल तथा चातुर्य को प्रदान करने वाले है तो कार्य
के मार्ग में आने वाली बाधाओं को दूर करने वाले भी हैं। समस्त देव सेना और शिवगणों
को पराजित करने वाले हैं, तो दूसरी ओर महाभारत जैसे ग्रंथ के लेखक भी हैं। ऐसे
सर्वगुण संपन्न देवता की आराधना न सिर्फ भौतिक जीवन बल्कि आध्यात्मिक जीवन की भी
समस्त विध मनोकामनाओं की पूर्ति करने में सक्षम हैं।
भगवान
गणेश की आराधना या साधना उनके तीन स्वरूपों में की जाती है। उनके तीनों स्वरूप, राजसी तामसी तथा सात्विक स्वरूप साधक की इच्ठा तथा क्षमता के अनुसार
कार्यसिद्धि प्रदान करते ही हैं।
भारतीय
संस्कृति में जो परंपरा है उसके अनुसार तो प्रत्येक कार्य के प्रारंभ में गणपति का
स्मरण किया ही जाता है। यदि नित्य न किया जाये तो भी गणेश चतुर्थी जैसे अवसरों पर
तो गृहस्थों को उनका पूजन व ध्यान करना चाहिए।
व्यापार, सेल्स, मार्केटिंग, एडवर्टाइजिंग
जैसे क्षेत्रों में जहां वाकपटुता तथा चातुर्य की नितांत आवश्यकता होती है, वहां गणपति साधना तथा ध्यान विशेष लाभप्रद होता है। भगवती लक्ष्मी को चंचला माना गया है। लक्ष्मी के साथ गणपति का पूजन
लक्ष्मी को स्थायित्व प्रदान करता है। इसलिए आप व्यापारी बंधुओं के पास ऐसा
संयुक्त चित्र लगा हुआ पायेंगे।
आगे
की पंक्तियों में भगवान गणपति का एक स्तोत्र प्रस्तुत है। इस स्तोत्र का नित्य पाठ
करना लाभप्रद होता है।
गणपति स्तोत्र
विघ्नेश्वराय
वरदाय सुरप्रियाय, लम्बोदराय सकलाय जगद्विताय ।
नागाननाय
श्रुति यज्ञ विभूषिताय, गौरीसुताय गणनाथ नमोस्तुते ॥
भक्तार्तिनाशनपराय
गणेश्वराय, सर्वेश्वराय शुभदाय सुरेश्वराय ।
विद्याधराय
विकटाय च वामनाय, भक्तप्रसन्न वरदाय नमोनमस्ते ॥
नमस्ते
ब्रह्मरूपाय विष्णुरूपायते नमः, नमस्ते रूद्ररूपाय करि
रूपायते नमः ।
विश्वरूपस्य
रूपाय नमस्ते ब्रह्मचारिणे, भक्तप्रियाय देवाय
नमस्तुभ्यं विनायकः ॥
लम्बोदर
नमस्तुभ्यं सततं मोदकप्रिय, निर्विनं में कुरू सर्व कार्येषु सर्वदा ।
त्वां
विन शत्रु दलनेति च सुंदरेति भक्तप्रियेति शुभदेति फलप्रदेति ॥
विद्याप्रदेत्यघहरेति
च ये स्तुवंति तेभ्यो गणेश वरदो भव नित्यमेवि ।
अनया
पूजया सांगाय सपरिवाराय श्री गणपतिम समर्पयामि नमः ॥
इस स्तोत्र का पाठ कर गणपति को नमन करें ।
12 सितंबर 2018
महागणपति : सरल हवन विधान
एक सरल हवन विधान प्रस्तुत है जो आप आसानी से स्वयम कर सकते हैं ।
ऊं अग्नये नमः .........७ बार इस मन्त्र का जाप करें तथा आग जला लें ।
ऊं परम तत्वाय नारायणाय गुरुभ्यो नमः ..... २१ बार इस मन्त्र का जाप करें ।
ऊं अग्नये स्वाहा ...... ७ आहुति (अग्नि मे डालें)
ऊं गं स्वाहा ..... १ बार
ऊं भैरवाय स्वाहा ..... ११ बार
ऊं परम तत्वाय नारायणाय गुरुभ्यो नमः स्वाहा .....२१ बार
ऊं गं गणपतये स्वाहा ..... १०८ बार
अन्त में कहें कि गणपति भगवान की कृपा मुझे प्राप्त हो....
गलतियों के लिये क्षमा मांगे.....
तीन बार पानी छिडककर शांति शांति शांति ऊं कहें.....
11 सितंबर 2018
उच्छिष्ट गणपतिम नमाम्यहम
विधि :-
- यह महागणपति का तंत्रोक्त मन्त्र है |
- कलियुग में शीघ्र फलदायक साधना है |
- रुद्राक्ष की माला सभी कार्यों के लिए स्वीकार्य है |
- जाप के पहले दिन हाथ में पानी लेकर संकल्प करें " मै (अपना नाम बोले), आज अपनी (मनोकामना बोले) की पूर्ती के लिए यह मन्त्र जाप कर रहा/ रही हूँ | मेरी त्रुटियों को क्षमा करके मेरी मनोकामना पूर्ण करें " | इतना बोलकर पानी जमीन पर छोड़ दें |
- गुरु से अनुमति ले लें|गुरु मन्त्र की एक माला का जाप करें |
- यदि गुरु न हो तो " ॐ निखिलेश्वराये नमः " मन्त्र की एक माला जाप कर लें |
- पान का बीड़ा चबाएं फिर मंत्र जाप करें |
- दिशा दक्षिण की और देखते हुए बैठें |
- आसन लाल/पीले रंग का रखें|
- जाप रात्रि 9 से सुबह 4 के बीच करें|
- यदि अर्धरात्रि जाप करते हुए निकले तो श्रेष्ट है |
- कम से कम 21 दिन जाप करने से अनुकूलता मिलती है |
- जाप के दौरान किसी को गाली गलौच / गुस्सा/ अपमानित ना करें|
- किसी महिला ( चाहे वह नौकरानी ही क्यों न हो ) का अपमान ना करें | यथा सम्भव सम्मान करें |
- सात्विक आहार/ आचार/ विचार रखें |
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